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सियाचिन: सबसे ख़तरनाक युद्धस्थल में भारतीय सेना के पराक्रम की कहानी
रूस के टुंड्रा को दुनिया का सबसे ख़तरनाक युद्धस्थल माना जाता है. 1942 के जाड़े के मौसम में स्टालिनग्राड में रूसी सेना के हाथ हिटलर की सेना की हार ने दूसरे विश्व युद्ध का रुख़ ही बदल दिया था.
वर्ष 1948 में बर्फ़ से ढ़के स्कर्दू और गिलगित में पाकिस्तानी कबाइलियों के ख़िलाफ़ मेजर जनरल थिमैय्या की 19 इंफ़्रैन्ट्री डिविजन ने जिस तरह लोहा लिया था वो भी साहस और जीवट की सबसे बड़ी मिसाल है. लेकिन ये सब लड़ाइयाँ सियाचिन में पिछले 36 साल से चल रहे भारत पाकिस्तान संघर्ष के सामने कहीं नहीं टिकतीं. ये वो इलाक़ा है जहाँ लड़ना तो दूर एक साँस लेना भी बहुत बड़ा कारनामा है.
वीडियो: रेहान फ़ज़ल और देबलिन रॉय
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