सोशल नेटवर्किंग साइट क्या बोलने की आज़ादी पर रोक लगा रही हैं?
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल ख़त्म होने के ठीक पहले सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर ने उन पर बैन लगा दिया. फ़ेसबुक और यूट्यूब ने भी उनके अकाउंट को सस्पेंड कर दिया.
ट्रंप के कई समर्थकों पर भी रोक लगाई गई. ऐसी ही रोक दूसरी जगहों पर भी नज़र आती है? इसे लेकर ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये कंपनियां बोलने की आज़ादी पर रोक लगाने के लिए हद पार कर रही हैं? दुनिया जहान में हमने की पड़ताल.
प्रेज़ेंटर: मोहन लाल शर्मा
प्रोड्यूसर: वात्सल्य राय
वीडियो प्रोडक्शन: काशिफ़ सिद्दीक़ी
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