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किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने हिंसा के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया?
बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा से बात करते हुए किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने लाल क़िला हिंसा को सरकार की चाल बताया है.
जोगिंदर सिंह कहते हैं, "ये तो कोई सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी जानता है. कि गणतंत्र दिवस के दिन लाल क़िला पर कितनी सुरक्षा होगी. और वहां कोई मज़े से जाकर झंडा चढ़ा दे, ऐसा कैसे हो सकता है. मेरी 75 साल की उमर हो गई. मैंने तो पहली बार ऐसी चीज़ देखी."
"इतने बड़ा देश जिसके अंदर इतने सुरक्षा प्रबंध हों कि चींटी भी नहीं आ सकती, वहां लाल क़िले पर जाकर झंडा लगा दिया. और बाद में लाइव होकर व्यक्ति ने बात भी की."
दीप सिद्धू ने इस घटना के बाद एक वीडियो में बताया था कि ये घटना किस तरह घटित हुई. लेकिन रैली के लिए जल्दी निकलने को लेकर उगराहांका बयान, दिल्ली पुलिस के बयान से अलग है. दिल्ली पुलिस जहां एक ओर कह रही है कि ट्रैक्टर मार्च की इजाज़त 12 बजे के बाद की थी, वहीं उगराहां बताते हैं कि उनके लिए पुलिस की ओर से सुबह के नौ बजे ही नाका खोल दिया गया था.
वे कहते हैं, "मैं 7 बजे निजामगढ़ नाके पर था. दिल्ली पुलिस ने 9 बजे अपने आप नाका खोला है. इसके बाद हम आगे बढ़े. हमें 9 बजे का समय दिया गया था."
राकेश टिकैत की तरह जोगिंदर सिंह उगराहां भी दीप सिद्धू की जांच किए जाने की माँग करते हैं. वे कहते हैं, "संयुक्त मोर्चे की मीटिंग का जो फ़ैसला था, सभी जत्थेबंदियों ने वही फ़ॉलो किया. सरकार ने जो रास्ता दिया था, वहां पर ही मार्च किया. दूसरा कहीं किसी ने मार्च नहीं किया. जो लाल क़िले पर गई जनता है वो सरकार को पता है, सरकार का प्री-प्लान्ड प्रोग्राम था. वो लोग उनको गुमराह करके लेकर गए थे."
"दीप सिद्धू उनकी अगुआई कर रहा था. लाल क़िले पर झंडा लगाकर उसने इस बात को स्वीकार किया. वो सरकार की साजिश है. जत्थेबंदियों को हिंसक बनाने की कोशिश की गई है."
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