ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई दिल्ली हिंसा पर क्या बोला दुनिया का मीडिया?

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न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी दिल्ली में एक ओर जहां सेना की भव्य परेड देख रहे थे, वहां से कुछ ही मील की दूरी पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में अफ़रा-तफ़री की तस्वीरें नज़र आ रही थीं.

रिपोर्ट में लिखा है कि अधिकतर किसानों के पास लंबी तलवारें, तेज़धार ख़ंजर और जंग में इस्तेमाल होने वाली कुल्हाड़िया थीं जो उनके पारंपरिक हथियार हैं. किसानों ने उस लाल क़िले पर चढ़ाई की जो एक ज़माने में मुग़ल शासकों की रिहाइश रहा है.

कई जगहों पर दृश्य ऐसे थे जहां एक तरफ़ पुलिस राइफ़ल ताने खड़ी थी और दूसरी ओर किसानों का हुजूम था. ज़्यादातर किसान पहले से तयशुदा रास्तों पर चल रहे थे, लेकिन कुछ किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सुप्रीम कोर्ट के रास्ते पर बढ़े, जिन्हें पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले दाग़कर रोका. रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश से आए हैप्पी शर्मा को ये कहते हुए उद्धृत किया गया है कि "एक बार हम दिल्ली के भीतर आ गए तो फिर हम तब तक कहीं नहीं जाने वाले, जब तक कि मोदी उन क़ानूनों को वापस नहीं ले लेते."

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