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तुर्की और इसराइल क्या फिर एक दूसरे के क़रीब आ रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल पर कड़ी टिप्पणी करने वाले और फ़लस्तीनियों के अधिकारों की बात करने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेचैप तैय्यप अर्दोआन की सरकार ने दो साल से इसराइल के साथ लगभग समाप्त राजनयिक संबंधों को अचानक बहाल करने की घोषणा की है.
तुर्की ने चंद रोज़ पहले इसराइल के लिए अपना राजदूत नियुक्त किया है. 2018 में ग़ज़ा में फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ इसराइल की हिंसक कार्रवाइयों के विरोध में तुर्की ने अपना राजदूत तेल अवीव से वापस बुला लिया था.
ये प्रदर्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से येरुशलम भेजने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हो रहे थे.
तुर्की के नेता अर्दोआन इसराइल को 'दहशतगर्द और बच्चों का क़ातिल' कह चुके हैं, लेकिन अब वो अपने राजदूत को इसराइल भेज रहे हैं. इस फ़ैसले के अर्थ को समझने के लिए हालिया घटनाक्रमों और इसराइल-तुर्की के लंबे ऐतिहासिक संबंधों को समझना ज़रूरी है.
स्टोरी: फ़राज़ हाशमी
आवाज़: नवीन नेगी
वीडियो एडिटिंग: देवाशीष कुमार
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