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अज़रबैजान आर्मीनिया की जंग और तुर्की की विदेश नीति
आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच छिड़ी जंग के फौरन बाद तुर्की ने अज़रबैजान का साथ देने की घोषणा की.
इसके बाद कथित तौर पर तुर्की ने हथियार और सीरिया से लौटे लड़ाके अज़रबैजान को मदद के लिए भेजे.
जहाँ एक तरफ़ तमाम दूसरे देश तत्काल युद्धविराम की अपील कर रहे हैं वहीं इसके उलट तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलियेव से जंग जारी रखने को कहा है.
तुर्की का अपने हितों की रक्षा के लिए हार्ड पावर (सैन्य कार्रवाई) पर यक़ीन करना उसकी 2015 के बाद की विदेश नीति की ख़ासियत रही है.
आखिर तुर्की ने अपनी विदेश नीति में इतना बदलाव क्यों किया?
स्टोरीः गोनल टॉल, सेंटर फॉर तुर्कीश स्टडीज़, मिडल ईस्ट इंस्टीट्यूट
आवाज़ः मानसी दाश
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