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पीरियड्स को लेकर झिझक क्यों?
प्रकाशित
दुनिया की आधी आबादी अब पुरुषों के साथ क़दम से क़दम मिलाकर आगे बढ़ रही है. आर्थिक तरक्की में योगदान दे रही है पर क्या महिला होना उनके क़दम पीछे खींचता है?
क्या उनकी बायोलॉजिकल साइकल ,जैसे पीरियड्स का आना उनकी तरक्की के आड़े आता है या फिर सोच में बदलाव आने लगा है?
और क्या इस बदलती सोच से महिलाओं के लिए बदलाव के रास्ते भी खुल रहे हैं ...कवर स्टोरी में इसी की बात.
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