कोरोना वायरस ने दुनिया को नमस्ते की कीमत कैसे समझाई?
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ज़्यादा पुरानी बात नहीं, जब दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष मिलते थे तो गर्मजोशी से हाथ मिलाया जाता था और कैमरा थामे लोग इस पल को कैद कर सकें, इसलिए उसकी अवधि भी काफ़ी होती थी.
यहां तक कि हाथ मिलाने के अंदाज़ें से मुलाकातों की कामयाबी और नाकामी के संकेत खोजे जाते थे. लेकिन कोरोना ने ज़िंदगी बदली और हाथ मिलाने का अंदाज़ भी.
अब लोग हाथ नहीं मिलाते, ऐसे में अभिवादन करने और स्वीकार करने के लिए भारतीय नमस्ते काफ़ी काम आ रहा है.
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