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कोरोना वायरस में आ रहा म्यूटेशन क्या इसे और ख़तरनाक बना रहा है?
दुनियाभर में जिस कोरोना वायरस ने इस वक्त तबाही मचा रखी है, लेकिन ये वो कोरानावायरस नहीं है जो पहली बार चीन से निकला था.
आधिकारिक तौर पर Sars-CoV-2 के नाम से जाना जाने वाला ये वायरस, जिससे दुनियाभर के लोग संक्रमित हो रहे हैं, म्यूटेट हो रहा है.
म्यूटेट होने का मतलब है वायरस के जेनेटिक मटेरियल में बदलाव होना. वैज्ञानिकों ने इस वायरस में हज़ारों म्यूटेशन देखे हैं. हालांकि सिर्फ एक म्यूटेशन ऐसा है जिससे इस वायरस के व्यवहार के बदलाव के संकेत मिले हैं.
तो क्या ये म्यूटेशन वायरस को और ज़्यादा ख़तरनाक और जानलेवा बना सकता है? क्या जिन वैक्सीन से हम उम्मीद लगाए बैठे हैं, उनकी सफलता को भी इससे ख़तरा है?
किसी फ़्लू वायरस की तुलना में कोरोना वायरस काफ़ी धीमी रफ्तार से बदल रहा है. लेकिन लोगों में वायरस से बचाव के लिए इम्यूनिटी कम है, न तो इसकी कोई वैक्सीन अभी मौजूद है और न ही असरदार इलाज के ज़्यादा तरीके ही है.
इसलिए वायरस पर ख़ुद को बदलने का कोई दबाव ङी कम ही है. अभी वह ख़ुद को फैलाने का काम अच्छे तरीके से कर रहा है.
स्टोरी: रेशल स्करियर, हेल्थ रिपोर्टर
आवाज़: गुरप्रीत सैनी
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