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कोरोनाकाल में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए डिस्टेंसिंग जैसे शब्द मायने नहीं रखते.
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कोरानाकाल में जब सोशल डिस्टेंसिंग और सेल्फ़ आइसोलेशन जैसे शब्दों पर ज़ोर दिया जा रहा है, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए ये शब्द मायने नहीं रखते. डर इन्हें भी लगता है, लेकिन ग़रीबी से लाचार पाकिस्तान की सेक्स वर्कर्स अपना काम करने के लिए मजबूर हैं.
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