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कोरोना वायरस ने कैसे एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया?
मेरी भांजी खुशाली तामैची को जिस समय उसकी 12वीं कक्षा की मार्कशीट मिली, उसकी आंखों में आंसू थे.
वो अपने बैच के उन कुछ बच्चों में से एक थी जो प्रथम श्रेणी से पास हुए थे. उसे जानने वाला हर शख़्स इसकी वजह जानता था. यही वो दिन था जिसके लिए उसके पिता ज़िंदा थे. उसके पिता उमेश तामैची की कुछ दिन पहले ही कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मौत हो गई थी. उमेश 44 साल के थे. वो अहमदाबाद मेट्रो कोर्ट में बतौर वरिष्ठ अधिवक्ता थे.
12 मई को उनका टेस्ट हुआ जिसमें वो कोरोना पॉज़िटिव पाए गए. यह सोमवार देर शाम 11 मई की बात थी जब उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ महसूस हुई. जिसके बाद मेरी बहन शेफ़ाली उन्हें पास के ही एक प्राइवेट अस्पताल ले गई.
आनंद सर्जिकल अस्पताल को कुछ दिन पहले ही अहमदाबाद नगर निगम ने कोविड-19 के मरीज़ों के लिए सूचीबद्ध किया था. यह काफ़ी जाना माना अस्पताल है. शेफ़ाली ने मुझे अस्पताल से ही फ़ोन किया और सारी जानकारी दी. लेकिन आगे क्या हुआ?
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