You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
लॉकडाउन में कैसे तबाह हुई चाय बाग़ान मज़दूरों की ज़िंदगी
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्था होने से इस पर कोरोना वायरस महामारी का असर नहीं पड़ा ऐसा नहीं है.
मार्च के बाद से यहां बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 1 करोड़ हो गई है.
भारत का चाय उत्पादन भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है जो लाखों की संख्या में मज़दूरों को रोज़गार देता है.
देश की सबसे पुरानी चाय कंपनी असम कंपनी लिमिटेड के दो सौ साल के इतिहास में पहली बार कंपनी को पूरी तरह से काम बंद करना पड़ा.
अब चाय बागानों में काम तो शुरू हो चुका है लेकिन मज़दूर अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
ये वीडियो बीबीसी के विशेष 'लॉकडाउन में आजीविका' सिरीज़ का हिस्सा है.
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- क्या दिल्ली के अस्पताल कोरोना मरीज़ों से भर चुके हैं और लोग भटक रहे हैं?
- कोरोना वायरस: भविष्य में होने वाली यात्राएं कैसी होंगी?
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- आत्मनिर्भर भारत बनाने की कोशिश और तस्करी शुरू होने का अंदेशा?
- कोरोना संकट: 8 जून से धार्मिक स्थल, रेस्तरां और मॉल खुलेंगे, जानिए क्या हैं नियम
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)