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सड़कों पर पैदल चलते मज़दूर और उनके परिवारों की दर्दभरी कहानियां
प्रकाशित
हर रोज़ तम़ाम मज़दूर सड़कों से पैदल चलकर अपने घर के रास्ते नाप रहे हैं. हर आदमी की अपनी एक कहानी. हर आदमी का अपना एक संघर्ष. महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग अपने-अपने परिवारों के साथ अपने घर पहुँचने के लिए एक लंबी यात्रा पर निकल पड़े हैं, वो यात्रा कब पूरी होगी नहीं जानते. लेकिन जानते हैं कि घर पहुँचना है, चाहे जैसे भी हो. ऐसी ही कुछ मज़दूरों की तकलीफ़ सुनिए.
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