मोदी सरकार को क्यों बेचनी पड़ी सरकारी कंपनियां?

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भारत का राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपए का है. इसका मतलब ख़र्चा बहुत ज़्यादा और कमाई कम. ख़र्च और कमाई में 6.45 लाख करोड़ का अंतर.

तो इससे निपटने के लिए सरकार अपनी कंपनियों का निजीकरण और विनिवेश करके पैसे जुटाती है.

क्या है निजीकरण और विनिवेश?

लेकिन क्या इससे कोई फ़ायदा है?

क्यों हो रहा है इसका विरोध?

रिपोर्ट - सर्वप्रिया सांगवान

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