रूस का ब्रिटेन पर निशाना, कहा- यूक्रेन को दी गई मदद नहीं भूलेंगे
रूस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके यूक्रेन की मदद करने के लिए सीधे ब्रितानी सरकार को निशाना बनाया है.
लाइव कवरेज
मोहम्मद शाहिद, कमलेश मठेनी and प्रियंका झा
यूक्रेनी शहर मारियुपोल रणनीतिक तौर पर इतना अहम क्यों है?
यूक्रेनी शहर मारियुपोल पर लगातार हो रही रूसी बमबारी के बाद वहां से हजारों लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना को रद्द करना पड़ा है.
इससे पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि अगर युद्धविराम लागू रहा तो वहां से लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है. लेकिन शहर पर अब भी रूसी सैनिक जोरदार बमबारी कर रहे हैं.
आखिर मारियुपोल रणनीतिक तौर पर इतना अहम क्यों है?
दरअसल यह ब्लैक सी पर यूक्रेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है. यह क्राइमिया और रूस के रास्ते में पड़ने वाला प्रमुख शहर भी है.
अगर रूस मारियुपोल पर कब्जा कर लेता है तो वह लुहान्स्क दोनेत्स्क को जोड़ने वाले रास्ते पर भी नियंत्रण स्थापित कर लेगा.
लुहान्स्क, दोनेत्स्क पर फिलहाल रूस समर्थित अलगाववादियों का कब्जा है.
मारियुपोल पर रूसी कब्जे के बाद यह क्राइमिया से भी जुड़ जाएगा. क्राइमिया को 2014 में रूस ने यूक्रेन से अलग कर दिया था.
पुतिन की आंखों में क्यों चुभता रहा है यूक्रेन? – विवेचना
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रूस का ब्रिटेन पर निशाना, कहा- यूक्रेन को दी गई मदद नहीं भूलेंगे
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इमेज कैप्शन, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा
रूस
के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके यूक्रेन की मदद करने के लिए सीधे ब्रितानी
सरकार को निशाना बनाया है.
रूसी
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा है कि कीएव को की गई ब्रिटेन
की मदद को रूस नहीं भूलेगा. रूसी मीडिया के अनुसार उन्होंने इसे ‘यूक्रेन की अति-राष्ट्रवादी ताक़तें’ बताया
है.
मारिया
ने कहा, “प्रतिबंधों के हिस्टीरिया में लंदन ने मुख्य न सही
लेकिन भूमिका निभाई है. इसने हमारे पास जवाबी उपाय उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं
छोड़ा है.”
रूस का आधिकारिक तौर पर
मानना है कि यूक्रेन में आम लोगों को ख़तरा रूसी सेना से नहीं बल्कि ‘यूक्रेनी राष्ट्रवादियों’ से है.
रूस
के हमले के बीच ब्रिटेन सरकार ने यूक्रेन को हथियार और आर्थिक मदद दी है.
यूक्रेन-रूस युद्धः हमले से पहले और बाद की तस्वीरें
‘मेरा घर तबाह हो गया, शायद मेरी पत्नी स्वर्ग में हो’
दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप में सबसे तेज़ी से बढ़ता शरणार्थी संकट: संयुक्त राष्ट्र
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संयुक्त
राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR)
ने बताया है कि यूक्रेन में
जंग के बाद वहां से भागने वाले शरणार्थियों की संख्या जल्द ही 15 लाख हो सकती है.
UNHCR प्रमुख ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी से कहा है, “दूसरे
विश्व युद्ध के बाद से हम यूरोप में सबसे बड़ा शरणार्थी संकट देख रहे हैं.”
रूस के हमले के बाद से 13
लाख लोग अपना घर छोड़कर भाग चुके हैं.
पोलैंड का कहना है कि उसने
अब तक आधे शरणार्थियों को अपने देश मे लिया है. वहीं हंगरी और रोमानिया में भी काफ़ी
शरणार्थी गए हैं.
लेकिन सभी शरणार्थी उन्हीं
देशों में रुकने का नहीं सोच रहे हैं जो वहां पर पहुंचे हैं.
UNHCR
के अनुसार, रोमानिया में
पहले आठ दिनों में दो लाख लोग पहुंचे थे और वहां से 1.4 लाख लोग दूसरे देशों के
लिए चले गए और सिर्फ़ 60,000 वहां पर बचे हैं.
पुतिन की दुनिया को चेतावनी, अगर ऐसा किया तो युद्ध में शामिल मानेंगे
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर
पुतिन ने सरकारी विमान कंपनी एयरोफ़्लोट के फ़्लाइट अटेंडेंट के साथ बैठक के दौरान
कहा है कि कोई भी देश अगर यूक्रेन पर नो-फ़्लाई ज़ोन लागू करता है तो उसे यूक्रेन
में युद्ध में शामिल माना जाएगा.
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “इस दिशा में किसी भी उठाए गए क़दम को हम मानेंगे कि
वोउस देश में एक सशस्त्र विद्रोह
में शामिल हो रहा है.”
सेना
के संदर्भ में नो फ़्लाई ज़ोन का मतलब होता है कि उस क्षेत्र में कोई भी विमान
नहीं जा सकता है ताकि किसी हमले या निगरानी को रोका जा सके. लेकिन इसे सेना द्वारा
लागू किया जाता है ताकि किसी विमान को संभावित रूप से गिराया जा सके.
यूक्रेन
के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने नेटो पर नो-फ़्लाई ज़ोन न घोषित करने के लिए
उसकी आलोचना की थी और इसे ‘कमज़ोरी’ और ‘एकता का अभाव’ बताया था.
नेटो ने कहा था कि इससे बाक़ी
देशों पर युद्ध का ख़तरा बढ़ा सकता है.
यूक्रेन पर पुतिन के हमलावर रुख़ को बदलने में क्या चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की कोई भूमिका होगी?
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने हाल में बीजिंग में आमने-सामने बातचीत की थी. इसके बाद दोनों देशों की ओर से एक संयुक्त दस्तावेज़ जारी किया गया. फिर दोनों विंटर ओलिम्पिक गेम्स का उद्घाटन समारोह देखने चले गए.
इन खेलों के खत्म होने के चंद दिन बाद ही रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. चीन सरकार ने ना इस हमले की निंदा की है और ना ही इसकी अनदेखी की है. उसने इसे ''हमला'' कहने से भी परहेज किया है.
चीन हमेशा यह कहता आया है कि वह दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता. यह उसकी विदेश नीति के मूल में है. लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत में चीन के विदेश मंत्री यांग वी ने संकेत दिया कि चीन युद्धविराम के लिए मध्यस्थता कर सकता है.
तो क्या चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की यूक्रेन-रूस युद्ध को रोकने में भी कोई भूमिका होगी?
पढ़ें ये स्टोरी नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर के.
यूक्रेन में युद्धः प्रतिबंधों, बहिष्कारों से आहत रूस के लोग क्या बोल रहे हैं?
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यूक्रेन पर हमले के बाद से दुनियाभर के कला और खेल जगत में रूस का बहिष्कार जारी है. पश्चिमी देशों ने रूस के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी बंद कर दिया है.
रूस की मुद्रा गिर रही है और प्रेस की आज़ादी ख़त्म हो रही है.
लेकिन क्या इसका रूस के लोगों पर कोई असर हुआ है, जो अपना अलग भविष्य देखने लगे हैं.
पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें..
यूक्रेन-रूस संघर्ष का भारत और दुनिया पर कितना असर पड़ेगा?, बीबीसी इंडिया बोल सुनिए वात्सल्य राय के साथ...
बीबीसी इंडिया बोल, 05 मार्च 2022, यूक्रेन-रूस संघर्ष का भारत और दुनिया पर कितना असर पड़ेगा?
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ब्रेकिंग न्यूज़, भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया- ख़ारकीएव में फ़िलहाल कोई भारतीय नहीं
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भारतीय
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि यूक्रेन के ख़ारकीएव में फ़िलहाल कोई भी
भारतीय नहीं बचा है और अब उनका उद्देश्य सुमी से भारतीयों को बाहर निकालना है.
विदेश
मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शनिवार की शाम को प्रेस कॉन्फ़्रेंस के
दौरान कहा कि सुमी से भारतीयों को बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि वहां पर
हिंसा जारी है और परिवहन की कमी है, सबसे अच्छा विकल्प संघर्ष विराम ही हो सकता
है.
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उन्होंने
बताया कि अब भारत का ज़ोर यह देखने पर है कि यूक्रेन में अभी भी कुल कितने भारतीय
बचे हुए हैं, दूतावास उन लोगों से संपर्क करेगा जिन्होंने ख़ुद को रिजस्टर्ड नहीं
कराया है.
भारतीय
विदेश मंत्रालय ने बताया है कि यूक्रेन से अब तक 13,300 लोगों को वापस लाया जा चुका
है.
बीते
24 घंटों के दौरान 15 उड़ानों से 2,900 लोग भारत वापस लौटे हैं और अगले 24 घंटों
में 13 उड़ानें आनी हैं.
व्लादिमीर पुतिन के भरोसेमंद अरबपति रूसी कारोबारी, जिन पर लगी हैं पाबंदियां, डैनियल सैनफ़ोर्ड, बीबीसी संवाददाता
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का जवाब यूके, ईयू और अमेरिकी सरकारों ने व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले रूस के अरबपति कारोबारियों पर ऐसे कड़े प्रतिबंध लगाकर दिया है, जो उन्हें बर्बादी की कगार पर ला सकते हैं.
इनमें छह अरबपति सूची में सबसे ऊपर हैं.
एलिशर उस्मानोव
पुतिन के पसंसदीदा कारोबारियों में से एक एलिशर उस्मानोव दुनिया के सबसे अमीरों में शुमार हैं, जिनकी कुल संपत्ति करीब 17.6 अरब डॉलर के आसपास है.
उस्मानोव पर अमेरिका, यूरोपिय संघ और ब्रिटेन तीनों ने ही पाबंदी लगाई है.
रोमन एब्रामोविच
फुटबॉल क्लब चेल्सी की सफलता के बाद से रोमन एब्रामोविच हाई-प्रोफ़ाइल अरबपतियों की सूची में शामिल हो गए हैं.
हालांकि, अभी तक उन पर किसी देश ने प्रतिबंध नहीं लगाया है. संभवतः ऐसा इसलिए भी है क्योंकि एब्रामोविच पुतिन के बाकी कारोबारी करीबियों की तुलना में अधिक प्रभावशाली हैं.
12.4 अरब डॉलर की कुल संपत्ति वाले एब्रामोविच ने बुधवार को कहा कि वो 3 अरब डॉलर में अपना चेल्सी फुटबॉल क्लब और लंदन स्थित अपना 1.5 करोड़ पाउंड की कीमत वाला घर बेचना चाहते हैं.
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इमेज कैप्शन, साल 2017 में पुतिन और ओलेग देरिपास्का
ओलेग देरिपास्का
राष्ट्रपति पुतिन जिस समय सत्ता में आए थे, उस समय ओलेग देरिपास्का बेहद अमीरों में शुमार थे और उनकी कुल संपत्ति करीब 2.8 करोड़ डॉलर के आसपास थी. हालांकि, अब उनके पास 3 अरब डॉलर की ही संपत्ति है.
अमेरिका ने ओलेग पर पाबंदियां लगाई हैं. अमेरिका ने कहा है कि ओलेग मनी लॉन्ड्रिंग, घूसख़ोरी, उगाही जैसी कई अवैध गतिविधियों में शामिल हैं. हालांकि, ओलेग ने इन आरोपों को खारिज किया है.
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इमेज कैप्शन, व्लादिमीर पुतिन के साथ आईगॉर सेचिन
आईगॉर सेचिन
यूरोपिय संघ ने 28 फ़रवरी को आईगॉर सेचिन पर प्रतिबंधों का ऐलान किया था. सेचिन को राष्ट्रपति पुतिन का सबसे करीबी और भरोसेमंद दोस्त माना जाता है.
आईगॉर सेचिन की कुल संपत्ति कितनी है इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है. अमेरिका ने सेचिन पर 2014 में भी पाबंदी लगाई थी. अमेरिका ने अब 24 फ़रवरी को सेचिन पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.
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इमेज कैप्शन, इस साल फ़रवरी में पुतिन और ऐलेक्सी मिलर
ऐलेक्सी मिलर
ऐलेक्सी मिलर भी पुतिन के दोस्त माने जाते हैं. मिलर को साल 2014 में क्राइमिया पर रूस के कब्ज़े के बाद प्रतिबंधित नहीं किया गया था, लेकिन साल 2018 में जब अमेरिका ने उन पर पाबंदी लगाई तो उन्होंने इसे गर्व की बात बताई. ऐलेक्सी की कुल संपत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
प्योट्र एवेन और मिखाएल फ्रिदमैन
ईयू ने इन दोनों ही कारोबारियों पर पाबंदी लगाई हैं. दोनों ने मिलकर रूस का सबसे बड़ा निजी बैंक अल्फ़ा बैंक खड़ा किया है.मिख़ाएल फ्रिदमैन के पास करीब 12 अरब डॉलर की संपत्ति होने का अनुमान है. वो लंदन में लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान के पास ही एक बड़े बंगले में रहते हैं. इसे उन्होंने साल 2016 में 6.5 करोड़ पाउंड में ख़रीदा था. वहीं, प्योट्र एवेन के पास करीब 4.8 अरब डॉलर की संपत्ति है.
मारियुपोल में संघर्ष विराम के उल्लंघन पर रूस ने तोड़ी चुप्पी
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संघर्ष
विराम घोषित होने के बाद भी मारियुपोल में बमबारी करने के यूक्रेन के आरोप पर अब रूस
बोला है.
रूस
के रक्षा मंत्रालय का यूक्रेन से अलग रुख़ है और उसका कहना है कि लोगों को शहरों
से निकलने ही नहीं दिया जा रहा है.
रूस
के रिया न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, यूक्रेनी ‘राष्ट्रवादी’ आम
लोगों को शहर छोड़ने से रोक रहे हैं.
मंत्रालय ने कहा कि शहर
छोड़ने के लिए मानवीय कॉरिडोर स्थापित करने के लिए रूसी सुरक्षाबलों पर हमला हुआ
है.
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वहीं मारियुपोल में
संघर्ष विराम की घोषणा के बाद शहर के डिप्टी मेयर ने कहा है कि आम लोगों को
सुरक्षित कॉरिडोर से निकालने का काम रोक दिया गया है और उन्हें वापस अपनी जगहों पर
भेजा जा रहा है.
उनका कहना है कि मारियुपोल में और ओरिखिएव के नज़दीक लोगों को
निकालने के रूट पर लगातार बमबारी जारी है जिस कारण यह फ़ैसला लिया गया है, लोग बहुत डरे हुए हैं.
रूस अपने नए ‘फ़ेक न्यूज़’ क़ानून पर क्या बोला?
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इमेज कैप्शन, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने कहा है कि ‘कड़ा’ क़ानून ज़रूरी था
रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने देश के नए
‘फ़ेक न्यूज़’ क़ानून का
बचाव किया है.
इस क़ानून के तहत रूसी सेना के
ख़िलाफ़ ‘फ़ेक न्यूज़’ प्रकाशित
करने पर 15 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है.
इस क़ानून के कारण रूस में
स्वतंत्र पत्रकारिता पर असर पड़ेगा. इसके तहत न्यूज़ चैनलों को यूक्रेन में चल रहे
संघर्ष को ‘युद्ध’ कहने
की अनुमति नहीं होगी.
इस क़ानून के जवाब में बीबीसी,
सीबीएस न्यूज़ और एबीसी न्यूज़ ने देश मे अपने काम को अस्थाई तौर पर निलंबित कर
दिया है.
हालांकि पोस्कोफ़ का कहना है
कि ‘क़ानून बेहद ज़रूरी है और इसकी आवश्यकता थी क्योंकि
हमारे देश के ख़िलाफ़ एक सूचना युद्ध फैलाया जा रहा है.’
मारियुपोल के डिप्टी मेयर ने कहा- बमबारी के बीच निकलना नामुमकिन
इमेज कैप्शन, डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ़ ने
मारियुपोल में संघर्ष विराम की घोषणा के बाद शहर के डिप्टी
मेयर ने कहा है कि आम लोगों को सुरक्षित कॉरिडोर से निकालने का काम रोक दिया गया
है और उन्हें वापस अपनी जगहों पर भेजा जा रहा है.
डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ़ ने बीबीसी
से कहा कि मारियुपोल में और ओरिखिएव के नज़दीक लोगों को निकालने के रूट पर लगातार
बमबारी जारी है जिस कारण यह फ़ैसला लिया गया है, लोग बहुत डरे हुए हैं.
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डिप्टी मेयर ने कहा, “इस लड़ाई के कारण इस सड़क से जाना सुरक्षित नहीं है.”
उन्होंने बताया कि यूक्रेनी सरकार
संघर्ष विराम के उल्लंघन पर रूसी अधिकारियों से बातचीत कर रही है.
वहीं टेलीग्राम पर एक पोस्ट जारी करके
सिटी काउंसिल ने बताया है कि पुलिस लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके आम लोगों को वहां
से निकालने के कार्यक्रम को स्थगित करने की जानकारी दे रही है.
मारियुपोल से लोगों को निकालना रोका गया, रूस पर बमबारी के आरोप
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संघर्ष
विराम घोषित होने के बावजूद मारियुपोल से लोगों को निकालने की प्रक्रिया को स्थगित
कर दिया गया है. मारियुपोल की सिटी काउंसिल ने यह जानकारी दी है.
उसका
कहना है कि रूसी पक्ष अस्थाई संघर्ष विराम का पालन नहीं कर रहा है.
उसने
बताया है कि आम नागरिक बिखर जाएं और छिपने की जगह ढूंढें और आगे की जानकारी जल्द
ही जारी की जाएगी.
इससे पहले मारियुपोल के डिप्टी मेयर ने बताया था कि संघर्ष विराम लागू करने की
रूस की घोषण के बाद भी हमले जारी हैं.
मारियुपोल में अभी भी धमाके की आवाज़ें सुनी जा सकती
हैं.
मारियुपोल के डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ़ ने
बीबीसी को बताया कि “रूसी हम पर बमबारी कर रहे हैं और गोलियां
चला रहे हैं.”
“मारियुपोल में कोई
संघर्ष विराम नहीं हुआ है और लोगों को निकालने के रूट पर कोई संघर्ष विराम नहीं
हुआ है. हमारे नागरिक निकलने के लिए तैयार हैं लेकिन वो बमबारी के बीच में नहीं जा
सकते हैं.”
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी
जंग के दसवें दिन रूस ने यूक्रेन के दो शहरों में संघर्ष विराम की घोषणा की गई है. ये संघर्ष विराम मारियुपोल और वोल्नोवाखा शहरों के लिए होगा.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा
है कि शनिवार को जीएमटी सुबह 7 बजे यानी मॉस्को के
समयानुसार सुबह 10 बजे और भारतीय समयानुसार शनिवार दोपहर 12.30 बजे से मारियुपोल और वोल्नोवाखा के लिए मानवीय कॉरिडोर खोले जाएंगे. इस
दौरान लोग शहर छोड़कर जा सकेंगे.
हालांकि अब मारियुपोल की सिटी काउंसिल का कहना है कि
ज़ापोरिसहिया क्षेत्र में जहां पर मानवीय कॉरिडोर समाप्त होता है वहां पर अभी भी लड़ाई
जारी है.
यूक्रेन से छात्रों को निकालने के लिए सेफ़ कॉरिडोर न बन पाने पर भारत बोला
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यूक्रेन से भारतीय छात्रों को सुरक्षित
बाहर निकालने के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर न बन पाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने
प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची
ने ट्वीट करके बताया है कि भारत सुमी से भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी को लेकर
बेहद चिंतित है.
उन्होंने बताया है कि कई चैनलों के ज़रिए
रूसी और यूक्रेनी सरकार पर ज़ोरदार दबाव डाला गया है ताकि तुरंत संघर्ष विराम हो
और भारतीय छात्रों के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बने.
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इसके साथ ही अरिंदम बागची ने बताया कि
छात्रों को एहतियात बरतने के लिए कहा गया है और उन्हें सलाह दी गई है कि वो शेल्टर्स
में ही रहें, मंत्रालय और दूतावास छात्रों के लगातार संपर्क में हैं.
ग़ौरतलब है कि रूस और यूक्रेन संघर्ष के
बीच यूक्रेन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए सुरक्षित गलियारा बनाने पर
सहमति बनी है लेकिन यह लागू नहीं हो पाया है.
पूर्वी यूक्रेन के खारकीएव और सुमी जैसे
इलाक़ों से भारतीयों को बाहर निकालने को लेकर इस गलियारे पर सहमति बनी है.
संघर्ष विराम जारी रहा तो मारियुपोल से निकल सकते हैं 7000-9000 लोग- डिप्टी मेयर
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यूक्रेनी शहर मारियुपोल के डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ़ ने कहा है शुक्रवार को पूरी रात संघर्ष विराम पर बातचीत होती रही.
उन्होंने यूक्रेन में मौजूद बीबीसी के संवाददाता जोएल गुंटर को बताया, ''समझौता कुछ घंटों पहले तय हुआ. इसका एलान भी किया गया. हमने स्थानीय समय के मुताबिक सुबह नौ बजे संघर्ष विराम की पुष्टि कर दी थी. ''
उन्होंने कहा,''संघर्ष विराम के समझौते के बाद हमने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी और लोगों को युद्ध ग्रस्त इलाकों से निकालने का काम शुरू कर दिया. हमने 50 बसों का इंतज़ाम किया है और मुझे लगता है कि पांच से छह हज़ार लोग बसों में सवार होकर जेपोरिझिया से निकल सकते हैं''
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उन्होंने कहा, ''हमें लगता है कि लोग अपनी कारों से भी यहां से निकल सकते हैं. मेरा मानना है अगर संघर्ष विराम जारी रहा तो बसों और निजी कारों से कम से कम यहां से सात से नौ हज़ार लोग निकल सकते हैं.''
डिप्टी मेयर ने कहा, ''रूसी सैनिकों ने रेलरोड इन्फ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त कर दिया है. इसलिए कोई ट्रेन नहीं चल रही है. ''
''रूसियों की ओर हमें इस बात की कोई गारंटी नहीं मिली है कि संघर्ष विराम कल भी जारी रहेगा. लेकिन हम इस पर काम कर रहे हैं.'' '
'हमें यह समझना होगा कि शहर चार दिनों से बगैर किसी इन्फ्रास्ट्रक्चर के रहा है इसलिए लोगों तक सूचना पहुंचाना मुश्किल है.''