पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीईओ, डोर्सी ने छोड़ा पद
जैक डोर्सी ने ट्वविटर पर इसकी जानकारी दी है. पराग अग्रवाल ने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की है.
लाइव कवरेज
कीर्ति दुबे
ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के नेता की पीट-पीट कर हत्या, 9 गिरफ्तार

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दिलीप कुमार शर्मा
जोरहाट से, बीबीसी हिंदी के लिए
असम के जोरहाट शहर में गुस्साई भीड़ ने कथित तौर पर एक छात्र नेता की पीट-पीटकर हत्या कर दी. यह घटना आज (सोमवार) दोपहर करीब 2 बजे की है.
दरअसल एक सड़क दुर्घटना के बाद मौके पर जमा हुई लोगों की भीड़ ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन यानी आसू के एक स्थानीय नेता अनिमेष भुइयां और उनके साथ मौजूद दो अन्य युवकों पर हमला कर दिया.
इस हमले में 30 वर्षीय छात्र नेता अनिमेष की मौत हो गई, जबकि दोनों घायल युवकों को जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घायल युवकों में एक स्थानीय पत्रकार मृदुस्मंता बरुआ और आसू कार्यकर्ता प्रणय दत्ता शामिल है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक वृद्ध व्यक्ति सड़क दुर्घटना के बाद अपने दोपहिया वाहन के साथ सड़क पर गिरे हुए थे और ये तीनों युवक उस व्यक्ति की मदद करने की कोशिश कर रहे थे.लेकिन इसके विपरीत मोहन दास नाम के बूढ़े व्यक्ति ने तीनों युवकों पर उन्हें ठोकर मारकर गिराने का आरोप मढ़ दिया. इस बीच वहां जमा भीड़ ने युवकों पर हमला बोल दिया.
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस की एक टीम घटना में शामिल दोषियों की पहचान करने के लिए घटना के वीडियो फुटेज की जांच कर रही है और अब तक कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
जबकि आसू नेताओं ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक ज्ञापन भेजकर घटना में शामिल सभी दोषियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की है.
पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीईओ, डोर्सी ने छोड़ा पद

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इमेज कैप्शन, जैक डोर्सी ने ट्विटर के सीईओ का पद छोड़ दिया है. ट्विटर के बॉस जैक डोर्सी ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर अपना इस्तीफ़ा पोस्ट करके इसकी जानकारी दी.
ट्विटर के सीईओ के तौर पर उनकी जगह भारत के पराग अग्रवाल लेंगे. वह आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट हैं.
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पराग अग्रवाल ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, “जैक और हमारी पूरी टीम के दिल से आभारऔर भविष्य के लिए बहुत उत्साह. यहां वह पत्र है जो मैंने कंपनी को भेजा था. आपके विश्वास और समर्थन के लिए आप सभी का धन्यवाद.”
स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन चार दिन में दूसरी बार बनीं प्रधानमंत्री

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स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी मैग्डेलेना एंडरसन को इस्तीफ़ा देने के चार दिन बाद सोमवार को फिर से इस पद पर नियुक्त किया गया.
सोमवार को विश्वास मत प्रस्ताव पर हुए मतदान में उन्हें मामूली अंतर से कामयाबी मिली. स्वीडन की संसद रिक्सडैग में हुए मतदान में 349 सांसदों में से 101 ने एंडरसन के पक्ष में और 173 ने उनके विरोध में मतदान किया. 75 सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया.
स्वीडन में किसी को प्रधानमंत्री बनने के लिए संसद का बहुमत बस उनके ख़िलाफ़ नहीं होना चाहिए. इसका मतलब ये हुआ कि यदि तीन और सांसद उनके ख़िलाफ़ होते तो वो प्रधानमंत्री नहीं बन पातीं.
मतदान के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री एंडरसन ने कहा कि वो कल्याण, जलवायु परिवर्तन और अपराध पर फ़ोकस करते हुए "स्वीडन को आगे ले जाने" को तैयार हैं.
मैग्डेलेना एंडरसन अगले साल सितंबर में होने वाले चुनाव तक अपनी 'एक दल की सरकार' चलाने का प्रयास करेंगी. हालांकि, दूसरे दलों के समर्थन के बिना उनके लिए कोई भी क़ानून बना पाना बहुत मुश्किल होगा.

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पिछले हफ़्ते आख़िर हुआ क्या था?
इससे पहले, गुरुवार को एंडरसन ने केवल एक वोट के अंतर से स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया था.
हालांकि, उनके पद संभालने के कुछ ही घंटों बाद राजनीतिक उथल-पुथल के चलते उसी दिन उन्हें इस्तीफ़ा देने को मजबूर होना पड़ा.
असल में, उस दिन स्वीडन की संसद में उनके गठबंधन का बजट पास नहीं हो पाया. संसद ने इसके बजाय धुर दक्षिणपंथी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट सहित कई विपक्षी दलों द्वारा तैयार किए गए बजट को स्वीकार कर लिया.
इसके चलते उनकी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का ग्रीन पार्टी के साथ गठबंधन टूट गया और उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा. स्वीडन में परंपरा है कि यदि कोई गठबंधन सरकार छोड़ देता है तो प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देना होता है.
हालांकि, उन्होंने एलान किया कि वो संसद में केवल अपनी पार्टी के लिए विश्वास-मत हासिल करने की कोशिश करेंगी. सोमवार को इसमें वो कामयाब भी हो गईं.
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आज का कार्टून: कौन सी ध्वनि?
कृषि क़ानून पर संसद में क्या हुआ?
यूपी टीईटी : किसी की टूटी उम्मीदें तो किसी को सदमा, चिंता में लाखों युवा

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इमेज कैप्शन, पूर्वांचल के प्रयागराज से 32 वर्षीया मुक्ता कुशवाहा दो बच्चियों की माँ हैं. उत्तर प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी का व्हाट्सएप पर पेपर लीक हो जाने से लाखों आवेदकों में मायूसी है.
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दावा किया गया है कि यह परीक्षा जल्दी आयोजित करा ली जाएगी लेकिन आवेदकों को यह चिंता सता रही है कि विधानसभा चुनाव होने की वजह से परीक्षा और आगे तक स्थगित हो सकती है.
यूपी सरकार के जल्द परीक्षा कराने के दावे पर क्या सोचते हैं आवेदक, पढ़िए
अर्दोआन का एलान: इसराइल-मिस्र के साथ सुधारेंगे रिश्ते

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है कि उनका देश पुराने प्रतिद्वंद्वी मिस्र और इसराइल के साथ संबंध सुधारने वाले क़दम उठाएगा.
तुर्की के न्यूज़ चैनल एनटीवी के अनुसार, अर्दोआन ने कहा कि संबंध सुधारने की ये पहल कुछ हफ़्तों पहले संयुक्त अरब अमीरात के साथ की गई पहल जैसी होगी.
तुर्कमेनिस्तान से वापस आते वक़्त अर्दोआन ने पत्रकारों से कहा, "हमने यूएई के साथ जो क़दम उठाए, वैसे ही दूसरों (इसराइल और मिस्र) के मामले में भी उठाएंगे."
तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले हफ़्ते अरबों डॉलर के निवेश के समझौते पर दस्तख़त किए थे. उस दौरान अर्दोआन ने कहा था कि वे संबंधों के एक "नए युग" की शुरुआत करेंगे.
उन्होंने कहा, "यूएई ने 10 अरब डॉलर की निवेश योजना बनाई है. इसके निवेश से हम बहुत अलग भविष्य का निर्माण कर पाएंगे.” उस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि वो फ़रवरी में यूएई का दौरा करेंगे.
नवंबर की शुरुआत में तुर्की में हिरासत में बंद इसराइली जोड़े की रिहाई के बाद अर्दोआन ने इसराइल के प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट के साथ फ़ोन पर बातचीत की थी. दोनों देशों के प्रधानमंत्री के बीच ऐसी बातचीत शायद ही कभी होती है.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 29 नवंबर 2021, सुनिए सुशीला सिंह से
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ओमिक्रॉन वेरिएंट से दुनिया को ज़्यादा ख़तरा: WHO

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से दुनिया को बहुत ज़्यादा ख़तरा है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, WHO ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस वेरिएंट के फैलने की क्षमता और ख़तरे की गंभीरता को लेकर अनिश्चितता अभी बरक़रार है.
WHO ने अपने एक नोट में कहा, "यदि ओमिक्रॉन वेरिएंट के चलते कोविड-19 के मामलों में एक और बड़ी उछाल आई तो इसके नतीज़े गंभीर हो सकते हैं. हालांकि, ओमिक्रॉन वेरिएंट से अब तक कोई मौत नहीं हुई है."
इससे पहले, WHO ने शुक्रवार को कोविड-19 के हाल में मिले 'बी.1.1.529' स्ट्रेन को 'चिंता वाला वेरिएंट' (वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न/VoC) घोषित करते हुए इसका नाम ओमिक्रॉन रखा.
VOC की सूची में आने का मतलब यह होता है कि अब ओमिक्रॉन भी डेल्टा, अल्फ़ा, बीटा और गामा वेरिएंट की तरह कोरोना के सबसे परेशान करने वाले वेरिएंट है. हालांकि दुनिया में अब तक सबसे ज़्यादा तबाही डेल्टा वेरिएंट ने मचाई है.
WHO को पाँच दिन पहले मिली सूचना
इस वेरिएंट के पहले मामले की जानकारी WHO को 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से मिली थी. इसके अलावा बोत्सवाना, बेल्जियम, हॉन्ग कॉन्ग और इसराइल में भी इस वेरिएंट की पहचान हुई.
WHO ने अपने एक बयान में कहा था, "यह वेरिएंट काफ़ी तेज़ी से म्यूटेट हो रहा है और इनमें से कुछ म्यूटेशन चिंता के विषय हैं."
उसके अनुसार, इस म्यूटेशन का पहला ज्ञात संक्रमण 9 नवंबर को जमा किए गए नमूने से मिला था. हालांकि उसने कहा है कि नए वेरिएंट का प्रभाव समझने में अभी कुछ सप्ताह लगेंगे.
WHO के एलान के बाद शुक्रवार को दुनिया के कई देशों ने अफ़्रीका के कई दक्षिणी देशों से अपने यहाँ आने वाले विमानों पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया. साथ ही शेयर बाज़ार और तेल के दाम में भी गिरावट दर्ज़ की गई.
उत्तर कोरिया के इस व्यक्ति को लेकर चीन में हलचल क्यों?

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चीन की एक जेल से दुःस्साहस करते हुए फ़रार होने वाले उत्तर कोरिया के एक शख़्स को को 40 दिन बाद फिर से पकड़ लिया गया है.
चीन की पुलिस के अनुसार, 39 साल के झू जियानजियान (चीनी नाम) की दोबारा गिरफ़्तारी रविवार को हुई.
इससे पहले झू को 2013 में उत्तर कोरिया से भागकर चीन आने के बाद जिलिन शहर में जेल की सज़ा सुनाई गई थी. चीन ने झू के बारे में सूचना देने पर बड़ा इनाम देने का एलान किया था.
सरकारी मीडिया संस्थान बीजिंग न्यूज़ ने एक फ़ुटेज जारी किया था. इसमें झू जियानजियान 19 अक्टूबर की रात को छज्जे से जेल की छत पर चढ़ते हुए दिख रहे थे. उसके बाद वो बिजली की बाड़ को पार करके फ़रार हो गए. वीडियो फ़ुटेज में जेल के सुरक्षाकर्मियों को उनका पीछा करते हुए भी देखा गया.
झू के फ़रार होने के बाद उनकी तलाश में एक अभियान चला, जिसके बारे में सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा भी हुई. अधिकारियों ने झू की सूचना देने वाले के लिए इनाम की राशि बढ़ाते-बढ़ाते 7,00,000 यूआन (क़रीब 82 लाख रुपए) कर दी.
उनकी गिरफ़्तारी के बाद जिलिन के टीवी चैनलों द्वारा जारी किए गए तस्वीरों में पीठ पीछे बंधे हाथों के साथ जमीन पर लेटे हुए झू का चेहरा पीला और शरीर काफ़ी कमज़ोर लग रहा था. झू को उत्तर कोरिया से चीन में अवैध तरीक़े से आने, चोरी और डकैती करने के आरोप में सज़ा सुनाई गई थी.
अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, झू ने 2013 में उत्तर कोरिया और चीन की सीमा पर बहने वाली नदी को पार करके वहाँ के एक गाँव के कई घरों से लोगों के पैसे, मोबाइल फ़ोन और कपड़े चुरा लिए थे. इसके अलावा, उन्हें खोजने वाली एक बुज़ुर्ग महिला को उन्होंने चाकू मार दिया. गिरफ़्तारी से पहले उन्होंने एक टैक्सी में भागने की कोशिश भी की थी.
झू ने सुनाई गई सजा में से नौ साल जेल में बिता लिए थे. अब केवल दो साल की सजा बची हुई थी. उसके बाद उन्हें उत्तर कोरिया वापस भेज दिया जाता. अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि वो वापस उत्तर कोरिया नहीं जाना चाहते, इसलिए जेल से फ़रार हो गए.
रिफ़्यूज़ी पर 1951 के संयुक्त राष्ट्र समझौते में शामिल होने के बाद भी चीन अपने यहाँ उत्तर कोरिया से आने वाले लोगों को जबरन वहां भेज देता है. भले उनके वहां प्रताड़ित होने का ख़तरा ही क्यों न हो. चीन ऐसे लोगों को रिफ़्यूज़ी मानने के बजाय उन्हें अवैध प्रवासी मानता है.
नेपाल: आज चुना जाएगा सीपीआई-यूएमएल का अध्यक्ष, ओली के मुक़ाबले भुसाल

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नेपाल के मुख्य विपक्षी दल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी -एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीआई-यूएमएल) के अध्यक्ष का चुनाव आज (सोमवार को) होगा. पार्टी का 10वां महाधिवेशन शुक्रवार से मध्य नेपाल के चितवन में चल रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, अधिवेशन में पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों को चुनने के लिए नाम दाख़िल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. आज (सोमवार) रात साढ़े नौ बजे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के ज़रिए मतदान होगा.
अध्यक्ष पद के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश रविवार को सफल नहीं हो पायी. पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए भीम रावल ने घनश्याम भुसाल का नाम आगे बढ़ाया. इसके बाद ये तय हो गया कि पार्टी के अगले अध्यक्ष का फ़ैसला अब चुनाव से ही होगा.
इससे पहले सोमवार सुबह पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष और देश के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी अपना नामांकन दाख़िल कर दिया.
पार्टी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी घनश्याम भुसाल ने मीडिया को बताया, "केपी ओली के ग़लत फ़ैसले के चलते मैं उम्मीदवार बना हूं."
केंद्रीय समिति के सदस्यों की सूची के बाहर के कई प्रतिनिधियों द्वारा अपने उम्मीदवार देने के बाद ये तय हो गया कि अब मतदान होगा. पार्टी के उपाध्यक्ष और सचिव पद के लिए क्रमश: घनश्याम भुसाल और भीम आचार्य ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए ईश्वर पोखरेल और शंकर पोखरेल के ख़िलाफ़ कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं हुआ है.
इससे पहले रविवार आधी रात को पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने पार्टी की केंद्रीय समिति के 301 सदस्यों की सूची सार्वजनिक की.

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प्रस्तावित नाम
केपी शर्मा ओली ने ईश्वर पोखरेल को वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए तो बिष्णु पौडेल, सुभाष नेमवांग, अष्टलक्ष्मी शाक्य, राम बहादुर थापा बादल, सुरेंद्र पांडे और युवराज ग्यावली के नाम उपाध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया है.
इसी तरह उन्होंने शंकर पोखरेल को महासचिव पद के लिए तो प्रदीप ग्यावली, पृथ्वी सुब्बा गुरुंग और विष्णु रिमल को उप महासचिव पद के लिए नामित किया.
ओली ने शीर्ष बहादुर रायमाझी, छविलाल विश्वकर्मा, रघुवीर महासेठ, लेखराज भट्ट, योगेश भट्टराई, गोकर्ण बिष्ट और पद्मा आर्यल के नाम सचिव पद के लिए दिए.
ब्रेकिंग न्यूज़, राज्यसभा में शीत सत्र की बाक़ी की कार्यवाही से 12 सांसद निलंबित

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शीत सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे के कारण कल 11बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है.
हालाँकि इसी हंगामे के बीच तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने का बिल संसद के दोनों सदनों में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
विपक्ष ने कहा है कि मोदी सरकार ने बिना बहस के तीनों क़ानून की वापसी का बिल पास कर दिया. विपक्ष बहस की मांग कर रहा था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राज्यसभा ने 12सांसदों को बाक़ी के शीत सत्र से निलंबित कर दिया है. इन्हें नियमों की उपेक्षा कर ग़लत आचरण के मामले में निलंबित किया गया है.
निलंबित किए गए सांसदों में छह कांग्रेस के हैं. ये छह हैं- फुलो देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद हुसैन और अखिलेश सिंह.''
निलंबित किए गए सांसदों में शिव सेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और टीएमसी सांसद डोला सेन भी शामिल हैं.
इसके अलावा सीपीएम के इलामारम करीम, सीपीआई के बिनॉय विस्वाम, टीएमसी के शांता छेत्री और शिव सेना के अनिल देसाई हैं.
इन सांसदों के ख़िलाफ़ मॉनसून सत्र में अनुशासन के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई की गई है. इन पर मॉनसून सत्र के आख़िरी दिन 11अगस्त को सुरक्षा बलों पर हमला करने का मामला था.
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केजरीवाल पर जमकर बरसे नवजोत सिंह सिद्धू

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पंजाब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है.
सिद्धू ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''जो ख़ुद शीशे के घर में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए. अरविंद केजरीवाल जी आप महिला सशक्तीकरण, नौकरी और शिक्षक की बात करते हैं. हालाँकि आपकी कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है. शीला दीक्षित ने दिल्ली को राजस्व के मामले में सरप्लस छोड़ा था, आप वहाँ कितनी महिलाओं को 1000 रुपए देते हैं?''
सिद्धू ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, ''महिला सशक्तीकरण का मतलब जैसा पंजाब में कांग्रेस कर रही है, वो होता है. सच्चा नेतृत्व 1000 रुपए का लॉलीपॉप नहीं देता बल्कि स्किल और स्वरोज़गार के क्षेत्र में निवेश करता है. यह पंजाब मॉडल है. शिक्षक और जॉब की बात करें तो 2015 में दिल्ली में शिक्षकों के 12515 पद ख़ाली थे और 2021 में 19907 पद ख़ाली हैं. आप ज़्यादातर सीटों पर गेस्ट लेक्चरर से काम चला रहे हैं.''
सिद्धू ने अगले ट्वीट में कहा है, ''2015 के घोषणापत्र में आपने आठ लाख नई नौकरियां और 20 नए कॉलेज का वादा किया था. ये नौकरियां और कॉलेज कहाँ हैं? पिछले पाँच सालों में दिल्ली में बेरोज़गारी दर लगभग पाँच गुनी बढ़ गई है.''
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वियना में आज वार्ता: ईरान की दो टूक, अब क्या होगा?

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ईरान और दुनिया के ताक़तवर देश 2015 में हुए परमाणु समझौते को बचाने के लिए आज वियना में मिलने वाले हैं. हालांकि ईरान अपने सख़्त रुख़ पर क़ायम है. वहीं पश्चिमी देशों की निराशा लगातार बढ़ रही है. ऐसी दशा में सफलता की उम्मीद कम ही है.
कूटनीतिज्ञों का कहना है कि उस समझौते को फिर से बहाल करने के लिए समय कम है. 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते को रद्द करने के फ़ैसले से ईरान को नाराज़ कर दिया था. वहीं इस संधि में शामिल दूसरे देश जैसे- ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस ट्रंप के फ़ैसले से सहमत नहीं थे.
हालाँकि इस साल अप्रैल से जून के बीच छह दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता हो चुकी है. जून में ईरान के राष्ट्रपति के पद पर कट्टरपंथी नेता मौलवी इब्राहिम रईसी के बैठने के बाद अब बातचीत का नया दौर शुरू हो रहा है.
पश्चिमी देशों के राजनयिकों का कहना है कि बातचीत में शामिल होने वाली ईरान की नई टीम की मांग को अमेरिका और यूरोप के राजनयिक अवास्तविक मानते हैं.
वहीं इस बातचीत से जुड़े ईरान के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हमारी मांगें बिल्कुल साफ़ हैं. बातचीत में शामिल दूसरे पक्ष ख़ासकर अमेरिका को अब तय करना है कि वे इस सौदे को फिर से ज़िंदा करना चाहते हैं या नहीं. समझौते को उन्होंने छोड़ा है तो अब उन्हें ही वापस लौटना और सभी प्रतिबंधों को हटाना है.''
ईरान की मांग है कि 2017 के बाद से उस पर लगाए गए अमेरिका और यूरोपीय संघ के सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएं. इसमें वैसे प्रतिबंध भी शामिल हैं जो परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए नहीं हैं.
वैसे ईरान के विदेश मंत्रालय ने वियना में ईरान और अमेरिका के अधिकारियों के बीच सीधी मुलाक़ात की किसी संभावना से इनकार किया है. आज होने वाली यह बातचीत भारतीय समय के अनुसार शाम 6.30 बजे शुरू होगी.
अर्दोआन और इब्राहिम रईसी तुर्कमेनिस्तान में मिले

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इमेज कैप्शन, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के बीच बैठक बहुत ही दोस्ताना माहौल में हुई. ईरान का कहना है कि दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच संबंधों को और गहरा करने और द्विपक्षीय रिश्तों में कई अड़चनों को ख़त्म करने पर बात हुई है.
ईरान ने कहा है कि तुर्की से उसके रिश्ते ऐतिहासिक हैं और अर्दोआन के तेहरान दौरे में एक आयोग बनाने पर सहमति बनी है. तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से ट्वीट कर बताया गया है कि दोनों राष्ट्रपतियों की मुलाक़ात तुर्कमेनिस्तान में हुई है.
अज़रबैजान को लेकर तुर्की और ईरान में हाल के दिनों में तनाव देखा गया था. अक्टूबर महीने में तुर्की, पाकिस्तान और अज़रबैजान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास हुआ था. इसके जवाब में ईरान ने भी सैन्य अभ्यास किया था और कहा था कि "उत्तर-पश्चिमी सीमाई इलाक़ों में हमारे देश द्वारा किया जा रहा सैन्य अभ्यास संप्रभुता से जुड़ा है."
700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करने वाले दोनों देशों के बीच अब तक रिश्ते सामान्य रहे हैं लेकिन हाल के दिनों में इनमें थोड़ी उथल-पुथल देखी गई है. अज़रबैजान और आर्मेनिया के तनाव में तुर्की और ईरान के बीच पर्याप्त मतभेद हैं.
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ब्रेकिंग न्यूज़, लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हुआ कृषि क़ानून की वापसी का बिल
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन विवादित कृषि क़ानूनों की वापसी का बिल पास कर दिया गया. इसके साथ ही संसद में कृषि क़ानून वापसी का बिल पास हो गया है. राज्यसभा में भी ध्वनिमत से ही पास किया गया.
लोकसभा की कार्यवाही दो बजे फिर से शुरू हुई लेकिन हंगामे के कारण कल तक के लिए स्थगित कर दी गई. राज्यसभा में भी बिल पास होने के बाद काफ़ी हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही 2:38 बजे तक स्थगित कर दी गई है.
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किसानों की मांग MSP को समझिए
मोदी सरकार के तीन विवादित कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा के बावजूद किसानों ने आंदोलन ख़त्म करने से इनकार कर दिया है.
किसानों का कहना है कि ये आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक एमएसपी पर सरकार क़ानून नहीं लाएगी. लेकिन ये पूरा एमएसपी का विवाद क्या है और क्यों इसे लेकर किसान डटे हुए हैं. सरकार आख़िर क़ानून क्यों नहीं ला रही है? इन सभी सवालों के जावाब समझिए बीबीसी ग्राफ़िक्स के ज़रिए.






लोकसभा में महज़ चार मिनट में पास हुआ कृषि क़ानूनों की वापसी का बिल

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एक साल से किसान जिस तीन विवादस्पद कृषि क़ानून को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उसे वापस लेने का विधेयक शीत सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में पेश किया गया और महज़ चार मिनट के भीतर बिना चर्चा के ध्वनिमत के साथ ये विधेयक पारित कर दिया गया.
कृषि क़ानून निरस्त विधेयक,2021 को लोकसभा में दोपहर 12.06 बजे पेश किया गया और 12.10 पर यह पारित भी हो गया.
विधेयक पारित होने के कुछ सेकेंड बाद ही विपक्षी दलों के ज़ोरदार के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. सरकार ने उम्मीद जताई है कि आज ही राज्यसभा में भी इस विधेयक को मंज़ूरी मिल जाएगी.
जब साल 2020 में तीन कृषि विधेयक पारित किए गए,तो उस वक़्त भी विपक्ष ने सरकार के विधेयक पारित करने के तरीक़े को अलोकतांत्रिक बताया था. उस वक़्त भी विधेयक को ध्वनिमत के साथ पारित किया गया था.
विपक्ष के लिए आज का दिन, बीते साल के उस दिन जैसा ही साबित हुआ.
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क़ानून पर अपने यू-टर्न के लेकर उठने वाले सवालों के जवाब नहीं देना चाहते थे, इसलिए ही इस क़ानून की वापसी का बिल बिना चर्चा के पारित कर दिया गया.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "हमने लखीमपुर खीरी घटना और विधेयक पर चर्चा की मांग की थी लेकिन बिना चर्चा के विधेयक पारित कर दिया गया."
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सदन की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि सरकार सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार है.
इस बयान का ज़िक्र करते हुए लोकसभा सांसद चौधरी कहते हैं,‘’ इससे पहले छह निरसन विधेयक पारित हो चुके हैं लेकिन पहले सभी मौक़ों पर पर चर्चा हुई थी. ये सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष बोले.‘’
राज्यसभा में विपक्ष के नेतामल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘’हम चाहते हैं कि कृषि क़ानून निरसन विधेयक,2021 पर चर्चा हो. लेकिन लोकसभा में इस विधेयक को जल्दबाज़ी में पारित करके वो (सरकार) ख़ुद को किसानों के पक्ष में दिखाना चाहते हैं.’’
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वहीं, केंद्रीय संसदीय मंत्री प्रह्लाद जोशीने विपक्ष का जवाब देते हुए कहा, ‘’कृषि विधेयकों के पारित होने के दौरान काफ़ी चर्चा हुई थी. पूरा विपक्ष क़ानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहा था. लेकिन जब हम क़ानूनों को निरस्त करने गए तो विपक्ष ने हंगामा किया,मैं विपक्ष से पूछता हूँ कि उनकी मंशा क्या है? दो बजे इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा.
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