केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय के
हवाले से सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि महिलाओं को नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी (एनडीए)
में दाख़िला लेने के लिए ज़रूरी सभी इंतज़ाम अगले साल मई तक पूरे हो जाएंगे.
रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट
में एक हलफ़नामा दायर करके बताया है कि 2022 के बैच के लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग के
एनडीए की प्रवेश परीक्षा का नोटिफ़िकेशन जारी से पहले सारी ज़रूरी तैयारियाँ पूरी
कर ली जाएंगी.
पत्रकार सुचित्र मोहंती के मुताबिक हलफ़नामे में लिखा है, “अतिरिक्त वॉशरूम, हॉस्टल और केबिन बनाने, नए प्रशिक्षुओं के
लिए पाठ्यक्रम और अन्य चीज़ें तैयार करने में कुछ समय लगेगा.”
हलफ़नामे में यह भी बताया गया है
कि सरंचनागत ढाँचे और व्यवस्था में बदलाव के लिए विशेषज्ञों का एक समूह भी गठित किया गया है जो
महिलाओं के एनडीए में आने को लेकर अपने सुझाव देगा.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अगस्त में एनडीए में महिलाओं की एंट्री का रास्ता साफ़ किया था.
अब तक एनडीए में सिर्फ़ पुरुष ही प्रशिक्षण लेते रहे हैं और महिलाओं को इसकी प्रवेश परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं थी.
अदालत ने महिलाओं को एनडीए की परीक्षा में नहीं बैठने देने की केंद्र सरकार की "पुरानी मानसिकता" की आलोचना की थी.
कोर्ट ने कहा था कि यह एक नीतिगत फ़ैसला है जो लैंगिक असमानता के आधार पर बना है.
महिलाओं को एनडीए में प्रवेश की माँग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह फ़ैसला सुनाया था.
एनडीए में प्रशिक्षण लेने के लिए 12वीं कक्षा के बाद राष्ट्रीय स्तर की एक कठिन परीक्षा होती है जिसमें सफल होने पर कैडेट्स को सेना में अफ़सर रैंक के लिए तैयार किया जाता है.
महिलाएं सेना में डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, संकेतक, एडमिनिस्ट्रेटर और वकील के तौर पर काम करती रही हैं.
उन्होंने जंग के मैदान में सैनिकों का इलाज किया है, विस्फोटकों को हैंडल किया है. माइन खोजे और निष्क्रिय किये हैं और संचार के लिए लाइने बिछाई हैं.
जानकारों का कहना है कि लड़ाई के अलावा महिलाओं ने लगभग सबकुछ किया है. उन्हें इंफेंटरी और बंख़्तबंद सेवा से दूर रखा गया है.
साल 2019 में सरकार ने महिलाओं को स्थायी कमिशन देने की इजाज़त दी थी लेकिन उम्रदराज़ महिलाओं की शारीरिक परेशानियों को देखते हुए सरकार ने कहा था कि ये केवल उन अफ़सरों पर लागू होगा तो जिन्होंने 14 साल से कम की सेवा दी है.