सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वाराणसी के ज्ञानवापी
परिसर स्थित कथित वज़ूखाने को साफ़ करने की अनुमति दे दी है.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी
पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने हिंदू पक्ष की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश
दिया है.
मुस्लिम पक्ष ने भी इस याचिका का कोई विरोध
नहीं किया.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साफ सफाई का
काम वाराणसी के डीएम की देखरेख में किया जाए.
हिंदू पक्ष ने अपनी याचिका में अदालत से कहा
था कि पिछले कई महीनों से सील होने के कारण इस कथित वज़ूखाने से दुर्गंध आ रही है.
अदालत को बताया गया कि इस टैंक में रहने वाली
मछलियों के मरने और पानी के ख़राब होने के कारण ऐसा हो रहा है. इसलिए इस टैंक की साफ
सफाई बहुत ज़रूरी है.
अदालत में हिंदू पक्ष से सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान और विष्णु शंकर जैन उपस्थित हुए.
फ़ैसले के बाद एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने पीटीआई को बताया, "इस टैंक की मछलियां 20 से 25 दिसंबर, 2023 के बीच मर गईं, जिससे वहां पूजा करने वाले हिंदू लोगों को परेशानी हो रही थी. इसलिए हमने अदालत से टैंक को साफ करने की अनुमति देने की मांग की थी."
उन्होंने कहा, "मुस्लिम पक्ष के वकील सीनियर एडवोकेट हुज़ैफ़ा अहमदी ने भी इस मांग का समर्थन किया. असल में, अंजुमन इंतज़ामिया कमेटी ने भी वाराणसी के ट्रायल कोर्ट में में ऐसी एक याचिका दाख़िल की है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने ज़िला प्रशासन को टैंक की सफाई का आदेश जारी किया."
मई 2022 में सर्वे के दौरान वज़ूखाने में ही एक ढांचा पाया गया. हिंदू पक्ष ने इस ढांचे के शिवलिंग होने का दावा किया, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने कहा कि ये एक फव्वारा है.
हिंदू पक्ष ने कथित शिवलिंग की पूजा करने की इजाज़त मांगी और वहां मुसलमानों के वज़ू करने का विरोध किया.
दोनों पक्षों के बीच विवाद तेज़ होता देख कुछ दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने वज़ूखाने को सील करने का आदेश दिया था. हालांकि उसने मुसलमानों के परिसर में नमाज़ अदा करने पर रोक नहीं लगाई.
पिछले साल अगस्त में एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में एएसआई के सर्वेक्षण करने की इजाज़त दे दी थी.
एसआई ने सर्वेक्षण का काम अब पूरा कर लिया है और इसकी रिपोर्ट ज़िला अदालत में जमा कर दी गई है. हालांकि अभी तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है.