तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने बताया ‘युद्ध अपराधी’, इसराइल ने वापस बुलाए राजदूत
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने शनिवार को इसराइल को 'युद्ध अपराधी' क़रार दिया, जिसके जवाब में इसराइल ने तुर्की से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है.
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दीपक मंडल and संदीप राय
तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने बताया ‘युद्ध अपराधी’, इसराइल ने वापस बुलाए राजदूत
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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने शनिवार को इसराइल को 'युद्ध अपराधी' क़रार दिया, जिसके जवाब में इसराइल ने तुर्की से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है.
तुर्की के इस्तांबुल में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए अर्दोआन ने ग़ज़ा पर इसराइल के हमले को 'जनसंहार' बताया और कहा कि इसराइल के सहयोगी पश्चिमी मुल्क इस युद्ध अपराध के पीछे 'मुख्य अपराधी' हैं.
अर्देआन ने कहा, "इसराइल, हम तुम्हें दुनिया में एक युद्ध अपराधी के रूप में घोषित करेंगे. हम इसकी तैयारी कर रहे हैं और हम दुनिया के सामने इसराइल को युद्ध अपराधी के रूप में पेश करेंगे."
अर्दोआन ने कहा कि वो ये नहीं समझते कि हमास 'एक आतंकी संगठन' है.
राष्ट्रपति ने एक विशाल स्टेज से अपना भाषण दिया और दावा किया कि इस रैली में 15 लाख लोग शामिल हुए.
इसराइल ने तोड़े राजनयिक रिश्ते
इसराइल ने इसके जवाब में तुर्की से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है.
इसराइल के विदेश मंत्री एली कोहे ने सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि अर्दोआ की तीखी टिप्पणी के बाद उन्होंने अपने राजनयिकों को तुर्की छोड़ देने के आदेश दिए हैं.
इससे पहले बुधवार को अर्देआन ने हमास को 'लिबरेशन ग्रुप' यानी आज़ादी के लिए लड़ने वाला समूह कहा था.
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इमेज कैप्शन, बंधकों के परिजनों ने अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
युद्ध का दूसरा चरणः इसराइली सेना
इसराइली सेना ने शनिवार को कहा कि ज़मीनी हमले की प्रगति के साथ ही अब युद्ध का अगला चरण शुरू हो रहा है.
ग़ज़ा में मौजूद बीबीसी संवाददाता रुश्दी अबूअलूफ़ के अनुसार, उत्तर पश्चीमी ग़ज़ा में समंदर के क़रीब दो किलोमीटर अंदर तक इसराइली सेना के टैंक पहुंच गए हैं.
उन्होंने कहा कि ग़ज़ा पट्टी के उत्तरी, पश्चमी और पूर्वी हिस्से में लगातार बमबारी हो रही है. लेकिन दक्षिणी ग़ज़ा पर भी बम बरसाए गए हैं.
उन्होंने बताया कि आज 20 हवाई हमले खान यूनिस पर हुए हैं.
ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सात अक्टूबर को हमास के हमले के बाद से जारी इसराइली बमबारी में अबतक ग़ज़ा में 7,703 लोग मारे गए जिनमें 3,500 बच्चे हैं.
इसराइली बंधकों के परिजनों का बढ़ा दबाव, नेतन्याहू करेंगे मुलाकात
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जैसे जैसे ग़ज़ा में इसराइल के ज़मीनी
हमले की ख़बरें आ रही हैं, बंधकों के परिजनों में बेचैनी बढ़ती जा रही है.
बीती रात बंधकों के परिजनों ने एक
बयान जारी कर इसराइली सरकार से उनके प्रियजनों के की सुरक्षा सुनिश्चित करने को
कहा है.
ताज़ा सूचना के मुताबिक, इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू परिजनों से आज रात ही मुलाक़ात करेंगे.
इसके अलावा इसराइल रक्षा मंत्री योआव गैलेंट
रविवार को सुबह हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों से मुलाकात करेंगे.
क़रीब 229 बंधकों के परिजनों ने रक्षा मंत्री,
प्रधानमंत्री नेतन्याहू और युद्ध मंत्रिमंडल से मिलने की मांग की थी.
उदर दक्षिणी इसराइल से जेरेमी बोवेन ने बताया कि वो
सेदेरात में हैं, जहां से इसराइली बैटरी से हर मिनट कई फ़ायर किए जा रहे हैं.
ग़ज़ा संघर्ष विराम की मांग को लेकर लंदन से लेकर न्यूयॉर्क तक प्रदर्शन
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ग़ज़ा पर इसराइली बमबारी के ख़िलाफ़ शनिवार को सेंट्रल
लंदन के वाटरलू इलाके में प्रदर्शन हुआ, जिसमें क़रीब एक लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है.
दूसरी ओर अमेरिका के न्यूयॉर्क में प्रदर्शनकारियों ने एक व्यस्ततम मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन किया.
लंदन मेट्रोपोलिटन पुलिस ने कहा कि नारों और प्लेकार्ड को
लेकर कार्यवाही होगी अगर उनसे हमास के समर्थन का संदेश जाता है.
भीड़ में कुछ लोगों ने 'फ़्राम द रीवर टू द सी' के नारे लगाए
जिसका मतलब होता है कि जॉर्डन नदी से लेकर भूमध्सागर तक फ़लस्तीनी ज़मीन.
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ब्रिटेन होम सेक्रेटरी सुएला ब्रैवरमैन ने इससे पहले पुलिस से कहा था कि इस नारे को हिंसक माना जाए क्योंकि इसमें इसराइल को दुनिया के नक्शे से मिटाने का भाव जाता है.
हालांकि फ़लस्तीनी एकजुटता अभियान और अन्य एक्टिविस्टों ने ये कहते हुए इसे चुनौती दी है कि यह नारा “फ़लस्तीनी लोगों की आज़ादी, बराबरी और इंसाफ़” को दर्शाता है.
पिछले हफ़्ते लंदन में हुए इसी तरह के प्रदर्शन में 1,00,000 लोग इकट्ठा हुए थे. पुलिस को ताज़ा प्रदर्शन में भी इतने ही लोगों के आने का आंकलन है.
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न्यूयॉर्क में प्रदर्शन
अमेरिका के न्यूयार्क में मैनहट्टन के सबसे व्यस्ततम ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल पर द ज्यूईश वॉइस फॉर पीस के प्रदर्शनकारियों ने ग़ज़ा में संघर्ष विराम के लिए प्रदर्शन किया.
इस मेट्रो टर्मिनल से रोज़ाना 7.5 लाख लोग आते जाते हैं. प्रदर्शन के चलते इसे रोक दिया गया.
एनवाईपीडी ने बीबीसी को बताया कि कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सात अक्टूबर को हमास के हमले के बाद से जारी इसराइली बमबारी में अबतक ग़ज़ा में 7,703 लोग मारे गए जिनमें 3,500 बच्चे हैं.
भीषण धमाकों के बीच ग़ज़ा से भेजे गए ऑडियो संदेश में क्या कहा गया?
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दक्षिणी इसराइल में मौजूद बीबीसी रिपोर्टर एलिस कडी के अनुसार, हमने अभी अभी सेंट्रल ग़जा के दैर अल बालाह शहर में
रहने वाले किसी व्यक्ति की ओर से भेजा गया ऑडियो संदेश मिला है.
उस व्यक्ति ने कहा, “पिछली
रात अचानक सारे कनेक्शन टूट गए...सबकुछ ठप्प पड़ गया.”
लोग फ़ोन के सिग्नल से कनेक्ट होने की कोशिश
कर रहे हैं. ये बहुत ज़्यादा अजीब है.
इस ऑडियो संदेश के बीच बीच में पृष्ठभूमि से आ रहे
धमाकों की आवाज़ सुनी जा सकती है.
संदेश में उस व्यक्ति ने बताया, “अभी
हमला हो रहा है. हालात बहुत ख़तरनाक हैं. यहां लोग बहुत चिंतित हैं. लोग अपने परिवार
और प्रियजनों को तलाश रहे हैं.”
लोग मुझसे अपने रिश्तेदारों को तलाशने में मदद के लिए
कह रहे हैं. हालात बहुत ही तनावपूर्ण है.
ग़ज़ा के रहने वालों ने हमें बताया कि उत्तरी
इलाके में क्या हो रहा है इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है. वहां पर इसराइल की
सबसे भारी बमबारी हो रही है.
उस व्यक्ति के पास इसराइली ई-सिम है इसलिए वो हमसे
संपर्क बना पाया.
उसने बताया, “ग़ज़ा
इस पूरे ग्रह से कट गया है.”
ग़ज़ा में संचार लाइनों को पूरी तरह काट देने के बीबीसी के सवाल पर इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के सलाहकार मार्क रेगेव ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन में ये एक मानक प्रक्रिया होती है.
उन्होंने कहा, "ब्रिटिश और अमेरिकी सेना की ओर से चलाए जाने वाले सैन्य अभियान के दौरान दुश्मन के संचार को ध्वस्त करने के लिए यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है."
बीबीसी के टुडे प्रोग्राम में मार्क रेगेव से पूछा गया था कि क्या संचार की सारी लाइनें काटना अस्वीकार्य नहीं हैं?
इस बीच उत्तरी ग़ज़ा में अल शाति रिफ़्यूजी कैंप में इसराइली हवाई हमले की तस्वीरों में भारी तबाही का मंज़र दिख रहा है.
आर्मिटा गेरावंदः तेहरान मेट्रो पर गिरी ईरानी किशोरी की मौत
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ईरान की मॉरेलिटी पुलिस से कथित झड़प के बाद गिरने से कोमा में चली गईं 16 साल की
आर्मिटा गेरावंद की मौत हो गई. सरकारी मीडिया और एक्टिवस्टों ने ये जानकारी दी है.
आर्मिटा गेरावंद एक अक्टूबर को तेहरान मेट्रो ट्रेन में चढ़ते समय गिर
गई थीं.
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 'हिजाब न पहनने के लिए
मॉरेलिटी पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वो अचेत
हो गई थीं.'
आर्मिटा की मौत शनिवार की सुबह हुई. ईरान की सरकारी न्यूज़
एजेंसी इरना के अनुसार, उन्हें दिमाग पर गंभीर चोट लगी थी.
बीते रविवार को डॉक्टरों ने आर्मिटा को 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया था.
तब आर्मिटा के पिता बाहमन गेरावंद ने कहा था कि डॉक्टरों ने कहा था कि रिकवरी की उम्मीद ख़त्म हो गई है.
इस मामले में आर्मिटा के परिजनों की ओर से अभी तक कोई
बयान नहीं आया है.
नॉर्वे के एक मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने आर्मिटा
गेरावंद के मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
संगठन का कहना है कि आर्मिटा 'ज़बरदस्ती हिजाब पहनाने के मामले' की ताज़ा शिकार हैं और 28 दिन तक अस्पताल में ज़िंदगी
मौते से जूझने के बाद उनकी मौत हो गई.
इसराइली सेना ने ग़ज़ा के लोगों के लिए जारी किया अर्जेंट संदेश
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इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज ने शनिवार को उत्तरी ग़ज़ा के फ़लस्तीनी नागरिकों को एक आपात संदेश जारी कर दक्षिणी ग़ज़ा की ओर तत्काल चले जाने को कहा है.
एक वीडियो संदेश में इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस के प्रवक्ता डेनियल हगारी ने कहा, “ग़ज़ा के नागरिक ध्यान से सुनें. यह इसराइली सेना की ओर से अर्जेंट सैन्य सलाह है. हम अपील करते हैं कि आप अपनी सुरक्षा के लिए उत्तरी ग़ज़ा और ग़ज़ा सिटी को अस्थाई तौर पर छोड़कर तुरंत दक्षिणी ग़ज़ा चले जाएं. ये अस्थाई कदम है और दोबारा यहां वापसी तब संभव होगी जब तीखे संघर्ष का अंत हो जाएगा.”
हगारी ने कहा, “हमास ने स्कूलों, मस्जिदों और अस्पतालों समेत नागरिक इलाकों में हथियार और विस्फोटक रखकर आपकी ज़िंदगी को ख़तरे में डाल दिया है. ये कार्रवाई हमास के ख़तरे को सटीकता और सघनता से ख़त्म करने के लिए की जा रही है.”
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गौरतलब है कि शुक्रवार की रात से ही समूचे ग़ज़ा में इसराइल की ओर से अभूतपूर्व बमबारी की जा रही है और अब ग़ज़ा पट्टी में संचार माध्यम भी ध्वस्त हो चुके हैं जिससे कोई सूचना बाहर नहीं आ पा रही है.
इसराइली सेना ने सात अक्टूबर को हमास के हमले के बाद से ग़ज़ा पर बमबारी शुरू की, जिसके बाद से वह उत्तरी ग़ज़ा के निवासियों को इलाका छोड़ने की चेतावनी दे रहा है.
ग़जा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक युद्ध में अब तक 7,000 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें 3,000 बच्चे हैं.
इसराइल-हमास संघर्षः भारत ने यूएन में लाए गए प्रस्ताव से बनाई दूरी, क्या कहते हैं एक्सपर्ट
गिरिराज सिंह ने बिहार सरकार की तुलना इस्लामिक स्टेट से की, क्या है वजह
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार में 9वीं कक्षा के संस्कृत पेपर को लेकर सवाल खड़े करते हुए बिहार सरकार की तुलना इस्लामिक स्टेट से की.
उन्होंने कहा है कि संस्कृत के पेपर में इस्लाम धर्म से जुड़े सवाल करने का क्या मतलब है.
गिरिराज सिंह ने कहा कि संस्कृत के पेपर में 10 सवाल इस्लाम से जुड़े पूछे गए.
उन्होंने कहा, “किसी ने मुझे बताया कि जब संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सिलेबस में है.”
केंद्रीय मंत्री ने बिहार के इस्लामीकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा, “यहां लग रहा है कि हम इस्लामिक स्टेट की तरह जी रहे हैं.”
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दुर्गा से लेकर रामचरितमानस तक विवाद
अभी एक दिन पहले ही राष्ट्रीय जनता दल विधायक फतेह बहादुर सिंह ने 'हिंदुओं की देवी दुर्गा को काल्पनिक चरित्र' कह कर विवाद खड़ा कर दिया था.
उनके विवादित बयान पर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
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बिहार बीजेपी नेता विजय सिन्हा ने कहा, "राजद के लोग जिस तरह की भाषा का उपयोग कर रहे हैं और सनातन के संतानों को अपमानित कर रहे हैं वो तुष्टिकरण की राजनीति है."
इससे पहले बीते सितंबर में बिहार के शिक्षा मंत्री और राजद नेता चंद्रशेखर यादव ने रामचरितमानस को लेकर एक विवादित बयान दिया था.
उन्होंने रामचरितमानस की तुलना पोटैशियम साइनाइड से की थी. इसे लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन में तनाव की ख़बरें भी आईं थी.
वर्ल्ड कप: 383 रन बनाकर भी हारा न्यूजीलैंड, पांच रन से जीता ऑस्ट्रेलिया
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इमेज कैप्शन, मैच में ट्रेविस हेड ने 67 गेंद पर सबसे ज्यादा 109 रन बनाए
न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच धर्मशाला के मैदान में जबरदस्त मुकाबला हुआ. ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड के सामने जीत के लिए 389 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा था.
न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने संघर्ष की जबरदस्त क्षमता दिखाई और पचास ओवर में 9 विकेट पर 383 रन बनाने में कामयाब रहे.
न्यूजीलैंड के लिए रचिन रविंद्र ने 116, जेम्स नीशम ने 58 और डेरिल मिचेल ने 54 रन बनाए.
ऑस्ट्रेलिया के लिए ट्रेविस हेड ने 67 गेंद पर सबसे ज्यादा 109 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और सात छक्के शामिल हैं.
वहीं डेविड वॉर्नर ने पांच चौके और छह छक्कों की मदद से 81 रन की पारी खेली. इसके अलावा मिचेल मार्श 36 रन, मार्नस लाबुशेन 18 रन बनाकर आउट हो गए.
न्यूजीलैंड की तरफ से ट्रेंट बोल्ट और ग्लेन फिलिप्स ने तीन-तीन विकेट, मिचेल सैंटनर ने दो विकेट, हेनरी और नीशम ने एक-एक विकेट लिया.
इस पूरे मैच में 758 रन बने, जो ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए किसी वनडे में सबसे अधिक रन हैं.
तस्वीरों में देखिए: दक्षिणी ग़ज़ा में इसराइली बमबारी से तबाही का मंजर
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इमेज कैप्शन, बीते करीब 20 दिनों से ग़ज़ा पर जारी बमबारी के दौरान शुक्रवार की रात सबसे भीषण रात थी. ग़ज़ा में मौजूद हमारे रिपोर्टर रुश्दी अबू अलूफ़ ने बताया कि उत्तरी ग़ज़ा पर भयानक बमबारी की गई है और ये इतनी भीषण बमबारी थी जैसा पहले कभी किसी नहीं देखा होगा.
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इमेज कैप्शन, बीबीसी संवाददाता लूसी विलियमसन का कहना है कि बमबारी लगभग हर पहल हो रही है. हवाई बमबारी के अलावा ग़ज़ा पट्टी से लगी सीमा पर आर्टिलरी से भी फ़ायर किए जा रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, यह तस्वीर अल-शती कैंप के पास की है, जहां तबाह हुई इमारतें और मलबे के ढेर देखे जा सकते हैं. लोग मलबे को साफ करने की कोशिशों में लगे हुए हैं.
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इमेज कैप्शन, रफ़ाह से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं उसमें लोगों को मलबे से अपने काम की चीजें तलाशते देखा जा सकता है.
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इमेज कैप्शन, रफाह में लोग पानी की तलाश में बर्तन लिए सड़क पर दिखाई दे रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, ये नोट करने वाली बात है कि इससे पहले हुई बमबारी में रफ़ाह की कई इमारतें नष्ट हो चुकी हैं.
दिल्ली की हवा बिगड़ी, 300 के पार पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
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सर्दियों की दस्तक के साथ ही राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने लगी है.
शनिवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत ख़राब' की श्रेणी में पहुंच गई और अनुमान है कि आगे प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) शनिवार दोपहर को 301 हो गया जबकि शुक्रवार को 261 था.
दिल्ली के आस पास के शहरों गाजियाबाद में एक्यूआई 286, फ़रीदाबाद में 268, गुरुग्राम में 248, नोएडा में 284 और ग्रेटर नोएडा में 349 है.
दिल्ली के एयर क्वालिटी वार्निंग सिस्टम के अनुसार तापमान में गिरावट और धीमी हवा की गति की वजह से वायु की गुणवत्ता में और गिरावट आएगी.
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण निगरानी तंत्र बनाते हुए निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध, वृक्षारोपण जैसे उपाय किए हैं.
ग़ज़ा पर यूएन की वोटिंग से भारत के परहेज पर प्रियंका गांधी ने क्या कहा
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ग़ज़ा में इसराइली बमबारी के बीच मानवीय मदद के लिए यूएन में शनिवार को वोटिंग हुई, जिसमें भारत अनुपस्थित रहा.
अब इसे लेकर विपक्षी पार्टियां, केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना कर रही हैं.
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महात्मा गांधी के शब्दों को लिखते हुए कहा, "आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है."
उन्होंने लिखा, "मैं हैरान और शर्मिंदा हूं कि हमारे देश ने ग़ज़ा में युद्ध विराम के लिए हुए मतदान में हिस्सा लेने से मना कर दिया."
प्रियंका गांधी ने लिखा, "हमारे देश की स्थापना अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों पर हुई थी, जिन सिद्धांतों के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, ये सिद्धांत संविधान का आधार हैं जो हमारी राष्ट्रीयता को परिभाषित करते हैं."
उन्होंने लिखा कि जब लाखों लोगों के लिए भोजन, पानी, मेडिकल, संचार, आपूर्ति और बिजली काट दी गई है और जब फलस्तीन में हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को मारा जा रहा है, ऐसे समय में स्टैंड लेने से इनकार करना और इसे चुपचाप होते हुए देखना गलत है. यह उसके विपरीत है, जिसके लिए एक देश के रूप में भारत ने हमेशा से लड़ाई लड़ी है.
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वोटिंग से परहेज करने पर एआईएमआईएम के चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी भारत सरकार की निंदा की है.
पश्चिम एशिया की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के आपात विशेष सत्र में भारी बहुमत से पास किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘बिगड़ती तनाव की स्थिति, अकथनीय हिंसा, कष्टदायक पीड़ा अब – समाप्त होनी चाहिए.’
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ज़ोर देकर कहा कि ‘और अधिक रक्तपात अब बंद होना चाहिए.’
इस प्रस्ताव के समर्थन में 120 देशों ने वोट किया, जबकि इसराइल, अमेरिका समेत 14 देशों ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया.
जो 45 देश इस वोटिंग से अनुपस्थित रहे उनमें भारत भी शामिल था.
छत्तीसगढ़ में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बरसे राहुल गांधी, क्या कहा
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार, 28 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के कांकेर और कोंडागांव में चुनावी रैली को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा.
कांकेर की चुनावी रैली में बोलते हुए उन्होंने कहा, "सरकार चलाने के दो ही तरीके होते हैं. एक तरीका ये है कि आप प्रदेश या देश के अमीर लोगों को फायदा पहुंचाओ. दूसरा तरीका है कि आप देश या प्रदेश के सबसे गरीब लोगों की मदद करो. यही दो तरीके हैं. हमारी जो सरकार है, वो किसानों, गरीब लोगों और मज़दूर लोगों की मदद करती है. उनकी सरकार बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन आखिर में अदानी जी की मदद करते हैं."
"बघेल जी ने कहा कि खदान, एयरपोर्ट, पोर्ट्स अदानी जी को दिए जाते हैं. किसान के खिलाफ जो कानून बनाए गए, वो अदानी जी की मदद करने के लिए. हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सेब का पूरा बिजनेस अदानी जी के हाथ में है. जो भी वो करते हैं, अदानी जी के लिए, देश के दो तीन बड़े उद्योगपतियों के लिए करते हैं. हम जो भी करते हैं, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों और पिछड़ों के लिए करते हैं."
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मनरेगा पर क्या कहा
राहुल गांधी ने कहा, "हम मनरेगा लाए, लोकसभा में पीएम ने देश के सब मजदूरों का अपमान किया. कहा कि मनरेगा बिल्कुल बेकार प्रोग्राम है."
"भोजन का अधिकार हम लाए, कर्जा माफी हमने की, क्योंकि हम जानते हैं, कि जब तक हम गरीबों की मदद नहीं करेंगे, तब तक ये देश खड़ा नहीं हो सकता, प्रगति नहीं कर सकता."
ओबीसी का मुद्दा फिर उठाया
राहुल गांधी ने कहा, "नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हम पिछड़ों की सरकार चलाते हैं तो आप जाति जनगणना से इतना क्यों डरते हो."
"अपने भाषणों में जाति जनगणना का प्रयोग क्यों नहीं करते हो. जो आंकड़े हमारी सरकार ने निकाले थे, उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करते हो. आप जानते हो, आज के भारत में जितनी भागीदारी ओबीसी वर्ग की होनी चाहिए वो नहीं है. इस सच्चाई को आप देश के ओबीसी युवाओं को नहीं बताना चाहते, उनसे सच्चाई छिपाना चाहते हो."
"मैंने संसद में आंकड़ा रखा था, बीजेपी के लोग चुप हो गए. हिंदुस्तान की सरकार को 90 अफसर चलाते हैं. लोकसभा, राज्यसभा के सांसद सरकार नहीं चलाते. सरकार में 90 आईएएस अफसर हैं, जिन्हें कैबिनेट सेक्रेटरी कहा जाता है. ये असल में सरकार को चलाते हैं. सारे फैसले ये लेते हैं. मनरेगा में कितना पैसा जाएगा, सेना, वायु सेना को कितना पैसा चाहिए. सारे फैसले ये लोग लेते हैं."
"इन 90 लोगों में से पिछड़े वर्ग के कितने लोग हैं. 90 में से सिर्फ तीन लोग ओबीसी वर्ग के हैं. हिंदुस्तान का बजट करीब 45 लाख करोड़ रुपये का है, उसमें से ये तीन अफसर सिर्फ पांच प्रतिशत बजट पर निर्णय लेते हैं. मेरा सवाल है क्या हिंदुस्तान में ओबीसी की आबादी सिर्फ पांच प्रतिशत है?...दिल्ली में हमारी सरकार आएगी, दो घंटे में काम शुरू हो जाएगा. छत्तीसगढ़ में सरकार आएगी तो हम जाति आधारित सर्वे कराएंगे."
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आदिवासी, वनवासी अलग हैं
राहुल गांधी ने कहा, "हम आदिवासियों को आदिवासी कहते हैं. आपने देखा होगा, बीजेपी के लोग आदिवासी नहीं कहते. वे वनवासी शब्द का प्रयोग करते हैं. शब्दों में बहुत कुछ छिपा होता है. वनवासी और आदिवासी, बिल्कुल अलग चीजें हैं."
"आदिवासी का मतलब, वो लोग जो हिंदुस्तान के पहले मालिक थे. मतलब ये जो पूरी की पूरी जमीन है, उसके असल मालिक, जो इस देश में पहले रहते थे, उन्हें हम आदिवासी कहते थे. इस शब्द के अंदर छिपा मतलब है कि आदिवासियों को जमीन का अधिकार मिलना चाहिए. आदिवासियों की जो संस्कृति, इतिहास, जल, जंगल और जमीन है, उसकी रक्षा की जानी चाहिए और उसका हक उन्हें मिलना चाहिए."
"वनवासी का दूसरा मतलब है. वनवासी का मतलब ये नहीं है कि आप हिंदुस्तान के पहले मालिक थे. ये शब्द नहीं कहता है कि आपको हक मिलना चाहिए. वनवासी का मतलब है कि आप जंगल में रहते हैं. ये फर्क है दो शब्दों में. वनवासी शब्द हिंदुस्तान के आदिवासियों का अपमान है. आप पर आक्रमण है. आपकी संस्कृति पर, इतिहास पर, भाषाओं पर ये शब्द आक्रमण है. सच्चा शब्द आदिवासी है."
"कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश में एक आदिवासी युवा पर एक बीजेपी के नेता ने पेशाब किया. ये इनकी सोच है. हमने क्या किया. हम पैसा-कानून लाए, आपकी जमीन पर आपको अधिकार दिया और आदिवासी बिल में साफ लिखा था कि अगर आपको आदिवासियों से जमीन लेनी है तो बिना ग्राम सभा से पूछे, आप जमीन नहीं ले सकते...बीजेपी ने ग्राम सभा से इजाजत लेनी की बात को रद्द कर दिया. पैसा-कानून और आदिवासी बिल को उन्होंने अंदर से खोखला कर दिया."
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अंग्रेजी भाषा पर क्या कहा
राहुल गांधी ने कहा, "जहां भी बीजेपी के नेता जाते हैं, वे हिंदी की बात करते हैं. कहते हैं हिंदी सबसे जरूरी भाषा है. वे कहते हैं छत्तीसगढ़ी और अंग्रेजी जरूरी भाषाएं नहीं हैं. हमारी सोच अलग है. हम कहते हैं कि हिंदी भी जरूरी है, छत्तीसगढ़ी भी जरूरी है, अंग्रेजी भी जरूरी है. अगर आपको छत्तीसगढ़ में बात करनी है, तो आप छत्तीसगढ़ी काम आएगी. अगर यूपी, मध्य प्रदेश में बात करनी है, तो हिंदी काम आएगी."
"अगर आप बाकि दुनिया के लोगों से बात करना चाहो, कोई टूरिस्ट आए, उससे बात करना चाहो, कोई बड़ी कंपनी का मालिक अमेरिका से आए, उससे बात करना चाहो, तो अंग्रेजी चलेगी. हम चाहते हैं कि आप जहां भी जाओ, आप भाषा का प्रयोग कर पाओ और उसका फायदा उठा पाओ."
"किसी भी बीजेपी के नेता से पूछ लो, वे कहते हैं कि अंग्रेजी खराब है, हिंदी होनी चाहिए. एक बात बता दो कि आपके बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में जाते हैं, तो वे चुप हो जाएंगे. वे कहते हैं कि गरीबों को अंग्रेजी नहीं सिखनी चाहिए, ये सारे के सारे अपने बच्चों को इंग्लिश स्कूल में पढ़ाते हैं."
केजी से लेकर पीजी तक मुफ्त शिक्षा
"ये चाहते हैं कि आदिवासी, गरीब, पिछड़े लोगों के बच्चे बाकि दुनिया के साथ बिजनेस न कर पाएं, इसलिए ये लोग अंग्रेजी नहीं चलाना चाहते. सिर्फ अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में भेजना चाहते हैं. इसलिए हमने छत्तीसगढ़ में टॉप क्वालिटी के अंग्रेजी स्कूल खोले हैं, ताकि गरीब से गरीब लोग अपने बच्चों को हिंदी, छत्तीसगढ़ियां और अंग्रेजी सिखा पाएं."
राहुल गांधी ने कहा, "हम केजी से लेकर पीजी तक छत्तीसगढ़ के सारे के सारे सरकारी स्कूल और कॉलेजों में मुफ्त में शिक्षा मिलेगी. एक पैसा नहीं देना पड़ेगा."
ग़ज़ा पर यूएन में वोटिंग, भारत समेत किन देशों ने किया परहेज और किसने दिया साथ
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ग़ज़ा में भारी इसराइली
बमबारी के बीच मानवीय मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन बैठक में हुए मतदान में भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पास किया गया.
इस प्रस्ताव के समर्थन में 120 देशों ने वोट किया, जबकि इसराइल, अमेरिका समेत 14 देशों ने इस प्रस्ताव के
ख़िलाफ़ वोट किया.
पश्चिम एशिया की स्थिति पर संयुक्त
राष्ट्र महासभा के आपात विशेष सत्र में भारी बहुमत से पास किए गए इस प्रस्ताव में
कहा गया है कि ‘बिगड़ती तनाव की स्थिति, अकथनीय हिंसा, कष्टदायक पीड़ा अब – समाप्त होनी चाहिए.’
संयुक्त राष्ट्र महासभा
ने ज़ोर देकर कहा कि ‘और अधिक रक्तपात अब बंद होना चाहिए.’
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ये देश वोटिंग से अलग रहे
जो 45 देश इस वोटिंग से अनुपस्थित रहे उनमें भारत भी शामिल था और इसे लेकर एआईएमआईएम के नेता ओवैसी ने मोदी सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं.
दक्षिण एशिया में भारत अकेला देश था जो वोटिंग से अलग रहा जबकि अन्य सभी सातों देशों ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया.
संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने ‘एक्सप्लेनेशन ऑफ़ वोट’ में ग़ज़ा में जारी संघर्ष की वजह से नागरिकों, ख़ासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई.
सबसे ताज्जुब इराक की अनुपस्थिति रही.
अन्य अनुपस्थित रहने वाले देशों में जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इटली, साउथ सूडान, ईराक, ट्यूनीशिया, ब्रिटेन, यूक्रेन, फिलीपींस समेत 45 देश थे.
इस प्रस्ताव को जॉर्डन ने पेश किया जिसे अधिकांश अरब और इस्लामिक देशों ने स्पांसर किया था जिनमें मिस्र, ओमान और यूएई के अलावा रूस का नाम भी शामिल है.
इन देशों ने डाला विरोध में वोट
जैसा उम्मीद थी, इसराइल और अमेरिका ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया लेकिन उनके अलावा 12 देश और थे जिन्होंने विरोध में वोट डाला.
ये देश हैं- ऑस्ट्रिया, क्रोएशिया, ज़ेचिया, फिजी, ग्वाटेमाला, हंगरी, मार्शल आइलैंड, माइक्रोनेशिया, नाउरू, पापुआ न्यू गिनी, पैराग्वे और टोंगा.
ग़ज़ा में भारी बमबारी के बीच स्कॉटलैंड के फ़र्स्ट मिनिस्टर का परिवार से संपर्क टूटा
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इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में हो रही भारी बमबारी के बीच फंसा स्कॉटलैंड के फ़र्स्ट मिनिस्टर का परिवार.
स्कॉटलैंड के फ़र्स्ट मिनिस्टर और सत्ताधारी स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता हमज़ा यूसुफ का कहना है कि ग़ज़ा में हो रही भारी बमबारी के बीच उनका परिवार फंसा हुआ है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "ग़ज़ा पर भारी बमबारी हो रही है. दूरसंचार काट दिया गया है. इस युद्ध क्षेत्र में करीब तीन हफ्ते से फंसे अपने परिवार से हम नहीं मिल पा रहे हैं. हम सिर्फ प्रार्थना कर सकते हैं कि रात सुरक्षित तरीके से निकाल लें."
37 वर्षीय यूसुफ़ एसएनपी के पहले मुस्लिम नेता हैं.
उनका जन्म ग्लासगो में हुआ. उनके पिता पाकिस्तान और मां केन्या से हैं.
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हमज़ा यूसुफ की पत्नी के माता-पिता, ग़ज़ा में अपने एक बीमार रिश्तेदार से मिलने गए थे, लेकिन इसी बीच इसराइल और ग़जा के बीच युद्ध की शुरुआत हो गई.
चार दिन पहले उन्होंने बताया था कि कैसे उनके रिश्तेदार एक शेल्टर में रहे हैं और उन्हें पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है.
यूसुफ ने रफाह क्रॉसिंग खोलने की मांग की थी, ताकि ग़जा में फंसे विदेशी नागरिक सुरक्षित लौट पाएं.
क्रिकेट विश्व कप: बांग्लादेश के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरा नीदरलैंड, दोनों ओपनर पवेलियन लौटे
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विश्व कप के 28वें मैच में नीदरलैंड ने बांग्लादेश के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया है.
यह मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला जा रहा है. विश्व कप का यह पहला मैच है, जो इस मैदान में खेला जा रहा है.
नीदरलैंड को पहला झटका विक्रमजीत सिंह के रूप में लगा. वे 9 गेंदों पर 3 रन ही बना सकें. इसके बाद शोरफुर इस्लाम ने नीदरलैंड के मैक्स ओडोउड को जीरो रन पर आउट कर दिया.
इस मैच में हारने वाली टीम विश्व कप में सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो जाएगी.
शनिवार, 28 अक्टूबर को विश्व कप के दो मैच खेले जा रहे हैं. पहला मैच हिमाचल के धर्मशाला में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला जा रहा है.
इस मैच में न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लेथम ने टॉस जीतकर ऑस्ट्रेलिया को पहले बल्लेबाजी करने का न्योता दिया. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 388 रन बनाए.
ऑस्ट्रेलिया के ट्रेविस हेड ने 81 रन और डेविड वॉर्नर ने 109 रन बनाए.
बिहार के सारण में मूर्ति विसर्जन के दौरान उपद्रव, दो दिन के लिए इंटरनेट पर रोक
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Author, सीटू तिवारी
पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
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बिहार के सारण जिले के सदर अनुमंडल में शुक्रवार को दो गुटों के बीच झड़प के बाद दो दिन के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.
ये घटना शुक्रवार सुबह पांच बजे की है, जब छपरा शहर के नए बाजार से दुर्गा मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाया जा रहा था.
सारण पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा, "इस दौरान डीजे को तेज आवाज में बजाया गया जिसके विरोध में असामाजिक तत्वों ने जुलूस पर पथराव किया. जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने हालात को नियंत्रण में लेकर मूर्तियों का विसर्जन कराया."
मौके पर मौजूद स्थानीय पत्रकारों ने बीबीसी को बताया, " घटना के वक्त कोई पत्रकार मौजूद नहीं था, लेकिन घटना के बाद जब वे पहुंचे तो जगह-जगह ईंट-पत्थर बिखरे हुए थे, लोगों के घर के शीशे टूटे हुए थे. बाद में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस वहां मौजूद थी,लेकिन उनका संख्याबल काफी कम था, जिसके चलते भीड़ को संभालना मुश्किल था. "
इस घटना के बाद अफवाहों को रोकने के लिए एहतियातन सदर अनुमंडल में दो दिन के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई है.
सारण एसपी गौरव मंगला ने पत्रकारों से कहा, "हालत शांतिपूर्ण है. पुलिस इलाके में कैंप कर रही है. इस संबंध में वीडियोग्राफी के जरिए जो भी असामाजिक तत्व है उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी."
इस घटना मेंं कुछ लोगों के चोटिल होने की खबर है. जानकारी के मुताबिक पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस ने फिलहाल नहीं की है.
ग़ज़ा पर यूएन की वोटिंग से भारत के परहेज पर असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा?
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एआईएमआईएम के चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने यूएन जनरल असेंबली में ग़ज़ा संकट पर लाए गए प्रस्ताव पर भारत के वोटिंग में हिस्सा न लेने की निंदा की है.
प्रस्ताव ग़ज़ा में नागरिकों की सुरक्षा और वहां क़ानूनी और मानवीय क़दमों को जारी रखने के समर्थन में था.
ओवैसी ने मोदी सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, ''ये स्तब्ध करने वाला है कि नरेंद्र मोदी सरकार मानवीय समझौते और नागरिकों की सुरक्षा के लिए लाए गए संयुक्त राष्ट्र के समझौते के प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रही."
"ग़ज़ा में इसराइल अब तक 7028 लोगों को मार चुका है. इनमें से 3000 से ज्यादा बच्चे और 1700 महिलाएं हैं. कम से कम 75 फीसदी ग़ज़ा ध्वस्त कर दिया गया है. 14 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए हैं. शांतिकाल में भी ग़ज़ा के लोगों को भी नाकेबंदी का शिकार बनाया गया.''
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उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा है, ''ये मानवता से जुड़ा मुद्दा है राजनीतिक नहीं, लेकिन प्रस्ताव पर वोटिंग से परहेज कर भारत ग्लोबल साउथ, दक्षिण एशिया और ब्रिक्स में अकेले खड़ा हो गया है. आख़िर नागरिकों की ज़िंदगी से जुड़े मुद्दे पर भारत ने वोटिंग से परहेज क्यों किया. ग़ज़ा के लिए मदद भेजने के बाद वोटिंग से परहेज क्यों? एक दुनिया, एक परिवार और विश्व गुरु का क्या हुआ?''
उन्होंने लिखा है, ''नरेंद्र मोदी ने हमास के हमले की तो निंदा की लेकिन समझौते के लिए यूएन के प्रस्ताव पर सहमत नहीं हो पाए. उन्होंने जॉर्डन के किंग से कुछ दिनों पहले बात की लेकिन जॉर्डन के लाए गए प्रस्ताव से दूर रहे. ये असंगत विदेश नीति है.''
ग़ज़ा में भारी बमबारी के बीच कैसा है माहौल, बता रहे हैं कि ग्राउंड जीरो पर मौजूद बीबीसी संवाददाता
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ग़ज़ा के खान यूनिस में इस वक्त बीबीसी संवाददाता रुश्दी अबु अलूफ़ मौजूद हैं, जो ग्राउंड ज़ीरो से हालात की जानकारी दे रहे हैं.
रुश्दी अबु अलूफ़ का कहना है कि उत्तरी ग़ज़ा में इतने बड़े पैमाने पर बमबारी हो रही है, जो उन्होंने आज से पहले नहीं देखी थी.
वो कहते हैं कि आसमान में आग की लपटें उठती हुई देखी जा सकती हैं और ऐसा लग रहा है कि इसराइल अलग-अलग तरह के बमों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
अस्पतालों के बाहर एबुलेंस चलाने वाले ड्राइवरों ने बीबीसी संवाददाता को बताया कि वे एक दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि दूरसंचार सेवा पूरी तरह से ठप पड़ी है. वे बस उस दिशा में गाड़ी को दौड़ा रहे हैं, जहां विस्फोट की आवाज़ सुनाई दे रही है..
रुश्दी अबु अलूफ़ बताते हैं कि न सिर्फ उत्तरी ग़जा बल्कि ख़ान यूनिस में भी दहशत का माहौल है, जहां उत्तरी ग़ज़ा के मुकाबले कम बमबारी हुई है.
वे कहते हैं कि लोग अपने लोगों को फोन नहीं कर पा रहे हैं और हर तरफ अराजकता का माहौल है.
मुकेश अंबानी को जान से मारने की मिली धमकी, 20 करोड़ की डिमांड
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को जान से मारने की धमकी मिली है.
मुंबई पुलिस के मुताबिक एक अनजान शख्स ने ईमेल के जरिए मुकेश अंबानी को 20 करोड़ रुपये नहीं देने पर जान से मारने की बात कही है.
ईमेल में कहा गया है, "अगर तुम हमें 20 करोड़ रुपये नहीं दोगे तो हम तुम्हें मार देंगे. हमारे पास भारत में सबसे अच्छे शूटर हैं."
यह धमकी 27 अक्टूबर को शादाब ख़ान नाम के एक व्यक्ति ने भेजी थी.
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक मुंबई पुलिस ने गावदेवी थाने में आईपीसी की धारा 387 और 506 (2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है.
यह पहली बार नहीं है जब मुकेश अंबानी को जान से मारने की धमकी दी गई है. पिछले साल मुंबई पुलिस ने मुकेश अंबानी और उनके परिवार को धमकी देने वाले व्यक्ति को बिहार से गिरफ्तार किया था.
व्यक्ति ने मुकेश अंबानी के घर और रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल को उड़ाने की धमकी दी थी.
इससे पहले 2021 में अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी मिली थी.