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मक्का में हरम शरीफ़ के इमाम ने की फलस्तीनियों के लिए प्रार्थना
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सऊदी अरब के सरकारी टीवी चैनल ने मुसलमानों के सबसे पवित्र शहर मक्का के हरम शरीफ़ के इमाम का वीडियो दिखाया है.
इस वीडियो में नमाज़ की अगुवाई कर रहे इमाम को फ़लस्तीनियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते सुना जा सकता है.
आपको बता दें कि इसराइल की सेना ग़ज़ा पर ज़मीनी कार्रवाई करने की तैयारी में है. इसराइल ने वहां के लोगों को अपने घरबार छोड़ कर ग़ज़ा की दक्षिण की ओर कूच करने को कहा है.
सऊदी अरब सरकारी टीवी चैनल अल-इख़बरिया ने ट्वीटर इसका वीडियो शेयर किया है.
इस वीडियो क्लिप में इमाम ने अल-अक़्सा मस्जिद की मुक्ति के लिए भी प्रार्थना की है.
पूर्वी यरूशलम में स्थित अल-अक़्सा मस्जिद मक्का और मदीना के बाद मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है.
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फ़लस्तीन के मुसलमानों के लिए प्रार्थना करते हुए इमाम की आवाज़ टूटती-सी सुनाई दे रही है.
इसके बाद वे कह रहे हैं कि मरने वालों को अल्लाह शहीद का दर्जा दे.
इसराइल और हमास के बीच ताज़े संघर्ष से ठीक पहले सऊदी अरब और इसराइल के बीच संबंध नॉर्मल होने वाले थे.
इस हमले के बाद अधिकारियों संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें शुरू कर दी हैं.
संघर्ष के बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कई क्षेत्रीय ताक़तों से बातचीत की है.
अमेरिका ने इसराइल - हमास संघर्ष पर दी ये नई जानकारी
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन
अमेरिकी विदेश
मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने क़तर के प्रधानमंत्री के साथ हुई साझा प्रेस वार्ता में
कहा है कि वह फ़लस्तीनी नागरिकों के लिए सुरक्षिच स्थान मुहैया कराने की कोशिश
कर रहे हैं.
इस प्रेस वार्ता में
ब्लिंकन की ओर से दी गई जानकारी -
ग़ज़ा में आम लोगों को बचाने के लिए हर संभव सावधानी बरती जाए. ग़ज़ा में रहने वाले कई बेगुनाह परिवार भी इस संघर्ष का
शिकार हुए हैं.
अमेरिका शीर्ष
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से ग़ज़ा में सुरक्षित स्थान तैयार करने के लिए
इसराइल से बात कर रहा है.
ग़ज़ा में मानवीय
मदद पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास काफ़ी जटिल हैं क्योंकि हमास अभी भी आम
बेगुनाह नागरिकों का मानव कवच के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.
अमेरिका और क़तर
ग़ज़ा में रखे गए अग़वा लोगों को छुड़ाने की दिशा में काम कर रहा है
अमेरिका ये
सुनिश्चित करेगा कि इसराइल के पास अपनी रक्षा करने के लिए हर वो चीज हो जिसकी उसे
ज़रूरत है.
प्रत्येक देश को हमास
की ओर से की गई कार्रवाई की निंदा करते हुए उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए.
इसराइल हमास संघर्ष: लगातार होती बमबारी, शहर छोड़ते फ़लस्तीनी...अब तक जो कुछ पता है
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इसराइल और हमास के बीच पिछले शनिवार शुरू हुआ संघर्ष को अब एक हफ़्ता पूरा
होने जा रहा है. बीते शनिवार को हमास की ओर से हमले के बाद इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी
क्षेत्र में भीषण गोलाबारी शुरू की थो जो अभी भी जारी है.
इसराइली सेना ने अब से कुछ घंटे पहले उत्तरी ग़ज़ा में रहने वाले फ़लस्तीनियों को अगले
24 घंटे के अंदर दक्षिणी ग़ज़ा जाने की चेतावनी दी थी.
इसराइल ने ड्रोन विमानों के ज़रिए अपनी चेतावनी वाले पर्चे आसमान से गिराए थे.
इसके बाद शुक्रवार शाम (भारतीय समयानुसार) ऐसी तमाम तस्वीरें आई हैं जिनमें सड़कों
पर फ़लस्तीनी लोग अपना सामान लेकर चलते हुए नज़र आ रहे हैं.
इसराइल ने अपने चेतावनी वाली लाखों
पर्चियां इस इलाक़े में आसमान से गिराई हैं.
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इमेज कैप्शन, लोग अपने साथ ऊंट, खच्चर और अन्य मवेशियों को साथ ले जा रहे हैं.
ग़ज़ा पट्टी की सड़कों पर इस युद्ध से विस्थापित हुए लोगों की भीड़ नज़र आ रही है.
लोग जो भी सामान ले जा सकते हैं उसे साथ लेकर पैदल, छकड़े, गाड़ियों, कारों और बसों से दक्षिण ग़ज़ा की ओर जाते दिख रहे हैं.
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इसराइली सेना ने जिस इलाक़े से फ़लस्तीनी लोगों को हटने की चेतावनी दी थी, वहां लगभग 11 लाख फ़लस्तीनी रहते हैं.
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इमेज कैप्शन, हवाई हमले में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कार में जाता परिवार.
संयुक्त राष्ट्र ने इसराइली सेना की चेतावनी पर कहा था कि इतने कम समय में इतने अधिक लोग एक जगह से दूसरी जगह कैसे जा सकते हैं.
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इमेज कैप्शन, उत्तरी ग़ज़ा में करीब 11 लाख लोग रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इतने कम समय में इतने अधिक लोग कैसे एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं.
इसराइली हवाई हमले में अब तक 1500 से ज़्यादा फ़लस्तीनी लोगों की मौत हो चुकी हैं.
लेबनान-इसराइली सीमा से घुसपैठ की आशंका, इसराइल ने शुरू किया सर्च अभियान
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इमेज कैप्शन, ग़ज़ा सीमा के पास इसराइल के मेरकावा बैटल टैंक को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है.
इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेज ने कहा है कि लेबनान के साथ लगती इसराइल की सीमा पर सुरक्षा बाड़बंदी के पास हुए विस्फोट से क्षति पहुंची है.
हनिता के उत्तरी किबुत्ज़ के पास ये विस्फ़ोट हुआ जिससे बॉर्डर फेंस को नुकसान पहुंचा है.
इसराइली सेना ने कहा है कि इसके जवाब में लेबनान के इलाके की ओर आर्टलरी से फ़ायर किया गया है.
सेना के बयान में कहा है कि उसे आशंका है कि कुछ टेररिस्ट ने इस रास्ते हो सकता है कि इसराइल में घुसपैठ की हो. सेना के जवाबन इस समय पूरे इलाक़े की तलाशी ले रहे हैं.
ऐसी आशंका है कि अगर लेबनान के शिया संगठन हिज़्बुल्लाह ने इस मामले में दखल देने का निर्णय लिया और फ़लस्तीनी सहयोगियों के समर्थन में इसराइल पर हमला बोला तो तीसरा मोर्चा खुल जाएगा.
इस बीच इसराइली सेना के टैंक ग़ज़ा बार्डर पर तैनात हैं और ज़मीनी हमला करने से पहले इसराइली सेना ने उत्तरी ग़ज़ा के लोगों को ग़ज़ा सिटी को 24 घंटे के अंदर खाली करने का अल्टिमेटम दिया है.
इसके बाद उत्तरी ग़ज़ा को छोड़ने वालों का काफ़िला सड़कों पर देखा जा सकता है.
इसराइल के ताबड़तोड़ हमलों के बाद भी हमास कर रहा है पलटवार
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इसराइली सेना की ओर से लगातार
बमबारी के बीच हमास ने शुक्रवार को भी इसराइल पर रॉकेट दागे.
हमास ने कहा है कि उसने इसराइल के सुदूर उत्तर में
स्थित शहर सैफ़ेड पर मिसाइल दागी हैं.
इसराइली सेना के प्रवक्ता डैनियल हैगारी ने एक्स पर
लिखा कि ग़ज़ा से उत्तरी क्षेत्र की ओर लॉन्च की गई मिसाइल इंटरसेप्ट की गई है.
हमास ने तेल अवीव को भी निशाना बनाया और वहां हवाई हमलों
के सायरन सुनाई दिए.
हमास ने ये भी दावा किया कि उसने दक्षिणी इसराइल के अशकेलान,
सेदरात और बीरी में रॉकेट दागे हैं जहां पिछले शनिवार को हमास के हमले में 1300
लोग मारे गए थे.
जबसे इसराइल ने जवाबी कार्रवाई की है, तबसे इस
फ़लस्तीनी चरमपंथी ग्रुप ने इसराइल पर हज़ारों रॉकेट दागे हैं.
ग़ज़ा में लोगों कहा, न छिपने की जगह है और न भागने का रास्ता
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उत्तरी ग़ज़ा को 24 घंटे में खाली करने की इसराइल की चेतावनी के बाद ग़ज़ा निवासी अपने सामान के साथ घर छोड़ कर सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं.
ग़ज़ा सिटी में रहने वाली फ़राह एबो सीडो ने बीबीसी न्यूज़ ऑवर प्रोग्राम में कहा कि उन्हें नहीं पता कि शहर खाली करने की चेतावनी के बाद वो क्या करें.
उन्होंने कहा, "मैं ऐसे लोगों को देख रही हूं जो अपने सामान लेकर जा रहे हैं लेकिन हम कहां जाएं? ये बहुत छोटा-सा शहर है. यहाँ जाने का कोई रास्ता भी नहीं है. हम अपनी ज़िंदगी बचाने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "हर रात को वे हम पर बम गिराते हैं बिना किसी दया के. वहां अब कुछ भी नहीं बचा है."
फ़राह ने कहा, "हमारी रक्षा कोई नहीं कर रहा, न कोई मदद भेज रहा. कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बची है. यहां बड़ी संख्या में बच्चे और गर्भवती महिलाएं हैं और कोई भी मदद नहीं कर रहा."
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हमास खुद को नागरिकों के बीच छिपाता है?
इसराइल लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि हमास अपनी सैन्य कार्रवाई के लिए नागरिकों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करता है.
बीबीसी के डिप्लोमेटिक करेस्पांडेंट पॉल एडम्स के अनुसार, इसराइल का कहना है कि हमास फ़लस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा दांव पर लगाकर घनी आबादी के बीच अपने गोला बारूद और हथियार का जखीरा रखता है.
2021 में ग़ज़ा में चलाए गए अपने अभियान के दौरान इसराइली सेना ने एक वीडियो शेयर किया था जिसमें दिखता है कि घनी आबादी के बीच से रॉकेट फ़ायर किए जा रहे हैं.
इसराइल ने ग़ज़ा में ज़मीन के नीचे सुरंगों के जाल की ओर भी इशारा किया है जिसे 'मेट्रो' कहा जाता है और जिसे हमास के लड़ाके छिपने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
इस बीच इसराइल ने उत्तरी ग़ज़ा को खाली कराने की चेतावनी वाली लाखों पर्चियां आसमान से गिराई हैं.
दिनभर, पूरा दिन पूरी ख़बरः ग़ज़ा में कब घुसेंगे इसराइली सैनिक
ग़ज़ा पर इसराइल के हमले जारी, अब अमेरिका ने हमास पर क्या कहा?
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अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू
और इसराइली रक्षामंत्री से तेल अवीव में मुलाकात की और
इसराइल को 'हर मदद' करने के वादे को दुहराया है.
शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में लॉयड ऑस्टिन ने कहा, “अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि इसराइल को खुद की रक्षा करने के लिए जो भी
ज़रूरत हो उसे मुहैया कराया जाए. इसराइल को अपने नागरिकों की रक्षा का पूरा अधिकार
है. जब हम युद्ध के कानूनों का पालन करते हैं तो हमारे जैसे लोकतंत्र अधिक मजबूत
और सुरक्षित होते हैं.”
उन्होंने कहा, “हमास जैसे टेररिस्ट जानबूझ कर नागरिकों को निशाना
बनाते हैं. लेकिन लोकतांत्रिक सरकारें ऐसा नहीं करती हैं. यह समाधान का समय है न
कि बदले का. एक उद्देश्य है न कि पैनिक होने की बात. सुरक्षा का मसला है, न कि
आत्मसमर्पण का…”
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इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, “हमास इस्लामिक स्टेट है...हमास इस्लामिक स्टेट से भी बुरा है...जिस तरह आईएसआईएस के ख़िलाफ़ पूरी सभ्य दुनिया एकजुट हुई उसी तरह हमास से लड़ने के लिए पुरी दुनिया को एकजुट होना होगा.”
उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अमेरिका हमारे साथ खड़ा है.
प्रेस कांफ्रेंस में नेताओं ने क्या कहा?
लॉयड ऑस्टिन और इसराइली रक्षा
मंत्री योव गैलेंट ने ग़ज़ा के लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए दक्षिणी ग़ज़ा में
जाने की अपील की.
ऑस्टिन ने कहा कि टेररिज़्म को कभी भी सही नहीं ठहराया जा
सकता, “ये निष्पक्षता या झूठी तुलना या अक्षम्य
बहाने के लिए बहाना बनाने का समय नहीं है.”
पेंटागन
इसराइल को अतिरिक्त सैन्य उपकरण देने के लिए तैयार है.
गोला
बारूद, हवाई सुरक्षा के उपकरण और अन्य हथियार पहले ही इसराइल पहुंच रहे हैं.
गैलेंट ने
कहा कि इसराइल नागरिकों को जानबूझ कर कभी नहीं मारेगा और इसीलिए वे गज़ा सिटी से
लोगों को दक्षिण की ओर जाने के लिए कह रहे हैं.
उन्होंने
ईरान, हिज़्बुल्लाह और हमास को "बुराई की धुरी" कहा है.
इसराइली
रक्षामंत्री ने कहा कि हमास सभ्य लोगों के बीच रहने के लायक नहीं है और इसराइल
उन्हें ग़ज़ा और धरती से मिटाने जा रहा है.
24 घंटे में उत्तरी ग़ज़ा को खाली करने की चेतावनी
ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी जारी है जिसमें अभी तक 1500 फ़लस्तीनी लोग मारे जा चुके हैं.
इसराइल ने ग़ज़ा सीमा पर भारी संख्या में रिज़विस्ट सेना को जमा कर रखा है और कभी भी ज़मीनी हमला बोलने के लिए तैयार है.
इसराइल ने ग़ज़ा के उत्तरी हिस्से पर आसमान से लाखों की संख्या में चेतावनी की पर्चियां छोड़ी हैं. उसने उत्तरी ग़ज़ा के 11 लाख लोगों 24 घंटे में दक्षिणी ग़ज़ा में जाने का अल्टिमेटम दिया है.
रोहित शर्मा ने बताया भारत-पाकिस्तान मैच में शुभमन गिल खेलेंगे या नहीं?
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भारतीय क्रिकेट टीम
के कप्तान रोहित शर्मा ने कहा है कि शनिवार को पाकिस्तान के साथ होने वाले मैच में
शुभमन गिल के मौजूद होने की 99% संभावना है.
उल्लेखनीय है कि
पिछले दो मैचों में शुभमन गिल भारतीय टीम के साथ होने वाले मैचों में हिस्सा नहीं ले
पाए थे क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी.
शुभमन गिल भारतीय
टीम के स्टार बल्लेबाज़ हैं और इस मैच से दो दिन पहले ही वो अहमदाबाद पहुंचे हैं.
मौजूदा आईसीसी मेंस वर्ल्ड कप में अभी तक भारत ने दो मैच खेले हैं, एक ऑस्ट्रेलिया और एक अफ़ग़ानिस्तान के साथ. दोनों ही मैचों में भारत ने जीत दर्ज की थी.
अब तीसरा मैच पाकिस्तान के साथ है और शुभमन गिल के खेलने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.
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हिज़्बुल्लाह ने कहा- हमास का साथ देने के लिए 'पूरी तरह तैयार', तीसरा मोर्चा खुलने की आशंका
....में
Author, एना फ़ोस्टर
पदनाम, लेबनान के साथ इसराइल की उत्तरी सीमा से रिपोर्टिंग
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इमेज कैप्शन, हिज़्बुल्लाह नेता सैयद हसन नसरल्लाह से ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर अब्दुल्लाहियां से बेरूत में मुलाक़ात की.
हिज़्बुल्लाह के उप प्रमुख ने
कहा है कि इसराइल के ख़िलाफ़ युद्ध में हमास का साथ देने के लिए वो पूरी तरह तैयार
हैं.
बेरूत के बाहरी इलाके में हुई एक रैली के दौरान
उन्होंने कहा कि ‘जब समय आएगा, वे हस्तक्षेप
करेंगे.’
उधर, इसराइल की उत्तरी सीमा पर तनाव के बीच ईरान के
विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने पड़ोसी देश लेबनान का शुक्रवार को दौरा कर हिज़्बुल्लाह
के नेता हसन नसरल्लाह से मुलाक़ात की है.
उन्होंने कहा कि ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ चल
रहे ‘युद्ध अपराधों को लेकर सामूहिक प्रतिक्रिया दी जा सकती है.’
इस बात की आशंका पहले से थी कि
अगर हिज़्बुल्लाह अपने फ़लस्तीनी सहयोगियों के समर्थन में इसराइल पर हमले में शामिल
होता है तो एक तीसरा मोर्चा खुल सकता है.
ग़ज़ा में हमास की तरह ही हिज़्बुल्लाह
को ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने चरमपंथी संगठन घोषित कर रखा है.
लेबनान की सेना और राजनीति में
हिज़्बुल्लाह का अच्छा ख़ासा असर है और यह ईरान का करीबी भी है.
तस्वीरों में देखें कैसे ग़ज़ा में लोग छोड़ रहे हैं अपना घर
इसराइल की ग़ज़ा के लोगों को दक्षिण में चले जाने की चेतावनी के बाद ऐसी कई
तस्वीरें सामने आ रही हैं जिसमें लोग ग़ज़ा सिटी से अपना सब सामान बांधकर घर छोड़
रहे हैं.
जो सुरक्षित पनाह के लिए जा रहे हैं, उनमें अधिकतर बच्चे हैं. ग़ज़ा की
तक़रीबन आधी आबादी 18 वर्ष से कम है.
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क्रिकेट को 2028 के लॉस एंजेलिस गेम्स में शामिल करने की ओलंपिक कमेटी ने दी हरी झंडी
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इंटरनेशनल ओलम्पिक कमेटी ने 2028 के लॉस एंजेलिस गेम्स में
क्रिकेट के टी-20 फ़ॉर्मेट को शामिल किए जाने की हरी झंडी दे दी है.
शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाश ने मुंबई
में चल रही एक्जीक्युटिव की मीटिंग के दौरान इसकी जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि लॉस एंजेलिस आयोजकों की ओर से ट्वेंटी-20 क्रिकेट के
प्रस्ताव को अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया.
आईओसी के अनुसार, क्रिकेट के इस फॉर्मेट के साथ ही चार अन्य खेलों को
भी शामिल किया गया है जिनमें बेसबॉल-सॉफ़्टबॉल, फ्लैग फ़ुटबाल, स्क्वैश और
लैक्रोसी शामिल हैं.
हालांकि 2028 के खेलों में इनकी जगह पर तभी पक्की मुहर लगेगी, जब सोमवार
को आईओसी सदस्यों के बीच नए खेलों पर वोटिंग होगी, इसके बाद ही इन्हें आधिकारिक
रूप से शामिल किया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि आईओसी के बोर्ड की बैठक 14 से 16 अक्टूबर को मुंबई
में होने जा रही है.
इसराइली दूतावास के कर्मचारी पर बीजिंग में हमला
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इमेज कैप्शन, बीजिंग में इसराइली दूतावास
इसराइली
विदेश मंत्रालाय ने कहा है कि चीन की राजधानी बीजिंग में इसराइली दूतावास के एक
कर्मचारी पर हमला हुआ है.
चीनी सोशल मीडिया
पर साझा किए जा रहे हमले के वीडियो की बीबीसी पुष्टि नहीं करता, लेकिन इसमें दिख
रहा है कि सड़क पर एक हमलावर चाकू से वार कर रहा है.
शुक्रवार को हुआ
ये हमला दूतावास के अंदर नहीं हुआ है और इस हमले के पीछे की मंशा के बारे में जांच
की जा रही है.
विदेश मंत्रालय
के बयान में कहा गया है, “कर्मचारी का इलाज अस्पताल में किया जा रहा है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है.”
चीन में सोशल
मीडिया यूज़र्स ने हाल के दिनों में फ़लस्तीनी लोगों के प्रति अपना समर्थन और
इसराइल के ख़िलाफ़ भावनाएं ज़ाहिर की हैं.
कुछ लोगों ने ताईवान
के साथ संबंध रखने के लिए इसराइल की आलोचना की.
ग़ज़ा में ताज़ा
हिंसा को लेकर चीन ने कहा है कि वो ‘गहरे तौर पर चिंतित’ है और इस लड़ाई की वजह से नागरिकों के हताहत होने पर उसने दुख जताया.
उधर, इसराइल ने चीन के बयान में हमास के हमले की
निंदा न किए जाने पर ‘गहरी निराशा’ जताई.
जुमे की नमाज़ के बाद अरब के कई देशों में ग़ज़ा के लोगों के समर्थन में प्रदर्शन
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इराक़ की राजधानी बग़दाद में हज़ारों इराक़ी
ग़ज़ा के फ़लस्तीनियों के समर्थन में इकट्ठा हो रहे हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शुक्रवार
को जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह से मुलाकात की, जबकि दूसरी ओर यहां जुमे की नमाज़ के
बाद ग़ज़ा के लोगों के समर्थन में एक बड़ी रैली आयोजित हुई.
यरूशलम में मौजूद बीबीसी मध्य पूर्व संवाददाता योलांदे
नेल के अनुसार, पश्चिमी तट की सीमा के पास जॉर्डन में भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों
और सुरक्षा बलों के बीच भिड़ंत हुई.
किंग हुसैन क्रॉसिंग पर इसराइल का नियंत्रण है और
फ़लस्तीन की ओर इस प्रवेश द्वार को बंद रखा गया था.
बग़दाद में हज़ारों लोग इकठ्ठा हुए
समचार एजेंसी एएफ़पी ने बग़दाद में आयोजकों में से एक अबू कायान के हवाले से कहा, “कब्ज़ा किए गए फ़लस्तीन में जो कुछ हो रहा है उसकी निंदा करने के लिए यहां एक रैली हो रही है.”
ये उन कई रैलियों में से एक है जिन्हें आज शुक्रवार की नमाज़ के बाद पूरे पश्चिम एशिया के देशों में आयोजित किया गया है.
हमास और हिज़्बुल्लाह के वरिष्ठ नेताओं के आह्वान पर ये प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं.
हमास के पूर्व नेता खालेद मेशाल ने कल अरब और इस्लामी जगत के लोगों से अपील की थी कि वे रैली के लिए चौक चौराहों पर जाए.
इस तरह के प्रदर्शन लेबनान, ट्यूनीशिया और जॉर्डन में आयोजित किए जा रहे हैं.
कब्ज़े वाले पूर्वी यरूशलम में अल-अक़्सा मस्जिद में अशांति की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
उत्तरी ग़ज़ा को ख़ाली कराने को लेकर इसराइली सेना का अब आया नया बयान
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इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ के प्रवक्ता डैनियल हैगारी ने कहा है कि इसराइल की सेना को पता है कि 11 लाख़ लोगों
को उत्तरी ग़ज़ा से बाहर निकालने में वक़्त लगेगा.
इसराइल की समयसीमा को
लेकर बीबीसी के द्वारा पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “यह युद्ध क्षेत्र है, हम उन्हें मौक़ा देने की कोशिश कर रहे हैं और हम बहुत
सारी अन्य कोशिशें कर रहे हैं और हम समझते हैं कि इसमें 24 घंटे का ही समय नहीं
लगेगा.”
उन्होंने कहा कि हमास
लोगों से इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करने को कह रहा है, “हम समस्या समझते हैं. दुखद सच्चाई है. ये हमास की ज़िम्मेदारी है.”
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इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि गंभीर रूप से बीमार लोगों को ग़ज़ा में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नामुमकिन है.
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ग़ज़ा में स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि उत्तरी ग़ज़ा से गंभीर मरीज़ों को ट्रांसफ़र करना नामुमकिन है.
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जासारेविक ने कहा, “बहुत सारे बीमार लोग हैं जो लाइफ़ सपोर्ट पर हैं और उन्हें मेकैनिकल वेंटिलेटर का ही सहारा है. उन्हें हटाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को आदेश देना क्रूरता से परे की चीज़ है.”
11 लाख लोगों का 24 घंटों में उत्तरी ग़ज़ा से दक्षिणी ग़ज़ा पहुंचना क्यों नामुमकिन है?
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इसराइल ने उत्तरी ग़ज़ा के लोगों को 24 घंटों के अंदर दक्षिणी ग़ज़ा जाने को कहा है.
11 लाख लोगों के दक्षिणी ग़ज़ा की ओर जाने का मतलब ये है कि हर घंटे यहां से 40 हज़ार लोगों को निकलना पडे़गा.
ये असंभव है.
यूएन के मुताबिक़, इसराइल के आदेश में जिन लोगों को जाने को कहा गया है उनमें उन स्कूलों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं, जिन्हें यूएन शेल्टर होम के लिए इस्तेमाल कर रहा है.
यूएन कई हेल्थ सेंटर भी चला रहा है. यहां के लोगों को भी जाने को कहा गया है.
बीबीसी के मध्य-पूर्व संवाददाता टॉम बेटमैन ने यरुशलम से लिखा है कि ऐसा करना संभव नहीं दिखता. इसीलिए यूएन ने इसराइल से ये आदेश वापस लेने की अपील की है.
यूएन का कहना कि इससे ये त्रासदी और भयावह रूप ले लेगी.
इस समय ज़मीन पर इंटरनेशनल रेड क्रॉस इंटरनेशनल काफिला आगे बढ़ता दिख रहा है.
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संयुक्त राष्ट्रीय मानवीय सहायता एजेंसी के कर्मचारी भी दक्षिणी गज़ा की ओर जाते दिख रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि वो उत्तरी ग़ज़ा खाली करके जाने वाले हैं.
लेकिन 24 घंटों के अंदर लोगों को उत्तरी ग़ज़ा से दक्षिणी ग़ज़ा तक पहुंचने का आदेश भारी अराजकता पैदा कर सकता है क्योंकि इस घने इलाके में बड़ी तादाद में बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों की यात्रा काफी दिक्कत पैदा कर सकती है.
अस्पताल में जो लोग भर्ती हैं या जो लोग इसराइल की बमबारी में घायल हुए हैं और अपना इलाज करा रहे हैं, उनके लिए ये भारी मुसीबत भरा काम होगा.
न्यूज़क्लिक मामलाः हाईकोर्ट ने ख़ारिज की यूएपीए के तहत गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली याचिका
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दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को न्यूज़क्लिक के फाउंडर और
एडिटर इन चीफ़ प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर मैनेजर
अमित चक्रवर्ती की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें गिरफ़्तारी को चुनौती दी गई
थी.
आतंक रोधी क़ानून यूएपीए
के तहत गिरफ़्तार इन दोनों लोगों को एक ट्रायल कोर्ट ने सात दिन के लिए पुलिस
हिरासत में भेज दिया था.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र के. मोहंती के मुताबिक, जस्टिस तुशार राव गेडेला
ने 9 अक्टूबर को अपने आदेश सुरक्षित रख लिया था. शुक्रवार को उन्होंने अपना फैसला सुनाते
हुए याचिका को रद्द कर दिया.
अभियुक्त पुरकायस्थ और
चक्रवर्ती ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा लगाए गए यूएपीए की धारा के तहत
गिरफ़्तारी और पुलिस हिरासत को चुनौती दी थी.
इस सुनवाई के दौरान
पुरकायस्थ ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप झूठे और फ़र्ज़ी हैं और चीन से एक रुपया
भी नहीं आया.
पुरकायस्थ की ओर से पेश
हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि न्यूज़ क्लिक को चीन से एक रुपया भी
प्राप्त नहीं हुआ है.
पुरकायस्थ पर आरोप लगाया
गया है कि चीनी समर्थक प्रोपेगैंडा के तहत उन्हें पैसे मिले थे.
ईडी की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता
तुषार मेहता ने कहा कि जो जांच चल रही है वो बहुत ही गंभीर अपराध के बारे में है.
मेहता ने कहा कि “लगभग 75 करोड़ रुपये एक
ऐसे व्यक्ति की ओर से आए जो चीन में रह रहा है और इसका मक़सद देश की अखंडता और
स्थिरता से समझौता करना था.”
हमास का दावा- ग़ज़ा में हवाई हमले में 13 बंधक मारे गए
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हमास की सशस्त्र शाखा ने कहा है कि बीते 24 घंटों के दौरान ग़ज़ा पट्टी में
इसराइली हवाई हमले में कम से कम 13 इसराइली और विदेशी बंधक मारे गए हैं.
इज़ेदीन अल-क़ासम ब्रिगेड ने बयान में
कहा है कि इसराइली लड़ाकू विमानों ने पांच जगहों को निशाना बनाया है जिनमें ‘13 क़ैदी’ मारे गए हैं और इनमें विदेशी भी हैं.
7 अक्तूबर को
अचानक किए गए हमले में हमास ने 150 लोगों को क़ैद किया हुआ है.
उन्होंने
चेतावनी दी है कि इसराइल अगर आम लोगों के घरों को निशाना बनाता है तो वो बंधकों की
हत्या कर देगा.
इसराइल के आदेश के बाद हमास ने ग़ज़ा के लोगों से की अपील
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इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में इसराइली हमले में ध्वस्त मकान
हमास ने कहा है कि उत्तरी ग़ज़ा को खाली करने की चेतावनियों पर ध्यान न दें.
हमास के अधिकारी ने कहा है कि लोगों को उत्तरी से दक्षिणी ग़ज़ा जाने का इसराइली आदेश एक 'फ़र्ज़ी प्रोपेगेंडा' है.
उन्होंने उत्तरी ग़ज़ा में रहने वाले लोगों को इसे नज़रअंदाज़ करने को कहा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमास पर लंबे समय से आम नागरिकों को अपनी ढाल बनाने का आरोप लगाता रहा है. उसका कहना है इसके लड़ाके इसराइली सुरक्षा बलों से संघर्ष के दौरान बेकसूर लोगों की आड़ लेते हुए आए हैं.
2006 में चुनाव जीतने के बाद हमास ने ग़ज़ा पट्टी की सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. इसके बाद इसने फतह मूवमेंट के प्रमुख और राष्ट्रपति महमूद अब्बास को बेदखल कर दिया था.
अमेरिका ने शुरू किया अपने लोगों को निकालना
हमास और इसराइल के बीच संघर्ष तेज होने के बाद पांचवें दिन अमेरिका ने इसराइल से अपने लोगों को निकालने का काम शुरू कर दिया है.
अमेरिका अपने नागरिकों को निकालने में विमानों का इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन किर्बी ने कहा है कि वो विमानों के अलावा समुद्री और ज़मीनी रास्ते के ज़रिये भी लोगों को निकाल सकता है.
अमेरिका के साथ ही अर्जेंटीना, फ्रांस, भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी अपने नागरिकों को वहां से निकालना शुरू कर दिया है.