दो बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने पर बोले इमरान 'सहयोगियों को ज़बरदस्ती अलग किया जा रहा है'

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पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के चेयरमेन और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपनी पार्टी के नेताओं के इस्तीफ़े पर कहा है कि उन्हें 'जबरन अलग' कराया है.
उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, "आपने जबरन विवाह के बारे में सुना होगा, लेकिन तहरीक-ए-इंसाफ़ में एक नया करिश्मा लाया गया है, 'जबरन अलग कराने का'.
उन्होंने कहा, 'मैं हैरान हूं कि इस देश के मानवाधिकार संगठन कहां गायब हो गए हैं.''
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ख़ान की पार्टी के दो प्रमुख नेताओं फ़ैयाज़ चौहान और शिरीन मज़ारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने का एलान किया.
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के पूर्व प्रांतीय मंत्री फ़ैयाज़ चौहान ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं इमरान खान का मीडिया सलाहकार था."
उन्होंने कहा कि नौ मई को सेना के ठिकानों पर जो हिंसा हुई, उसमें तहरीक-ए-इंसाफ का हाथ था. उनके मुताबिक इमरान ख़ान से पार्टी के किसी नेता ने किसी मीटिंग में नहीं कहा कि राजनीति शांति के साथ होनी चाहिए और इसमें हिंसा नहीं होनी चाहिए.

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चौहान ने दावा किया कि फ़वाद चौधरी, शाहबाज गुल, आलिया हमजा, मुराद सईद, शिरीन मजारी जैसे लोगों ने इसके उलट सलाह दी.
पाकिस्तानी फ़ौज के ठिकानों पर हुए हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की 24 करोड़ आवाम की तरह उस दिन मैं भी दुखी था. फ़ौज़ के साथ मोहब्बत मेरे खानदान के ख़ून के अंदर रची बसी है."
उन्होंने कहा, " मेरे घर से चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया लेकिन इमरान खान को शिरीन मजारी की याद आई, सीनेटर नाज फलक की याद आई लेकिन फ़ैयाज़ चौहान की याद नहीं आई."

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उनसे पहले पाकिस्तान की शिरीन मज़ारी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वो नौ और 10 मई को हुई हिंसा की निंदा करती हैं.
उन्होंने कहा कि सेना के हेड क्वॉर्टर और सुप्रीम कोर्ट पर हमले निंदनीय हैं. इसके साथ ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूर होने का एलान किया.
उन्होंने कहा, "मेरे बच्चे, मेरी मां और मेरा स्वास्थ्य मेरी प्राथमिकता हैं."

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वहीं पंजाब पुलिस ने पार्टी के वाइस चेयरमेन शाह महमूद कुरैशी को अडियाला जेल से रिहा होने के बाद फिर से गिरफ़्तार कर लिया.
स्थानीय पुलिस ने कहा है कि उनकी रिहाई से शांति को ख़तरा था. उन्हें रावलपिंडी की अडियाला जेल के बाहर से गिरफ़्तार किया गया.
मंगलवार सुबह इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने कुरैशी को रिहा करने का आदेश दिया था और उन्हें एक एफ़िडेविट में ये लिखकर जमा करने के लिए कहा था कि वो किसी भी ऐसी गतिविधि का हिस्सा नहीं बनेंगे.






























