तुर्की: राहत और बचाव कार्य तेज़, अब भी आ रही हैं मलबे से दबे लोगों की आवाज़ें

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तुर्की और सीरिया में सोमवार तड़के आए भूकंप के कई ज़ोरदार झटकों से दोनों देशों में अब तक 5,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. मरने वालों की कुल संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है कि उन्हें दुनिया के 70 से अधिक देशों से राहत और बचाव अभियान में मदद करने की पेशकश मिल चुकी है. अर्दोआन ने मदद भेजने या पेशकश करने वाले देशों का शुक्रिया अदा किया है.
इसके साथ ही उन्होंने देश के दक्षिण के 10 सूबों में तीन महीने के लिए आपातकाल लगा दिया है.
भारत ने भी स्वास्थ्यकर्मियों और उपकरणों के साथ 30 बेड वाला फ़ील्ड हॉस्पिटल तुर्की रवाना किया है. भारतीय सेना और एनडीआरएफ़ की टीमों को लेकर भारतीय वायुसेना के चार सी-17 ग्लोबमास्टर मालवाहक विमान तुर्की रवाना हो गए हैं.
उधर पूरी दुनिया में फैले तुर्की के कई नागरिक अपने परिजनों की खोज ख़बर लेने अपने देश पहुंच रहे हैं. विदेश में रह रहे ऐसे लोग राहत और बचाव कार्य में शामिल होने की योजना बना रहे हैं. ये लोग पैसे से भी प्रभावित लोगों की मदद करने को तैयार हैं.

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तुर्की में राहत और बचाव अभियान में कड़ाके की सर्दी और बर्फ़बारी से काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके बावजूद राहतकर्मी मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम जारी रखे हुए हैं.
हालांकि जैसे जैसे वक़्त गुज़र रहा है, वैसे वैसे लोगों में मलबे में फंसे अपने परिजनों के ज़िंदा बचने को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.
तुर्की में तैनात एक रिपोर्टर ने बताया है कि उन्हें मलबे में फंसे लोगों की आवाज़ें सुनाई दे रही है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि भूकंप से लाखों लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है. उसके अनुसार, इस आपदा से तुर्की और सीरिया के क़रीब 2.3 करोड़ लोगों के किसी न किसी तरह से प्रभावित होने की आशंका है.
बीबीसी तुर्की की रिपोर्टर सेलिन गिरीट ने बताया है कि 1939 के बाद से आए सबसे ख़तरनाक भूकंप से अकेले तुर्की में 1.3 करोड़ लोगों के प्रभावित होने की आशंका है.






















