राजस्थान के भरतपुर ज़िले के कुम्हेर में रविवार को हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन में नव विवाहितों को शपथ दिलवाई गई. जिसको लेकर विवाद हो रहा है.
इस विवाह सम्मेलन को धर्मांतरण से जोड़ कर देखा जा रहा है.
संत रविदास सेवा विकास समिति की ओर से हुए इस विवाह सम्मेलन में 11 नवविवाहित जोड़ों को शपथ दिलाई गई, "मैं कभी ब्रह्मा, विष्णु, महेश को ईश्वर नहीं मानूंगा तथा मैं कभी इनकी पूजा नहीं करूंगा."
आगे शपथ दिलवाई गई, "मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, तथा कभी इनकी पूजा नहीं करूंगा. मैं गौरी गणपति आदि हिंदू धर्म में देवी देवता को नहीं मानूंगा. मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार हैं. मैं ऐसे प्रचार को पागलपन और झूठा समझता हूं. मैं कभी पिंडदान नहीं करूंगा. मैं कोई क्रियाकलाप ब्राह्मणों के हाथ नहीं कराऊंगा."
"मैं बौद्ध धर्म के विरोध में कभी कोई बात नहीं कहूंगा."
शपथ के दौरान के वीडियो भी सामने आए हैं. वीडियो में साफ नज़र आ रहा है कि एक शख़्स मंच पर मौजूद नव विवाहितों को शपथ दिलवा दे हैं.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने मीडिया से बातचीत में इस मामले को हिंदू देवी देवताओं का अपमान बताया है.
डॉ पूनिया ने कहा, "राजस्थान में इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन अब इस तरह की घटनाओं में एक साथ बढ़ोतरी हुई है. ईसाई और इस्लाम आमतौर पर इस्टैबलिश्ड हैं, जिनकी घटनाएं आती हैं. लेकिन, धरातल के स्तर पर विग्रह पैदा करना, देवी देवताओं का अपमान करना यह बड़े पैमाने पर हुआ है."
उन्होंने कहा, "यह तभी होता है जब धर्म और आस्था के खिलाफ़ हैं, उनको यह अवसर तब मिलता है जब उन पर सख़्ती नहीं होती है. यह चिंताजनक है क्योंकि इस तरह की घटनाओं से समाज में निराशा आती है, मनोबल गिरता है और विग्रह भी पैदा होता है."
सामूहिक विवाह सम्मेलन करवाने वाली संस्था 'संत रविदास सेवा विकास समिति' के संरक्षक अरविंद वर्मा ने बीबीसी से कहा, "यह पांचवां विवाह सम्मेलन था. इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है. शंकर लाल ने मंच से शपथ दिलवाई है. शंकर लाल समिति के वालंटियर हैं, उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया हुआ है."
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने इसे हिंदू देवी देवताओं का अपमान बताया है, इस पर अरविंद वर्मा ने कहा, "बाबा साहब आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं हैं, उनको बुलवाया गया है. उन प्रतिज्ञाओं को बुलवाना गुनाह नहीं है."
उन्होंने कहा, "बीजेपी बाबा साहेब को अपनाना तो चाहती है लेकिन क्या बीजेपी ने बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञाएं नहीं पढ़ी हैं. बीजेपी ज़बरदस्ती का मुद्दा बना रही है."
बीते महीने दिल्ली में बौद्ध महासभा के कार्यक्रम में भी इस तरह की शपथ दिलवाई गई थी. जिसमें दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद रहे थे, जिसके बाद उन्हें मंत्रीपद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.