झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द होने की अटकलों के बीच राज्य में सियासी हलचल तेज़ हो गई है.
मुख्यमंत्री आवास में 36 घंटे के अंदर यूपीए विधायकों की तीन बैठकों के बाद अब सभी विधायक बसों से किसी अज्ञात जगह के लिए रवाना हो गए हैं. एक बस में काली शर्ट पहने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी देखे गए हैं. उनके साथ चेहरों पर मुस्कान लिए कई विधायक भी हैं.
राज्य में तेज हुई इस सियासी हलचल की एकमात्र वजह वह कथित पत्र है, जो चुनाव आयोग ने राज्यपाल रमेश बैस को भेजा है.
स्थानीय मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक़ चुनाव आयोग ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफ़ारिश की है. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है कि वे कब और क्या निर्णय लेते हैं.
हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री व खनन मंत्री रहते हुए रांची ज़िले की अनगड़ा स्थित पत्थर की एक खान का आवंटन अपने नाम करा लिया. बीजेपी ने इसकी शिकायत राज्यपाल से की थी, जिसे राज्यपाल ने चुनाव आयोग को भेजकर उनका मंतव्य मांगा था.
यह प्रकरण पिछले फ़रवरी महीने से चल रहा है. इस मामले में लोक जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9-ए के तहत सुनवाई की जा रही थी. यह सुनवाई इसी महीने पूरी की गई है.
हालांकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उस माइंस से कोई खनन नहीं कराया और वे अपनी लीज भी सरकार को सरेंडर कर चुके हैं.
उन्होंने साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के शपथ पत्र में भी इस माइंस का ब्योरा दिया था. उन्होंने इस माइंस के लिए जब आवेदन किया था, तब वे सियासत में नहीं थे.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कल नेतरहाट के महुआडांड़ इलाक़े में एक सरकारी समारोह को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि उनकी सरकार को गिराने की साज़िश पिछले 4-5 महीने से रची जा रही है और राज्यपाल भी इसमें शामिल हैं.
हेमंत सोरेन ने कहा कि, "चार, पांच महीने से मुझे सत्ता से बेदख़ल करने के लिए, मेरा गला रेतने के लिए ‘आरी’ (एक यंत्र जिससे लकड़ी काटी जाती है) बनाई जा रही है लेकिन वह आरी उन लोगों से बन नहीं पा रही है. जो जिससे आगे बढ़ता है, वही टूट जाता है. क्योंकि उनको पता है कि झारखंड की मिट्टी के इस नौजवान को इतनी आसानी से नहीं गिराया जा सकता है."
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, "हम काम करने के लिए निकले हैं, तो वे शैतान लोग भी बिल से बाहर निकल कर रोड़ा डालने का काम कर रहे हैं. चिंता मत करो ये आदिवासी का बच्चा है. उनलोगों की चाल से न तो हमारा रास्ता रुका है और न हम लोग कभी डरे हैं. डर-भय तो हम आदिवासियों के बीच में कभी रहा ही नहीं. हमारे पूर्वजों ने इतना आंदोलन किया है कि हम लोगों में डर नाम की चीज ही नहीं है. हमारे डीएनए से इस डर को हमारे पूर्वजों ने पहले ही भगा दिया है."
इधर, बीजेपी के नेता गिरिडीह जिले के मधुबन में एक प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रहे हैं. वहीं पर अगली रणनीति तय किए जाने की संभावना है. वहां जाने से पहले बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा था कि उनकी पार्टी सरकार गिराने की कोशिशें नहीं कर रही है.