जामनगर के होटल एलेंटो में लगी भीषण आग, कई लोग फंसे
हादसे में हताहत लोगों की संख्या के बारे में सूचना का अभी इंतज़ार है. शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी है.
लाइव कवरेज
अभिनव गोयल and चंदन शर्मा
जामनगर के होटल एलेंटो में लगी भीषण आग, कई लोग फंसे

जामनगर के एक होटल में भीषण आग लगने की ख़बर है.
बीबीसी के दर्शन ठक्कर के अनुसार, शहर के मोतीखावड़ी इलाके में स्थित होटल एलेंटो में लगी इस आग में कई लोग फंसे हुए हैं.
इस हादसे में हताहत लोगों की संख्या के बारे में सूचना का अभी इंतज़ार किया जा रहा है.
छोड़िए X पोस्टX सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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आग का जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें आग का विकराल रूप देखा जा रहा है. ऐसा भी लग रहा है कि आग दूर-दूर तक फैल गई है.
शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी है. दमकल विभाग की कई टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है.
‘मुफ़्त की सुविधा’ पर केजरीवाल के आरोपों को निर्मला सीतारमण ने बताया विकृत करने वाला बयान

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जनता को मुफ़्त में मिलने वाली सुविधाएं बंद करने को लेकर जारी बहस में अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कूद पड़ी हैं.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए निर्मला सीतरामण ने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि जनता को डराने के लिए वे इस मुद्दे को विकृत रूप दे रहे हैं.
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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दी जा रही मदद को ‘मुफ़्त की रेवड़ी’ बताकर वे इस बहस को विकृत मोड़ दे रहे हैं.’’
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केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हम इस मसले पर बहस चाहते हैं. एक कल्याणकारी देश होने के नाते किसी भी सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं को नहीं नकारा है. यह सरकार की प्राथमिकता है.’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘किसान या लघु और मध्यम उद्योगों को एक सीमा तक फ्री बिजली देने में भी हमें कोई एतराज नहीं है. लेकिन इसका उस राज्य के बजट में प्रावधान होना चाहिए और राज्य के पास इसके लिए पर्याप्त राजस्व भी होना जरूरी है.’’
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बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया का केजरीवाल पर आरोप
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अपनी पार्टी के मुख्यालय में आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेन्स में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर गुरुवार के बयान में तीन झूठ बोलने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के बजट में 25 फीसदी की कटौती कर दी, जो कि सरासर झूठ है.
गौरव भाटिया ने कहा, ‘‘2021-22 में मनरेगा का जो बजट था वो 73 हजार करोड़ था. महामारी के कारण इस बजट को 25 हजार करोड़ रुपये बढ़ाकर 98 हजार करोड़ कर दिया गया जिस तरह से मनरेगा को प्रभावी बनाकर न केवल उसका बजट बढ़ाया, बल्कि ये भी तय किया गया कि एक-एक रुपया लोगों के खाते में सीधा पहुंचे और भ्रष्टाचार ना हो.’’
उनके अनुसार, इस बार भी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में मनरेगा के लिए धन की कमी न होने का भरोसा दिया है.’’
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केजरीवाल के दिल्ली माॅडल के फेल हो जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि केजरीवाल दूसरा झूठ ये बोल रहे हैं कि राज्यों को होने वाले धन के आवंटन में कटौती की गई है.
भाटिया ने कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल जी ने एक और अनर्गल आरोप लगाते हुए कह दिया कि केंद्र सरकार टैक्स एकत्रित कर राज्यों को इसका 42 प्रतिशत देती थी, जिसे पिछले कुछ वर्षों से 13 प्रतिशत की कटौती करके 29 प्रतिशत कर दिया गया है.’’
उन्होंने दावा किया कि अब भी राज्यों को 42 फीसदी ही राजस्व बांटा जा रहा है लेकिन कुल आवंटन में कमी इसलिए दिख रही है कि जम्मू और कश्मीर के साथ लद्दाख के पूर्ण राज्य के बजाय केंद्रशासित राज्य बन जाने के चलते उनके हिस्से का धन अब केंद्र सरकार के खाते में दिखाया जा रहा है.
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भाटिया ने दावा किया है कि केजरीवाल ने तीसरा झूठ आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर बोला है. उनके अनुसार, वेतन आयोग के गठन और उसके सिफारिशें लागू होने में होने वाली देरी को देखते हुए केंद्र सरकार कर्मचारियों के वेतन में स्वतः वृद्धि का एक माडल तैयार कर रही है.
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नीतीश भले कहें कि उपराष्ट्रपति वाली बात झूठ है पर ये 100 फ़ीसदी सच है: सुशील मोदी

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बिहार के बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इनकार के बाद फिर से अपना वह दावा दोहराया है कि नीतीश कुमार देश के उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सुशील कुमार मोदी ने दावा किया है कि नीतीश कुमार के दो करीबी सहयोगियों ने उन्हें उपराष्ट्रपति बनाने का रास्ता खोजने के लिए बिहार बीजेपी के सीनियर नेताओं से दो बार बात की थी.
सुशील मोदी ने गुरुवार को कहा, ‘‘अब वह नीतीश कुमार कह रहे हैं कि ये झूठ है, लेकिन उनके दो करीबी सहयोगियों ने उन्हें उपराष्ट्रपति बनाए जाने का रास्ता खोजने के लिए बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से दो बार बात की थी.’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘ये बात 100 फ़ीसदी सच है. और इस पर हमने कहा था कि ऐसा हो पाना संभव नहीं है.’’
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इससे पहले बुधवार को भी सुशील मोदी ने दावा किया था, ‘‘नीतीश कुमार का बीजेपी से अलग होने का फैसला उपराष्ट्रपति बनने की उनकी चाहत से जुड़ा हो सकता है.
हालांकि सुशील मोदी के पहले वाले दावे को सीएम नीतीश कुमार ‘बोगस’ करार दे चुके हैं. नीतीश कुमार ने कहा था, ‘‘जिसे जो मन में आता है, वो कहता रहे, कौन.कौन लोग बोलता है, एक आदमी को देखे नहीं कि क्या बोल दिए मेरे बारे में कि हम उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे, क्या मजाक है...’’
यूक्रेन हमले के बाद रूस से तेल और कोयले के आयात में बढ़ा एशियाई मुद्रा का चलन

रूस से कोयले के आयात के बदले भुगतान करने के लिए भारतीय कंपनियां अब एशियाई मुद्राओं का जमकर उपयोग कर रही हैं.
कस्टम विभाग के दस्तावेज़ों और कंपनी जगत के सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंध को तोड़ने के ख़तरों से बचने के लिए भारतीय कंपनियां डाॅलर के इस्तेमाल से बच रही हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पहले की एक ख़बर में बताया था कि भारत के एक बड़े सौदे में चीन की मुद्रा युआन का इस्तेमाल हुआ था. और अब कस्टम विभाग के दस्तावेज़ बता रहे हैं कि डॉलर के बजाय एशिया की मुद्राओं का इस्तेमाल अब आम चलन हो गया है.
फरवरी में यूक्रेन पर हुए हमले के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल और कोयले की ख़रीद में आक्रामक वृद्धि कर दी.
इससे रूस पर लगे पश्चिमी देशों के प्रतिबंध से पैदा हुए दबाव से निपटने में उसे मदद मिली. वहीं भारत को दूसरों देशों के मुकाबले रूस से सस्ती दरों पर कच्चे माल के आयात का विकल्प मिल गया.
रूस जुलाई में भारत को कोयले की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया. जून की तुलना में जुलाई में रूस से कोयले का निर्यात 20 फ़ीसदी से भी ज़्यादा बढ़कर 20.6 लाख टन हो गया.
11 अगस्त 2022 का दिनभर- पूरा दिन पूरी ख़बर, सुनिए मानसी दाश और मोहम्मद शाहिद के साथ
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फ्रांस में बोर्डो के पास के जंगल में लगी भयानक आग, हज़ारों लोग घर छोड़कर भागे

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दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में बोर्डो शहर के पास लगी भयानक आग से अब तक लगभग 70 वर्ग किलोमीटर (7,000 हेक्टेयर) में फैला जंगल बर्बाद हो गया है.
अधिकारियों के अनुसार इस आग को बुझाने के लिए 1,000 से भी ज़्यादा अग्निशमन कर्मचारी जूझ रहे हैं.
इस आग ने कई घरों को तबाह कर दिया है और लगभग 10 हज़ार लोगों को वहां से पलायन करने को मजबूर कर दिया है.
अग्निशमन कर्मचारियों के प्रतिनिधि ग्रेगरी एलियोन ने फ्रांस के आरटीएल रेडियो से कहा कि 'ये आग दानव है.'
बताया जा रहा है कि तेज़ हवाओं और बढ़े तापमान से आग बुझाने के काम में बाधा आ रही है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एलान किया है कि आग बुझाने के काम में ऑस्ट्रिया, जर्मनी, ग्रीस, पोलैंड और रोमानिया मदद करने वाले हैं. सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर उन्होंने इस अभियान में यूरोप की एकजुटता का दावा किया है.
यूरोप में इस साल भयानक गर्मी पड़ रही है. पुर्तगाल और स्पेन में गर्मी के चलते 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
फ्रांस सहित यूरोप के कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान और सूखे के चलते कई जगहों पर जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी है.
खून से ख़त लिखकर पिता को सज़ा दिलाने वाली लड़की
वीडियो कैप्शन, खून से ख़त लिखकर पिता को सज़ा दिलाने वाली लड़की 6 साल पहले एक किशोरी ने अपने ख़ून से ख़त लिखकर अपनी मां के लिए इंसाफ़ की मांग की थी.
उनकी मां को उनकी आंखों के सामने ज़िंदा जलाकर मार दिया गया था लेकिन छह साल पहले लिखे गए इस ख़त से शुरू हुई जांच के बाद अब हत्यारे को सज़ा सुनाई गई है.
जानिए अपनी मां के लिए इंसाफ़ मांगने वाली लतिका बंसल की कहानी.
मुफ़्त में मिलने वाली सुविधाएं बंद करने की बात कहीं ख़राब आर्थिक हालत के संकेत तो नहींः केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता को मुफ़्त में मिलने वाली सुविधाएं बंद करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि कहीं केंद्र सरकार की आर्थिक हालत ज़्यादा ख़राब तो नहीं हो गई है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने कहा है, "पिछले कई दिनों से जनता को मुफ्त में मिलने वाली सुविधाओं का विरोध हो रहा है और कहा जा रहा है कि मुफ्त में मिलने वाली सारी सुविधाएं बंद कर देनी चाहिए."
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केजरीवाल के अनुसार, "केंद्र सरकार कह रही है कि जनता को जितनी भी मुफ़्त की सुविधाएं मिलती है, उसे बंद कर देनी चाहिए. साथ ही, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में फीस ली जानी चाहिए."
उन्होंने आगे कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि हर रोज डीज़ल-पेट्रोल से कर के रूप में 1,000 करोड़ रुपए की आमदनी होती है, लेकिन ये सारा पैसा कहां गया?
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार कोई सरकार कह रही है कि सैनिकों के पेंशन का ख़र्च इतना बढ़ गया है कि केंद्र सरकार उसे बरदाश्त नहीं कर पा रही है. उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना लाॅन्च करते समय केंद्र सरकार ने यही बात कही थी.
बारिश के मौसम में ऐसे बढ़ाएं इम्यूनिटी
वीडियो कैप्शन, बारिश के मौसम में ऐसे बढ़ाएं इम्यूनिटी बारिश के मौसम में इम्यूनिटी थोड़ी कम हो जाती है.
फ्लू और खांसी-जुकाम होना जैसे आम हो जाता है.
ऐसे में इम्यूनिटी को कैसे बेहतर बनाएं, बता रही हैं डायटीशियन मेहवश ख़ान.
पश्चिम बंगालः कोयला घोटाले में पूछताछ के लिए ईडी ने भेजा 8 आईपीएस अधिकारियों को समन

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पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने 8 आईपीएस अधिकारियों को पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया है.
इन अधिकारियों से 21 से 31 अगस्त के बीच पूछताछ होने का अनुमान है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ज्ञानवंत सिंह, कोटेश्वर राव, एस सेल्वामुरुगन, श्याम सिंह, राजीव मिश्रा, सुकेश कुमार जैन और तथागत बसु को पूछताछ के लिए समन भेजा है. ये सभी पश्चिम बंगाल के आईपीएस अधिकारी हैं.
बताया गया है कि जिन अधिकारियों को समन भेजा गया है, उनमें से कई अधिकारी कोयले की अवैध खुदाई और तस्करी वाले इलाके में पहले तैनात थे.
वीडियो कैप्शन, Cover Story: आख़िर कैसे कम होगा कोयले का इस्तेमाल सूत्रों के अनुसार ईडी की जांच में संकेत मिले हैं कि इन अधिकारियों को कथित तौर पर कोयले की अवैध खुदाई और तस्करी की जानकारी थी, लेकिन इन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की.
सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि आधिकारिक वाहनों में नकदी की ढुलाई में भी कई अधिकारी शामिल रहे हैं.
इससे पहले इस साल मार्च में ईडी ने इस केस के मुख्य अभियुक्त और टीएमसी के युवा नेता विनय मिश्रा से पूछताछ की थी. विनय मिश्रा के राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का करीबी सहयोगी होने का दावा किया जाता है.
नीतीश कुमार को आरजेडी में भी चैन नहीं मिला तब कहाँ जाएंगे?

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जाने-माने शायर शेख़ इब्राहिम ज़ौक़ का मशहूर शेर है- अब तो घबराकर ये कहते हैं कि मर जाएंगे, मर के भी चैन नहीं पाया तो किधर जाएंगे.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी छोड़ एक बार फिर से राष्ट्रीय जनता दल से हाथ मिला लिया है. बिहार के कुछ नेता चुटकी लेते हुए पूछ रहे हैं कि नीतीश कुमार को आरजेडी में भी चैन नहीं मिला तो कहाँ जाएंगे?
बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब क़ादरी कहते हैं कि नीतीश कुमार को जेडीयू को अपग्रेड करने की ज़रूरत है.
क़ादरी कहते हैं, ''नीतीश कुमार का बीजेपी और आरजेडी में आना-जाना उनके भीतर की एक बेचैनी को दिखाता है. नीतीश कुमार की लोकप्रियता 2005 से 2010 के बीच जो थी, वह 2022 तक कमज़ोर पड़ी है. वह बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं. बिहार उनको आजमा चुका है.''
चुनावों के दौरान मुफ़्त में चीज़ें बांटना या देने का वादा करना एक 'गंभीर मुद्दा': सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा है कि चुनावों के दौरान मुफ़्त में चीज़ें बांटना या देने का वादा करना एक 'गंभीर मुद्दा' है और इस पर खर्च होने वाली रकम को बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कार्यों में लगाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही. ये याचिका चुनावों के दौरान जनता के पैसे से ग़ैरवाजिब चीज़ें मुफ़्त में बांटने या देने का वादा करने वाले राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और उनका चुनाव चिह्न ज़ब्त करने की मांग को लेकर दायर की गई थी.
चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पैसे का नुक़सान हो रहा है और जनकल्याण के साथ इसका संतुलन बनाया जाना चाहिए.

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इमेज कैप्शन, इस मामले में दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी का पक्ष सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा कोर्ट ने मामले के पक्षकारों से कहा, "इसीलिए ये बहस हो रही है. ये एक गंभीर मुद्दा है. जो लोग इसका विरोध करते हैं, उनका कहना है कि वे इसके लिए टैक्स भरते हैं. उनका पैसा बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कामों में खर्च किया जाना चाहिए न कि लोगों को बांटने के लिए."
इस मामले में और चर्चा हो, ऐसी राय रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "ये निश्चित रूप से चिंता की बात है और वित्तीय अनुशासन बनाकर रखा जाना चाहिए लेकिन भारत जैसे देश में जहां ग़रीबी है, वहां हम ऐसे मुद्दे को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं."
इस मामले में दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी का पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मुफ्त में चीज़ें बांटने और जनकल्याण की योजनाओं में फर्क होता है और फ्रीबीज़ जैसे शब्द का यहां गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया जा रहा है.
बेरोज़गारी: कैसे बढ़ेंगी नौकरियां और क्या कर सकते हैं नौकरी चाहने वाले

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हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि अप्रैल 2014 से मार्च 2022 के बीच आठ सालों में विभिन्न केंद्र सरकार के विभागों में स्थायी नौकरी पाने के लिए क़रीब 22 करोड़ लोगों ने आवेदन किया.
इसी अवधि में जिन लोगों को अंततः केंद्र सरकार में स्थायी नौकरी मिली उनकी संख्या क़रीब 7.22 लाख थी.
आसान शब्दों में कहा जाए तो जितने लोगों ने नौकरी के लिए आवेदन किया उसमें से केवल 0.32 प्रतिशत लोगों को नौकरी मिली.
भारत में बेरोज़गारी से बनी स्थिति का ये सिर्फ एक उदाहरण है.
इनकम टैक्स भरने वाले लोग 1 अक्तूबर से नहीं हो सकेंगे अटल पेंशन योजना में शामिल

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आयकर देने वालों को आगामी 1 अक्तूबर से केंद्र सरकार की अटल पेंशन योजना में शामिल होने की इजाज़त नहीं होगी. केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है.
अटल पेंशन योजना के बारे में जारी एक संशोधित अधिसूचना में कहा गया है, "1 अक्तूबर, 2022 से कोई भी नागरिक जो आयकर दाता हैं या कभी रहे हैं अटल पेंशन योजना में शामिल होने के योग्य नहीं होंगे."
हालांकि 1 अक्तूबर के पहले इस योजना में शामिल होने वाले इसके लायक माने जाएंगे.
सरकार की अधिसूचना में यह भी बताया गया कि 1 अक्तूबर या इसके बाद इस योजना में शामिल होने वाले किसी शख़्स के बारे में पाया गया कि वे अभी या पहले आयकर दाता रहे हैं तो अटल पेंशन योजना का उनका ख़ाता बंद कर दिया जाएगा और उसमें जमा की गई राशि संबंधित शख़्स को लौटा दी जाएगी.
वीडियो कैप्शन, धंधा पानी भारत के मौजूदा आयकर क़ानून के अनुसार, 2.5 लाख रुपये तक की आय वालों को आयकर देने की ज़रूरत नहीं होती.
मुख्यतः असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए सरकार ने अटल पेंशन योजना की शुरुआत 1 जून, 2015 से की थी.
इस योजना में शामिल होने वाले कामगारों को 60 साल की उम्र होने के बाद 1,000 से 5,000 रुपये प्रति महीने की पेंशन देने की गांरटी दी गई है.
वीडियो कैप्शन, ईपीएफ़ के बदले नियम फ़िलहाल 18 साल से 40 साल के बीच के सभी नागरिक बैंक या डाकघर में खोले गए बचत खाते के द्वारा इस योजना में शामिल हो सकते हैं.
इस योजना में शामिल होने की एक शर्त यह भी होती है कि लाभार्थी किसी और सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ नहीं लेता हो.
अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के बीच इस योजना में 99 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हुए. इस चलते इस योजना के कुल लाभार्थियों की संख्या 2 मार्च तक 4,01 करोड़ हो गई है.
