भारत की श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी स्थिति नहीं होने जा रही है: रघुराम राजन

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत की स्थिति श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी नहीं होने जा रही है. यहां की आर्थिक समस्याएं श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह नहीं हैं. भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और विदेशी कर्ज़ भी कम है.

लाइव कवरेज

अभिनव गोयल and प्रेरणा .

  1. भारत की श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी स्थिति नहीं होने जा रही है: रघुराम राजन

    रघुराम राजन

    भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत की स्थिति श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी नहीं होने जा रही है. यहां की आर्थिक समस्याएं श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह नहीं हैं. भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और विदेशी कर्ज़ भी कम है.

    राजन ने आरबीआई की पीठ थपथपाते हुए कहा कि बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में अच्छा काम किया है.

    आरबीआई के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, 22 जुलाई तक भारत के पास 571.76 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है. वहीं मार्च 2022 के आख़िर तक देश पर कुल 620.7 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज़ है.

    हालांकि श्रीलंका संकट को देखते हुए उन्होंने ये चेतावनी दी कि भारत के सुनहरे भविष्य और आर्थिक विकास के लिए उसके उदारवादी लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने की ज़रूरत है.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन शनिवार को 'भारत के आर्थिक विकास के लिए क्यों उदारवादी लोकतंत्र की ज़रूरत है' के मुद्दे पर बोल रहे थे.

    रायपुर में अखिल भारतीय पेशेवर कांग्रेस के 5वें सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए राजन ने कहा कि अल्पसंख्यकों को "द्वितीय श्रेणी के नागरिक" में तब्दील करने का कोई भी प्रयास देश को विभाजित करता है.

    श्रीलंका की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए राजन ने कहा कि जब कोई देश अपने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर नौकरी के संकट को दूर करने का प्रयास करता है, तो यही हालात बनने लगते हैं.

    ''आज भारत में कुछ वर्गों में यह भावना है कि लोकतंत्र भारत को पीछे धकेल रहा है. जबकी हमारा भविष्य हमारे उदार लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं को मजबूत करने में है, उन्हें कमजोर करने में नहीं है, और यह वास्तव में हमारे विकास के लिए आवश्यक है. अगर ऐसा नहीं होता तो यह देश को कमज़ोर बना देगा और विदेशी दख़ल की संभावनाएं बढ़ने लगेंगी.''

  2. पीएफ़आई के जनरल सेक्रेटरी बोले- 'हमें आतंकी संगठन ब्रांड करने की हो रही है कोशिश'

    वीडियो कैप्शन, हिंदुओं का क़त्ल हमारा एजेंडा नहीं: पीएफ़आई

    पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया यानी पीएफ़आई के जनरल सेक्रेटरी अनीस अहमद ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उनका संगठन "सरकार की एंटी-मुस्लिम पॉलिसी'' का पुरज़ोर विरोध करता रहा है.

    अनीस अहमद कहते हैं, "न तो ग़ज़वा-ए-हिंद की हमारी कोई अवधारणा है, न ही हम भारत को इस्लामी मुल्क बनाना चाहते हैं, न ही हिंदुओं का क़त्ल हमारे एजेंडा का हिस्सा है. देखिए बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली की अनीस अहमद के साथ ख़ास बातचीत.

  3. रूस-यूक्रेन युद्ध: 50 से ज़्यादा युद्ध बंदियों की मौत कैसे हुई, यूएन और रेड क्रॉस जांच की उठी मांग

    वीडियो कैप्शन, रूस की बमबारी से यूक्रेन के शहर वीरान

    यूक्रेन ने कहा है कि रूस के कब्ज़े वाले दोनेत्स्क इलाक़े में ओलेनिव्का बंदी शिविर पर हुए हमले में 50 से ज़्यादा युद्ध बंदियों की मौत के कारणों की जांच संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस द्वारा की जानी चाहिए.

    रेड क्रॉस ने कहा है कि ओलेनिव्का में युद्ध बंदियों को रखने के लिए जो बंदी शिविर बनाया गया था, वहां घायलों के इलाज के लिए वो अपनी टीम भेजने की कोशिश कर रहा है.

    एक बयान जारी कर रेड क्रॉस ने कहा, "हमारी प्रथमिकता ये सुनिश्चित करना है कि घायलों का इलाज कर उनकी जान बचाई जा सके और जो लोग मारे गए हैं, उनके शवों को उचित सम्मान मिले."

    वीडियो कैप्शन, रूस-यूक्रेन युद्ध: मलबे के नीचे से ज़िंदा निकला यूक्रेनी सैनिक

    हमले में बच गए कुछ घायलों को दोनेत्स्क सेंट्रल सिटी क्लिनिकल हॉस्पिटल नंबल 16 में भर्ती कराया गया था.

    यहां के वरिष्ठ डॉक्टर मिखाइल यूरेनको बताते हैं, "एंबुलेंस में सात युद्धबंदी और यूक्रेनी सेना से जुड़े सैनिक लाए गए थे. सभी को शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कई चोटें आई थीं. सभी को इंटेसिव केयर यूनिट में रखा गया है और ज़रूरी इलाज किया जा रहा है. उन्हें पेट में चोटें आई हैं, उनकी आंतों, प्लीहा, पीठ की तरफ और किडनी में चोटें आई हैं. सभी की हालत नाज़ुक है."

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन की राजदूत सर्गिए किस्लीत्या ने कहा, "रूस ने वहां यूक्रेनी सेना से जुड़े युद्ध बंदियों को रखा था, जिनमें से अधिकतर अज़ॉव रेजिमेन्ट से थे. रूस ने ये हमला कर यूक्रेन पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाने की कोशिश की है और वो खुद युद्ध बंदियों पर कर रहे अत्याचारों को छिपाने की कोशिश कर रहा है."

    वीडियो कैप्शन, किस ओर जा रहा रूस-यूक्रेन का युद्ध?

    यूक्रेन के मंत्री और विपक्षी पार्टी की नेता किरा रूडिक ने बीबीसी से बात की और कहा है कि रूस ने बंदियों पर किए जा रहे अत्याचारों और उनकी मौतों को छिपाने के लिए ये हमला किया है.

    उन्होंने कहा, "ये वाकई में डराने वाला है. हमें लगता है कि उन्होंने वहां किए जा रहे अत्याचारों और हत्याओं को छिपाने लिए हमला किया है. हम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से गुज़ारिश करेंगे कि वो इस बात की जांच करें कि वहां क्या कुछ हो रहा था और इस बात की भी कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों की अनदेखी कर रूस वहां अत्याचार करना कैसा जारी रखा हुआ था. आप देख सकते हैं कि वो इसका आरोप यूक्रेन पर लगा रहे हैं, ये बेहद घिनौना है. आप देख सकते हैं उनकी रणनीति डराने, आतंक फैलाने और मासूम लोगों को मारने की है."

    वीडियो कैप्शन, रूस और यूक्रेन -दोनों ही देशों की सीमा पर फौज की तैनाती बढ़ी है.

    कीएव इंडिपेंडेंट के अनुसार, रूस ने आज हमले में मारे गए 50 यूक्रेनी युद्धबंदियों की लिस्ट जारी की है और कहा है कि हमले में तेहत्तर लोग घायल हैं.

    रूसी रक्षा मंत्रालय ने इस हमले का आरोप यूक्रेन पर लगाया है और कहा है कि इस घटना के लिए कानूनी और नैतिक तौर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़िम्मेदार हैं जिन्हें दूसरे देशों का समर्थन हासिल है.

    हमले के बारे में रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता आइगोर कोनाशेन्कोव ने कहा था कि ओलेनिव्का शहर पर शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को हमला किया गया.

    वीडियो कैप्शन, ‘क्या मैं ये रूसी टैंक खींचकर उस पार छोड़ आऊं?’

    उन्होंने कहा, "बीती रात यूक्रेन सरकार ने जानबूझकर भड़काने की एक और कोशिश की और ओलेनिव्का में जहां यूक्रेनी युद्धबंदी थे, वहां हमला किया, इसमें अजॉव रेजिमेंट के सैनिक भी थे. सैनिकों से साथ साथ शिविर में मौजूद कर्मचारियों भी घायल हुए हैं. अभी के वक्त में बड़ी संख्या में यूक्रेनी सैनिक खुद हथियार डाल रहे हैं और ये मान रहे हैं कि युद्ध बंदियों के प्रति रूस का रवैया मानवीय है. यूक्रेन आत्मसमर्पण कर रहे यूक्रेनी सैनिकों को डराकर उन्हें रोकना चाहता है. घटना की विस्तृत जांच की जा रही है."

    इस बीच शनिवार को यूक्रेन के शहरों पर रूस के लगातार हमले जारी है. यूक्रेन ने भी अपने हमले तेज़ किए हैं.

    यूक्रेन ने कहा है कि शनिवार को उसने खेरसोन इलाके में रूस के हथियारों के दो ठिकानों को तबाह किया है.

  4. बच्चों में हेपेटाइटिस के मामले क्यों बढ़े

    वीडियो कैप्शन, हाल के समय में छोटे बच्चों में भी लिवर से जुड़ी परेशानियां देखी गई हैं.

    हाल के समय में छोटे बच्चों में भी लिवर से जुड़ी परेशानियां देखी गईं, जिसकी वजह एकदम से समझ में नहीं आई. लेकिन अब शोधकर्ताओं ने इसकी वजह का पता लगा लिया है.

    शोध से पता चला है कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बाद दो कॉमन वायरस दोबारा सक्रिय हो गए हैं, जो मिलकर बच्चों के लीवर पर असर डाल रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक, 35 देशों में 1,000 से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हुए हैं. फ़र्गश वॉल्श की रिपोर्ट.

  5. ब्रेकिंग न्यूज़, जिम्बॉब्वे के ख़िलाफ़ तीन वनडे मैचों के लिए भारतीय टीम घोषित, शिखर धवन होंगे कप्तान

    शिखर धवन

    इमेज स्रोत, BCCI/IPL

    जिम्बॉब्वे के खिलाफ तीन वनडे मैचों के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का एलान कर दिया गया है.

    टीम के कप्तान शिखर धवन होंगे. टीम में रितुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, दीपक हुड्डा, राहुल त्रिपाठी, वाशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, अवेश खान, प्रसिद कृष्णा, मोहम्मद सिराज, दीपक चाहर को शामिल किया गया है. ईशान किशन और संजू सैमसन विकेटकीपर के तौर पर शामिल किए गए हैं.

    भारत और जिम्बॉब्वे के बीच तीन वन डे मैचों की सिरीज 18 अगस्त से शुरू होगी. भारतीय टीम इस वक्त वेस्टइंडीज के दौरे पर है. भारतीय क्रिकेट टीम अगस्त में तीन वन डे मैचों की सिरीज के लिए छह साल में जिम्बॉब्वे का पहला दौरा करेगी. सिरीज में भारत का पहला मैच 18 अगस्त को होगा. दूसरा मैच 20 और तीसरा 22 अगस्त को होगा.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    भारतीय टीम ने आखिरी बार 2016 में महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में जिम्बॉब्वे का दौरा किया था. उस समय भारत ने जिम्बॉब्वे के साथ तीन टी20 और तीन वनडे मैच खेले थे. भारत ने ये श्रृंखला अपने नाम की थी. वनडे में भारत 3-0 से विजयी रहा था, वहीं टी20 श्रृंखला इसने 2-1 अपने नाम की थी.

  6. वो 'लापता' पाकिस्तानी फ़ौजी जो कारगिल युद्ध से वापस नहीं लौट सके

    वीडियो कैप्शन, वो 'लापता' पाकिस्तानी फ़ौजी जो कारगिल युद्ध से वापस नहीं लौट सके

    भारत और पाकिस्तान के बीच यह युद्ध मई से जुलाई 1999 के दौरान नियंत्रण रेखा के साथ जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र कारगिल और इससे सटी बर्फीली चोटियों पर लड़ा गया.

    इस युद्ध में होने वाली मौतों के वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं लेकिन भारत में 500 से अधिक फ़ौजियों की जान गयी और पाकिस्तान में यह संख्या 300 से 500 के बीच बतायी जाती है.

    साल 1999 का कारगिल युद्ध क्यों और कैसे शुरू हुआ, इस बारे में बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है लेकिन इस जंग का एक मानवीय पहलू ऐसा भी है जिस पर बहुत ध्यान नहीं दिया गया.

    23 साल बाद आज भी ऐसे परिवार मिलते हैं जो मोर्चे पर जाने वाले अपने प्यारों का इंतज़ार कर रहे हैं, जिनकी मौत की ख़बर तो आ गयी, पर वे हज़ारों फुट की ऊंचाइयों पर बर्फ़ की चादर तले न जाने कहां दफ़न हो गये. इन फ़ौजी अफ़सरों की सही संख्या से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं हैं.

  7. पंजाब: मंत्री के बर्ताव की वजह से इस्तीफा देने वाले वाइस चांसलर पर राजनीति गरमाई

    डॉ. राज बहादुर

    इमेज स्रोत, ANI

    बाबा फरीद हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी, फरीदकोट के उप कुलपति डॉ. राज बहादुर के इस्तीफ़े के बाद से पंजाब सरकार सवालों के घेरे में है. प्रदेश की सभी विपक्षी पार्टियां राज्य की आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमलावर हैं.

    इस्तीफ़े के बाद पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने वीसी से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना देते नज़र आए. इस दौरान वीसी काफ़ी भावुक हो गए.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    दरअसल, पिछले शुक्रवार को पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जोदामाजरा फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल अस्पताल पहुंचे थे. यह मेडिकल कॉलेज बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के अंतर्गत आता है.

    अस्पताल के ख़राब प्रबंधन को लेकर क्षेत्र के लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की थी.

    इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे और इस दौरान उन्होंने पाया कि स्किन डिपार्टमेंट में मरीज़ों के लिए रखे गए बेड के गद्दे ख़राब हो गए हैं.

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    इसके बाद मंत्री ने वीसी को बुलाया और ख़राब गद्दे पर लेटने का निर्देश दिया. दबाव में वीसी को ऐसा करना तो पड़ा, लेकिन मंत्री के इस रवैये से वो काफ़ी नाराज़ हो गए.

    दी ट्रिब्यून अखबार से बात करते हुए डॉ. राज बहादुर ने कहा, "मुझे बहुत बुरा लग रहा है. अपने 45 साल के मेडिकल करियर में मैंने भारत और विदेशों में 13 बड़े संस्थानों में काम किया है, लेकिन मेरे साथ ऐसा व्यवहार कभी नहीं किया गया."

  8. पाकिस्तान से लौटकर आईं रीना वर्मा ने की दोनों देश से ये अपील

    वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान से लौटकर आईं रीना वर्मा ने की दोनों देश से ये अपील

    रीना वर्मा छिब्बर पाकिस्तान के रावलपिंडी में अपने पुश्तैनी घर में कुछ दिन रहकर भारत लौटी हैं.

    इस दौरान उन्हें किस बात की खुशी रही और किस बात का ग़म, इस बारे में उन्होंने बीबीसी हिन्दी से खुलकर बातचीत की है.

  9. अजीत डोभाल: धर्म और विचारधारा के नाम पर नफ़रत का पूरे देश पर असर

    अजित डोभाल

    इमेज स्रोत, ANI

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को देश में धर्म और विचारधारा के नाम पर फैल रही नफ़रत पर अपनी चिंता ज़ाहिर की है.

    दिल्ली के कंस्टिट्यूशन क्लब में अखिल भारतीय सूफी सज्जादनाशिन परिषद (एआईएसएससी) की ओर से आयोजित एक अंतरधार्मिक सम्मेलन में अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरुओं के सामने अपनी बात रखते हुए डोभाल ने कहा कि ऐसी चीज़ें पूरे देश को प्रभावित करती हैं. उन्होंने कहा, '' इससे लड़ने के लिए सभी धर्म के धर्मगुरुओं को साथ मिलकर काम करना होगा. गलतफ़हमियों को दूर करने और हर धार्मिक संस्था को ये एहसास दिलाने की ज़रूरत है कि वो भारत का हिस्सा हैं.''

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    डोभाल ने कहा, ''कुछ लोग धर्म के नाम पर नफ़रत पैदा करते हैं. इसका पूरे देश पर बहुत गलत प्रभाव पड़ता है. हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते. धार्मिक द्वेष का मुक़ाबला करने के लिए हमें एक साथ काम करना होगा और हर धार्मिक निकाय को भारत का हिस्सा बनाना होगा. ''

    सम्मेलन में, एआईएसएससी के बैनर तले इकट्ठा हुए धार्मिक नेताओं ने "पीएफआई जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने" और ऐसे अन्य मोर्चों के ख़िलाफ प्रस्ताव पारित किया जो "राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल" रहे हैं.

  10. रत्ना पाठक शाह ने करवा चौथ पर ऐसा क्या कह दिया कि ट्रोल्स पड़ गए पीछे

    रत्ना पाठक शाह
    इमेज कैप्शन, रत्ना पाठक शाह पति नसीरुद्दीन शाह के साथ

    फिल्म एक्ट्रेस और दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह की पत्नी रत्ना पाठक शाह को करवा चौथ पर बयान देने पर सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है.

    एंटरटेनमेंट वेबसाइट 'पिंकविला' को एक इंटरव्यू में रत्ना पाठक शाह ने कहा था कि भारत बहुत ज्यादा रूढ़िवादी होता जा रहा है और हो सकता है कि यह सऊदी अरब जैसा बन जाए.

    उन्होंने करवा चौथ का व्रत रखने से इनकार करते हुए कहा कि कैसे 21वीं सदी में भी महिलाएं बरसों पुरानी परंपरा ढो रही हैं. एक रूढ़िवादी समाज में महिलाओं पर ही सबसे पहले शिकंजा कसा जाता है.

    लेकिन इंटरव्यू में सांप्रदायिकता को लेकर भारत के मौजूदा माहौल और महिलाओं के बारे में रुढ़िवादी ख्यालों का जिक्र करते ही सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा.

  11. 30 जुलाई 2022 का दिनभर- पूरा दिन पूरी ख़बर सुनिए मानसी दाश के साथ

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त

  12. सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार की ज़मानत याचिका ख़ारिज

    तीस्ता सीतलवाड़

    इमेज स्रोत, ANI

    अहमदाबाद के सेशन कोर्ट ने शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार की जमानत याचिका को ख़ारिज कर दी.

    तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार ने जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद सरकार ने दोनों की जमानत याचिका के ख़िलाफ़ हलफ़नामा दायर किया. कोर्ट ने बीते हफ़्ते ही दोनों पक्षों की दलील सुनी और अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया.

    कोर्ट के फ़ैसले के बाद अभी दोनों जेल में ही रहेंगे. गुजरात पुलिस क्राइम ब्रांच ने बीते 26 जून को तीस्ता सीतलवाड़ को 2002 गुजतरात दंगे से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किया था. सीतलवाड़ के एनजीओ पर दंगे से जुड़ी भ्रामक जानकारियां देने का आरोप है.

    एसआईटी ने तीस्ता, श्रीकुमार और संजीव भट्ट के ख़िलाफ़ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई अन्य लोगों को बदनाम करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

    एसआईटी ने अपनी एक रिपोर्ट के ज़रिए ये दावा किया था कि तीस्ता, श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सलाहकार अहमद पटेल से गुजरात सरकार को अस्थिर करने और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए 30 लाख रुपये लिए थे.

    अहमदाबाद की सेशन कोर्ट ने बीते दो जुलाई को सीतलवाड़ और श्रीकुमार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था. वहीं अहमदाबार पुलिस क्राइम ब्रांच ने संजीव भट्ट को पिछले महीने गिरफ्तार किया था.

  13. आईटीआर कैसे भरें और कहां-कहां छूट मिल सकती है?

    वीडियो कैप्शन, आईटीआर कैसे भरें और कहां-कहां छूट मिल सकती है?

    इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख नज़दीक आ गई है. ITR दायर करने वाली महिलाओं को दो समूहों में बांट सकते हैं.

    नौकरीपेशा महिलाएं और सेल्फ-एम्पलॉयड महिलाएं.

    आईटीआर भरने की पूरी प्रक्रिया क्या है और कहां कहां छूट मिल सकती है, बता रही हैं प्रेरणा.

  14. ब्रेकिंग न्यूज़, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए दूसरी सफलता, वेटलिफ्टर गुरुराज पुजारी ने जीता कांस्य पदक

    गुरुराज पुजारी

    इमेज स्रोत, REUTERS/Jason Cairnduff

    बर्मिंघम में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन आज भारत को दोगुनी खुशी हाथ लगी है.

    संकेत सरगर के बाद वेटलिफ्टिंग कैटगरी में ही गुरुराज पुजारी ने कांस्य पदक अपने नाम किया है.

    गुरुराज को ये पदक 61 किलोग्राम की कैटगरी में मिला है. उन्होंने कुल 269 किलो का भार उठाया था.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    इससे पहले 55 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग कैटगरी में संकेत सरगर ने रजत पदक अपने नाम किया था. इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में अब तक भारत ने दो मेडल अपने नाम कर लिए हैं.

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    कॉमनवेल्थ गेम्स में गुरुराज का ये दूसरा पदक है. इससे पहले साल 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्डकोस्ट में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया था.

  15. रूस और यूरोप के बीच अब 'गैस वॉर'

    वीडियो कैप्शन, रूस और यूरोप के बीच अब एक किस्म का 'गैस वॉर' शुरू हो गया है.

    रूस और यूरोप के बीच अब एक किस्म का 'गैस वॉर' शुरू हो गया है. नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन के डेटा से पुष्टि हुई है कि रूस ने जर्मनी को दी जाने वाली गैस काफी कम कर दी है.

    एनर्जी कंपनी गैज़प्रोम ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वो पाइपलाइन के रख-रखाव के लिए एक अतिरिक्त टर्बाइन भी रोक सकता है.

    लेकिन इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि टर्बाइन रोकने के पीछे ये असल वजह नहीं है. जर्मनी ने कहा है कि यूरोप में राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल भड़काने के लिए पुतिन गैस सप्लाई रोकने का हथकंडा अपना रहे हैं.

  16. पीएम मोदी ने पदक जीतने पर संकेत सरगर को दी बधाई, कहा- भारत के लिए एक अच्छी शुरुआत

    संकेत सरगर

    इमेज स्रोत, ANI

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला मेडल दिलाने वाले संकेत सरगर को बधाई दी है.

    55 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतने वाले संकेत को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "संकेत सरगर की तरफ़ से असाधारण प्रयास. कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका रजत पदक जीतना भारत के लिए एक अच्छी शुरुआत है. उन्हें बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं."

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    संकेत की जीत पर जितना गर्व देश को है, उतनी ही खुशी उनके माता-पिता को हो रही है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए संकेत के पिता महादेव सरगर ने कहा, "मेरे बेटे ने भारत को पहला पदक दिया है इससे हम बहुत खुश हैं."

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    हालांकि संकेत का कहना है कि वो खुश से ज़्यादा खुद से नाराज़ हैं. उन्हें स्वर्ण पदक जीतना था.

    छोड़िए X पोस्ट, 3
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 3

    संकेत ने कहा, "चार साल से स्वर्ण पदक के लिए तैयारी कर रहा था और स्वर्ण पदक एक कदम की दूरी पर था. मुझे इस पदक के मिलने पर खुशी है कि ये देश का पहला पदक है."

  17. अफ़ग़ानिस्तान में कौन दे रहा है तालिबान को चुनौती

    वीडियो कैप्शन, पिछले एक साल में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को सबसे ज़्यादा टक्कर विद्रोही बलों से ही मिली.

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को सत्ता पर काबिज़ हुए क़रीब एक साल हो गया है. इस दौरान इस नए शासक के ख़िलाफ़ विद्रोही बलों ने भी सिर उठाया. ये विद्रोही बल पिछली सरकार के वफ़ादार हैं.

    अभी झड़पें उन कुछ इलाक़ों तक ही सीमित हैं, जहां लंबे वक़्त से तालिबान-विरोधी भावना रही है. हालांकि तालिबान, इन विद्रोहियों से किसी तरह का ख़तरा होने की बात से इनकार करता है.

    लेकिन पिछले एक साल में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को सबसे ज़्यादा टक्कर विद्रोही बलों से ही मिली. अंदराब घाटी उन इलाकों में से एक है, जहां ये विद्रोही सक्रिय हैं. सिकंदर किरमानी की रिपोर्ट.

  18. चीन को सता रहा है सुरक्षा का डर, शी जिनपिंग बोले- सेना में केवल विश्वसनीय लोगों की हो भर्ती

    शी ज़िंनपिंग

    इमेज स्रोत, Pool/Getty Images

    चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की है. साथ ही ये चेतावनी भी दी है कि दुनिया की सबसे बड़ी और सशक्त सेना की श्रेणी में कोई दूसरा देश उसे चुनौती न दे, ये सुनिश्चित करने के लिए चीनी सेना का नेतृत्व केवल सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार "विश्वसनीय लोगों" को ही देना चाहिए.

    आगामी 1 अगस्त को चीन की पीपुल्स लिबरेशन ऑर्मी के गठन को 95 साल पूरे हो जाएंगे.पीपुल्स लिबरेशन आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी सेना है.

    इससे पहले गुरुवार को सेना के प्रशिक्षण और मज़बूती को लेकर आयोजित की गई एक स्टडी सेशन में बोलते हुए चीन के राष्ट्रपति ने कहा, ''हमें सैन्यकर्मियों की नियुक्ति करते व़क्त राजनीतिक अखंडता पर ज़ोर देना चाहिए, ताकि सेना पर पार्टी का पूर्ण नेतृत्व बरकरार रहे.''

    अपने वक्तव्य में ज़िनपिंग ने युद्ध की आहट और दुनिया में जारी अशांति की ओर इशारा करते हुए कहा कि सैन्यकर्मियों का केवल एक मकसद होना चाहिए कि वो मिलकर एक ऐसी सेना तैयार करें जो लड़ने और जीतने में सक्षम हों. देश राष्ट्रीय सुरक्षा में बढ़ती अस्थिरता और अनिश्चितता का सामना कर रहा है.

    ज़िनपिंग का ये बयान ऐसे व़क्त में आया है जब चीन और अमेरिका के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है. खासकर ताइवान के मुद्दे पर दोनों ही देश आमने-सामने हैं.

    अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैन्सी पेलोसी ताइवान की यात्रा कर सकती हैं. उनकी यात्रा से जुड़ी ख़बरों के बीच चीन गुस्से में है, चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर नैन्सी पेलोसी ताइवान की यात्रा करती हैं तो अमेरिका को इसका ख़मियाज़ा भुगतना होगा.

    इधर 29 जुलाई को चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच वीडियो कॉल के ज़रिये दो घंटे से ज़्यादा देर तक बातचीत हुई. ताइवान के मुद्दे पर चीन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि डेढ़ अरब चीनी नागरिकों का मानना है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखे जाना चाहिए.

  19. निशांक राठौर ने क्या ख़ुद किया 'सिर तन से जुदा' का मैसेज, सुलझी मौत की गुत्थी

    निशांक राठौर

    इमेज स्रोत, VIRENDRA TIWARI

    इमेज कैप्शन, निशांक राठौर

    मध्य प्रदेश में निशांक राठौर की मौत की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने बताया है कि उनकी मौत कर्ज़ ना चुका पाने के चलते आत्महत्या करने से हुई है. निशांक की हत्या नहीं हुई है जैसा कि पहले संदेह जताया जा रहा था.

    21 साल के निशांक राठौर का शव 24 जुलाई को मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले में रेलवे ट्रैक पर मिला था, जिसे पहले भी आत्महत्या का मामला माना जा रहा था लेकिन मौत की गुत्थी तब उलझ गई जब उनके पिता को उसी दिन बेटे के फोन पर एक मैसेज मिला.

    अंग्रेज़ी अख़बारहिंदुस्तान टाइम्सके मुताबिक, निशांक राठौर के मोबाइल से जो मैसेज पिता को मिला उसमें लिखा था, "नबी से गुस्ताख़ी नहीं. गुस्ताख़-ए-नबी की एक ही सज़ा, सिर तन से जुदा..." इसी तरह का मैसेज उसके दोस्तों के पास भी गया. इसके साथ ही उसमें लिखा था कि राठौर साहब आपका बेटा बहुत बहादुर था.

    विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बताया कि निशांक के मोबाइल फ़ोन से अपने पिता के लिए लिखा गया आख़िरी मैसेज हिंदी में था जिसमें 'सिर तन से जुदा' करने की बात कही गई थी. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी इसी तरह का मैसेज पोस्ट किया था.

  20. कौन हैं अलेक्जेंडर विक्टरोविच, जिन्हें अमेरिका 'रूसी सरकार का अवैध एजेंट' बता रही है

    अमेरिका

    इमेज स्रोत, Getty Images

    अमेरिका ने एक रूसी नागरिक पर देश के ख़िलाफ अभियान चलाने और रूसी एजेंडे पर काम करने का आरोप लगाया है. आरोप हैं कि रूसी नागरिक अमेरिकी नागरिकों को मोहरा बनाकर ''रूसी सरकार के अवैध एजेंट'' के रूप में इस्तेमाल करता था.

    अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक़ मॉस्को के निवासी अलेक्जेंडर विक्टरोविच आयनोव ने अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप करने की भी कोशिश की थी.

    वो एंटी ग्लोबलाइजेशन मूवमेंट ऑफ रूस (एजीएमआर)) नाम की एक संस्था चला रहे थे. यह संस्था रूसी राज्य के हितों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी राजनीतिक समूहों की भर्ती करता था.

    अलेक्जेंडर विक्टरोविच

    इमेज स्रोत, IONOV/FACEBOOK

    इमेज कैप्शन, अलेक्जेंडर विक्टरोविच

    विक्टरोविच ये सबकुछ रूसी संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) के इशारे पर कर रहे थे. उन्होंने फ्लोरिडा, जॉर्जिया और कैलिफोर्निया में कुछ अज्ञात राजनीतिक समूहों को नियंत्रित भी किया. वह कैलिफॉर्निया और अमेरिका के अलगाव को बढ़ावा देने के रूसी एजेंडे पर काम कर रहे थे.

    विक्टरोविच और कम से कम तीन अन्य रूसी अधिकारी लगभग दिसंबर 2014 से मार्च 2022 तक अमेरिका के ख़िलाफ चल रहे इस ख़ुफिया अभियान में जुटे हुए थे.

    हालांकि विक्टरोविच ने अमेरिकी न्याय विभाग के सभी आरोपों को बकवास बताया है. उनका कहना है कि उनके ख़िलाफ़ ऐसे कोई सबूत नहीं हैं और यूक्रेनी संकट ने अमेरिकी अधिकारियों को पागल कर दिया है! .