अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को जापान की राजधानी टोक्यो में अपनी अगुआई में इंडो पैसिफिक इकनॉमिक फ्रेमवर्क यानी आईपीईएफ़ बनाने की घोषणा की है.
इसमें भारत को भी शामिल किया गया है. इसमें कुल 13 देश हैं.
IPEF को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि यह वैश्विक विकास में इंडो-पैसिफिक इलाक़े को ग्रोथ इंजन बनाने का काम करेगा. पीएम मोदी ने कहा कि भारत मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक को लेकर प्रतिबद्ध है.
ये देश हैं- अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रूनेई, भारत, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम.
कहा जा रहा है कि अभी ये शुरुआती सदस्य हैं.
बाद में इसमें और भी देश शामिल हो सकते हैं. जापान के निक्केई एशिया के पत्रकार केंतारो लवाम्टो ने लिखा है कि इन 13 देशों की वर्ल्ड जीडीपी में 40 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
लेकिन इन 13 देशों में से 11 देश RCEP यानी रीजनल कॉम्परहेंसिव इकनॉमिक पार्टनर्शिप के भी सदस्य हैं. RCEP में चीन भी शामिल है.
इसमें ताइवान को शामिल नहीं किया गया है. म्यांमार के अलावा चीन के क़रीबी देश कंबोडिया और लाओस को भी शामिल नहीं किया गया है. अमेरिका और भारत RCEP में शामिल नहीं हैं.
RCEP को दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक माना जाता है. इसमें शामिल देशों की वर्ल्ड जीडीपी में 30 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
इन 13 देशों में से जापान, ब्रूनेई, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड CPTPP से भी जुड़े हैं. अमेरिका ने 2017 में ख़ुद को इस ब्लॉक से अलग कर लिया था. इसे ट्रांस-पैसिफिक पार्टनर्शिप भी कहा जाता है.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, IPEF मुख्य रूप से अमेरिका और एशियाई साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने पर काम करेगा.
इनमें मुख्य चार बातें हैं- सप्लाई चेन, क्लीन एनर्जी, टैक्स और ट्रेड. इसके अलावा डिज़िटल अर्थव्यवस्था, नए तकनीक, श्रम क़ानून और पारदर्शिता पर भी IPEF काम करेगा. कहा जा रहा है कि बाइडन प्रशासन IPEF के ज़रिए एशिया में अपनी अर्थव्यवस्था की मौजूदगी बढ़ाना चाहता है. इसका एक लक्ष्य की मज़बूती से मुक़ाबले के तौर पर भी देखा जा रहा है.