ब्रिटेन की विदेश मंत्री ने कहा- यूक्रेन पर अब कभी भी हमला कर सकता है रूस
ब्रिटेन की विदेश मंत्री का कहना है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो उसे गंभीर प्रतिबंध झेलने होंगे.
लाइव कवरेज
पंकज प्रियदर्शी, कीर्ति दुबे and अभय कुमार सिंह
ब्रिटेन की विदेश मंत्री ने कहा- यूक्रेन पर अब कभी भी हमला कर सकता है रूस
रूस के हमले की आशंका के बीच यूक्रेन संकट गहराता जा रहा है. ब्रिटेन की विदेश मंत्री का कहना है कि ब्रिटिश सरकार इस बात को लेकर स्पष्ट है कि यूक्रेन पर ज़ल्द ही हमला हो सकता है.
सरकार की एक आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता के बाद विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने चेतावनी दी कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है, ऐसे में यूक्रेन में रह रहे ब्रिटिश नागरिकों को देश छोड़ देना चाहिए.
उधर रूस की तरफ़ से अंतराराष्ट्रीय मामलों के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि यूक्रेन के पास रूस का सैन्य अभ्यास करना कोई बड़ी बात नहीं है, ये नियमित अभ्यास का हिस्सा है.
इससे पहले भी रूस, यूक्रेन पर हमले की योजना से बार-बार इनकार करता आया है. साथ ही वो अमेरिका समेत पश्चिमी देशों पर झूठ फ़ैलाने का आरोप भी लगा चुका है.
अधिकारी ने ये भी कहा कि रूस युद्ध शुरू नहीं करता है, ख़त्म ज़रूर करता है.
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'गंभीर परिणाम भुगतने होंगे'
ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रस का कहना है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो उसे गंभीर प्रतिबंध झेलने होंगे. हालांकि, सरकार अभी भी डिप्लोमेसी के जरिए तनाव को कम करने की कोशिश कर रही है.
नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन पर ट्रस का कहना है कि इसे लेकर जर्मनी बिलकुल साफ़ है कि अगर रूस हमला करता है तो इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.
पिछले ही हफ्ते रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोव से लिज़ ट्रस की मुलाकात हुई थी. इस मुलाक़ात के बारे में पूछे जाने पर ट्रस ने कहा, ''ज़ाहिर है कि रूस के लोगों को मेरी बात पसंद नहीं आई, लेकिन मैं फिर से कहती हूं कि वो ये जान लें कि किसी भी हमले की बड़ी कीमत उन्हें चुकानी होगी.''
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कई देश कर चुके हैं नागरिकों से यूक्रेन छोड़ने की अपील
बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन समेत 10 से ज्यादा देशों ने यूक्रेन में रह रहे अपने नागरिकों से देश छोड़ देने की अपील की है.
बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़, सुरक्षा की वजह से वर्ल्ड बैंक भी अपने कर्मचारियों को यूक्रेन से अस्थायी तौर पर बाहर निकाल रहा है.
इस तरह की मची भगदड़ को लेकर हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने शांति बनाए रखने की अपील की थी. साथ ही ये भी कहा था कि इस तरह का दहशत का माहौल ही लोगों का सबसे बड़ा दुश्मन है.
बिहार में हिजाब मुद्दा नहीं, इस पर बहस की कोई ज़रूरत नहीं- नीतीश कुमार
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एक तरफ़ कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद चल रहा है और मामला हाई कोर्ट में है, तो वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि ये कोई मुद्दा नहीं है और इस पर बहस नहीं होनी चाहिए.
नीतीश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य में एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का आदर किया जाता है और बिहार में ये कोई मुद्दा नहीं है.
हिजाब को लेकर नीतीश कुमार कहते हैं कि अगर कोई छात्र सिर के ऊपर कुछ रखता है तो इस पर टिप्पणी करने की क्या ज़रूरत है, इस पर बहस नहीं होनी चाहिए.
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यूपी के सीएम योगी ने क्या कहा था?
इससे पहले सोमवार को ही न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी.
योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ये स्कूलों के अनुशासन का विषय है इसलिए ड्रेस कोड स्कूलों में लागू होना चाहिए.
उन्होंने कहा, ''भारत की व्यवस्था संविधान के अनुरूप चलनी चाहिए, हमारी स्वयं की पसंद-नापसंद देश के ऊपर लागू नहीं कर सकते, संस्थाओं के ऊपर लागू नहीं कर सकते.''
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि पिछले दिनों ये मामला तब सुर्ख़ियों में आया जब उडुपी के एक प्री-यूनिवर्सिटी गवर्नमेंट कॉलेज की लगभग आधा दर्जन छात्राओं ने हिजाब उतारने से इनकार कर दिया.
दूसरे वर्ष की इन छात्राओं ने हिजाब उतारकर क्लास में बैठने की अपीलों को ख़ारिज कर दिया.
जब इन छात्राओं की बात नहीं सुनी गई तो इन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया. ये मामला तब और बढ़ गया जब उडुपी ज़िले के कॉलेज में लड़कियों के हिजाब के जवाब में कुछ छात्र भगवा शॉल पहन कर चले आए थे.
बाद में ये मामला हाईकोर्ट में चला गया, जहां इस पर सुनवाई चल रही है.
इस बीच देश के अलग-अलग राज्यों से हिजाब पर चल रहे इस विवाद से जुड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
एबीजी शिपयार्ड धोखाधड़ी मामला कम समय में पकड़ा गया- वित्त मंत्री
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि एबीजी शिपयार्ड के मामले में धोखाधड़ी का पता सामान्य से कम समय में लगा लिया गया है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सीतारमण का कहना है कि एबीजी शिपयार्ड को कर्ज़ कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में दिया गया था. और ये खाता भी साल 2013 में ही एनपीए बन गया था.
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आम तौर पर बैंकों को ऐसे केस पर कार्रवाई का फ़ैसला लेने में 52-56 महीने का वक्त लग जाता है लेकिन इस बार बैंकों ने इस फ्रॉड का पता लगाने में औसत से कम समय लिया है.
मामला क्या है?
बता दें कि सीबीआई ने कथित तौर पर 22,842 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके पूर्व सीएमडी ऋषि कमलेश अग्रवाल और तत्कालीन डायरेक्टरों संथानम मुथुस्वामी और अश्विनी कुमार के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.
इससे पहले नीरव मोदी ने पंजाब नैशनल बैंक से लगभग 13 हज़ार करोड़ रुपये का ऋण लिया था जिसे वो चुका नहीं सके. तब उसे भारत के बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी बैंकिंग धोखाधड़ी कहा गया था.
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केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है कांग्रेस
इस मामले में कांग्रेस, केंद्र सरकार पर हमलावर है. इसे देश का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए कांग्रेस का दावा है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 5,35,0000 करोड़ के ब्रैंक फ्रॉड हुए हैं.
खुदरा महंगाई दर 6.01 फीसदी पहुंची, आरबीआई के संतोषजनक दायरे के पार
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सोमवार को जारी किए गए महंगाई के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार जनवरी के महीने में ख़ुदरा महंगाई दर में इजाफा दर्ज़ किया गया है. मतलब ये कि पिछले महीने के मुक़ाबले जनवरी में आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा है.
दिसंबर 2021 में खुदरा महंगाई दर 5.66 फीसदी थी, जो जनवरी 2022 में बढ़कर 6.01 फीसदी हो गई है. इसके पीछे की वजह कुछ खाद्य उत्पादों का महंगा होना बताई जा रही है.
6.01 फीसदी की दर रिज़र्व बैंक के संतोषजनक दायरे से ऊपर है. पिछले साल की बात करें तो जनवरी 2021 में कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित महंगाई दर 4.06 फीसदी थी.
बता दें कि रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी बनाते वक्त ख़ास तौर से कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित महंगाई दर को ध्यान में रखता है.
सरकार ने रिज़र्व बैंक को दो फ़ीसदी के उतार-चढ़ाव के साथ खुदरा महंगाई दर चार फ़ीसदी पर बनाए रखने की ज़िम्मेदारी दी है. लेकिन इस बार ये आंकड़ा इस रेंज से बाहर चला गया है.
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सोमवार को राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय ने जो आंकड़े जारी किए, उसके मुताबिक़, खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर जनवरी 2022 में बढ़कर 5.43 फीसदी पर पहुंच गई है, जो दिसंबर 2021 में 4.05 फीसदी थी.
इससे पहले सोमवार को ही रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, "जनवरी की मुद्रास्फ़ीति दर 6 फ़ीसदी हो सकती है, लेकिन इसमें घबराने की कोई बात, हम इस पर नज़र बनाए हुए हैं."
शक्तिकांत दास ने आरबीआई बोर्ड की बैठक के बाद कहा कि भारत का मुद्रास्फ़ीति का अनुमान मज़बूत है और तेल की क़ीमत से लेकर सभी संभावित परिदृश्यों को ध्यान में रखा गया है. दास का ये भी कहना था कि क़ीमत में स्थिरता लाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
बीजेपी ने 'पर्दानशीं महिलाओं' को लेकर चुनाव आयोग से क्या की शिकायत
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भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में 'पर्दानशीं महिलाओं की पहचान तय किए बिना ही वोटिंग कराई जा रही है.'
पार्टी ने इसे लेकर चुनाव आयोग से शिकायत भी की है. उत्तर प्रदेश में सोमवार को दूसरे चरण के चुनाव के दौरान 55 सीटों पर वोट डाले गए.
केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "इसके पीछे सपा, बसपा और कांग्रेस की कोशिश है कि मुस्लिम महिलाएं वोट न दें. ये पार्टियां महिलाओं को बुर्के में बूथों पर जाने और बिना पहचान दिखाए मतदान करने के लिए कह रही हैं."
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केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि इस मामले में चुनाव आयोग को जानकारी दी गई है और फर्ज़ी वोटिंग को रोकने के लिए 'कदम उठाने का आग्रह किया गया है.'
उत्तर प्रदेश में 7 चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. अब तक दो चरण का मतदान हो चुका है. नतीजे 10 मार्च को आएंगे.
Live: बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' 14 फरवरी 2022, सुनिए मोहनलाल शर्मा से
इमरान ख़ान बोले- हालात ऐसे ही रहे तो भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु ताक़तों के टकराने की आशंका. उत्तराखंड, गोवा विधानसभा के साथ उत्तर प्रदेश की 55 सीटों पर मतदान संपन्न. 14 फरवरी की ऐसी ही बड़ी ख़बरों का ख़ास डिजिटल बुलेटिन, सुनिए मोहन लाल शर्मा से.
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डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' फेसबुक पर यहां सुनिए-
हिजाब से दूसरे की आज़ादी का हनन नहीं होता, हाई कोर्ट में वकील की दलील
....में
Author, इमरान क़ुरैशी
पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
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हिजाब मामले में एक याचिकाकर्ता के वकील ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा है कि हिजाब पहनने से दूसरों की आज़ादी के अधिकार का हनन नहीं होता और केंद्रीय विद्यालय में भी हिजाब पहनने को लेकर अनुमति है.
कर्नाटक के कुंदापुर में महिलाओं के कॉलेज की तरफ से याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट में दलील दी कि केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाली मुसलमान छात्राओं को हिजाब पहनने की इजाज़त इस शर्त पर दी जाती है कि उसका रंग स्कूल यूनिफॉर्म के रंग से अलग नहीं होगा.
शुक्रवार को इस मामले में अंतरिम आदेश देने के बाद चीफ़ जस्टिस ऋतु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस ज़ैबुन्निसा मोहिलन्नुदीन काज़ी की हाई कोर्ट की फुल बैंच ने मामले की सुनवाई की.
अपने अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कहा था कि शिक्षण संस्थाओं को इस शर्त पर फिर से खोला जाए कि केस के दौरान कोई भी छात्रा न तो हिजाब पहनेगी और न ही कोई भगवा दुपट्टे ओढ़ेंगी.
वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा, "मुसलमान लड़कियों का हिजाब पहनना और सिख समुदाय के लोगों का पगड़ी पहनना संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार ही है."
ये भी पढ़ें- कर्नाटक हिजाब विवादः क्या कहता है संविधान और क्या हैं इससे जुड़े अहम सवाल
वीडियो कैप्शन, हिजाब पर किस देश में पाबंदी और कैसे क़ानून हैं?
जस्टिस दीक्षित के एक सवाल का जवाब देते हुए देवदत्त कामत ने कहा कि मलेशिया एक इस्लामिक देश है. मलेशियाई सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कहा, "पर्दा करना ज़रूरी नहीं है लेकिन अपने सिर को एक स्कार्फ से ढंकना अनिवार्य है."
शिरुर मठ के मामले का ज़िक्र करते हुए देवदत्त कामत ने कहा कि कपड़ा व्यक्ति के धर्म का भी हिस्सा होता है. उन्होंने कहा,"किसी बाहरी संस्था को ये अधिकार नहीं है कि वो ये कहे कि ये धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है."
रतिलाल गांधी मामले के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "प्रशासन की आड़ में इस पर पाबंदी लगाना या रोक लगाना एक धर्मनिरपेक्ष प्राधिकरण का काम नहीं है."
उन्होंने कहा कि कॉलेज डेवेलपमेंट कमिटी का नेतृत्व स्थानीय विधायक कर रहे हैं और छात्राएं हिजाब पहनें या नहीं ये तय करने का उन्हें क़ानूनी तौर पर कोई हक नहीं है.
एक कमिटी को इस तरह की ताकत देना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा की राज्य की ज़िम्मेदारी से बचने जैसा है. उन्होंने कहा "ये संविधान प्रदत्त आज़ादी के मौलिक अधिकार का मज़ाक उड़ाने जैसा है."
इस मामले की सुनवाई आगे मंगलवार दोपहर 2.30 बजे होनी है.
कोर्ट में सोमवार को इस मामले की सुनवाई से पहले शिवमोगा में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया. अब तक इन छात्राओं को स्कूल आने की इजाज़त थी.
हरिद्वार धर्म संसद और हिजाब मामले पर 'चिंतित' ओआईसी ने कहा- भारत सुनिश्चित करे मुसलमानों की सुरक्षा
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इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने हरिद्वार में हुई 'धर्म संसद' में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए उकसावे वाले बयान, सोशल मीडिया पर मुस्लिम महिलाओं के कथित उत्पीड़न और कर्नाटक के हिजाब विवाद पर चिंता जताई है.
सगंठन ने इन तीन मामलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद से आवश्यक क़दम उठाने की अपील की है.
ओआईसी के ऑफिशियल अकाउंट से एक के बाद एक किए गए ट्वीट में लिखा गया है, ''इस्लामिक सहयोग संगठन, उत्तराखंड के हरिद्वार में हिंदुत्व समर्थकों की ओर से मुसलमानों के नरसंहार के आह्वान, सोशल मीडिया पर मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न और कर्नाटक में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है.''
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अगले ट्वीट में ओआईसी की तरफ़ से अंतरराष्ट्रीय समुदाय, यूएन और मानवाधिकार परिषद से आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है.
ओआईसी ने कहा है, ''ये अपील की जा रही है कि भारत, मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करे. साथ ही हिंसा और हेट क्राइम को बढ़ावा देने वाले तत्वों को न्याय के दायरे में लाए.''
बता दें कि इस्लामिक सहयोग संगठन के 57 देश सदस्य हैं. ओआईसी ख़ुद को मुस्लिम जगत की सामूहिक आवाज़ के तौर पर पेश करता है. संगठन का कहना है कि वो दुनियाभर में शांति और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देने के साथ ही मुस्लिम दुनिया के हितों की रक्षा की कोशिश करता है.
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पिछले साल दिसंबर में हरिद्वार में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया था. इस धर्म संसद में दिए गए भाषण के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे. वीडियो क्लिप में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और हिन्दुओं को हथियार उठाने के लिए कहा जा रहा था.
इस मामले में उत्तराखंड पुलिस ने वसीम रिज़वी उर्फ़ जितेंद्र नारायण त्यागी समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की, जिनमें यति नरसिम्हानंद भी शामिल हैं. ये दोनों फ़िलहाल जेल में हैं. हालाँकि नरसिम्हानंद महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के मामले में गिरफ़्तार हुए हैं.
लालू यादव के बेटे तेज प्रताप ने मांगी वाई श्रेणी की सुरक्षा
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राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपने लिए वाई श्रेणी की सुरक्षा की मांग की है.
केंद्रीय गृह मंत्री और बिहार के पुलिस महानिदेशक को भेजे अपने पत्र में तेज प्रताप यादव ने कहा है कि पिछले दिनों उनके आवास पर असामाजिक तत्वों ने हंगामा किया था और जान से मारने की धमकी भी दी थी.
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उन्होंने पत्र में लिखा है कि इन सब बातों के मद्देनज़र उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाए. तेज प्रताप यादव के पटना स्थित सरकारी आवास पर रविवार शाम को उस समय हंगामा हो गया था, जब कुछ असामाजिक तत्वों ने वहाँ मारपीट की.
आरोप है कि तेज प्रताप के क़रीबी और यूवा आरजेडी के उपाध्यक्ष सृजन स्वराज से भी बदसलूकी की गई. सृजन स्वराज ने भी पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई.
टाटा संस ने इल्कर आयची को बनाया एयर इंडिया का नया सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर
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टाटा संस ने इल्कर आयची को एयर इंडिया का नया सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है. आयची तुर्की एयरलाइंस के चेयरमैन रह चुके हैं.
टाटा संस ने एक बयान जारी कर कहा है कि आयची को ये पद दिए जाने को लेकर सोमवार को एयर इंडिया के डायरेक्टर्स की एक बैठक हुई. बैठक में इल्कर आयची की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है.
आयची 1 अप्रैल 2022 से या उससे पहले एयर इंडिया में अपनी जिम्मेदारी संभालना शुरू करेंगे.
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टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस नियुक्ति पर कहा है, ''इल्कर एविएशन इंडस्ट्री के लीडर हैं, तुर्की एयरलाइंस की मौजूदा सफलता में उनका योगदान है. हम टाटा ग्रुप में इल्कर का स्वागत करते हैं, जहाँ वो एयर इंडिया को नए युग में पहुंचाने के लिए नेतृत्व करेंगे.''
बता दें कि इल्कर आयची का जन्म साल 1971 में इस्तांबुल में हुआ था. वो बिल्केंट यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन विभाग के छात्र रहे हैं. यूके की लीड्स यूनिवर्सिटी और इस्तांबुल की मरमारा यूनिवर्सिटी से भी वो हायर एजुकेशन हासिल कर चुके हैं.
Live: मतदाताओं ने ईवीएम में लॉक किया गोवा की नई सरकार का भविष्य
गोवा से बीबीसी संवाददाता मयूरेश कोण्णूर.
नरेंद्र मोदी ने कहा- कांग्रेस का कंट्रोल जिस परिवार के पास है, वो पंजाब से पुरानी दुश्मनी निकालता है
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पंजाब के जालंधर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधा, साथ ही एनडीए गठबंधन की जीत का भरोसा भी जताया.
जालंधर की रैली में अपने भाषण की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद उनकी इच्छा त्रिपुरमालिनी देवी के दर्शन की थी लेकिन प्रशासन और पुलिस ने व्यवस्था करने से इनकार कर दिया.
पीएम मोदी ने कहा, ''आज मेरी इच्छा थी कि इस कार्यक्रम के बाद त्रिपुरमालिनी देवी जी के चरणों में जाकर नमन करूं,लेकिन यहां के प्रशासन और पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि हम व्यवस्था नहीं कर पाएंगे आप हेलिकॉप्टर से ही चले जाइए.अब यहाँ सरकार का ये हाल है.''
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गांधी परिवार पर निशाना
अपने भाषण में गांधी परिवार पर भी प्रधानमंत्री ने निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सारी सरकारें रिमोट कंट्रोल से ''एक परिवार'' चलाता है और वो संविधान के आधार पर नहीं चलाई जातीं.
प्रधानमंत्री ने कहा, ''कांग्रेस का कंट्रोल जिस परिवार के पास है, वो पंजाब से अपनी पुरानी दुश्मनी निकालता है. जब तक कांग्रेस उस परिवार के कब्जे में है, कभी भी पंजाब का भला कांग्रेस नहीं कर सकती है.''
प्रधानमंत्री ने कहा कि पंजाब को ऐसी सरकार की जरूरत है जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर रहकर काम करे. उन्होंने आगे कहा, ''कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि वो कभी पंजाब के लिए काम नहीं कर सकती और जो काम करना भी चाहता है, वो उसके आगे हज़ार रोड़े खड़े कर देती है.''
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने 1984 के सिख दंगों के अभियुक्तों को पार्टी में बड़े पद दिए हैं. उन्होंने कहा कि सिख दंगों की जाँच के लिए बीजेपी गठबंधन ने ही SIT बनाई थी और पीड़ितों की मदद की थी.
माफ़ियाओं के क़ब्ज़े में है व्यापार- मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि पंजाब में इस वक्त ज़्यादातर कारोबार पर माफ़ियाओं का दबदबा है.
उन्होंने कहा, ''अभी पंजाब में व्यापार-कारोबार को जिस तरह माफियाओं के क़ब्ज़े में दे दिया गया है, ये खेल भाजपा सरकार में नहीं चलने दिया जाएगा.भाजपा की सरकार में यहां का व्यापारी, बिना किसी अत्याचार के, बिना किसी खौफ़ के अपना व्यापार करेगा.''
अकाली दल पर क्या बोले प्रधानमंत्री?
मोदी ने भरोसा जताया कि पंजाब में एनडीए गठबंधन की सरकार बनने जा रही है. उन्होंने कहा, पहली बार बीजेपी सबसे बड़े और भरोसेमंद विकल्प के रूप में आज पंजाब के सामने आई है.
इस बार बीजेपी और अकाली दल अलग-अलग चुनाव में उतरे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में अकाली दल का भी ज़िक्र किया. उनका कहना है कि जब अकाली दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं था तो बीजेपी ने उसका साथ दिया लेकिन बीजेपी के साथ अन्याय हुआ और डिप्टी सीएम का पद अकाली दल ने अपने पास ही रख लिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि पंजाब की भलाई के लिए वो अकाली दल के साथ बने रहे और सरकार नहीं गिरने दी. बता दें कि कृषि कानूनों के मुद्दे पर केंद्र और राज्य में बीजेपी और अकाली दल के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं.
राना अय्यूब पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पर हमलावर हुईं कंगना रनौत
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अभिनेत्री कंगना रनौत ने पत्रकार राना अय्यूब पर ईडी की कार्रवाई की ख़बर शेयर करते हुए पत्रकार और कांग्रेस पर निशाना साधा है.
इंस्टाग्राम की एक स्टोरी में कंगना ने ''ज़िंदगी के चार नियम'' बताए हैं. साथ ही ये भी लिख दिया है कि अगर आप चोर हैं तो आप कांग्रेस को पसंद करेंगे, सच्चे राष्ट्रवादी हैं तो बीजेपी को वोट करेंगे.
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पत्रकार राणा अय्यूब की 1.77 करोड़ की संपत्ति जब्त की है. ईडी का आरोप है कि राना अय्यूब ने डोनेशन में मिली राशि का दुरुपयोग किया.
जबकि राना अय्यूब ने इससे इनकार किया है.
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कंगना ने अपने पोस्ट में लिखा है-
1- धोख़ेबाज़, धोख़ेबाज़ का ही समर्थन करते हैं.
2- जिनको ख़ुद पर भरोसा नहीं होता वो भगवान या किसी दूसरे फेथ में विश्वास नहीं रख सकते.
3-अगर आप सच्चे हैं तो आपको सच्चे गुरू मिलेंगे. अगर आप धोख़ेबाज़ हैं तो आपको गुरू के रूप में धोख़ेबाज़ मिलेंगे.
4-अगर आप चोर हैं तो आप कांग्रेस को पसंद करेंगे और अगर आप एक सच्चे राष्ट्रवादी हैं तो आपका वोट बीजेपी को जाएगा.
इसी के साथ कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी में एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसपर बीजेपी को वोट देने की अपील की गई है.
इस तस्वीर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिख रहे हैं और लिखा है- ''सही चुना था, सही चुनेंगे, कमल चुना था, कमल चुनेंगे.''
अक्सर सुर्ख़ियों में रहती हैं कंगना रनौत
कंगना रनौत अक्सर अपने बयान की वजह से सुर्ख़ियों में रहती हैं. पिछले साल उन्होंने कह दिया था कि 'देश को असली आज़ादी 2014 में मिली.' इस बयान को लेकर काफ़ी विवाद हुआ था. किसान आंदोलन के वक्त किसानों पर उनकी टिप्पणी भी विवादों में रही थी.
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: आशीष की बेल, कल रणनीति बनाएंगे किसान नेता, प्रशांत पांडेय, बीबीसी हिंदी के लिए
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लखीमपुर हिंसा मामले में गिरफ़्तार आशीष मिश्र मोनू की ज़मानत के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने संशोधित कर दिया है.
आशीष के वकीलों ने बताया है कि बेल ऑर्डर में धारा 302 और 120बी आईपीसी जोड़ दिया गया है.
आशीष मिश्र मोनू केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे हैं. चार किसानों और एक पत्रकार पर थार चढ़ाकर उनकी जान लेने के मामले में उन्हें मुख्य अभियुक्त बनाया गया है.
हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त के वकीलों की ओर से दी गई एप्लिकेशन को संशोधित करने के आदेश दिए गए हैं. इस बीच, मंगलवार को किसान नेता राकेश टिकैत लखीमपुर खीरी आएंगे और पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात करेंगे.
रिहाई में फँसा था पेंच
बीती 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस राजीव सिंह की अदालत ने आशीष मिश्र मोनू की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ज़मानत मंजूर की थी.
लखीमपुर में आशीष मिश्र मोनू के वकील अवधेश सिंह ने बताया, "हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को जो ज़मानत ऑर्डर टाइप कराया था उसमें धारा 120 बी और 302 आईपीसी का जिक्र छूट गया था, इसलिए हमलोगों ने ज़मानत आदेश में संशोधन के लिए प्रार्थनापत्र दिया था, इस पर संशोधित आदेश पारित कर दिया."
आशीष मिश्र मोनू जेल से बाहर कब तक बाहर आ सकते हैं, ये पूछे जाने पर उनके वकील अवधेश सिंह ने कहा, "हम आज माननीय हाईकोर्ट का आदेश ज़िला जज की अदालत में दाख़िल कर रहे हैं. अदालत अब जमानत पर प्रतिभूति तय करेगी. फिर उसका सत्यापन होगा. इसके बाद ही रिहाई होगी.''
राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल
आशीष मिश्र को जमानत मिलने पर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं आ चुकी हैं. प्रियंका गाँधी से लेकर अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने चुनावों के बीच आशीष की ज़मानत पर नाराजगी व्यक्त की है. वहीं तिकुनिया में थार गाड़ी की चपेट में आने से मारे गए पीड़ित परिवार के लोगों ने भी उन्हें जमानत मिलने पर हैरानी जताई.
खीरी के धौरहरा इलाके 60 वर्षीय किसान नक्षत्र सिंह के बेटे जगदीप सिंह कहते हैं,"चार किसानों और एक पत्रकार को दिनदहाड़े रौंदने वालों को चार महीनों में बेल मिल जाए इससे बड़ी हैरानी क्या होगी. हमें उम्मीद थी कि 302 और 120बी में ज़मानत नहीं मिलेगी. पर सरकार क्या चाहती है? समझ नहीं आ रहा. किसान इसका जवाब वोट से देंगे. हमें पूरा भरोसा है. हम सुप्रीम कोर्ट जाएँगे हमें न्याय मिलेगा हम सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है.''
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत मंगलवार को लखीमपुर आ रहे हैं और वे पीड़ित परिवारों से मिलकर आगे की रणनीति बनाएँगे.
चुनाव में बनेगा मुद्दा?
आशीष मिश्र मोनू को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जमानत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में चल रहे चुनाव में क्या यह मुद्दा बनेगा, इस सवाल पर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक कहते है,''आशीष को ज़मानत मिलने पर किसानों का गुस्सा बढा है. इससे सत्ता को वोटों का नुकसान भी बढ़ेगा. किसानों को लग रहा सब प्री प्लांड है.
लचर पैरवी की गई है. इसलिए बेल मिली. हम काग़ज़ इकट्ठे कर रहे हम सुप्रीम कोर्ट बेल के ख़िलाफ़ जाएँगे.''
योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर आज़म ख़ान की पत्नी और बेटे ने दिया जवाब
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अखिलेश यादव ख़ुद ही नहीं चाहते कि आज़म ख़ान बाहर आएँ, क्योंकि इससे उनकी कुर्सी को ख़तरा हो सकता है.
आज़म ख़ान इस समय भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं.
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उनकी ज़मानत याचिका हाई कोर्ट में लंबित है. इसको लेकर आज़म ख़ान ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और राज्य सरकार पर आरोप लगाया था कि वो जान-बूझकर इसमें देरी कर रही है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को जल्द सुनवाई का निर्देश देते हुए उनकी याचिका ठुकरा दी थी. आज़म ख़ान रामपुर से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हैं. उनकी पत्नी तंज़ीम फ़ातिमा ने योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी को ग़लत कहा है. एएनआई से बातचीत में तंज़ीमा फ़ातिमा ने कहा- योगी आदित्यनाथ कई ग़लत बयान देते रहते हैं, ये बयान भी इन्हीं में से एक है.
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आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्लाह आज़म ख़ान ने भी योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ख़ुद ही इस मामले में विरोधाभासी बयान देती है. अब्दुल्लाह आज़म ख़ान भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा- एक तरफ़ तो बीजेपी कहती है कि अगर बीजेपी नहीं रहती, तो आज़म ख़ान जेल में नहीं रहते, दूसरी ओर सीएम योगी आदित्यनाथ अलग बात कह रहे हैं.
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उन्होंने कहा कि बीजेपी को इस मामले पर पहले अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए. अब्दुल्लाह आज़म ख़ान ने कहा- कोई भी आज़म ख़ान की अनुपस्थिति की भरपाई नहीं कर सकता. लेकिन अगर कोई ये समझ रहा है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को जेल भेजना अच्छा है, तो ये बीजेपी की ग़लतफ़हमी है. लोग इसे ग़लत समझते हैं. वे 10 मार्च को इसकी प्रतिक्रिया देखेंगे.
सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर केसीआर के सवाल पर आया बीजेपी का जवाब
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सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ी हुई है. सर्जिकल स्टाइक के सबूत को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद मामला गरमाया हुआ है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, हिमंता बिस्वा सरमा के बयान की निंदा कर उनके इस्तीफ़े की मांग रख चुके हैं और अब के चंद्रशेखर राव ने भी सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगा है.
इसके बाद से ही बीजेपी के कई नेता उनपर निशाना साध रहे हैं. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और जी किशन रेड्डी ने के चंद्रशेखर राव के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया है.
सोमवार को राव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगकर कुछ भी ग़लत नहीं किया है. उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी ने अगर सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे हैं, तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. इसमें क्या गलत है, अब मैं भी पूछ रहा हूँ, केंद्र सरकार को सबूत दिखाना चाहिए. बीजेपी फ़ेक प्रोपेगैंडा फैलाती है, इसलिए लोग सबूत मांग रहे हैं. ''
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ये सेना की बहादुरी पर सवाल है-अनुराग ठाकुर
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने टीआरएस चीफ के चंद्रशेखर राव के इस बयान पर कहा है कि कांग्रेस और टीआएएस दोनों को जवाब देना होगा कि वो भारतीय सेना के साथ हैं या पाकिस्तान के साथ.
ठाकुर का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव के वक्त विपक्ष कहीं हिजाब तो कहीं सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे निकाल रहा है. उन्होंने कहा कि टीआरएस की नींव ख़िसक रही है इसलिए केसीआर की बौख़लाहट दिख रही है.
अनुराग ठाकुर का कहना है, ''उत्तर प्रदेश के चुनाव के समय इन सबको सर्जिकल स्ट्राइक याद आ रही है. पाकिस्तान के बोल,कांग्रेस के बोल और अब टीआरएस के बोल एक जैसे ही हैं. जब-जब चुनाव आता है तब-तब नए-नए प्रयोग करते हैं. कोई हिजाब का करता है तो कोई सर्जिकल स्ट्राइक का करता है क्योंकि विकास के मुद्दे पर ये बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकते. ''
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अनुराग ठाकुर ने कहा है कि चंद्रशेखर राव ने सेना की बहादुरी पर सवाल खड़ा किया है जो उनकी मानसिकता को दिखाता है.
उन्होंने कहा, ''देश इनको कभी माफ़ नहीं करेगा. पाकिस्तान और दुनिया ने मान लिया था कि भारतीय सैनिकों ने किस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था. जवाब कांग्रेस और टीआरएस को देना होगा कि वो भारतीय सेना के साथ हैं या पाकिस्तान के साथ हैं.''
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने भी के चंद्रशेखर राव के इस बयान की निंदा की है. उन्होंने कहा, ''ये बयान संवेदनशीलता, गैर-जिम्मेदारी, अज्ञानता को दर्शाता है और ये एक मुख्यमंत्री की अक्षमता है.''
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केसीआर कर चुके हैं सरमा के इस्तीफ़े की मांग
शनिवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने असम के मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए पीएम मोदी से सवाल पूछे थे.
केसीआर ने कहा था, ''प्रधानमंत्री मोदी जी, क्या यही बीजेपी का संस्कार है? क्या हमारा यही हिन्दू धर्म है? क्या हमारे देश की यही मर्यादा है? आपका मुख्यमंत्री पूछ रहा है कि किस बाप से पैदा हुए. मेरा सिर शर्म से झुक रहा है. मेरी आँखों में पानी आ रहा है. ये अच्छी बात नहीं है.''
केसीआर ने कहा, ''यह देश के लिए अच्छी बात नहीं है. एक सांसद के बारे में आपका मुख्यमंत्री क्या यह पूछ सकता है कि किस बाप से पैदा हुए? क्या हमारा यही संस्कार है? क्या महाभारत, रामायण, गीता और वेद से हमें यही सिखाया गया है? हिन्दू धर्म को बेचकर उसके नाम पर वोट कमाने वाले, आप गंदे लोग हो. नड्डा जी क्या हमारा यही संस्कार है? अगर धर्म को मानते हो तो उस मुख्यमंत्री को बर्खास्त करो. क्या देश में ऐसा मुख्यमंत्री हो सकता है? सहनशीलता की भी एक सीमा होती है.''
असम के मुख्यमंत्री ने क्या कहा था?
हिमंता बिस्वा सरमा ने उत्तराखंड में 11 फ़रवरी को एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
असम के मुख्यमंत्री ने कहा था, ''राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगा था. अरे भाई आप कौन से पिता के बेटा हैं, हमने कभी प्रमाण मांगा है क्या? मेरे सैनिक से सबूत मांगने का क्या अधिकार है. क्या आपका बिपिन रावत पर भरोसा नहीं था? जब सेना ने कह दिया कि सर्जिकल स्ट्राइक किया तो मान लो किया है. मैंने इस बात का कभी सबूत नहीं मांगा कि आप राजीव गांधी के बेटे हैं.''
इसी के बाद से सर्जिकल स्ट्राइक पर नई बहस शुरू हो गई है.
LIVE 607 यूपी चुनाव Live: बरेली में दूसरे चरण की वोटिंग जारी
यूपी के बरेली में मतदान केंद्र के बाहर से बीबीसी संवाददाता रॉक्सी गागडेकर छारा. (कैमरा- पवन जायसवाल)
यूक्रेन से तनाव के बीच रूस ने कहा- अमेरिका के साथ रिश्ते 'निम्नतम स्तर' पर
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हाल के दिनों में रूस और अमेरिका के बीच कूटनीतिक कोशिशों के बीच रूसी सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि दोनों देशों के रिश्ते 'निम्नतम स्तर' पर हैं.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के चैनल्स खुले हुए हैं, लेकिन जहाँ तक द्विपक्षीय रिश्तों की बात है, सिर्फ़ नकारात्मक ही बात कर सकते हैं.
उन्होंने कहा- हम बहुत निचले स्तर पर हैं. राष्ट्राध्यक्षों में बातचीत हो रही है. अन्य मोर्चों पर भी बातचीत हो रही है. ये एक सकारात्म पक्ष है क्योंकि कुछ वर्षों पहले दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं थी. इस तरह का संपर्क भी नहीं था. क्रेमलिन के प्रवक्ता का ये बयान ऐसे समय आया है, जब रूस ने यूक्रेन से लगी सीमा पर क़रीब 130,000 सैनिकों को तैनात किया है.
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अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने अपने नागरिकों से यूक्रेन छोड़कर जाने को कहा है. पिछले दिनों रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच बातचीत भी हुई थी. अमेरिका और कई अन्य पश्चिमी देश रूस को कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि अगर उसने यूक्रेन पर हमला किया, तो इसके नतीजे उसे भुगतने होंगे.
योगी आदित्यनाथ ने गजवा ए हिन्द और आज़म ख़ान पर क्या कहा?
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उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है. इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में वो विपक्ष ख़ासकर समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधते नज़र आए.
साथ ही आज़म ख़ान, हिजाब विवाद को लेकर अपनी राय रखते नज़र आए. योगी आदित्यनाथ का दावा है कि उनके कार्यकाल में पिछले 5 साल में उत्तर प्रदेश में कोई दंगा नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा, ''क़ानून का भय, हर उस व्यक्ति के मन में होना चाहिए, जो सुरक्षा के लिए ख़तरा है. यही फ़र्क है, 2017 से पहले हर 3-4 दिन के अंदर एक बड़ा दंगा यूपी में होता था. महीनों तक प्रदेश में कर्फ्यू रहता था, अराजकता चरम पर थी. आज तो प्रदेश में 5 साल में कोई दंगा नहीं हुआ.''
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'गजवा-ए-हिन्द' वाले ट्वीट पर क्या बोले योगी?
रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ट्वीट में 'गजवा-ए-हिन्द' का ज़िक्र किया था. इस ट्वीट में योगी ने लिखा था, ''भारत शरीयत के हिसाब से नहीं, संविधान के हिसाब से ही चलेगा.''
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एएनआई की तरफ़ से इस ट्वीट को करने का मतलब पूछा गया तो योगी ने बिना किसी का नाम लिए ये कहा कि भारत में विकास सबका होगा लेकिन तुष्टिकरण किसी का नहीं होगा.
उन्होंने कहा, ''ये नया भारत संविधान के अनुरूप चलेगा, शरीयत के अनुरूप नहीं. मैं इस बात को भी स्पष्टता के साथ कहता हूँ, 'गजवा-ए-हिन्द' का सपना क़यामत के दिन तक भी साकार नहीं होगा.''
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कर्नाटक में चल रहे हिजाब को लेकर विवाद पर योगी आदित्यनाथ का कहना है कि ये स्कूलों के अनुशासन का विषय है इसलिए ड्रेस कोड स्कूलों में लागू होना चाहिए.
उन्होंने कहा, ''भारत की व्यवस्था संविधान के अनुरूप चलनी चाहिए, हमारी स्वयं की पसंद-नापसंद देश के ऊपर लागू नहीं कर सकते, संस्थाओं के ऊपर लागू नहीं कर सकते.''
योगी ने आगे कहा, ''क्या मैं उत्तर प्रदेश के अंदर सभी कर्मचारियों को या सभी लोगों को बोल सकता हूं कि आप भी भगवा धारण करें?''
आज़म ख़ान पर क्या बोले योगी आदित्यनाथ?
हाल ही में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय मंत्री आशीष मिश्र टेनी को जमानत मिली है लेकिन आज़म ख़ान को जमानत नहीं मिलती. इस पर जब एएनआई ने योगी से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव भी नहीं चाहते कि आज़म ख़ान जेल से बाहर आएं क्योंकि इससे अखिलेश की कुर्सी ख़तरे में पड़ जाएगी.
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योगी आदित्यनाथ का कहना है, ''अखिलेश यादव से पूछा जाना चाहिए कि ये जो मामले हैं जो आज़म ख़ान पर हैं या अन्य लोगों के मामले हैं. ये न्यायालय से जुड़े मामले हैं, इनका राज्य सरकार से कोई लेना देना नहीं है. ज़मानत देने का काम न्यायालय का होता है, राज्य सरकार से इसको जोड़ना सही नहीं है.''
राहुल गांधी ने कहा- मोदी ने मारे गए किसानों के लिए दो मिनट का मौन तक नहीं रखा
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कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने कहा है कि पीएम मोदी अपने हर भाषण में कहते थे कि वे लोगों के बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपए जमा कराएँगे, लेकिन क्या ये किसी को मिला.
पंजाब के होशियापुर में एक चुनावी रैली में राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार और रोज़गार पर पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए.
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उन्होंने कहा- पीएम मोदी ने दो करोड़ युवाओं को रोज़गार देने की बात की थी. क्या किसी को रोज़गार मिला. वे भ्रष्टाचार और रोज़गार पर क्यों नहीं बोलते. उन्होंने नोटबंदी की, जीएसटी लगाया, लेकिन इससे फ़ायदा किसका हुआ?
राहुल गांधी ने कहा कि एक साल तक पंजाब का किसान जाड़े में भूखे खड़े रहे और पीएम मोदी ने उनकी कड़ी मेहनत को दो-तीन अरबपतियों को देने की कोशिश की. उन्होंने कहा- पीएम मोदी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए किसानों के लिए संसद में दो मिनट का मौन तक नहीं रखा. उन्होंने मुआवज़ा भी नहीं दिया, जबकि राजस्थान और पंजाब की सरकारों ने दिया.