पंजाब: कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की आख़िरी सूची, सीएम चन्नी दो सीटों से लड़ेंगे चुनाव

पंजाब चुनाव के लिए रविवार को प्रत्याशियों की जारी अंतिम सूची में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चमकौर साहिब के बाद अब भदौर सीट से भी उम्मीदवार बनाया है.

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद and प्रियंका झा

  1. पंजाब: कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की आख़िरी सूची, सीएम चन्नी भदौर से भी आज़माएंगे किस्मत

    पंजाब चुनाव

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    पंजाब चुनाव के लिए रविवार को प्रत्याशियों की जारी अंतिम सूची में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चमकौर साहिब के बाद अब भदौर सीट से भी उम्मीदवार बनाया है. चन्नी दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. इसके साथ ही पार्टी ने तीन मौजूदा विधायकों को सूची से बाहर कर दिया है.

    कांग्रेस की आख़िरी सूची नामांकन भरने की अंतिम तारीख़ से दो दिन पहले आई है. पंजाब में 20 फ़रवरी को एक चरण में मतदान होना है. सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी अब राज्य की सभी 117 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान कर चुकी है.

    राहुल गाँधी की ओर से यह कहे जाने के बाद कि पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद पंजाब में मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान करेगी, चरणजीत सिंह चन्नी के दो सीटों से चुनाव लड़ने की घोषणा की गई थी.

    दो सीटों से चुनाव लड़ने को लेकर आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीएम चन्नी पर तंज़ कसते हुए कहा कि "आप" के अंदरूनी सर्वे में यह पता लगा है कि मुख्यमंत्री अपनी चमकौर साहिब सीट पर चुनाव हारने वाले हैं.

    कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री औप चंडीगढ़ से पूर्व सांसद पवन बंसल के बेटे मनीष बंसल को बरनाला विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है.

    पार्टी ने पटियाला के पूर्व मेयर विष्णु शर्मा को पटियाला शहरी सीट से टिकट दिया है. बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी पटियाला शहरी सीट से ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.

  2. प्रियंका गांधी को लेकर बोलीं अपर्णा यादव- केवल नारे देती हैं...

    अपर्णा यादव

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    बीजेपी नेता अपर्णा यादव ने रविवार को कांग्रेस के "लड़की हूं, लड़ सकती हूं नारे" पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी बस नारे देती हैं लेकिन कुछ करती नहीं हैं.

    एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपर्णा यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण के नारे दे रही है और पार्टी ने पंजाब में एक भी महिला को टिकट नहीं दिया है.

    बीजेपी नेता ने कहा, "इन दिनों कांग्रेस "लड़की हूं, लड़ सकती हूं" का नारा लगा रही है. एक न्यूज़ आर्टिकल के मुताबिक़, पंजाब महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बलवीर रानी सोढी ने कहा कि टिकट बंटवारे में महिलाओं को एकदम दरकिनार किया गया है. प्रियंका गांधी सिर्फ़ नारा देती हैं लेकिन कुछ करती नहीं हैं."

    बीते पांच सालों में बीजेपी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए अपर्णा ने कहा कि राज्य में योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में एक भी दंगा या घोटाला नहीं हुआ है. उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान 10 फ़रवरी को है.

    राज्य में सात चरणों में 7 मार्च तक मतदान होंगे और 10 मार्च को नतीजे घोषित किए जाएंगे. अपर्णा ने कहा कि राज्य में बीजेपी सरकार के अंतर्गत कानून व्यवस्था सुधरी है और अब प्रदेश गुंडा राज से मुक़्त हो गया है.

  3. उन्हें सिर्फ़ इटली में रह रही 'नानी' की परवाह, राहुल-प्रियंका पर बोले योगी आदित्यनाथ

    योगी आदित्यनाथ

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश कोरोना वायरस महामारी का सामना कर रहा था, ऐसे वक़्त में पार्टी को सिर्फ़ इन दोनों भाई-बहनों की "इटली में रह रही नानी" की परवाह थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, विधानसभा चुनावों से पहले रविवार को एक सभा में आदित्यनाथ ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी पर निशाना साधा और समाजवादी पार्टी "चाचा-भतीजा पार्टी" बताया.

    सीएम ने दावा किया कि यूपी में बीजेपी से पहले आई सरकारों के पास विकास के लिए समय नहीं था. उन्होंने आगे कहा, "सैफ़ई (सपा का गढ़) का विकास ही चाचा-भतीजा पार्टी के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी था. "बहनजी"(मायावती) के लिए अपने भतीजे का विकास ही मायने रखता था."

    सीएम आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा, "जब मुसीबत आई तब भाई-बहन की पार्टी ने देश की परवाह नहीं की, उन्होंने सिर्फ़ इटली में रह रही "नानी" के बारे में सोचा."

    आदित्यनाथ ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी यूपी की सत्ता में आती है तो राज्य में "माफ़िया राज" होगा. जो माफ़िया अभी जेल में बंद हैं, वो बाहर आ जाएंगे.

  4. रूस-यूक्रेन संकट को लेकर ब्रिटेन इतना परेशान क्यों है

    बोरिस जॉनसन

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    दूसरे पश्चिमी देशों की तरह ब्रिटेन भी यूक्रेन की सहायता कर रहा है. अगर रूस, यूक्रेन पर हमला करता है तो ब्रिटेन आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा, ऐसी चेतावनी ब्रिटेन की तरफ़ से रूस को दी जा रही है.

    ब्रिटेन, यूक्रेन को टैंक रोधी हथियार और बख़्तरबंद गाड़ियां भी मुहैया करा रहा है. ऐसा भी वादा किया गया है कि अगर रूस की सेना यूक्रेन की सीमा में घुसती है तो ब्रिटेन भी नेटो सैन्य गठबंधन के अपनी फौज़ भेजेगा.

    आख़िर ब्रिटेन इस संभावित संघर्ष में क्यों शामिल हो रहा है?

    साल 1938 में जर्मनी के चेकोस्लोवाकिया पर आक्रमण की कोशिश पर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री नेविल चेम्बरलेन की टिप्पणी की लंबे समय तक आलोचना हुई थी. उन्होंने इसे कुछ इस तरह बताया था- "एक दूर के देश में उन लोगों के बीच झगड़ा जिनके बारे में हम कुछ नहीं जानते."

    लेकिन उनकी ये टिप्पणी सभी नीति-निर्माताओं के लिए एक चुनौती की तरह है. ये इसलिए क्योंकि ये सोचने को मजबूर करती है कि क्या दो देशों के बीच चल रहे संघर्ष में कूटनीतिक रूप से और यहाँ तक की सैन्य रूप से शामिल होना चाहिए. इसके नतीजे दूरगामी हो सकते हैं.

  5. मध्य प्रदेश: बड़ी संख्या में गायों की मौत के बाद गौशाला पर केस दर्ज़

    गौशाला

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    भोपाल के पास ही बरासिया नाम के क़स्बे में एक गौशाला के अंदर रविवार को बड़ी संख्या में गायों की मौत हो गई. इसके बाद ज़िला अधिकारियों ने गौशाला प्रबंधन के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ की है.

    एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि भोपाल ज़िला अधिकारी अविनाश लावनिया के निर्देश पर बरासिया के सब-डिविज़नल मैजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास राजधानी भोपाल से क़रीब 45 किलोमीटर दूर स्थित गौशाला के ख़िलाफ केस दर्ज़ किया गया है.

    अविनाश लावनिया ने रविवार को ही इस गौशाला का दौरा किया था. लावनिया ने एक बयान में कहा कि गौशाला के मौजूदा प्रबंधन को हटा दिया गया है और जनपद पंचायत के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर (सीईओ) को रिसीवर नियुक्त किया गया है. उन्होंने बताया कि फ़िलहाल गायों की मौत का कारण पता लगाने के लिए ऑटोप्सी का आदेश दिया गया है.

    लावनिया ने बरासिया के एसडीएम को गौशाला के निदेशक पर भी गायों के शव एक जगह इकट्ठा करने और दिशानिर्देशों के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार न किए जाने को लेकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

    इस बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इस गौशाला में गायों की हड्डियों और चमड़े का व्यापार चल रहा था. दिग्विजय का आरोप है कि यह व्यापार बीजेपी की महिला नेता चला रही थीं.

    दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस गौशाला में 500 से ज़्यादा गायों की मौत हुई है. उन्होंने इसके निदेशकों के ख़िलाफ गौहत्या का केस चलाए जाने की मांग भी की.

    वहीं, बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि दिग्विजय सिंह को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बारे में बात करनी चाहिए, जिन्होंने केरल की सड़क पर बीफ़ खाया था.

  6. पेगासस स्पाइवेयर ख़रीद का यूएन में वोटिंग से कोई लेनादेना नहीं: अकबरुद्दीन

    सैयद अकबरुद्दीन

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    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में पेगासस स्पाइवेयर की ख़रीद और संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के पक्ष में भारत के वोट के बीच संबंध होने के दावे को यूएन में तत्कालीन स्थायी राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने ख़ारिज कर दिया है.

    शुक्रवार को छपी न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पेगासस सॉफ्टवेयर की ख़रीद के बाद साल 2019 में भारत ने फ़लस्तीन के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में यरूशलम के पक्ष में वोट किया था.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, मौजूदा समय में कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के डीन सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, "यूएन वोट को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा एकदम बक़वास है." जिस समय यह वोटिंग हुई थी, उस समय अकबरुद्दीन ही संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत थे.

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2017 में नरेंद्र मोदी दशकों बाद इसराइल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे. इस यात्रा से पहले तक भारत की फ़लस्तीन के लिए नरम रुख रखता था और इसराइल के साथ उसके रिश्ते ठंडे थे. हालांकि इस दौरे पर पीएम मोदी अपने तत्कालीन इसराइली समकक्ष बिन्यामिन नेतन्याहू समुद्र किनारे नंगे पैर टहलते दिखे.

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों के बीच इस ग़र्मजोशी की वजह 2 अरब डॉलर का वह रक्षा सौदा था जिसके तहत इसराइल से भारत ने मिसाइल सिस्टम और पेगासस स्पाइवेयर ख़रीदा था.

    रिपोर्ट के मुताबिक़, इसके कुछ ही महीनों बाद नेतन्याहू ने भारत का दौरा किया और जून 2019 में भारत ने फ़लस्तीन के एक मानवाधिकार संगठन को ऑब्ज़र्वर का दर्जा देने के ख़िलाफ जाकर संयुक्त राष्ट्र संघ के आर्थिक और सामाजिक परिषद् इकाई में यरुशलम के पक्ष में वोट दिया था.

  7. नाथूराम गोडसेः महात्मा गांधी की हत्या करने वाले से जुड़े राज़

    गोडसे

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    30 जनवरी 1948 की शाम, नाथूराम विनायक गोडसे ने बेहद क़रीब से तीन गोली दाग कर भारत के उस वक्त के सबसे जानेमाने नेता महात्मा गांधी की हत्या कर दी.

    जिस वक्त ये हत्या हुई उस वक्त गांधी देश की राजधानी, दिल्ली में एक प्रार्थना सभा के लिए निकले थे.

    38 वर्षीय जोशीले गोडसे एक दक्षिणपंथी पार्टी हिंदू महासभा के सदस्य थे. इस पार्टी ने गांधी पर मुसलमान समर्थक होने और पाकिस्तान के प्रति नरमी दिखाकर हिंदुओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया था.

    उन्होंने विभाजन के वक़्त हुई हिंसा और रक्तपात का आरोप भी गांधी पर लगाया जिसके बाद अगस्त 1947 में ब्रिटेन से आज़ाद होकर पाकिस्तान बना था.

    गांधी की हत्या के एक साल बाद ट्रायल कोर्ट ने गोडसे को सज़ा-ए-मौत सुनाई. हाई कोर्ट की सुनवाई में सज़ा को बरकरार रखने का आदेश दिया गया जिसके बाद नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को फ़ांसी दे दी गई.

  8. सरकारी नौकरी के मामले में नौजवानों का भविष्य कैसे दाँव पर लग गया

    छात्रों का विरोध प्रदर्शन

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    बाइस साल के लखन कुमार सिंह बिहार के सीवान ज़िले के रहने वाले हैं. नौकरी की तैयारी के लिए पिछले चार साल से पटना में हैं. उनके घर की माली हालत ठीक नहीं है. बड़े भाई बीटेक करने के बाद भी बेरोज़गार हैं, वहीं छोटे भाई पढ़ाई कर रहे हैं. ऐसे में घर की उम्मीदें लखन सिंह पर टिकी हैं.

    पटना में किराए के एक कमरे में रह रहे लखन के हर महीने का ख़र्च करीब 6 हज़ार है लेकिन दिक़्क़त सिर्फ़ ये नहीं है. असली समस्या है कि लखन सिंह जिस सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, वो अभी कोसों दूर है.

    लखन सिंह, 23 फ़रवरी को होने वाली रेलवे की ग्रुप 'डी' परीक्षा देने वाले हैं. इस परीक्षा के लिए उन्होंने 2019 में फ़ॉर्म भरा था, लेकिन रेलवे भर्ती बोर्ड ने आख़िरी समय पर नियम बदल दिया.

    लखन सिंह बताते हैं, ''भर्ती के नोटिफ़िकेशन में सिर्फ़ एक ही परीक्षा सीबीटी 1 (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) की बात कही गई थी. अब 24 जनवरी को नोटिफ़िकेशन निकालकर कहा गया कि सीबीटी 1 पास करने के बाद सीबीटी 2 परीक्षा भी देनी होगी. पहले ग्रुप-डी की नौकरी के लिए सिर्फ सीबीटी 1 ही होती थी. सरकार ने जब एक परीक्षा लेने में तीन साल लगा दिए तो सोचिए कि अगली परीक्षा में कितना समय लगेगा? ये छात्रों के साथ धोखा है.''

  9. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 30 जनवरी 2022, सुनिए मोहनलाल शर्मा से

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  10. सोमवार को देशभर में केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ 'विश्वासघात दिवस' मनाएंगे किसान, राकेश टिकैत का एलान

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    केंद्र सरकार पर वादाख़िलाफ़ी का आरोप लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) नेता राकेश टिकैत ने एलान किया कि सोमवार को किसान संगठन पूरे देश में "विश्वासघात दिवस" मनाएंगे.

    बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दावा किया कि 9 दिसंबर को सरकार की तरफ़ से वादों वाली चिट्ठी मिलने के बाद किसानों ने एक साल से भी लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन को वापस लिया था. लेकिन ये वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं.

    राकेश टिकैत ने ट्वीट किया, "सरकार द्वारा किसानों से वादाख़िलाफ़ी के ख़िलाफ़ कल 31 जनवरी को देशव्यापी विश्वासघात दिवस मनाया जाएगा. सरकार के 9 दिसंब के जिस पत्र के आधार पर आंदोलन स्थगित किया गया था, सरकार ने उनमें से कोई वादा पूरा नहीं किया है.!"

    राकेश टिकैत

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    संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले दिल्ली की सीमाओं पर अलग-अलग किसान संगठनों ने नवंबर 2020 में आंदोलन शुरू किया था. किसानों ने एक साल से भी ज़्यादा समय तक बीजेपी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ सीमाओं पर धरना दिया था.

    सिंघू, टीकरी और गाज़ीपुर सीमा पर एक साल से भी लंबे समय तक टिके रहे किसानों ने तीनों कानून वापस लिए जाने के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून लाए जाने की भी मांग की थी.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने का एलान किया था, जिसके बाद किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया था.

  11. अमेरिका की वो जगह जहां महात्मा गांधी की अस्थियां रखने का दावा किया जाता है

    महात्मा गांधी

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    74 साल पहले आज ही के दिन भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी.

    भारत के बाहर शायद कैलिफ़ोर्निया ही एकमात्र ऐसी जगह जहां के एक आध्यात्मिक स्थल के बारे में दावा किया जाता है कि महात्मा गांधी की अस्थियों की राख का एक हिस्सा उनके पास रखा गया है.

    हॉलीवुड से कुछ ही मिनट की दूरी पर गांधी वर्ल्ड पीस मेमोरियल स्थित है. परमहंस योगानंद ने साल 1950 में इसे बनवाया था. यह समंदर के दृश्य के साथ हरे-भरे बगीचों और झरनों के बीच स्थित है.

    और यहाँ चीन का एक प्राचीन पत्थर का ताबूत है जिसमें कथित तौर पर महात्मा गांधी की राख पीतल और चांदी के बॉक्स में है.

  12. छात्रों के समर्थन में आए राहुल गाँधी, बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर केंद्र पर साधा निशाना

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    कांग्रेस के पूर्वाध्यक्ष और सांसद राहुल गाँधी ने रविवार को देश में बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर एक बार फिर से केंद्र सरकार पर निशाना साधा. राहुल ने कहा कि बेरोज़गारी बढ़ने की वजह से ही छात्रों को प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है.

    वायनाड सांसद राहुल ने रविवार को एक मीडिया रिपोर्ट ट्वीट की जिसमें बताया गया था कि देश के 3.03 करोड़ युवाओं के पास काम नहीं है और बेरोज़गारी दर लॉकडाउन के दौर से भी ज़्यादा पहुंच गई है.

    रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि सिर्फ़ चार सालों में 1.26 करोड़ युवा बेरोज़गार हो गए हैं. राहुल ने इस रिपोर्ट के साथ लिखा, "ये आँकड़े बताते हैं कि स्टूडेंट्स सत्याग्रह करने पर मजबूर क्यों हैं. एक अहंकारी व्यक्ति अब भी आँख बंद करे बैठा है!"

    राहुल गांधी

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    राहुल ने यह ट्वीट ऐसे समय में किया है जब रेलवे भर्ती बोर्ड की एनपीसी परीक्षा लेवल 1 के परिणामों में धांधली का दावा कर रहे छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

    इस बीच रेल मंत्रालय ने धांधली के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यों वाली एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर दी है. वहीं, छात्रों को अपनी परेशानियां कमेटी के आगे रखने के लिए 16 फ़रवरी तक का समय दिया गया है. छात्रों से बातचीत के बाद कमेटी 4 मार्च को अपने सुझाव सौंपेगी.

  13. सपा सरकार में ही क्यों होते थे दंगे, कासगंज में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

    राजनाथ सिंह

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    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को उत्तर प्रदेश के कासगंज में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए यह कहा कि पार्टी जब सत्ता में थी तब यूपी के अंदर गुंडे-बदमाश बेख़ौफ़ खुले में घूमते थे और दंगे होते थे.

    राजनाथ सिंह ने कहा, "अब (बीजेपी कार्यकाल में) बदमाशों और माफ़ियाओं को संरक्षण नहीं मिलता बल्कि अवैध संपत्तियों पर बुलडोज़र चलते हैं."

    अगले माह से शुरू हो रहे विधानसभा चुनावों से पहले प्रचार करने पहुंचे राजनाथ सिंह ने कहा, "मैं जानना चाहता हूं कि समाजवादी पार्टी की सरकार में ही दंगे क्यों हुए. उनकी सरकार में गुंडे-बदमाश ख़ुले में क्यों घूमते थे."

    कासगंज में 20 फ़रवरी को तीसरे चरण में मतदान होना है. उत्तर प्रदेश में 10 फ़रवरी से सात चरणों में वोटिंग होगी. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की उपलब्धियां गिनाते हुए रक्षा मंत्री बोले, "भाजपा सरकार में राज्य के अंदर बीते पांच सालों में एक भी दंगा नहीं हुआ."

    उत्तर प्रदेश में पिछली सरकार समाजवादी पार्टी की थी. बीजेपी ने साल 2017 के विधानसभा चुनावों में सपा को हराकर जीत हासिल की थी.

    राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था की तारीफ़ करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "जब कानून व्यवस्था अच्छी हो तो विकास भी तेज़ी से होता है. यदि आज उत्तर प्रदेश में विकास हो रहा है तो इसके पीछे बेहतर कानून-व्यवस्था है."

    विपक्षी पार्टियों सपा, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस पर बरसते हुए राजनाथ ने कहा कि जो लोग अपनी जड़ों से कट जाते हैं वो कटी पतंग जैसे बन जाते हैं.

  14. महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी को क्या क्या किया था? Vivechna

    वीडियो कैप्शन, महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी को क्या क्या किया था? Vivechna

    30 जनवरी, 1948 को गांधी हमेशा की तरह सुबह साढ़े तीन बजे उठे. उन्होंने सुबह की प्रार्थना में हिस्सा लिया.

    इसके बाद उन्होंने शहद और नींबू के रस से बना एक पेय पिया और दोबारा सोने चले गए. जब वो दोबारा उठे तो उन्होंने ब्रजकृष्ण से अपनी मालिश करवाई और सुबह आए अख़बार पढ़े.

    इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के भविष्य के बारे में लिखे अपने नोट में थोड़ी तब्दीली की और रोज़ की तरह आभा से बांग्ला भाषा सीखने की अपनी मुहिम जारी रखी.

    नाश्ते में उन्होंने उबली सब्ज़ियां, बकरी का दूध, मूली, टमाटर और संतरे का जूस लिया.

    उधर शहर के दूसरे कोने में सुबह सात बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के छह नंबर वेटिंग रूम में जब नारायण आप्टे और विष्णु करकरे पहुंचे, उस समय तक नाथूराम गोडसे जाग चुके थे.

  15. महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे 30 जनवरी, 1948 को क्या कर रहे थे?

    गांधी और गोडसे

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    अपने अंतिम दिनों में गांधी इस हद तक अपनी मौत का पूर्वानुमान लगा रहे थे कि लगता था कि वो ख़ुद अपनी मौत के षडयंत्र का हिस्सा हैं.

    20 जनवरी को जब उनकी हत्या का पहला प्रयास किया गया उसके बाद से अगले दस दिनों तक उन्होंने अपनी बातचीत, पत्रों और प्रार्थना सभा के भाषणों में कम से कम 14 बार अपनी मृत्यु का ज़िक्र किया.

    21 जनवरी को उन्होंने कहा, "अगर कोई मुझ पर बहुत पास से गोली चलाता है और मैं मुस्कुराते हुए, दिल में राम नाम लेते हुए उन गोलियों का सामना करता हूं तो मैं बधाई का हक़दार हूं."

    अगले दिन उन्होंने कहा कि "ये मेरा सौभाग्य होगा अगर ऐसा मेरे साथ होता है."

    29 जनवरी, 1948 की शाम राजीव गांधी को लिए इंदिरा गांधी, नेहरू की बहन कृष्णा हठीसिंह, नयनतारा पंडित और पद्मजा नायडू गांधी से मिलने बिरला हाउस गए थे.

  16. जबरन धर्मांतरण गलत, पुराने कानून में ही रोकने के प्रावधान: केजरीवाल

    अरविंद केजरीवाल

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    पंजाब पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि लालच देकर और डरा-धमकाकर जबरन धर्म परिवर्तन करवाना गलत है और देश के मौजूदा कानून में ऐसे कई प्रावधान हैं जो इसे रोक सकते हैं.

    केजरीवाल ने यह भी कहा कि धर्म चुनना किसी व्यक्ति का निजी मामला है और किसी भी सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

    दिल्ली के मुख्यमंत्री चुनावी राज्य पंजाब में थे, जहां अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने ईसाई मिशनरियों पर सीमावर्ती गांवों में सिख परिवारों का जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था. हालांकि, अमृतसर सूबे के बिशप ने इस आरोप का खंडन किया है.

    केजरीवाल ने कहा, "मुझे लगता है कि कोई व्यक्ति किस धर्म का पालन करना चाहता है, ये उसकी निजी पसंद है. इसमें किसी को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. किसी सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने का हक़ नहीं है और यह हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जब केजरीवाल से धर्म परिवर्तन रोधी कानून को लेकर उनकी पार्टी के रुख पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "लेकिन किसी को लालच देकर या जबरन धर्म परिवर्तन करवाना गलत है."

    कई राज्यों में धर्मांतरण रोधी कानून ला चुकी बीजेपी पर इशारों में तंज कसते हुए केजरीवाल ने कहा, "मौजूदा समय में भी देश में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं. जो लोग नए कानून की बात करते हैं, वे जो कर रहे हैं, वह राजनीति से प्रेरित है."

  17. बंगाल के गवर्नर का सीएम ममता पर तंज- व्यक्ति नहीं कानून से चलता है लोकतंत्र

    जगदीप धनखड़

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    पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रविवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र किसी "व्यक्ति विशेष" के शासन से नहीं बल्कि कानून के शासन से चलता है.

    धनखड़ ने कहा, "लोकतंत्र किसी व्यक्ति के शासन से नहीं बल्कि कानून के शासन से चलता है. मुझे उम्मीद है कि वे (ममता बनर्जी) इसपर ध्यान देंगी. वह संविधान के तहत राज्यपाल के साथ बैठकर वार्ता करने के लिए बाध्य हैं." महात्मा गाँधी की 74वीं पुण्यतिथि के मौके पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने यह बयान दिया.

    राज्यपाल के मुताबिक, बंगाल में हिंसा से लोकतंत्र को बचाने की ज़रूरत है. उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कभी भी राज्य के बारे में उन्हें सूचना देने का अपना कर्त्तव्य नहीं निभाया.

    उन्होंने कहा, "मैंने सीएम ममता बनर्जी से निवेदन किया है कि लोकतंत्र बातचीत पर ज़िदा रहता है. हमें लोकतंत्र को हिंसा से बचाने की ज़रूरत है. मुख्यमंत्री का संवैधानिक कर्त्तव्य है कि वह राज्य से जुड़ी सूचनाएं राज्यपाल के साथ साझा करें, लेकिन जबसे मैं गवर्नर बना, ऐसा कुछ भी नहीं किया गया."

    राज्यपाल धनखड़ ने गुरुवार को बंगाल सीएम से 26 जुलाई को जारी की गई पेगासस से जुड़ी सूचना, महामारी से जुड़े खर्च, बंगाल ग्लोबल बिज़नेस समिट, बंगाल एरोट्रोपॉलिस प्रोजेक्ट, गोरखालैंड टैरिटोरियल एडिमिन्सट्रेशन (GTA), एमएए कैंटीन और राज्य वित्त आयोग से जुड़ी जानकारियां तलब की थीं.

  18. बीजेपी हमसे डर गई है, यूपी में शिवसेना प्रत्याशियों के नामांकन रद्द होने पर बोले संजय राउत

    यूपी विधानसभा चुनाव

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    उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर बरसते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा उनकी पार्टी से डर गई है. राउत का यह बयान उनकी पार्टी के छह उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने के बाद आया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए संजय राउत ने कहा, "समय से रहने के बावजूद हमारे प्रत्याशियों का नामांकन रद्द कर दिया गया. इलेक्शन ऑफिसर इस मामले में कार्रवाई करने को तैयार नहीं थे. वह दबाव में हैं. जल्द ही दिल्ली में मैं चुनाव आयुक्त से मिलूंगा. हमारे कुछ प्रत्याशियों को नामांकन वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है. वे (बीजेपी) हमसे डरे हुए हैं. बीजेपी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी."

    इससे पहले 28 जनवरी को राउत ने चुनावी प्रक्रिया पर दबाव वाली व्यवस्था को लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया था. राउत ने ट्वीट किया था, "यूपी में बीजेपी शिवसेना के प्रत्याशियों से डर गई. अभी तक हमारे छह प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं. नोएडा से हमारे प्रत्याशी का आवेदन बेवजह रद्द कर दिया गया. आरओ और डीएम बात सुनने के लिए तैयार नहीं. चुनावी प्रक्रिया में "प्रेशर सिस्टम" का दबदबा होना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. "

    इस माह की शुरुआत में ही राउत ने एलान किया था कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में शिवसेना 50 से 100 सीटों पर लड़ेगी. बता दें कि उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं. मतगणना 10 मार्च को होगी.

  19. पेगासस 'जासूसी' मामला फिर गरमाया, नेताओं से लेकर पत्रकारों ने क्या कहा

    जासूसी

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    भारत की राजनीति में कथित पेगासस जासूसी मामला एक बार फिर छा गया है. अमेरिकी अख़ाबर न्यूयॉर्क टाइम्स ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत ने इसराइली स्पाईवेयर पेगासस को ख़रीदा था.

    न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट के दावे के मुताबिक़, भारत ने पेगासस को एक रक्षा सौदे के तहत साल 2017 में इसराइल से ख़रीदा था. हथियारों के दो अरब डॉलर के पैकेज में इसे लिया गया था.

    पिछले साल पेगासस जासूसी सॉफ़्टवेयर के ज़रिए कई देशों में नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के कॉल रिकॉर्ड करने की बात सामने आई थी. इसमें भारत का नाम भी शामिल था.

    इसके बाद इस मामले पर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है. राजनीतिक दलों से लेकर पत्रकार तक इस पर टिप्पणी कर रहे हैं. ये सोशल मीडिया पर ट्रेंड में है और लोग इस पर बात कर रहे हैं.

  20. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: सपा, बसपा, भाजपा या कांग्रेस- दलितों का रुख किधर?

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022

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    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2018-20 के आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश ने अनुसूचित जातियों के ख़िलाफ़ अपराधों में काफी अंतर से अपना शीर्ष स्थान बरक़रार रखा है. राज्य में 2018 में दर्ज 11924 ऐसे मामलों के मुक़ाबले 2019 में 11829 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 12,714 हो गया. बिहार दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर हैं लेकिन अपराधों की संख्या यूपी की तुलना में आधी से भी कम हैं.

    दलितों के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराध और दलित के ख़िलाफ़ अत्याचार उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों का मुद्दा नहीं है.

    सियासी पार्टियां इन अपराधों का सोशल मीडिया पर खंडन कर देते हैं. कुछ नेता पीड़ित परिवारों से मिल भी लेते हैं. यहाँ तक कि दलितों की पार्टी समझे जाने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भी केवल ट्वीट से अपना विरोध प्रकट करती हैं.

    समझा जाता है कि बसपा दलित समुदाय का, जो राज्य की आबादी का 21.6 प्रतिशत है, प्रतिनिधित्व करती है लेकिन मायावती के ख़िलाफ़ भी दलित अत्याचार का कड़ा विरोध न करने का आरोप है.