अफ़ग़ानिस्तान: कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला, कम से कम 50 लोगों की मौत

जिस वक्त हमला हुआ उस वक्त मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने के लिए तीन सौ से अधिक लोग एकत्र थे.

लाइव कवरेज

सिंधुवासिनी, पवन सिंह अतुल and दिलनवाज़ पाशा

  1. अफ़ग़ानिस्तान: कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला, कम से कम 50 लोगों की मौत

    कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला

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    अफ़ग़ानिस्तान के कुंदूज़ प्रांत के उत्तरपूर्व में शु्क्रवार को एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस हमले में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अफ़ग़ानिस्तान की सरकार समर्थित बख्तियार न्यूज़ एजेंसी के हवाले से कहा है कि इस आत्मघाती हमले में 140 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

    वहीं समाचार एजेंसी असोसिएटेड प्रेस ने तालिबान के एक पुलिस अधिकारी के हवाले से मृतकों का आंकड़ा कम से कम सौ के क़रीब बताया है.

    स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों ने टोलो न्यूज़ के हवाले से कहा है कि जिस वक्त हमला हुआ उस वक्त मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने के लिए तीन सौ से अधिक लोग एकत्र थे.

    अफ़ग़ान अधिकारियों का कहना है कि देश से अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद हुआ ये सबसे बड़ा हमला है.

    कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला

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    घटनास्थल से मिल रहे वीडियो फुटेज में देखा गया है कि अल्पसंख्यक शिया समुदाय की सैय्यद अबद मस्जिद के भीतर फर्श पर खून के धब्बे हैं.

    हमले के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "स्थानीय समयानुसार दोपहर को 1.40 बजे बड़ा धमाका हुआ था. जिस वक्त मैंने धमाके की आवाज़ सुनी उस वक्त शुक्रवार की नमाज़ के लिए मस्जिद के पास बहुत सारे लोग इकट्ठा थे."

    "मैं धमाके की जगह के पास ही था, मुझे लगा जैसे दुनिया का अंत आ गया है. मैं आपको बता नहीं सकता कि मैंने कितने शवों को अपनी गाड़ी में रख कर यहां से बाहर निकाला है. अल्लाह सभी मुसलमानों पर रहम करे."

    हमले के बाद ज़ल्मे अलोकाज़ी नाम के एक स्थानीय व्यापारी ज़रूरतमंदों को खून दान करने के लिए अस्पताल पहुंचे थे. वो कहते हैं कि अस्पताल में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था.

    उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "एक के बाद एंबुलेंस हादसे की जगह से शवों को लाने के लिए जा रही थीं."

    अब तक नहीं ली किसी ने ज़िम्मेदारी

    अब तक किसी समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन स्थानीय इस्लामिक स्टेट समूह समेत सुन्नी मुसलमान कट्टरपंथी समूह शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाते रहे हैं. ये समूह शिया मुसलमानों को सच्चा मुसलमान नहीं मानते.

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन का विरोध करने वाला इस्लामिक स्टेट खुरासान, इस्लामिक स्टेट समूह का समर्थन करने वाला एक स्थानीय समूह है जिसने हाल के दिनों में देश में हिंसक हमलों को अंजाम दिया है. ये हमले अधिकतर देश के पूर्वी हिस्से में किए गए हैं.

    कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला

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    तालिबान के लिए बड़ा ख़तरा

    सिकंदर किरमानी,

    पाकिस्तान से बीबीसी संवादादाता

    अब तक किसी ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन ये ऐसे लगता है कि इसे इस्लामिक स्टेट खुरासान ने अंजाम दिया है, जिसने इससे पहले अगस्त में काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम हमला किया था.

    हाल के दिनों में इस समूह के लड़ाके मस्जिदों, स्कूलों और स्पोर्ट्स क्लब जैसी जगहों पर अफ़ग़ानिस्तान के अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाते रहे हैं.

    हाल के दिनों में इस्लामिक स्टेट ने भी तालिबान के ख़िलाफ़ हमले करने का अभियान तेज़ कर दिया है.

    रविवार को उसने काबुल में एक शवयात्रा पर हमला किया था. इसमें तालिबान के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे. इससे अलावा पहले इस्लामिक स्टेट का गढ़ रहे नंगरहार और कुनार में भी समूह ने कई छोटे-बड़े हमलों को अंजाम दिया है.

    अगर शुक्रवार को हुए हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ले लेता है तो हम मान सकते हैं कि ये संगठन देश के उत्तर में पैर फैला रहा है.

    तालिबान ने इस्लामिक स्टेट के दर्जनों सदस्यों को गिरफ्तार करने का दावा किया है और ये भी माना जा रहा है कि इस समूह के साथ संबंध रखने वाले कई लोगों को उसने ख़त्म कर दिया है.

    लेकिन सार्वजनिक तौर पर तालिबान ने अब तक इस्लामिक स्टेट के ख़तरे को बड़ा नहीं बताया है.

    कई अफ़ग़ान नागरिकों को लगता है कि तालिबान के आने से देश में भले ही निरंकुश शासन होगा लेकिन शांति बहाल हो सकेगी. लेकिन तालिबान के शांति और स्थिरता के वादे के लिए इस्लमिक स्टेट बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है.

    कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला

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    इसी साल अगस्त के आख़िर में अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी और नैटो सेनाओं के पूरी तरह बाहर निकल जाने से कुछ दिन पहले तालिबान ने देश की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था.

    बीस साल बाद ये दूसरी बार था जब देश एक बार फिर तालिबान के कब्ज़े में था. इससे पहले सितंबर 11 के हमले के बाद अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला कर तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया था.

  2. खट्टर ने वापस लिया किसानों के ख़िलाफ़ दिया बयान

    मनोहर लाल खट्टर

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    बीजेपी समर्थकों को किसानों के ख़िलाफ़ लाठी डंडे उठाने का सलाह देने पर हुई चौतरफ़ा आलोचना के बाद हरयाणा के मुख्मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपना बयान वापस ले लिया है.

    शुक्रवार को एक बयान में खट्टर ने कहा कि वो शांति के हित में अपने विवादित बयान को वापस ले रहे हैं.

    पंचकुला में पत्रकारों से बात करते हुए खट्टर ने कहा कि उन्होंने वो बयान किसी ग़लत इरादे से नहीं बल्कि आत्मरक्षा के उद्देश्य से दिया था.

    खट्टर ने कहा कि उनके बयान से किसान आहत हुए हैं और वो नहीं चाहते कि क़ानून व्यवस्था की स्थिति ख़राब हो इसलिए वो अपना बयान वापस ले रहे हैं.

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    खट्टर ने कहा कि सभी के पास शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है. रविवार को एक बयान में खट्टर ने कहा था कि किसान मोर्चा को किसानों के ऐसे समूह बनाने चाहिए जो प्रदर्शनकारी किसानों के ख़िलाफ़ लाठी उठा सकें और उन्हें जवाब दे सकें.

    इस बयान को लेकर खट्टर की तीखी आलोचना हुई थी.

    रविवार को ही उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कस्बे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय गृहमंत्री अजय मिश्रा के लोगों ने कार चढ़ा दी.

    इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई. वहीं घटना से गुस्साई भीड़ ने गाड़ियों में सवार तीन लोगों को पीट-पीट कर मार दिया था.

  3. लंदन में बिकेंगे हीरे जड़े मुग़ल काल के चश्मे

    हीरे जड़ा चश्मा

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    भारत की एक अज्ञात रियासत के मुग़ल काल के दो हीरे और पन्ना जड़े चश्मों की लंदन में नीलामी होगी. नीलामी घर सोथबी क मुताबिक मुग़ल काल के इस फ्रेम में 1890 के आसपास लेंस लगाए गए थे.

    नीलामी घर के मुताबिक प्रत्येक चश्मे की शुरुआती कीमत 15 लाख पाउंड से 25 लाख पाउंड के बीच रखी गई है. बिक्री से पहले इन चश्मों को पहली बार दुनिया के सामने हांगकांग और लंदन में प्रदर्शित किया जाएगा.

    अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये चश्मे किसने बनवाए थे लेकिन माना जा रहा है कि ये मुग़ल काल के हैं. मुग़लों ने सौलहवीं और सत्रहवीं सदी में भारत पर शासन किया. मुग़ल कला और आर्किटेक्चर के विकास के लिए जाने जाते हैं.

    सोथबी की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि हीरों और रत्नों की गुणवत्ता असाधारण है और इस क़द के ये पत्थर किसी बादशाह के पास ही रहे होंगे.

  4. RJD का स्टार प्रचारक न बनाए जाने पर क्या बोले तेज प्रताप यादव?

    तेजस्वी और तेज प्रताप

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    लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने बिहार में आगामी विधानसभा उपचुनाव में उनका नाम राष्ट्रीय जनता दल के स्टार प्रचारकों में शामिल न किए जाने पर ट्वीट किया है.

    गुरुवार को जारी राष्ट्रीय जनता दल के स्टार प्रचारकों में लालू यादव और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव का तो नाम है लेकिन तेज प्रताप या उनकी बहन मीसा भारती का नाम नहीं है.

    तेज प्रताप ने इस पर कहा है, “ऐ अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया, माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया. मेरा नाम रहता ना रहता, मां और दीदी का नाम रहना चाहिए था…इस गलती के लिए बिहार की महिलाएं कभी माफ नहीं करेगीं, दशहरा में हम मां की ही अराधना करतें हैं ना जी.”

    पार्टी के स्टार प्रचारकों में लालू यादव और तेजस्वी के अलावा अब्दुल बारी सिद्दीकी, जय प्रकाश नारायण यादव, उदय नारायण चौधरी, श्याम रजक और मनोज कुमार झा जैसे बीस नेताओं के नाम हैं.

    लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों के बीच मनमुटाव की ख़बरें अक्सर मीडिया में आती रहती हैं, लेकिन अक्सर दोनों भाई बाद इनका खंडन करते दिखते हैं.

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  5. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 08 अक्टूबर 2021

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 08 अक्टूबर 2021, सुनिए वात्सल्य राय से.

    आज की प्रमुख ख़बरें- जापान के पीएम की चीन को नसीहत, ज़िम्मेदारी भरा करें बर्ताव, ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा- हर कीमत पर बचाएंगे आज़ादी.

    सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में यूपी पुलिस की कार्रवाई से नाराज़, बेटे की पेशी को लेकर बोले गृह राज्यमंत्री.

    18 हज़ार करोड़ की बोली के साथ टाटा ने हासिल की एयर इंडिया और विवेचना में 1971 की जंग में हिस्सा लेने वाले उस पायलट की कहानी, मुक्तिवाहिनी के लड़ाकों ने बचाई जिसकी जान.

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  6. भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पद छोड़ा

    केवी सुब्रमण्यम

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    भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    एक बयान में सुब्रमण्यम ने कहा है कि अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद वो फिर से शिक्षा जगत में लौट रहे हैं. सुब्रमण्यम ने कहा कि राष्ट्रसेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात थी.

    ट्विटर पर जारी बयान में सुब्रमण्यम ने कहा, "अपनी तीन साल की प्रतिबद्धता पूरी करने के बाद मैं ख़ुशी-ख़ुशी शिक्षा जगत में लौट रहा हूं."

    सुब्रमण्यम ने कहा कि अपने तीन दशकों के सार्वजनिक जीवन में अभी तक उन्होंने नरेंद्र मोदी जैसा प्रेरणादायक नेता नहीं देखा है.

    अपने बयान में सुब्रमण्यम ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ़ की है और कहा है कि उन्होंने हमेशा आम लोगों के जीवन को बेहतर करने के लिए काम किया.

  7. अफ़ग़ानिस्तान - कुंदूज़ में जुमे की नमाज़ के वक्त मस्जिद में आत्मघाती हमला, कई मरे

    धमाका

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    अफ़ग़ानिस्तान के कुंदूज़ प्रांत में एक शिया मस्जिद को आत्मघाती हमले में निशाना बनाया गया है. इस हमले में कम से कम 50 लोग मारे गए हैं.

    बीबीसी को तीन अलग-अलग सूत्रों ने हमले में अब तक पचास लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका ज़ाहिर की है.

    बीबीसी संवाददाता महफ़ूज़ ज़ुबैद के मुताबिक हमले में सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.

    समाचार एजेसी रायटर्स से बात करते हुए एक तालिबान अधिकारी ने कहा है कि इस हमले में कम से कम 28 लोग मारे गए हैं. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए घटनास्थल के वीडियो में लाशें और मलबा फैला हुआ दिख रहा है.

    कुंदूज़ सेंट्रल अस्पताल के एक डॉक्टर के अपना नाम न जाहिर करते हुए एएफ़पी को बताया, "अभी तक हमारे अस्पताल में 35 शव आए हैं और 50 से अधिक घायल लोग पहुंचे हैं."

    वहीं एमएसएफ़ के एक डॉक्टर ने एजेंसी से अपने अस्पताल में 15 शवों के पहुंचने की पुष्टि की है.

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    अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. ये हमला उस समय हुआ जब शिया समुदाय के लोग अपनी मस्जिद में जुमे की नमाज़ पढ़ रहे थे. हाल के दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में कई हमले हुए हैं.

    कुछ दिन पहले ही काबुल की एक मस्जिद में प्रार्थना सभा को निशाना बनाया गया था. कई हमलों की ज़िम्मेदारी सुन्नी चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट ने ली है.

    तालिबन ने इसी साल अगस्त में अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण किया है. अफ़गानिस्तान में सुरक्षा हालात अस्थिर बने हुए हैं. तालिबान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा हालात को संभालना ही है.

    तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने ट्विटर पर लिखा है, "आज हमारे शिया भाइयों की मस्जिद पर धमाका हुआ है जिसके नतीजे में हमारे कई शिया भाई मारे गए हैं और घायल हो गए हैं."

  8. आर्यन ख़ान मामले में शुक्रवार को क्या हुआ? पूरी जानकारी के साथ मुंबई से बीबीसी संवाददाता मयंक भागवत

  9. आर्यन ख़ान की ज़मानत याचिका खारिज, जेल में ही रहना होगा

    आर्यन ख़ान

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    ड्रग्स मामले में गिरफ़्तार अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान की ज़मानत याचिका ख़ारिज हो गई है. अब उन्हें जेल में ही रहना होगा.

    मुंबई के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आर्यन ख़ान, अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी है. शुक्रवार को किला कोर्ट में आर्यन, अरबाज़ और मुनमुन की ज़मानत याचिका पर सुनवाई हुई.

    इसी बीच एनसीबी ने आर्यन समेत 6 पुरुष अभियुक्तों को आर्थर रोड जेल जबकि दोनों महिला अभियुक्तों को भायखला जेल भेजा है.

    क्रूज़ पर ड्रग्स पार्टी के मामले में बॉलीवुड अभिनेता के बेटे आर्यन ख़ान और अन्य अभियुक्तों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

    एनसीबी ने अभियुक्तों की अपने यहाँ हिरासत अवधि बढ़ाए जाने का अनुरोध किया था लेकिन अदालत ने इसकी अनुमति नहीं दी थी.

    आर्यन के साथ अरबाज़ मर्चेंट और मुममुन धमेचा को भी न्यायिक हिरासत में रखा गया था.

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला मुंबई में एक क्रूज पर हो रही कथित रेव पार्टी से जुड़ा है.

    एनसीबी प्रमुख एसएन प्रधान ने बताया कि मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले की निष्पक्ष जाँच की जाएगी.

    प्रधान ने कहा, "हम इस मामले में निष्पक्ष रूप से काम कर रहे हैं. ग़ौरतलब कि इस मामले में बॉलीवुड और कुछ अमीर लोग भी शामिल हैं. उनमें कोई भी होगा तब भी हम अपना काम कानून के दायरे में रहकर काम करेंगे."

    एनसीबी का कहना है कि अभियुक्तों के मोबाइल में ड्रग पेडलर से चैट मिले हैं और उनके पास से ड्रग बरामद किए गए हैं.

    एनसीबी ने मामले में आर्यन ख़ान समेत आठ लोगों को हिरासत में लिया था, इनमें आर्यन ख़ान समेत तीन की गिरफ़्तारी की गई थी

  10. अब टाटा समूह की होगी एयर इंडिया, सरकार ने लगाई मुहर

    एयर इंडिया

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    भारत की सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया अब टाटा समूह की होगी. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहीन कांता ने बताया कि "टाटा समूह ने 18000 करोड़ रुपए की बोली लगाई है."

    कांता के मुताबिक दस दिसंबर तक एयर इंडिया को टाटा समूह को सौंप दिया जाएगा. नागरिक उड्डयन सचिव राजीव बंसल के मुताबिक विजेता बोलीदाता को सभी कर्मचारियों को पहले एक साल तक नौकरी पर बरकरार रखना होगा. इसके बाद टाटा समूह के पास स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने का विकल्प होगा.

    कांता ने कहा कि एयर इंडिया की बिड की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिद्वंदी रही है. कांता के मुताबिक दूसरे दौर की नीलामी में सात बोलियां लगी थीं जिनमें से पांच खारिज हो गईं थीं. एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया जुलाई 2017 में शुरू हुई थी. 15 सितंबर को दो योग्य बोलीदाताओं ने अपनी वित्तीय बोली लगाई थी.

    कांता के मुताबिक एयर इंडिया के विनिवेश के इस निर्णय में कई स्तर पर निर्णय लिए गए. निर्णय लेने वाली समिति की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे थे.

    भारत की सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को इस समय प्रति दिन बीस करोड़ रुपए का नुकसान होता है. एयर इंडिया पर अगस्त 2021 तक कुल 61562 रुपए का कर्ज था. बोलीदाता को इसमें से 15300 करोड़ के क़र्ज़ का भार उठाना होगा. निजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद जो 46262 करोड़ का क़र्ज़ बचेगा वो सरकार के पास रहेगा. ये क़र्ज़ एयर इंडिया की एसेट होल्डिंग कंपनी के पास रहेगा.

    टाटा ने किया स्वागत

    एयर इडिया की बोली जीतने के बाद टाटा समूह ने एक बयान में इसे अच्छी ख़बर बताया है. रतन टाटा ने ट्विटर पर लिखा, ''वेलकम बैक एयर इंडिया.''

    भारत में नागरिक उड्डयन की शुरुआत टाटा समूह के संस्थापक जेआरडी टाटा ने ही की थी. उन्होंने ही एयर इंडिया की स्थापन की थी जिसका बाद में नेहरू सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था. अब एक बार फिर एयर इंडिया टाटा समूह के हाथ में है.

    रतन टाटा ने ट्विटर पर जारी बयान में कहा है, "'टाटा समूह का एयर इंडिया की बोली को जीतना एक अच्छी खबर है. हम ये स्वीकार करते हैं एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने में काफ़ी मेहनत लगेगी. ये टाटा समूह नागरिक उड्डयन में मौजूदगी को बाज़ार में बहुत मज़बूत मौका देगा."

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    उन्होंने लिखा, "भावनात्मक रूप से कहा जाए तो, एक समय जेआरडी टाटा के नेतृत्व में एयर इंडिया ने दनिया की सबसे सम्मानित एयरलाइनों में जगह बनाई थी. टाटा समूह को पास शुरुआती सालों में बनाई गई छवि को फिर से गढ़ने का मौका होगा. यदि आज जेआरडी टाटा हमारे बीच होते तो बहुत ख़ुश होते."

    टाटा ने सरकार के कुछ चुनिंदा उ्दयोगों को फिर से निजी क्षेत्र के लिए खोलने के फैसले का भी धन्यवाद दिया है.

  11. कश्मीर में अल्पसंख्यकों की हत्या पर नाराज़गी, जम्मू में प्रदर्शन

  12. आर्यन ख़ान ड्रग्स मामले में क्यों एनसीबी पर सवाल उठ रहे हैं?

  13. पुलिस ने आशीष मिश्रा के घर चिपकाया दूसरा नोटिस, कल हाजिर होने के लिए कहा

    आशीष मिश्रा

    लखीमपुर खीरी पुलिस ने तिकुनिया मामले में मुख्य अभियुक्त केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्र के घर पर दूसरा नोटिस चस्पा किया है.

    अजय मिश्र को आज मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था और सुबह दस बजे तक का टाइम दिया गया था लेकिन वो पेश नहीं हुए. इसके बाद उनके घर पर दूसरा नोटिस चस्पा करते हुए क्राइम ब्रांच ने उन्हें कल यानी शनिवार को सुबह 11 बजे अपने कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है.

    नोटिस में कहा गया है, "आपको पुनः निर्देशित किया जाता है कि आप दिनांक 9-10-21 को अपराध शाखा कार्यालय में पेश होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करें. यदि आपके द्वारा ऐसा नहीं किया जाताहै तो नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी."

    आशीष और अजय मिश्रा

    पिता ने कहा कल होंगे पेश

    आशीष मिश्र के प्रस्तुत ना होने पर बयान देते हुए उनके पिता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने कहा है कि स्वास्थ्य कारणों से वो आज पेश नहीं हुए हैं, वो कल क्राइम ब्रांच के सामने पेश होंगे.

    अजय मिश्रा ने कहा है कि ये बीजेपी सरकार है और इसमें निष्पक्ष जांच होगी, जो भी दोषी है उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

    इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि वो उत्तर प्रदेश सरकार के क़दमों से संतुष्ट नहीं है. आशीष मिश्रा के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज है बावजूद इसके यूपी पुलिस ने अभी तक उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया है.

    सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यवाई पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा, "क्या आप देश में हत्या के अन्य अभियुक्तों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं?"

    लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में 3 अक्तूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी गई थी. इस घटना में चार किसानों की मौत हो गई थी. इसके अलावा भीड़ ने गाड़ियों में सवार तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी जबकि एक पत्रकार की मौत भी गाड़ी की चपेट में आने से हुई थी.

    तिकुनिया थाने में इस घटना के संबंध में आशीष मिश्र समेत 15-20 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है. पुलिस ने अभी तक दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है.

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  14. बोलने की आज़ादी की हिमायत के लिए दो पत्रकारों को 2021 का नोबेल शांति पुरस्कार

    नोबेल शांति पुरस्कार

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    इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार मारिया रेस्सा और दिमित्री मुरातोव को देने की घोषणा हुई है.नोर्वे की नोबेल कमेटी ने थोड़ी देर पहले ही इसकी घोषणा की है. ये दोनों ही पत्रकार हैं.

    इन दोनों को अभियव्यक्ति की स्वतंत्रता की हिफ़ाज़त के प्रयास करने के लिए ये पुरुस्कार दिया गया है.

    नोबेल प्राइज़ की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है - इन दोनों ने बोलने की आज़ादी की सुरक्षा करने की कोशिश की है जो लोकतंत्र और शांति की एक ज़रूरी शर्त है."

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    मारिया रेस्सा फ़िलीपीन्स के जानी-मानी पत्रकार हैं जो रेपलर नाम की वेबसाइट चलाती हैं. सरकार से मुश्किल सवाल पूछने के कारण, फ़िलीपीन्स में उन्हें कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है.

    रेस्सा का जन्म फ़िलीपीन्स में ही हुआ था लेकिन वे बचपन में ही अमेरिका चली गई थीं. उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है.

    मारिया रेस्सा

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    दिमित्री मुरातोव भी पत्रकार हैं और उन्होंने नोवाजा गज़ेता नाम के एक स्वतंत्र अख़बार की स्थापना की है. वे दशकों से रूस में बोलने की आज़ादी की हिमायत करते रहे हैं.

    इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के विजेता को साढ़े आठ करोड़ रुपये के करीब राशि मिलती है. इन दोनों का चुनाव 329 उम्मीदवारों में से किया गया है.

    इस वर्ष अन्य मशहूर उम्मीदवारों में पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग, मीडिया राइट्स ग्रुप रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स और वर्ल्ड हेल्थ ओर्गेनाइजेशन शामिल थे.

    दिमित्री मुरातोव

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  15. लखीमपुर खीरी हिंसा पर सख़्त सुप्रीम कोर्ट, यूपी सरकार के क़दमों से असंतुष्ट

    सुप्रीम कोर्ट

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    सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि वो उत्तर प्रदेश सरकार के क़दमों से संतुष्ट नहीं है.

    इस मामले की अगली सुनवाई अब दशहरे की छुट्टियों के बाद होगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना की बेंच कर रही है.

    बेंच ने कहा कि हमने सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे को सुना है. उन्होंने ये बताया है कि यूपी सरकार ने क्या क़दम उठाए हैं. स्टेटस रिपोर्ट भी फ़ाइल की गई है. लेकिन हम राज्य सरकार के क़दमों से संतुष्ट नहीं हैं.

    अदालत ने कहा, "क्या आप देश में हत्या के अन्य अभियुक्तों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं?"

    इस मामले की अगली सुनवाई अब दशहरे की छुट्टी के बाद 20 अक्तूबर को होगी.

    उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट हरीश साल्वे ने अदालत से कहा कि अगली तारीख़ तक और क़दम उठाए जाएँगे और अन्य एजेंसियों से जाँच के विकल्प पर भी विचार किया जाएगा.

    लखीमपुर खीरी में तीन अक्तूबर को हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई. इनमें चार किसान थे. आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी, जिससे किसानों की मौत हुई. हालाँकि आशीष मिश्रा ने इन आरोपों से इनकार किया है.

    लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने आशीष मिश्रा समेत 15-20 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है. इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और आशीष मिश्रा को भी पुलिस ने समन भेजा है. लेकिन वे अभी पुलिस के सामने पेश नहीं हुए हैं.

  16. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम हत्या के एक मामले में दोषी करार. पंचकुला से ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा

  17. तय समय तक पुलिस के पास नहीं पहुँचे आशीष मिश्रा, कांग्रेस ने कहा - 'भागा नहीं, भगाया है'

      • Author, अनंत झणाणे
      • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखीमपुर खीरी से
    आशीष मिश्रा

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे और तिकुनिया में हुई हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा शुक्रवार सुबह 10 बजे तक लखीमपुर पुलिस लाइंस में नहीं पहुँचे हैं.

    गुरुवार शाम लखीमपुर पुलिस ने उनके घर पर समन की कॉपी चस्पा की थी. समन में आशीष मिश्रा जो हत्या के आरोपी हैं, उन्हें सभी सबूतों के साथ पुलिस लाइंस स्थित क्राइम ब्रांच के दफ़्तर आने के लिए शुक्रवार दस बजे तक पहुँचने का समय दिया गया था.

    गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए लखनऊ आईजी लक्ष्मी सिंह ने कहा था कि आशीष मिश्र तय समय तक नहीं पहुँचते हुए हैं तो उनके ख़िलाफ़ विधिक कार्रवाई की जाएगी और उनके ख़िलाफ़ वॉरंट भी जारी किया जाएगा.

    गुरुवार रात पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ़्तारी की जिनके नाम आशीष पांडेय और लवकुश है. पुलिस के मुताबिक़ दोनों किसानों को रौंदने कर मारने वाली गाड़ियों में सवार थे और उनके ख़िलाफ़ मौक़े पर मौजूद होने के सबूत पाए गए हैं.

    दोनों घटना के बाद घायल हैं. पुलिस ने एक और आरोपी सुमित जयसवाल को भी समन जारी किया था. आरोप है कि एक वायरल वीडियो में सुमित जायसवाल थार जीप से निकल कर भागते हुए देखा जा सकता है.

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    अगर पहले समन के बाद आशीष मिश्र क्राइम ब्रांच के दफ़्तर नहीं पहुँचते हैं तो फिर दूसरा समन जारी हो सकता है.

    सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी सामान्य हत्या के मामले में पुलिस आरोपी को इतनी मोहलत देती है.

    उधर कांग्रेस के पंजाब अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू किसानों ले परिवार वालों से मिलने के बाद लखीमपुर पहुँच रहे है.

    पुलिस लाइंस में मौजूद अतिरिक्त पुलिस सिद्धू और उनके क़ाफ़िले के इर्द गिर्द तैनात की जाएगी.

    कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गांधी लखीमपुर खीरी से लौट चुके हैं, लेकिन कांग्रेस आशीष मिश्रा को लेकर यूपी सरकार पर सवाल उठा रही है.

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट किया है कि “भागा नहीं भगाया गया है.”

  18. कश्मीर में हिंसा: श्रीनगर में सुपिंदर कौर की अंतिम यात्रा, कांग्रेस का बीजेपी पर हमला

    सुपिंदर कौर की शवयात्रा

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    गुरुवार को भारत प्रशासित कश्मीर में संदिग्ध चरमपंथियों की गोली से मारी गई स्कूल प्रिंसिपल सुपिंदर कौर की शवयात्रा में आज सिख समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया है.

    राजधानी श्रीनगर की सड़कों से गुज़री उनकी अंतिम यात्रा में कई लोग भावुक नज़र आए. हमें इंसाफ़ चाहिए के नारों के साथ ये शवयात्रा शहर के बीच से आगे बढ़ी

    कल श्रीनगर के ईदगाह इलाक़े में बंदूकधारियों ने एक सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और उसी स्कूल के एक अध्यापक दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

    ये इस सप्ताह श्रीनगर में होने वाली पांचवी हत्या थी. इससे पहले शहर के नामी केमिस्ट मखनलाल बिंद्रू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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    बदतर होते हालात

    कई लोग इन ताज़ा हत्याओं की तुलना 1990 के दशक जैसे हालात से कर रहे हैं जब हज़ारों कश्मीरी पंडित हिंसा से बचने के लिए घाटी छोड़कर, देश के विभिन्न हिस्सों में रिफ़्यूजी कैंपो में चले गए थे.

    कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था, “मोदी सरकार देश में वोट तो कश्मीरी पंडितों की रक्षा की दुहाई देकर बटोरती है पर उन्हें सुरक्षा देने में फेल साबित हुई है.पाक समर्थित उग्रवाद पर कब क़ाबू पाएगी छद्म राष्ट्रवादी भाजपा सरकार?”

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    आज सुबह पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है.

    प्रियंका गांधी ने कहा, “आतंकियों द्वारा हमारे कश्मीरी बहनों-भाइयों पर बढ़ते हमले दर्दनाक और निंदनीय हैं। इस मुश्किल घड़ी में हम सब अपने कश्मीरी बहनों-भाइयों के साथ हैं.केंद्र सरकार को तुरंत कदम उठाकर सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.”

  19. RBI ने ब्याज दरों में नहीं किए बदलाव, रेपो रेट 4% पर बना रहेगा

    आरबीआई

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    भारतीय रिजर्व बैंक ने आज रेपो रेट को 4 प्रतिशत पर ही रहने देने का फ़ैसला किया है. रेपो रेट उस ब्याज़ दर को कहते हैं जिस पर रिज़र्व बैंक ( या किसी भी देश का सेंट्रल बैंक) कॉमर्शियल बैंकों को कर्ज़ देता है.

    अगर रिज़र्व बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती करता है तो उसका फायदा, बैंकों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को हो सकता है. घर ख़रीदने के लिए लोन लेने वालों की इसपर नज़र होती है.

    मॉनेटरी पॉलिसी में इसका इस्तेमाल मंहगाई दर को काबू में रखने के लिए भी किया जाता है.

    कोविड महामारी से धीमी पड़ी देश की अर्थव्यवस्था में अब रिकवरी के कुछ संकेत नज़र आ रहे हैं लेकिन बैंक दरों को अपरिवर्तित रखकर आरबीआई ने इकॉनमी पर उदार रुख़ बनाए रखा है.

    यह लगातार आठवीं बार है जब आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है.

    इससे पहले आरबीआी ने 22 मई 2020 को रेटो रेट में बदलाब किया था.

    मौद्रिक नीति समिति के इस निर्णय का अर्थ है कि अब रेपो रेट 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 3.55 प्रतिशत पर बना रहेगा.

    जब कॉमर्शियल बैंक अपना पैसा रिज़र्ब बैंक में रखते हैं तो उन्हें उसपर जो ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

  20. वीडियो: पूर्व कर्मचारी के फ़ेसबुक पर गंभीर आरोप

    वीडियो कैप्शन, COVER STORY: फ़ेसबुक पर लगे आरोप

    क्या फ़ेसबुक या इंस्टाग्राम यूज़र्स की सेफ़्टी के साथ समझौता करते हैं? इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया साइट क्या टीनएजर्स की मानसिक हालत पर बुरा असर डाल रहे हैं?

    क्या सोशल मीडिया साइट्स का लोगों की ज़िंदगी पर बुरा असर पड़ रहा है?

    फ़ेसबुक में काम कर चुकी एक महिला ने यही सब आरोप लगाए हैं.