अफ़ग़ानिस्तान: कुंदुज़ में मस्जिद पर हमला, कम से कम 50 लोगों की मौत

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अफ़ग़ानिस्तान के कुंदूज़ प्रांत के उत्तरपूर्व में शु्क्रवार को एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस हमले में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अफ़ग़ानिस्तान की सरकार समर्थित बख्तियार न्यूज़ एजेंसी के हवाले से कहा है कि इस आत्मघाती हमले में 140 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
वहीं समाचार एजेंसी असोसिएटेड प्रेस ने तालिबान के एक पुलिस अधिकारी के हवाले से मृतकों का आंकड़ा कम से कम सौ के क़रीब बताया है.
स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों ने टोलो न्यूज़ के हवाले से कहा है कि जिस वक्त हमला हुआ उस वक्त मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने के लिए तीन सौ से अधिक लोग एकत्र थे.
अफ़ग़ान अधिकारियों का कहना है कि देश से अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद हुआ ये सबसे बड़ा हमला है.

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घटनास्थल से मिल रहे वीडियो फुटेज में देखा गया है कि अल्पसंख्यक शिया समुदाय की सैय्यद अबद मस्जिद के भीतर फर्श पर खून के धब्बे हैं.
हमले के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "स्थानीय समयानुसार दोपहर को 1.40 बजे बड़ा धमाका हुआ था. जिस वक्त मैंने धमाके की आवाज़ सुनी उस वक्त शुक्रवार की नमाज़ के लिए मस्जिद के पास बहुत सारे लोग इकट्ठा थे."
"मैं धमाके की जगह के पास ही था, मुझे लगा जैसे दुनिया का अंत आ गया है. मैं आपको बता नहीं सकता कि मैंने कितने शवों को अपनी गाड़ी में रख कर यहां से बाहर निकाला है. अल्लाह सभी मुसलमानों पर रहम करे."
हमले के बाद ज़ल्मे अलोकाज़ी नाम के एक स्थानीय व्यापारी ज़रूरतमंदों को खून दान करने के लिए अस्पताल पहुंचे थे. वो कहते हैं कि अस्पताल में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "एक के बाद एंबुलेंस हादसे की जगह से शवों को लाने के लिए जा रही थीं."
अब तक नहीं ली किसी ने ज़िम्मेदारी
अब तक किसी समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन स्थानीय इस्लामिक स्टेट समूह समेत सुन्नी मुसलमान कट्टरपंथी समूह शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाते रहे हैं. ये समूह शिया मुसलमानों को सच्चा मुसलमान नहीं मानते.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन का विरोध करने वाला इस्लामिक स्टेट खुरासान, इस्लामिक स्टेट समूह का समर्थन करने वाला एक स्थानीय समूह है जिसने हाल के दिनों में देश में हिंसक हमलों को अंजाम दिया है. ये हमले अधिकतर देश के पूर्वी हिस्से में किए गए हैं.

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तालिबान के लिए बड़ा ख़तरा
सिकंदर किरमानी,
पाकिस्तान से बीबीसी संवादादाता
अब तक किसी ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन ये ऐसे लगता है कि इसे इस्लामिक स्टेट खुरासान ने अंजाम दिया है, जिसने इससे पहले अगस्त में काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम हमला किया था.
हाल के दिनों में इस समूह के लड़ाके मस्जिदों, स्कूलों और स्पोर्ट्स क्लब जैसी जगहों पर अफ़ग़ानिस्तान के अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाते रहे हैं.
हाल के दिनों में इस्लामिक स्टेट ने भी तालिबान के ख़िलाफ़ हमले करने का अभियान तेज़ कर दिया है.
रविवार को उसने काबुल में एक शवयात्रा पर हमला किया था. इसमें तालिबान के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे. इससे अलावा पहले इस्लामिक स्टेट का गढ़ रहे नंगरहार और कुनार में भी समूह ने कई छोटे-बड़े हमलों को अंजाम दिया है.
अगर शुक्रवार को हुए हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ले लेता है तो हम मान सकते हैं कि ये संगठन देश के उत्तर में पैर फैला रहा है.
तालिबान ने इस्लामिक स्टेट के दर्जनों सदस्यों को गिरफ्तार करने का दावा किया है और ये भी माना जा रहा है कि इस समूह के साथ संबंध रखने वाले कई लोगों को उसने ख़त्म कर दिया है.
लेकिन सार्वजनिक तौर पर तालिबान ने अब तक इस्लामिक स्टेट के ख़तरे को बड़ा नहीं बताया है.
कई अफ़ग़ान नागरिकों को लगता है कि तालिबान के आने से देश में भले ही निरंकुश शासन होगा लेकिन शांति बहाल हो सकेगी. लेकिन तालिबान के शांति और स्थिरता के वादे के लिए इस्लमिक स्टेट बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है.

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इसी साल अगस्त के आख़िर में अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी और नैटो सेनाओं के पूरी तरह बाहर निकल जाने से कुछ दिन पहले तालिबान ने देश की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था.
बीस साल बाद ये दूसरी बार था जब देश एक बार फिर तालिबान के कब्ज़े में था. इससे पहले सितंबर 11 के हमले के बाद अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला कर तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया था.
















