इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.
पोस्ट YouTube समाप्त
मोदी-बाइडन की व्हाइट हाउस में पहली मुलाक़ात
चीन ने सीमा विवाद पर भारत से की शांतिपूर्ण समाधान की पेशकश, कहा- मुद्दों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए
इमेज स्रोत, in.china-embassy.org
इमेज कैप्शन, भारत में चीन के राजदूत सन वीडॉन्ग
भारत में चीन के राजदूत सन वीडॉन्ग ने एक समारोह में भारत-चीन
संबंधों में जहां सहयोग और समन्वय की बात की वहीं, पश्चिमी देशों से सहयोग को लेकर
चेताया भी.
सन वीडॉन्ग चीन-भारत संबंधों पर चौथे उच्च-स्तरीय ट्रैक II
संवाद के उद्घाटन समारोह में संबोधित
कर रहे थे.
उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद को परस्पर सहयोग और संवाद से हल करने
की बात कही, साथ ही सीमा विवाद को अन्य द्विपक्षीय संबंधों जैसे आर्थिक संबंधों से
अलग रखने की सलाह दी और पश्चिमी देशों से भारत की नज़दीकी को लेकर भी चेतावनी दी.
इमेज स्रोत, SOPA IMAGES
सन वीडॉन्ग ने कहा, “पिछले साल भारत-चीन संबंधों में ऐसी परेशानियां आईं जो पिछले कई सालों में नहीं देखी गई थीं. दोनों के संबंध बेहद निचले स्तर पर आ गए.”
“वर्तमान में एक तरफ दुनिया अशांति और परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रही है, तो दूसरी तरफ कोविड महामारी अब भी फैल रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती बनी हुई है. अफ़ग़ानिस्तान में हुए बदलाव ने क्षेत्रीय स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है. दो सबसे बड़े विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, चीन और भारत को समन्वय और सहयोग को मजबूत करना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “चीन और भारत को अपने मतभेदों को ठीक से संभालना चाहिए और उन्हें विवाद नहीं बनने देना चाहिए. हमें द्विपक्षीय संबंधों में सीमा मुद्दे को उचित स्थान पर रखना चाहिए और बातचीत व परामर्श के ज़रिए एक निष्पक्ष और स्वीकार्य समाधान की तलाश करनी चाहिए. चीन भारत-चीन सीमा मुद्दे का उचित समाधान निकालने के लिए हमेशा सकारात्मक रहा है.
इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
कारोबार को सीमा विवाद से अलग रखने की सलाह
सन वीडॉन्ग ने कहा, “हमें द्विपक्षीय संबंधों को एकतरफा न होकर व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहिए. उदाहरण के लिए, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति महत्वपूर्ण है, लेकिन यह द्विपक्षीय संबंधों की पूरी कहानी नहीं है.”
“दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं.हालांकि, इसे पिछले साल से भारत के जानबूझकर लगाए गए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है. हमें दीवारों के बजाय पुलों का निर्माण करना चाहिए. यह आशा की जाती है कि भारत चीनी कंपनियों को भारत में निवेश और संचालन के लिए एक निष्पक्ष, न्यायसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल प्रदान करेगा.
इमेज स्रोत, REUTERSCopyright
पश्चिमी देशों पर निशाना
सन वीडॉन्ग ने पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों से कोई फायदा ना होने की बात कही.
वर्तमान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वाड की बैठक के लिए अमेरिकी दौरे पर हैं. यहां वो क्वाड के सदस्य देश अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुखों से मुलाक़ात करने वाले हैं.
चीन कहता रहा है कि क्वाड के ज़रिए उसकी बढ़ती ताकत को रोकने की कोशिश की जा रही है.
पश्चिमी देशों से भारत के संबंधों को लेकर सन वीडॉन्ग ने कहा, “दो प्रमुख पूर्वी देशों के तौर पर चीन और भारत को पुरानी पश्चिमी सोच के जाल में फंसने से बचना चाहिए. दोनों पक्षों की पहली ज़िम्मेदारी विकास लाना और अपने मामलों पर ध्यान केंद्रित करना है.”
“कुछ देशअपने वैचारिक पूर्वाग्रह और शीत युद्ध की मानसिकता के साथ तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए छोटे गुट बनाने में जुटे हैं ताकि टकराव बढ़ सके और भू-राजनीतिक खेल खेले जा सकें. गुट बनाने से किसी देश के विकास में फायदा नहीं होगा और ना ही कोई ज़्यादा सुरक्षित हो जाएगा.”
ब्रेकिंग न्यूज़, व्हाइट हाउस पहुंचे नरेंद्र मोदी, जो बाइडन के साथ अहम मुद्दों पर जारी है चर्चा
अब से कुछ देर पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाक़ात की.
दोनों नेताओं के बीच व्यापार, जलवायु परिवर्तन और कोरोना महामारी को वेकर चर्चा हई.
भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "मौजूदा दशक में सबसे बड़ा सेक्टर व्यापार है. दोनों देशों के बीच व्यापार बेहद अहम रहा है. भारत के पास काफी कुछ ऐसा है जो वो अमेरिका को दे सकता है, वहीं अमेरिका के पास काफी कुछ है जिससे भारत को मदद मिलेगी."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 1
इससे पहले बाइडन ने कहा कि "द्विपक्षीय बातचीत के लिए मैं आज व्हाइट हाउस में भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहा हूं. मैं दोनों देशों के बीच मज़बूत रिश्ते चाहता हूं और चाहता हूं कि इंडो-पेसिफ़िक से लेकर कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन को लेकर हम साथ में काम करें."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त, 2
ब्रेकिंग न्यूज़, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में टॉपर बने बिहार के शुभम
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2020 के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं.
आईआईटी बॉम्बे से बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) शुभम कुमार पहले स्थान पर आए हैं तो दूसरे स्थान पर बीटेक कर चुकीं जागृति अवस्थी आई हैं. वहीं आगरा की अंकिता जैन को तीसरा स्थान मिला है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
सिविल सेवा की परीक्षा में कुल 761 लोगों का चयन हुआ है. इनमें 545 पुरुष और 216 महिलाएं हैं. टॉप 25 चयनित परीक्षार्थियों में 13 पुरुष और 12 महिलाएं हैं.
सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हर साल भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में समूह 'ए' और समूह 'बी' के पदों पर नियुक्ति की जाती है.
ऑकस समझौते के बाद पहली बार बोरिस जॉनसन और इमैनुएल मैक्रों ने की बात
इमेज स्रोत, Reuters
अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए अहम रक्षा समझौते के बाद पहली बार ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की है.
दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद ब्रितानी सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि "दोनों में वैश्विक मुद्दों पर मिल कर काम करने पर सहमति बन गई है."
वहीं फ्रांसीसी सरकार के एक सूत्र ने बताया है कि "दोनों देशों के साझा हित" हैं.
हाल में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऑकस समझौता हुआ था जिसके तहत अमेरिका ऑस्ट्रेलिया को परमाणु शक्ति वाली पनडुब्बियां बनाने के लिए मदद करेगा.
इसके बाद ऑस्टेलिया ने पनडुब्बियों के लिए फ्रांस के साथ किया अरबों डॉलर का समझौता रद्द कर दिया था और फ्रांस ने इस समझौते को 'पीठ में छुरा घोंपने जैसा' कहा था.
समझौते से नाराज़ फ्रांस के रक्षा मंत्री ने ब्रितानी रक्षा मंत्री के साथ अपनी मुलाक़ात भी रद्द कर दी थी. फ्रांस सरकार ने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को भेजे अपने राजदूत भी वापिस बुला लिए थे.
हालांकि, ब्रितनी प्रधानमंत्री ने कहा था कि फ्रांस ज़रूरत से अधिक प्रतिक्रिया दे रहा है.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.
पोस्ट YouTube समाप्त
दोनों देशों के बीच मतभेद ख़त्म करने की कोशिश के तहत शुक्रवार को बोरिस जॉनसन और इमैनुएल मैक्रों ने फ़ोन पर बातचीत की.
डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच "आपसी हितों के कई मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने फ्रांस और ब्रिटेन के दोस्ताना संबंधों के महत्व को स्वीकार किया. दोनों में नेटो के ज़रिए और द्विपक्षीय साझा हितों के मुद्दों पर मिल कर काम करने की सहमति बनी है."
प्रवक्ता ने कहा कि दोनों नेताओं में "हिंद-प्रशांत और अफ़्रीका के मुद्दे पर साझेदारी के साथ काम करने के रणनीतिक महत्व पर भी चर्चा हुई."
वहीं फ्रांसीस सरकार के एक सूत्र ने बीबीसी को बताया कि बोरिस जॉनसन की गुज़ारिश पर चर्चा की व्यवस्था की गई थी.
उन्होंने बताया, "बोरिस जॉनसन ने दोनों देशों के हित के लिए बेहतर रिश्तों को बनाए रखने की इच्छा ज़ाहिर की है."
ये भी पढ़ें- Aukus समझौता - फ़्रांस ने अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को बताया ‘झूठा’
चीन ने क्रिप्टोकरेंसी को घोषित किया अवैध
इमेज स्रोत, REUTERS
चीन के सेंट्रल बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी सभी ट्रांजेक्शन को
अवैध घोषित कर दिया है. बैंक ने बिटकॉइन जैसी डिजिटल करेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया
है.
पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने कहा, “वर्चुअल करेंसी से जुड़ी कारोबारी गतिविधियां अवैध
वित्तीय गतिविधियां हैं. ये लोगों की परिसंपत्ति की सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा हैं.”
चीन दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी के
बाज़ारों में से एक है.
चीन में क्रिप्टोकरेंसी में आने वाले उतार-चढ़ाव अक्सर क्रिप्टोकरेंसी की वैश्विक कीमत को प्रभावित करते हैं.
चीन की
इस घोषणा के बाद बिटकॉइन की कीमत 2,000 डॉलर से ज़्यादा गिर गई है.
क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार 2019 से चीन में आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित
कर दिया गया है लेकिन विदेशी मुद्रा के माध्यम से ऑनलाइन जारी है.
कमलेश तिवारी हत्याकांड, लखनऊ से प्रयागराज ट्रांसफर हुआ मुक़दमा
इमेज स्रोत, KAMLESH TIWARI FB
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू समाज पार्टी के
नेता कमलेश तिवारी की हत्या मामले में मुक़दमा लखनऊ से
प्रयागराज ट्रांसफर कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने
मामले के अभियुक्तों की याचिका पर यह फैसला दिया है.
अभियुक्तों का कहना
था कि लखनऊ में सांप्रदायिक माहौल के कारण स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं
हो सकती है.
कमलेश तिवारी की हत्या
के मामले में अशफ़ाक हुसैन समेत 11 अभियुक्तों ने ये याचिका दायर की थी. उन्होंने
लखनऊ में अपनी जान को ख़तरा बताया था.
हालांकि, अभियुक्तों
के वक़ील मोहम्मद प्राचा ने कोर्ट से पहले लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग
की थी.
कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर
2019 को लखनऊ में कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी.
वह हिंदू महासभा के पूर्व
नेता थे और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपील भी की थी.
शोएब अख्तर बोले, 'हम न्यूज़ीलैंड-इंग्लैंड जाएंगे तो जान का ख़तरा बताएंगे'
तीन बीयर कंपनियों पर गुटबंदी के लिए करोड़ों का जुर्माना
भारतीय
प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने बाज़ार में गुटबंदी करने के लिए तीन बीयर कंपनियों
पर करोड़ों रुपयों का जुर्माना लगाया है.
इन तीन कंपनियों में
यूनाइटेड ब्रूअरी लिमिटेड (यूबीएल), एसएबीमिलर इंडिया लिमिटेड (नया नाम एबी इनबेव
इंडिया लिमिटेड) और कार्ल्सबर्ग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (सीआईपीएल) शामिल हैं.
सीसीआई ने पाया है
कि ऑल इंडिया ब्रूअर्स एसोसिएशन (एआईबीए) ने भी कंपनियों को गुटबंदी (कार्टल) बनाने
में मदद की है.
ये कंपनियां कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीयर की बिक्री और आपूर्ति में गुटबंदी करके
मनमानी कीमतें वसूलतीं या बीयर की आपूर्ति रोक देती थीं.
सीसीआई ने यूबीएल
पर 750 करोड़ और सीआईपीएल पर 120 करोड़ का जुर्माना लगाया है. हालांकि, इन तीनों
कंपनियों के कम जुर्माना आवेदक होने के कारण उनके जुर्माने में कमी भी की गई है.
इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
बाज़ार से प्रतिस्पर्धा को कम करने के लिए कई बार कंपनियां गठजोड़ बनाती हैं जिससे किसी उत्पाद के बाज़ार पर उनका एकाधिकार हो जाता है. इससे कंपनियां उत्पाद की कीमतें बढ़ा सकती हैं और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित कर सकती है. ऐसे में उपभोक्ताओं के हितों को नुक़सान पहुंचता है.
ये गुटबंदी साल 2009 से 2018 तक चलती रही. अक्टूबर 2018 में बीयर कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई और जांच शुरू हुई.
सीआईपीएल इसमें साल 2012 में शामिल हुई है. एआईबीए साल 2013 से इस गुटबंदी की मदद कर रहा है.
सीसीआई के महानिदेशक को विभिन्न कंपनियों के बीच हुई बातचीत और कंपनियों द्वारा दी गई जानकारियों के आधार इस गुटबंदी के काम करने के तरीक़े का पता चला है.
ये कंपनियां आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पुडुचेरी में बीयर की कीमतों पर आपसी सहमति बनाकर मनमाने दाम वसूलती थीं.
इसके अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में ये कंपनियों सहमति से बीयर की आपूर्ति रोक लेती थीं.
यूबीएल और एबी इनबेव कंपनियां सैकेंड हैंड बोतलों की खरीद में भी लिप्त पाई गई हैं.
इस मामलेें में यूबीएल के चार, एबी इनबेव के चार, सीआईपीएल के छह लोगों और एआईबीए के महानिदेशक को सीसीआई ने पकड़ा है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
अमेरिका में क्वाड की बैठक से पहले चीन ने कही ये बड़ी बात
....में
Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
पदनाम, .
इमेज स्रोत, AFP
इमेज कैप्शन, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान
चीन के विदेश
मंत्रालय ने कहा है कि क्वाड सम्मेलन में दूसरे देशों को निशाना ना बनाएं. चीन के सरकारी मीडिया ‘द पेपर’ ने ये रिपोर्ट दी
है.
चीनी विदेश
मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान आज मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “चीन ने हमेशा माना है कि
किसी भी क्षेत्रीय सहयोग तंत्र को तीसरे पक्षों के हितों को निशाना नहीं बनाना
चाहिए या नुक़सान नहीं पहुंचाना चाहिए. इस छोटे समूह का असफल होना तय है क्योंकि ये अन्य
देशों को अलग-थलग रखकर निशाना बनाता है और क्षेत्रीय
देशों की इच्छाओं के उलट चलता है.”
झाओ लिजियान ने इस
पर भी जोर दिया कि चीन “विश्व शांति का निर्माता, वैश्विक विकास में योगदान देना वाला और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का रक्षक देश है.”
उन्होंने इसके साथ संबंधित देशों से "चीन के विकास के बारे में सही दृष्टिकोण
अपनाने और क्षेत्र के देशों के बीच एकजुटता व सहयोग को बढ़ावा देने के लिए और अधिक
प्रयास करने" का आग्रह किया.
झाओ ने पहली बार व्यक्तिगत
रूप से क्वाड सम्मेलन पर टिप्पणी की है. उनसे क्वाड सम्मेलन को लेकर सवाल पूछा गया
था.
इमेज स्रोत, REUTERS
अमेरिका में क्वाड देशों की बैठक होने वाली है जिसे लेकर चीन का बयान अहम है. चीन को लगता है कि क्वाड के चार देश उसकी बढ़ती ताकत के खिलाफ गुटबंदी कर रहे हैं.
हालांकि, ये चारों देश इस बात से इनकार करते रहे हैं.
क्वाड अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच अनौपचारिक राजनीतिक वार्ता समूह है.
क्वाड शब्द "क्वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता" के क्वाड्रीलेटरल (चतुर्भुज) से लिया गया है.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वाड की बैठक में शामिल होने के लिए अमेरिका के दौर पर हैं. इसमें बाकी तीनों देशों के प्रमुख भी शामिल होने वाले हैं.
जातीय जनगणना से इंकार पर मायावती ने केंद्र को घेरा, कहा भाजपा का चुनावी स्वार्थ है वजह
इमेज स्रोत, Getty Images
बहुजन समाज
पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार के पिछड़े वर्गों की जाति गणना से
"इनकार" करने पर गंभीर चिंता ज़ाहिर की है.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम
कोर्ट में कहा है कि पिछड़े वर्गों की जाति जनगणना "प्रशासनिक रूप से कठिन और
बोझिल" है और इस तरह की जानकारी को जनगणना के दायरे से बाहर करना एक सोचा
समझा फ़ैसला है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
बीएसपी प्रमुख ने इस संबंध में कई ट्वीट किये हैं.
उन्होंने लिखा है कि केन्द्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल करके पिछड़े वर्गों की जातीय जनगणना कराने से साफ़तौर पर इनक़ार कर देना चिंता का विषय है. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह फ़ैसला भाजपा के चुनावी स्वार्थ का पर्दाफाश करती है.
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है- एससी और एसटी की तरह ही ओबीसी वर्ग की भी जातीय जनगणना कराने की माँग पूरे देश में काफी ज़ोर पकड़ चुकी है, लेकिन केन्द्र का इससे साफ़ इनक़ार पूरे समाज को उसी प्रकार से दुःखी करने वाला है जैसे नौकरियों में इनके बैकलॉग को न भरने से लगातार हो रहा है.
अब राकेश टिकैत की बाइडन से अपील - मोदी से बात में हमारी चिंताओं पर भी फ़ोकस करें
इमेज स्रोत, MONEY SHARMA/AFP VIA GETTY IMAGE
भारतीय किसान
यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से किसान आंदोलन
को लेकर अपील की है.
उन्होंने कहा है कि
वह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के दौरान किसानों की चिंताओं पर
भी ध्यान दें.
राकेश टिकैत ने राष्ट्रपति
बाइडन के ट्विटर अकाउंट को टैग करते हुए ट्वीट किया, “हम भारतीय किसान पीएम मोदी की सरकार द्वारा लाए गए
तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. पिछले 11 महीनों के
विरोध प्रदर्शन में 700 किसानों की मौत हो चुकी है. हमें बचाने के लिए इन काले
क़ानूनों को ख़त्म करना होगा. पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान कृप्या हमारी चिंता
पर भी ध्यान दें.”
पीएम मोदी तीन दिनों
के अमेरिका दौरे पर हैं. उन्होंने गुरुवार को अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस
से मुलक़ात की थी. आज राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ उनकी बैठक होने वाली है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
सीबीआई ने शुरु की मंहत नरेंद्र गिरी की मौत के मामले की जांच
इमेज स्रोत, NURPHOTO/Getty Images
अखिल भारतीय अखाड़ा
परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की कथित आत्महत्या के मामले की जांच अब
सीबीआई को सौंप दी गई है.
सीबीआई ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की है जिसमें नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद
गिरी को संदिग्ध बनाया गया है.
मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई गई है जिसमें फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी शामिल
हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में
सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने ये मामला सीबीआई के हवाले
कर दिया है.
निरंजन अखाड़े के
संत एवं बाघंबरी मठ के महंत नरेंद्र गिरि को रहस्यमयी हालात
में मृत पाया गया था. उनके पास से एक कथित सुसाइट नोट भी बरामद हुआ था.
हालांकि, महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या पर सवाल उठाए जा रहे हैं. उनके करीबियों का कहना है कि वो आत्महत्या नहीं कर सकते और ना ही इतना लंबा सुसाइड नोट लिख सकते हैं.
पुलिस ने इस मामले
में आनंद गिरी समेत कई अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
शोएब अख़्तर - हम भी जब न्यूज़ीलैंड या इंग्लैंड जाएंगे तो बोलेंगे कि हमें डर लगता है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
असम के दरंग ज़िले में 12 घंटे का बंद जारी, कल फायरिंग में दो लोगों की हुई थी मौत
इमेज स्रोत, ANI
असम के दरंग ज़िले
में शुक्रवार को अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठनों ने 12 घंटे के बंद का आह्वान
किया है. जिसका असर जनजीवन पर भी पड़ा है.
गुरुवार को दरंग
ज़िले के सिपाझार मंडल के तहत आने वाले गांवों में अतिक्रमण हटाने गयी पुलिस और
कथित अतिक्रमकारियों के बीच हुई झड़प में दो लोगों की मौत हो गई है और क़रीब 11
लोग इस झड़प में घायल भी हुए हैं.
ऑल माइनॉरिटी ऑर्गनाइजेशन
कोऑर्डिनेशन कमेटी के बुलाए गए बंद में अब तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली
है.इसमें ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन और जमीयत-ए-उलेमा
भी शामिल हैं.
बंद के कारण सभी व्यापारिक
प्रतिष्ठान बंद हैं और गिने-चुने वाहन भी सड़क पर नज़र आ रहे हैं.
पुलिस अधिकारियों
ने बताया कि सिपाझार के गोरोईखुटी, धौलपुर गांवों में सुरक्षाबल की तैनाती की गई है और पूरे ज़िले में
भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल
ने दंरग के उपायुक्त कार्यालय के बाहर इस
घटना के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया है.
पुलिस महानिदेशक भास्कर
ज्योति महंत खुद क़ानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की.
रिटायर जज करेंगे जांच
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. असम सरकार के गृह विभाग की विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में जांच कराई जाएगी. जांच में घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा.
गंभीर रूप से घायल
लोगों में तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. एक पुलिसकर्मी और तीन नागरिकों की हालत नाज़ुक बताई
गई है, जबकि बाकी लोगों की हालत स्थिर
है.
मुख्यमंत्री हिमंत
बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा था कि अतिक्रमण के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान को रोका नहीं
जाएगा. और "कथित अवैध अतिक्रमणकारियों" की जमीन को साफ कराने का काम पूरा
होने तक जारी रहेगा.
असम सरकार के एक आदेश के बाद 20 सितंबर को दरंग ज़िले के सिपाझार में प्रशासन ने एक अभियान चलाकर लगभग 4,500 बीघा भूमि पर कब्जा करने वाले कम से कम 800 परिवारों को बेदखल कर दिया था.
जबकि क़रीब दो सौ परिवार के ख़िलाफ़ गुरुवार सुबह फिर से बेदखली अभियान चलाया गया था और तभी यह फायरिंग की घटना हुई.
असम सरकार ने 'अवैध अतिक्रमण' के नाम पर जिन सैकड़ों लोगों के ख़िलाफ़ बेदखली अभियान चलाया है वे सारे मुसलमान है. एक जानकारी के अनुसार सरकारी ज़मीन खाली कराने के बाद सैकड़ों लोगों ने नदी के किनारे शरण ले रखी है.
ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में फायरिंग हुई, एक गैंगस्टर और दो हमलावर मरे
इमेज स्रोत, Getty Images
दिल्ली के रोहिणी कोर्ट के कोर्ट नंबर एक के बाहर फ़ायरिंग की ख़बरें आ रही हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक गोलीबारी में जितेंद्र मान गोगी नाम का गैंगस्टर मारा गया है.
गोगी पर गोली चलने के बाद क्रॉस फायरिंग में सुरक्षाकर्मियों ने दो हमलावरों को गोली मार दी. वे दोनों भी मौके पर ही मारे गए हैं.
हमलावर वकीलों का ड्रेस पहनकर आए थे. इस घटना में एक महिला वकील समेत तीन व्यक्ति घायल हुए हैं.
रोहिणी कोर्ट में काम करने वाले एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया," बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा वकीलों को यूनीक आईडी दिए जाने चाहिए ताकि एंट्री पर चैकिंग की जा सके."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
पाकिस्तान के समर्थन में आए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख़्वाजा, भारत के बारे में क्या कहा?
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और पाकिस्तान में जन्मे उस्मान ख्वाजा, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के समर्थन में आए हैं.
हाल ही में न्यूज़ीलैंड की टीम अपनी पाकिस्तान सीरिज़ का रावलपिंडी में पहला मैच खेलने से ठीक पहले, दौरा छोड़कर वापस लौट गई थी.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और उसके प्रमुख रमीज़ राजा ने इसपर सख़्त एतराज़ किया था.
अब पाकिस्तान मूल के ऑस्ट्रेलियाआई खिलाड़ी ख़्वाजा उस्मान भी इस बहस में कूद पड़े हैं.
ख्वाजा ने कहा कि खिलाड़ियों और क्रिकेट संगठनों के लिए पाकिस्तान दौरे से मना करना आसान है, क्योंकि वो पाकिस्तान है. यही बात तब भी होती अगर वो बांग्लादेश होता, लेकिन भारत को कोई ना नहीं कहेगा.
इमेज स्रोत, Getty Images
हैती के लोगों के साथ 'अमानवीय व्यवहार' के विरोध में अमेरिका के विशेष राजदूत ने दिया त्यागपत्र
इमेज स्रोत, एएफ़पी
हैती के लिए अमेरिका
के विशेष राजदूत ने हैती अप्रवासियों और शरणार्थियों के निर्वासन के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है.
वरिष्ठ राजनयिक डेनियल
फूटे ने एक पत्र के माध्यम से अपनी बात कही है.
उन्होंने लिखा, भूकंप और राजनीतिक अस्थिरता
से भाग रहे लोगों को वापस भेजने का निर्णय "अमानवीय" था.
पिछले सप्ताह,
अमेरिका ने टेक्सस के सीमावर्ती शहर से निर्वासन
के लिए उड़ानें शुरू की, जहां लगभग 13,000 लोग एकत्र हुए थे. तपती धूप में 37 डिग्रीे सेल्सियस तापमान में ये लोग एक कैंप में थे. अधिकारियों को इन्हें भोजन और पानी मुहैया कराने में भी काफी परेशानी हुई.
मेक्सिको से लगी सीमा
पर टेक्सस कैंप से अमेरिका रविवार तक क़रीब 1400 लोगों को हैती लौटा चुका है.
अपने त्याग पत्र में,
फूटे ने कहा कि हैती एक बर्बाद हो चुका देश बन गया है जो हज़ारों की संख्या में वापस लौटाये गए अप्रवासियों का बोझ नहीं उठा सकता. जबकि वहां खुद भुखमरी से हालात हैं.
वहीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता
जेन साकी ने एक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "विशेष दूत फूटे के पास अपने
कार्यकाल में आप्रवासन के बारे में उनकी चिंता बताने के पर्याप्त अवसर थे. लेकिन उन्होंने
ऐसा कभी नहीं किया."
प्रवक्ता साकी ने
उन तस्वीरों पर भी टिप्पणी की जिसे लेकर बाइडन प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
उन्होंने
कहा,- घोड़ों पर चढ़े अमेरिकी अधिकारियों के प्रवासियों को भगाने की जो तस्वीरें
सामने आयी हैं, वो भयावह हैं. और अब इस क्षेत्र में घोड़ों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा."
इस सप्ताह की शुरुआत
में एएफ़पी के एक फोटोग्राफर की ली गई तस्वीर ने दुनिया भर में चर्चा बटोरी. इन तस्वीरों
की तुलना गुलामी और अश्वेत लोगों के साथ
हुए ऐतिहासिक दुर्व्यवहार से की गई.
इन तस्वीरों के
कारण राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन पर दबाव बढ़ा है.