जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की होगी अगली सरकार: फारूक़ अब्दुल्लाह
पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्लाह ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में किया दावा. पंचायत चुनाव में हिस्सा नहीं लेने पर जताया खेद.
लाइव कवरेज
अनंत प्रकाश, विभुराज and अपूर्व कृष्ण
भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के संकेत, 20.1 फ़ीसदी की दर से बढ़ी जीडीपी
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भारतीय अर्थव्यवस्था के कोरोना महामारी के दौरान लगे झटके से उबरकर पटरी पर लौटने के संकेत मिल रहे हैं. साल की पहली तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज़ उछाल दर्ज किया गया है.
केंद्रीय सांख्यिकी
मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि साल 2021-22 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 20 फ़ीसदी से ज़्यादा की दर से बढ़ी है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने सांख्यिकी मंत्रालय के हवाले से बताया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही
में जीडीपी ग्रोथ रेट निगेटिव 24.4 फीसद थी जो एक साल बाद 2021-22 की पहली तिमाही
में बढ़कर 20.1 फीसद हो गयी है.
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इस साल की पहली तिमाही का ये आंकड़ा उस दौर का है जब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में भारत के शहरों से लेकर गाँवों में कोहराम जैसी स्थिति थी. दिल्ली समेत कई राज्यों को लॉकडाउन लगाना पड़ा था.
ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगली तिमाही में इससे बेहतर आंकड़े सामने सकते हैं.
जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की होगी अगली सरकार: फारूक़ अब्दुल्लाह
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक़ अब्दुल्लाह ने दावा किया है कि जम्मू कश्मीर में अगली सरकार उनकी पार्टी बनाएगी.
उन्होंने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, “हम अगले चुनाव में सफाया करते हुए जीत दर्ज करेंगे. मैं ये बात पूरे अधिकार से कह रहा हूं. जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी है.”
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पंचायत चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था. फारूक़ अब्दुल्लाह ने इसे लेकर खेद जताया. उन्होंने पंचायत सदस्यों की सुरक्षा बढ़ाए जाने की मांग भी की.
अब्दुल्लाह ने कहा, “हम अभी भी चरमपंथ
का सामना कर रहे हैं और अल्लाह ही जानता है कि भविष्य में क्या होगा? ऐसे में पंचायत
सदस्यों की सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे अहम कामों में से एक है. क्योंकि सबसे पहला
निशाना वही हैं. "
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कर रहे थे. इस कार्यक्रम में उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद थे.
अब्दुल्लाह ने आगे कहा, "हम राजनेता एक निशाना हैं. वो लोग, जो देश के
साथ खड़े हैं, उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. भारत एक विविधता से भरा
देश है. ऐसे में हमें क्या एकजुट करता है? इस देश को विविधताओं से भरा देश बनाए रखने की हमारी इच्छाशक्ति, हमें एक साथ लाती है. हमें अपनी
विविधता को बचाने की ज़रूरत है.”
बता दें कि पिछले कुछ महीनों में चरमपंथियों ने घाटी के कई नेताओं को निशाना बनाया गया है.
इस वजह से जम्मू से लेकर कश्मीर तक में काफ़ी तनाव की स्थिति है. पंचायत सदस्यों की सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान है.
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उत्तर प्रदेश: योगी सरकार का फ़ैसला, कल से खुलेंगे 1 से 5वीं कक्षा के स्कूल
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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार
1 सितंबर से प्राइमरी स्कूलों को खोलने का फैसला किया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़,
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 सितंबर से कोविड नियमों को ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से
5वीं कक्षा तक के स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया है.
मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने कहा है कि कोविड को ध्यान में रखते हुए स्कूल में सफाई और सैनिटाइजेशन
का काम हर रोज़ करना चाहिए.
प्रदेश में कक्षा छह से बारह
तक के स्कूल पहले ही खोले जा चुके हैं.
उत्तर प्रदेश में कोरोना
की स्थिति
उत्तर प्रदेश में बीते 24
घंटों में कोरोना संक्रमण के 19 नए मामले सामने आए हैं. बीमारी से उबरने के बाद 74
लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है. और फिलहाल कोरोना संक्रमित लोगों
की संख्या 256 है.
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में अब तक सात करोड़ से
ज़्यादा वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं.
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बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, सुनिए मोहम्मद शाहिद के साथ
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बीजेपी नेता ने ओवैसी की पार्टी को कहा 'तालिबान जैसी', मिला ये जवाब
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इमेज कैप्शन, लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव
सीटी रवि ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी 'ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन' या एआईएमआईएम को लेकर
एक बयान दिया है जिसे लेकर विवाद हो रहा है.
समाचार एजेंसी एएनआई से
बात करते हुए रवि ने कहा, “एआईएमआईएम कर्नाटक के तालिबान जैसी है. तालिबान, एआईएमआईएम और एसडीपीआई का
मुद्दा एक ही है. तालिबान को कलबुर्गी में स्वीकार नहीं किया जाएगा.”
सीटी रवि ने कलबुर्गी
सिटी कॉरपोरेशन चुनाव में एआईएमआईएम द्वारा चुनौती दिए जाने पर ये बात कही.
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क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?
'ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन' के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि बीजेपी नेता सीटी रवि को अंतरराष्ट्रीय राजनीति की समझ नहीं है.
उन्होंने कहा, "वह एक बच्चे हैं और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं. क्या बीजेपी यूएपीए के तहत तालिबान पर प्रतिबंध लगाएगी?"
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पाकिस्तान में अमेरिकी सैनिक क्या कर रहे हैं? गृह मंत्री शेख रशीद ने दी सफ़ाई
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद (फ़ाइल)
पाकिस्तान सरकार ने अपने यहाँ अफ़ग़ानिस्तान से लौटी अमेरिकी सेना के लंबे समय तक टिके रहने की किसी भी संभावना को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा कुछ ही वक़्त के लिए हो रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सोशल मीडिया पर इस्लामाबाद एयरपोर्ट की तस्वीरें आ रही थीं जिनमें वहाँ अमेरिकी सैनिक दिख रहे थे.
इसके बाद ऐसी अफ़वाह उड़ने लगी कि कहीं अफ़ग़ानिस्तान से लौटे सैनिक अब पाकिस्तान में तो नहीं टिक जाएँगे.
पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने इस बारे में वहाँ के अख़बार डॉन को दिए गए एक इंटरव्यू में स्थिति स्पष्ट की है.
उन्होंने अख़बार से कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकले कुछ विदेशी लोग पाकिस्तान आए हैं मगर उन्हें केवल 21 से 30 दिनों का ट्रांज़िट वीज़ा दिया गया है.
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी मंत्री ने ऐसी किसी बात से भी इनकार किया कि पाकिस्तान फिर से मुशर्रफ़ दौर में पहुँच रहा है.
उन्होंने पाकिस्तानी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर रहमान के इस दावे की भी भर्त्सना की कि सरकार इस्लामाबाद में अमेरिकी लोगों के लिए होटल बुक कर रही है.
शेख़ रशीद ने बताया कि अभी तक अफ़ग़ानिस्तान में तोर्खम सीमा के रास्ते 2,192 लोग पाकिस्तान आए हैं जबकि 1,627 लोग हवाई जहाज़ों से इस्लामाबाद पहुँचे हैं. साथ ही कुछ लोग चमन बोर्डर केर रास्ते भी आए हैं.
उन्होंने इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि अफ़ग़ानिस्तान से लगभग सभी पाकिस्तानी नागरिकों को निकाला जा चुका है.
उन्होंने कहा कि लगभग 30 से 40 पाकिस्तानी लोग अभी भी वहाँ हैं मगर वो लौटना नहीं चाहते क्योंकि वहाँ उनके परिवार बसे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम से कहा- 'जेल में ही मिलेगा आयुर्वेदिक इलाज', नहीं दी ज़मानत
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सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामले में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे आसाराम की ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा है कि उन्हें जेल में ही आयुर्वेदिक
पद्धति से इलाज कराने की सुविधा मिलेगी.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस
इंदिरा बनर्जी, बी रामा सुब्रमण्यन और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मंगलवार को इस मामले में
फैसला दिया है.
समाचार वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने आसाराम बापू के अपराध पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि इसे सामान्य अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.
जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने आसाराम
की ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा, “इस तरह की स्थिति में माफ़ करिएगा, पूरे मामले
को देखा जाए तो ये कोई साधारण अपराध नहीं था. आपको अपना आयुर्वेदिक इलाज कराने की
सुविधा अस्पताल में ही मिलेगी."
"आयुर्वेदिक इलाज जारी रखना कोई समस्या नहीं है. हम जेल प्राधिकारियों
को आदेश देंगे कि आपको आयुर्वेदिक इलाज कराने की अनुमति दी जाए.”
आसाराम के
वकील ने आयुर्वेदिक इलाज के लिए दो महीने की अग्रिम ज़मानत की मांग की थी.
इससे पहले राजस्थान हाइकोर्ट भी आसाराम बापू की सज़ा कम करने और ज़मानत याचिका स्वीकार करने से इनकार कर चुकी है.
85 वर्षीय आसाराम इस समय बलात्कार के मामले में दोषी पाए जाने के बाद राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं.
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ब्रेकिंग न्यूज़, टोक्यो पैरालंपिकः भारत की झोली में दो और पदक, मरियप्पन तंगवेलु ने हाई जंप में जीता सिल्वर
टोक्यो पैरालंपिक में भारत को मंगलवार को भी बड़ी सफलता मिली जब हाई जंप में उसके दो खिलाड़ियों ने पदक जीते.
मरियप्पन तंगवेलु ने इस स्पर्धा में रजत पदक जीता जबकि शरद कुमार ने कांस्य पदक हासिल किया.
मरियप्पन का ये लगातार दूसरा ओलंपिक मेडल है. 2016 के रियो ओलंपिक में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था.
टोक्यो में ओलंपिक खेलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के बाद भारत ने वहाँ पैरालंपिक में भी अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया है.
भारत अब तक कुल 10 पदक जीत चुका है. इनमें दो स्वर्ण, पाँच रजत और तीन कांस्य पदक हैं.
इससे पहले भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2016 में रियो के पैरालंपिक में रहा था जहाँ उसे दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक मिला था.
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सऊदी अरब में एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, 8 घायल, एक विमान क्षतिग्रस्त
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सऊदी अरब के अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए एक ड्रोन हमले में आठ लोग घायल हो
गए हैं और एक यात्री विमान क्षतिग्रस्त हुआ है.
सऊदी अरब के सरकारी
न्यूज़ चैनल के हवाले से बताया है कि पिछले 24 घंटों में देश के दक्षिण में स्थित इस एयरपोर्ट पर दो बार हमला
किया गया है.
अल-अख़बारिया चैनल ने पड़ोसी देश यमन में मौजूद सऊदी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के हवाले से बताया कि पहले हमले के कुछ घंटे बाद एक और हमला हुआ जिसे नाकाम कर दिया गया. इसमें कोई हताहत नहीं हुआ.
अब तक किसी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
ड्रोन की मदद से किए गए हमलों में बम बांधकर भेजे गए थे.
यमन में हूती विद्रोहियों
के साथ संघर्षरत सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इस हमले और इसमें घायल हुए
लोगों के बारे में इससे अधिक जानकारी नहीं दी है. उन्होंने सिर्फ ये बताया
है कि उनके द्वारा इस ड्रोन का पता लगा लिया गया था.
बता दें कि अभा एयरपोर्ट
पर हुए इन हमलों से कुछ दिन पहले यमन के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक सैन्य अड्डे
पर मिसाइलों और ड्रोन की मदद से एक बड़ा हमला किया गया था.
इसमें सऊदी अरब के समर्थन
वाले यमन गुट के 30 सैनिकों की मौत हो गयी थी.
इस हमले की ज़िम्मेदारी
अब तक किसी ने नहीं ली है. लेकिन ऐसे संकेत मिलते हैं कि ये हमला ईरान समर्थित
विद्रोहियों द्वारा किया गया था.
साल 2015 से सऊदी नेतृत्व
वाले सैन्य गठबंधन से जूझ रहे यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अंतरराष्ट्रीय
हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और अहम तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है.
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अफ़ग़ानिस्तान में कुछ दिनों में बन जाएगी सरकार: पाकिस्तानी विदेश मंत्री कु़रैशी
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में कुछ दिनों के भीतर सरकार बन जाएगी.
मंगलवार को क़ुरैशी ने इस्लामाबाद में जर्मनी के विदेश मंत्री हेइको मास के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में एक सरकार गठित हो जाएगी.”
उन्होंने कहा कि तालिबान के बयानों के मुताबिक़, अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इसके एलान की संभावना है.
क़ुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के बाेर में पाकिस्तान की नीति बिल्कुल स्पष्ट है.
उन्होंने एक ट्वीट भी किया जिसमें उन्होंने लिखा है- “पाकिस्तान की नीति स्पष्ट है, हम एक राजनीतिक रूप से समावेशी, संप्रभु और समृद्ध अफ़ग़ानिस्तान चाहते हैं, जहाँ ख़ुद भी शांति हो और पड़ोसियों के साथ भी शांति रहे.“
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान की हरसंभव मदद करने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में पहले से ही 30 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी रह रहे हैं और उन्हें हर तरह की सुविधा दी जा रही है.
क़ुरैशी ने कहा, “पाकिस्तान ने अपनी सीमाएँ खुली रखी हैं. लोग दोनों देशों के बीच आवाजाही कर रहे हैं और व्यापार भी चल रहा है.”
जर्मन विदेश मंत्री ने तालिबान के हाल में आए बयानों का स्वागत किया जिसमें उन्होंने वादा किया है कि वो बदले की कार्रवाई नहीं करेंगे और मानवाधिकारों का सम्मान करेंगे.
हास ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में यदि एक व्यापक आधार वाली और सबको शामिल करने वाली सरकार गठित होती है तो ये अच्छा होगा.
तालिबान ने इससे पहले कहा था कि वो एक भावी सरकार के गठन के बारे में सभी पक्षों के साथ चर्चा कर रहे हैं.
हालाँकि, ये स्पष्ट नहीं है कि वो कैसे देश चलाएँगे और उनके शासन में महिलाओं और मानवाधिकारों की स्थिति कैसी होगी .
तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने मंगलवार को अमेरिकी सेना की वापसी के बाद काबुल एयरपोर्ट पर कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान में "सच्ची इस्लामी व्यवस्था" क़ायम करना चाहते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया नोएडा में 40 मंज़िलों वाली दो इमारतों को ढहाने का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में रियल एस्टेट कंपनी
सुपरटेक को दिल्ली से सटे नोएडा में अपनी दो बहुमंज़िला इमारतों को गिराने का आदेश दिया है.
सुपरटेक ने एमराल्ड कोर्ट में दो एपेक्स और सेयाने नाम के 40 मंज़िल ऊंचे दो टॉवर बनाए थे जिनमें लगभग
1000 फ़्लैट थे.
लेकिन एमराल्ड कोर्ट के निवासियों ने कंपनी के इस कदम का विरोध किया और
वे इसके ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाइकोर्ट तक गए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुपरटेक और एमराल्ड
कोर्ट ओनर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य के बीच जारी विवाद में सुपरटेक
के ख़िलाफ़ फैसला दिया था.
इसके बाद सुपरटेक ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेते हुए इलाहाबाद
हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगवा दी थी.
लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाइकोर्ट के
फैसले को स्वीकार करते हुए इन टॉवरों को गिराने का आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में
क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने अपने
आदेश में कहा है कि नोएडा स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट में स्थित इन दोनों टॉवरों के निर्माण में
नियमों का उल्लंघन हुआ है और इन्हें अगले दो महीनों के अंदर सुपरटेक द्वारा अपने
ही खर्च पर गिरा देना चाहिए.”
कोर्ट ने ये भी कहा है कि कंपनी
द्वारा फ़्लैट मालिकों को 12 फीसद ब्याज़ के साथ उनका पैसा लौटाया जाना चाहिए.
बता दें कि इस मामले में अदालतों
द्वारा नोएडा अथॉरिटी एवं सुपरटेक के बीच मिलीभगत को लेकर तीखी टिप्पणियां की गयी
हैं.
कोर्ट ने कहा
है कि सुपरटेक ने जो किया वो बहुत ग़लत है क्योंकि इन टॉवरों का निर्माण हाउसिंग
सोसाइटी को मिली साझा हरित ज़मीन पर किया गया है.
नोएडा अथॉरिटी को
फटकार लगाते हुए कोर्ट ने 4 अगस्त को कहा था कि उसके अंग-अंग से भ्रष्टाचार की बू आती है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी दिया था
यही फ़ैसला
इससे पहले साल 2014 में इलाहाबाद
हाइकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए इन दोनों टॉवरों को चार महीने के भीतर गिराने
का आदेश दिया था.
इसके साथ ही नोएडा अथॉरिटी के
अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के आदेश भी जारी किए थे.
लेकिन सुपरटैक द्वारा सुप्रीम
कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बाद हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लग गयी.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में
एनबीसीसी को जांच करने का आदेश दिया था. और बीती चार अगस्त को सभी दलीलों के बाद
अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था.
मंगलवार को जस्टिस डीवाई
चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने कहा है कि 11 अप्रैल, 2014 को इलाहाबाद हाइकोर्ट
द्वारा दिया गया फैसले में हस्तक्षेप करने की ज़रूरत नहीं दिखती है.
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राहुल गांधी ने जलियांवाला स्मारक के नए रूप को बताया शहीदों का अपमान
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जलियांवाला बाग स्मारक के पुनर्निर्माण को "शहीदों का अपमान" बताया है.
उन्होंने कहा कि केवल एक शख़्स जो शहादत का अर्थ नहीं जानता हो वही इस तरह का अपमान कर सकता है.
एक अन्य ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा है- "जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष नहीं किया, वे उन लोगों को नहीं समझ सकते जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जलियांवाला बाग स्मारक के पुनर्निर्मित परिसर का वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया था.
इस मौक़े पर वहाँ एक साउंड एंड लाइट शो भी हुआ था जिसमें जलियांवाला बाग़ नरसंहार के दिन की घटनाएँ दिखाई गईं.
प्रधानमंत्री ने इस मौक़े पर कहा कि अपने इतिहास की रक्षा करना देश का कर्तव्य है.
उन्होंने कहा कि अतीत की घटनाएं "हमें सिखाती हैं और हमें आगे बढ़ने की दिशा देती हैं."
इतिहासकारों का मानना है कि 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर शहर के जलियांवाला बाग़ में एक जनसभा कर रहे निहत्थे लोगों पर जनरल डायर के आदेश पर गोलियाँ चलाने से हुए नरसंहार में एक हज़ार से अधिक निर्दोष भारतीय मारे गए थे और 1100 से अधिक घायल हुए थे.
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स्मारक के पुनर्निर्माण पर एक सोशल मीडिया पोस्ट को टैग करते हुए राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "केवल एक व्यक्ति जो शहादत का अर्थ नहीं जानता, वह जलियांवाला बाग के शहीदों का ऐसा अपमान कर सकता है."
उन्होंने लिखा है- "मैं एक शहीद का बेटा हूँ. शहीदों का अपमान किसी क़ीमत पर सहन नहीं करूँगा. हम इस अभद्र क्रूरता के ख़िलाफ़ हैं."
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तालिबान नेताओं ने लड़ाकों से कहा- लोगों से शराफ़त से पेश आएँ, हम उनके सेवक हैं
इमेज स्रोत, Reuters
इमेज कैप्शन, काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान की सैन्य टुकड़ी को संबोधित करते तालिबान नेता
अमेरिकी सेना के काबुल एयरपोर्ट से निकलने के बाद तालिबान के नेताओं ने एयरपोर्ट पर फ़ौजी लिबास पहने अपने लड़ाकों को संबोधित करते हुए उन्हें "आज़ादी" के लिए बधाई दी.
तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने उनसे कहा, हमें आपकी क़ुर्बानियों पर नाज़ है. ये आपके और आपके नेताओं ने जो मुश्किलें सही हैं उसी की बदौलत हो सका है. ये हमारे नेताओं की ईमानदारी और सब्र का नतीजा है कि आज हम आज़ाद हैं.
उन्होंने कहा, "मैं आपको और अफ़ग़ानिस्तान को बधाई देता हूँ. हम मनाते हैं कि हमारे देश पर फिर कोई हमला ना हो. हम सुख, समृद्धि और सच्ची इस्लामी व्यवस्था चाहते हैं."
उन्होंने साथ ही तालिबान लड़ाकों से कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ "शराफ़त से पेश आएँ".
ज़बीहुल्लाह ने कहा, "मैं आपसे ये भी चाहता हूँ कि आप लोगों के साथ अपने बर्ताव को लेकर सावधानी बरतें. इस मुल्क़ ने काफ़ी कुछ सहा है. अफ़ग़ान लोग प्यार और सहानुभूति के हक़दार हैं. तो उनके साथ शराफ़त से पेश आएँ. हम उनके सेवक हैं. हमने उनके ऊपर ख़ुद को थोपा नहीं है."
वहीं एयरपोर्ट पर तालिबान के एक और बड़े नेता हनस हक़्क़ानी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के "लोग ख़ुश हैं" हालाँकि "कई तत्व शांति नहीं चाहते थे, वो चाहते थे कि अमेरिकी क़ब्ज़ा क़ायम रहे".
तालिबान के साथ रहे हक़्क़ानी नेटवर्क के नेता ने वहाँ एक रिपोर्टर से बात की जिसकी क्लिप तालिबान के एक मीडिया प्रभारी तारिक़ ग़ज़नीवाला ने ट्वीट की है.
हक़्क़ानी ने कहा, "मैं एक डॉक्टर से बात कर रहा था, उसने कहा- "पहले अस्पताल घायलों और मृतकों से भरे होते थे, अब ऐसा नहीं है."
वो साथ ही कहते हैं, "जब भी कोई सत्ता बदलती है तो ये स्वाभाविक है कि पहले कुछ चुनौतियाँ भी आएँगी...आप जब घर बदलते हैं तो भी कुछ नुक़सान होता है. ये तो सत्ता का परिवर्तन था."
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अफ़ग़ानिस्तान लौटे ओसामा बिन लादेन के पूर्व सुरक्षा प्रमुख
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इमेज कैप्शन, काबुल में तालिबान के सुरक्षा गार्ड
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के प्रभावशाली होने और अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अमीन-उल-हक़ अपने घर लौट आए हैं.
हक़ की वापसी का एक वीडियो सामने आया है जो समझा जाता है कि सोमवार का है. इसमें दिखता है कि नांगरहार प्रांत में बड़ी संख्या में लोग हक़ की कार के आस-पास खड़े हैं.
तालिबान ने इसी महीने 15 अगस्त को राजधानी काबुल पर क़ब्ज़े से पहले नांगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद को अपने नियंत्रण में ले लिया था.
बताया जाता है कि अमीन-उल-हक़ और ओसामा बिन लादेन एक साथ भागे थे जब अमेरिका ने तोरा-बोरा की गुफ़ाओं पर बमबारी कर दी जहाँ वो छिपे थे.
2011 में अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिका के हमले के बाद लादेन और दूसरे अल क़ायदा नेता पाकिस्तान की सीमा से लगी तोरा-बोरा के पहाड़ों में छिप गए थे.
लादेन के वहाँ छिपे होने के दौरान अल क़ायदा नेता की सुरक्षा व्यवस्था की मुख्य ज़िम्मेदारी अमीन-उल-हक़ की थी.
ओसामा बिन लादेन को बाद में अमेरिकी सेना की एक विशेष टुकड़ी ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में 2011 में मार गिराया था.
20 साल पहले अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिका के हमले की मुख्य वजह वहाँ अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी थी.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमीन-उल-हक़ को भी पाकिस्तान में 2008 में गिरफ़्तार किया गया था मगर 2011 में उन्हें रिहा कर दिया गया.
रिपोर्टों के अनुसार हक़ का नाम अभी भी अमेरिका सरकार की विशेष अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची में शामिल है.
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अमेरिका छोड़ गया ढेर सारे सैन्य विमान और गाड़ियाँ, पर वो तालिबान के किसी काम की नहीं
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इमेज कैप्शन, चिनुक हेलिकॉप्टर को वापसी के लिए मालवाहक सैन्य विमान में डालती अमेरिकी सेना
अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ते समय काबुल एयरपोर्ट पर रह गए अपने विमानों और सैन्य गाड़ियों को बेकार कर दिया है ताकि तालिबान उनका इस्तेमाल ना कर सकें.
अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रमुख जनरल केनेथ मैकेंज़ी ने कहा कि उनके सैनिकों ने 73 एयरक्राफ़्ट, 70 बख़्तरबंद गाड़ियों और 27 हम्वी वाहनों को निष्क्रिय कर दिया.
उन्होंने कहा, ये एरक्राफ़्ट दोबारा कभी नहीं उड़ेेंगे, उन्हें कोई इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.
अमेरिकी सैनिकों के काबुल छोड़ने के बाद अमेरिकी अख़बार लॉस एंजेल्स टाइम्स के एक रिपोर्टर ने एयरपोर्ट का एक वीडियो पोस्ट किया है.
इसमें दिखता है कि तालिबान के लोग एयरपोर्ट के हैंगर में जाकर अमेरिकी विमानों का मुआयना कर रहे हैं.
अमेरिका ने साथ ही अपने अत्याधुनिक रॉकेट डिफ़ेंस सिस्टम को भी निष्क्रिय कर दिया है जो वो काबुल एयरपोर्ट पर छोड़ आया है.
इसी सी-रैम सिस्टम से अमेरिकी सेना ने सोमवार इस्लामिक स्टेट के एक रॉकेट हमले को नाकाम किया था.
इससे पहले पिछले कुछ सप्ताह से ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं कि तालिबान लड़ाके बड़ी संख्या में अमेरिका में बने सैन्य हथियारों और वाहनों के साथ देखे जा रहे हैं.
इन्हें असल में अमेरिकी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान की सेना को दिया था, मगर उन्होंने बड़ी आसानी से समर्पण कर दिया जिसके बाद ये हथियार और वाहन तालिबान के हाथों में चले गए.
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अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की शिकस्त दूसरे हमलावरों के लिए सबक: तालिबान
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तालिबान ने मंगलवार को कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की शिकस्त दूसरे हमलावरों और हमारी आने वाली नस्लों के लिए एक सबक है.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने काबुल से आख़िरी अमेरिकी विमान के रवाना होने के कुछ ही देर बाद हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रनवे पर से कहा, "ये दुनिया के लिए भी एक सबक है."
इस मौके पर जश्न मनाते हुए तालिबान लड़ाकों ने हवाई फायरिंग की और सुलह के संकेत दिए.
युद्ध से खस्ताहाल हो चुके अफ़ग़ानिस्तान में वे अमेरिका के जाने के साथ ही 20 साल बाद सत्ता में वापस लौट रहे हैं.
सोमवार की रात छह हज़ार अमेरिकी सैनिकों ने आनन-फानन में काबुल एयरपोर्ट को छोड़ा है.
इसके साथ ही अमेरिका की महाशक्ति वाली छवि अब पहले जैसी नहीं रह जाएगी.
तालिबान लड़ाकों ने काबुल एयरपोर्ट को अपने नियंत्रण में लेने में देर नहीं की.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान को मुबारक हो.... ये फतह हम सब की है."
हालांकि तालिबान ने बार-बार अपने पहले शासन काल की तुलना में एक अधिक सहिष्णु और खुली शासन व्यवस्था देने की पेशकश की है.
उन्होंने कहा, "हम अमेरिका और दुनिया के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं. हम उन सब के साथ अच्छे कूटनीतिक संबंध चाहते हैं."
अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान छोड़ते ही काबुल एयरपोर्ट पर अब तालिबान का नियंत्रण
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काबुल से आ रही तस्वीरों और वीडियो फुटेज में ये देखा जा सकता है कि तालिबान ने अमेरिका के आख़िरी विमान के उड़ान भरने के फौरन बाद हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अपने नियंत्रण में ले लिया है.
लॉस एंजीलिस टाइम्स के रिपोर्टर नबीह बुलोस तालिबान लड़ाकों की उस टीम का हिस्सा थे जो एयरपोर्ट के हैंगर की तलाशी ले रहा था.
ऐसा मालूम दे रहा है कि वहां अमेरिकी सैनिकों ने अपने कुछ विमान छोड़ दिए हैं.
नबीह बुलोस कैमरे पर कहते हैं, "हम यहां तालिबान के साथ हैं. वे कुछ मिनट पहले काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिका के नियंत्रण वाले हिस्से में दाखिल हुए हैं. अब उन्होंने यहां पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है."
कुछ और भी वीडियो सामने आए हैं जिनमें तालिबान लड़ाके अपनी मशीन गनों से खुशी में फायरिंग कर रहे हैं. वे तस्वीरें खिंचा रहे हैं, जश्न मना रहे हैं और एयरपोर्ट के बाक़ी हिस्सों की तलाशी ले रहे हैं.
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संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान पर कड़ा प्रस्ताव पारित, चीन और रूस वोटिंग से रहे दूर
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भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर एक कड़े प्रस्ताव को पारित किया है.
प्रस्ताव में ये मांग की गई है कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल किसी देश को धमकी देने या चरमपंथियों को पनाह देने के लिए नहीं किया जाएगा.
प्रस्ताव में तालिबान से ये उम्मीद जताई गई है कि उसने देश छोड़ने के लिए इच्छुक अफ़ग़ान लोगों और सभी विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकलने के लिए जो प्रतिबद्धता दिखलाई है, वो उसका पालन करेगा.
सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव को सोमवार को पारित किया. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका समेत सुरक्षा परिषद के 13 सदस्य देशों ने इसके पक्ष में वोट किया और किसी सदस्य ने भी इस प्रस्ताव का विरोध नहीं किया.
जबकि वीटो अधिकार से लैस सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
15 अगस्त पर काबुल पर तालिबान के नियंत्रण स्थापित करने के बाद 15 सदस्यों वाले सुरक्षा परिषद अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर ये पहला प्रस्ताव था.
सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता अगस्त में ख़त्म हो रही है.
अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रस्ताव में काबुल एयरपोर्ट पर इस्लामिक स्टेट के हमले की कड़ी भर्त्सना की गई.
इस हमले में 300 से ज़्यादा लोग मारे और घायल हो गए थे जिनमें 28 से सैनिक थे.
अफ़ग़ानिस्तान की 'सबसे लंबी जंग' ख़त्म होने पर क्या बोले अमेरिकी लोग
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अफ़ग़ानिस्तान से आख़िरी अमेरिकी सैनिक के काबुल एयरपोर्ट से रवाना होने के साथ ही 20 साल से इस देश में चल रहा अमेरिकी सैनिक अभियान ख़त्म हो गया है.
अमेरिका के राजनीतिक धड़ों की ओर से अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
राष्ट्रपति जो बाइडन पहले ही इस मुद्दे पर सख़्त आलोचनाओं का सामना कर चुके हैं. सोमवार को रिपब्लिकन नेताओं ने भी उन पर अपने हमले तेज़ कर दिए.
ख़ासतौर पर इस बात के लिए बाइडन प्रशासन की आलोचना की जा रही है कि अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान से केवल 6000 अमेरिकी नागरिकों को वापस निकाला है जबकि वहां अनुमानतः 15,000 अमेरिकी रह रहे थे.
हालांकि उनमें से कई अमेरिकी अफ़ग़ानिस्तान नहीं छोड़ना चाहते हैं.
इससे पहले विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के लिए इच्छुक लगभग 100 से 200 अमेरिकी अभी भी वहीं पर हैं.
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इस पर रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि बाइडन प्रशासन ये कैसे नहीं मालूम है कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में कितने अमेरिकियों को छोड़ दिया है.
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व्हाइट हाउस में चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ रहे मार्क मेडोज़ ने कहा, "आठ महीनों में पहली बात राष्ट्रपति जो बाइडन ने साफ़ कर दिया कि वे 'अमेरिका को सबसे आख़िर में' रखने वाले राष्ट्रपति हैं. वे इस लिस्ट में 'पीछे छूट गए अमेरिका' को भी अब शामिल कर सकते हैं."
"सैकड़ों अमेरिकी अब चरमपंथियों के पास बंधक हैं. हमारे अरबों रुपये के सैनिक साज़ोसामान को तालिबान को सौंप दिया गया. 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई..."
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हालांकि कई डेमोक्रेट नेताओं ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के लिए इच्छुक अफ़ग़ान लोगों और वहां रह गए हरेक अमेरिकी नागरिक को वापस लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.
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कई लोगों ने इस युद्ध में मारे गए अमेरिकियों को अपनी श्रद्धांजलि दी है.
और बहुत से लोगों ने देश की सबसे लड़ाई के ख़त्म होने का स्वागत किया है.
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अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के बाद काबुल में तालिबान खेमे में जश्न का माहौल
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इमेज कैप्शन, अमेरिका का आख़िरी विमान काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरता हुआ
सोमवार की रात काबुल छोड़ने वाले आख़िरी अमेरिकी विमान के उड़ान भरने के साथ ही तालिबान लड़ाकों के बीच जश्न का माहौल देखा गया.
रिपोर्टों के मुताबिक़ तालिबान लड़ाकों ने खुशी जताते हुए हवाई फायरिंग की है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के प्रवक्ता क़ारी युसुफ़ ने कहा कि अमेरिका के आख़िरी सैनिक ने काबुल छोड़ दिया है और हमारे देश को पूरी आज़ादी मिल गई है.
अफ़ग़ानिस्तान में बदले हालात में अमेरिका और उसके नेटो सहयोगियों को जल्दबाज़ी में देश छोड़ना पड़ा.
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हालांकि वहां अभी भी हज़ारों अफ़ग़ान पीछे छूट गए हैं जिन्होंने अमेरिका और पश्चिमी ताक़तों की मदद की थी.
राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बयान में कहा है कि दुनिया तालिबान को उसकी इस प्रतिबद्धता से परखेगी कि जो लोग अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना चाहते हैं, तालिबान उन्हें सुरक्षित निकलने का रास्ता देते हैं या नहीं.
जो बाइडन ने जो डेडलाइन तय की थी, उससे पहले ही अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने का अपना अभियान एक दिन पहले ही ख़त्म कर लिया है.
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