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चीन-रूस की अफ़ग़ानिस्तान पर चर्चा, तालिबान को लेकर क्या बोले जिनपिंग और पुतिन?
चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने तय किया है कि उनके देश आगे भी बातचीत करते रहेंगे.
लाइव कवरेज
शुभम किशोर, रजनीश कुमार and अपूर्व कृष्ण
अफ़ग़ानिस्तान: काबुल एयरपोर्ट पर 10 हज़ार लोग बाहर निकलने के इंतज़ार में - अमेरिका
अमेरिका के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान के काबुल पर एयरपोर्ट पर अभी भी 10 हज़ार लोग इकट्ठा हैं और वो देश से बाहर निकलने की कोशिश में हैं.
अमेरिकी अधिकारी मेजर जनरल हैंक टेलर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि अफ़ग़ानिस्तान में उनका ऑपरेशन "ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित" है.
उन्होंने कहा कि 42 अमेरिकी सैन्य विमानों ने मंगलवार को 11,200 अमेरिकी और 48 सहयोगी देशों के 7,800 नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाला. इन विमानों में 37 सी-17 और पाँच सी-130 विमान शामिल रहे.
उनके मुताबिक हर 39 मिनट के बाद काबुल एयरपोर्ट से एक विमान ने उड़ान भरी. उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर 10 हज़ार लोग बाहर निकाले जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
टेलर ने कहा, "ये इस समय के हालात हैं." उनके मुताबिक देश के बाहर जाने की कोशिश में कई और लोग एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं.
पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, "हम अपनी तरफ़ से जितनी तेज़ी से मुमकिन हो, एक दिन में अधिक से अधिक लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं."
"हम बिल्कुल अंत तक लोगों को निकालने की कोशिश करते रहेंगे."
उन्होंने कहा कि अमेरिकी मिशन ख़त्म होने के बाद सैन्य टुकड़ियां एयरपोर्ट छोड़ देंगी और उसके बाद वहां की ज़िम्मेदारी अमेरिका की नहीं होगी.
उन्होंने कहा, "तालिबान को इसे ख़ुद संभालना होगा और मुझे लगता है अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर ये करना होगा."
उन्होंने कहा, "अगर ज़रूरत पड़ी तो हम वहां से ज़रूरतमंद लोगों को निकालते रहेंगे."
"लेकिन आखिरी के दो दिनों में हम सेना और सैन्य संसाधनों को बाहर निकालने पर ध्यान देंगे."
"लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अगर आपको बाहर निकालना है तो हम आपको बाहर निकालने की कोशिश नहीं करेंगे."
अमेरिका के पास अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौटने की समय सीमा मंगलवार 31 अगस्त की है.
अफ़ग़ानिस्तान: काबुल की हिफ़ाज़त करेगी तालिबान की ये नई 'फ़तेह फ़ोर्स'
अफ़ग़ानिस्तान पर चीन-रूस के बीच बातचीत, तालिबान पर जिनपिंग-पुतिन ने क्या कहा?, केरी ऐलन, बीबीसी मॉनिटरिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फ़ोन पर बात की है.
रिपोर्टों के मुताबिक दोनों नेताओं ने "अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर चर्चा की."
चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, जिनपिंग ने "इस बात पर ज़ोर दिया कि चीन अफ़ग़ानिस्तान की "संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता" का सम्मान करता है, और कहा कि चीन "अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की नीति का पालन कर रहा है."
हालांकि, उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति जटिल है और लगातार बदल रही है." दोनों नेताओं ने तय किया है कि दोनों देश "बातचीत जारी रखेंगे.”
गौर करने वाली बात ये है कि पश्चिमी देशों की अफ़ग़ानिस्तान में क्या भूमिका होगी, इसके बारे में दोनों देशों के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि जिनपिंग ने सभी पक्षों के बीच राजनीतिक वार्ता के महत्व पर ज़ोर दिया.
चीनी सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने पहले संकेत दिये थे कि तालिबान के प्रति चीन का रवैया तब बदल सकता है जब अफ़ग़ानिस्तान में होने वाली घटनाओं का "शिनजियांग पर नकारात्मक प्रभाव" पड़े, ये सीमा से लगा चीनी क्षेत्र है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि "चीन की तालिबान के साथ बातचीत जारी है ."
हाल के दिनों में चीन की मीडिया ने अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान से वापस जाने को लेकर सवाल उठाए हैं.
चीन के सरकारी मीडिया ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों को प्रमुखता से जगह दी है. इसमें चीनी अधिकारियों ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका के "जल्दबाजी" में पीछे हटने की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे "अशांति और अराजकता" का माहौल बना है.
तालिबान ने देश के बाहर अमेरिकी डॉलर ले जाने पर लगाई पाबंदी
तालिबान ने अमेरिकी डॉलर और अफ़ग़ान कलाकृतियों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी है.
अफ़ग़ान इस्लामिक प्रेस से बात करते हुए, तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि इनके साथ पकड़े जाने वाले किसी भी व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अगर ऐसा कोई भी सामान मिला तो उसे ज़ब्त कर लिया जाएगा.
तालिबान का ये बयान ऐसे समय में आया है जब विदेशों से वित्तीय मदद के दरवाज़े उसके लिए एक एक करके बंद होते जा रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के केंद्रीय बैंक के पास लगभग नौ बिलियन अमेरिकी डॉलर हैं. इस राशि का अधिकतर हिस्सा अमेरिका में है. लेकिन अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि वो तालिबान को इस संपत्ति में से कुछ भी नहीं लौटाएगा.
वर्ल्ड बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी अफ़ग़ानिस्तान को सहायता और कर्ज देना निलंबित कर दिया है.
अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान से बातचीत के लिए तैयार जर्मनी
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि जर्मनी तालिबान के साथ बात करने के लिए तैयार हैं ताकि पिछले 20 सालों में जो हासिल हुआ है उसकी हिफ़ाज़त की जा सके. हालांकि उन्होंने कहा है कि वो तालिबान के साथ किसी तरह के बिना शर्त समझौते के लिए तैयार नहीं होंगे.
जर्मनी की संसद को संबोधित करते हुए मर्केल ने कहा कि वो सेना और स्टाफ़, जिन्होंने जर्मनी के लिए "जब तक ज़रूरत थी, काम किया", उन्हें बाहर निकालना जारी रखेंगे.
साथ ही उन्होंने कहा कि वो संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को मानवीय मदद करने में सहयोग करते रहेंगे, ताकि अफ़ग़ानिस्तान से भागकर पड़ोसी देश पहुंचे लोगों की मदद की जा सके.
उन्होंने बताया कि जर्मन सेना ने 4,600 से ज़्यादा लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से निकाला है, ये उनका अभी तक का सबसे बड़ा एयरलिफ़्ट ऑपरेशन है. उन्होंने कहा कि "बचे हुए दिनों में जर्मनी उन लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने में मदद करेगा, जिन्होंने हमारी मदद की है."
मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अमेरिकी लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने की 31 अगस्त की समय सीमा को बढ़ाया नहीं जाएगा. फ्रांस ने कहा है कि वो अपना बचाव अभियान को गुरुवार को ख़त्म कर देगा.
तालिबान के कब्ज़े के कारण चरमपंथ की बढ़ती संभावनाओं पर मर्केल ने कहा, "ये नया सच कड़वा है लेकिन हमें इसका सामना करना पड़ेगा."
"एक बात जिसका हमें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था, वो ये है कि कितनी तेज़ी से अफ़ग़ान सेना तालिबान से हार मान लेगी, या फिर उन्हें रोकने की कोशिश भी नहीं की जाएगी."
अफ़ग़ानिस्तान के लोग देश छोड़ रहे, तालिबान क्या कह रहा इस पर
अफ़ग़ानिस्तान में 10 दिन पहले तालिबान के काबुल पहुँचन के बाद से वहाँ से लगातार लोग देश छोड़ रहे हैं. इनमें वहाँ रह रहे या काम कर रहे विदेशी लोग भी हैं और अफ़ग़ानिस्तान के लोग भी.
काबुल हवाई अड्डे से हर घंटे कोई ना कोई विमान लोगों को लेकर बाहर निकल रहा है, मगर ऐसी भी स्थिति आ रही है जब हो सकता है कि इनमें सीटें खाली रह जाएँ.
बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये को कुछ अधिकारियों ने बताया कि कुछ अफ़ग़ान लोगों को एयरपोर्ट पहुँचने में दिक़्क़त हो रही है क्योंकि उन्हें कई जगह नाकों पर रोक लिया जा रहा है. हालाँकि ये पता नहीं है कि कौन लोग उन्हें रोक रहे हैं.
काबुल के हामिद करज़ई एयरपोर्ट पर हालात पिछले हफ़्ते से ही ख़राब हैं मगर अब हालत और बिगड़ती जा रही है.
बीबीसी को ये भी पता चला है कि बुधवार को कुछ अफ़ग़ान लोगों ने देश छोड़ने की अपनी योजना टाल दी क्योंकि उन्हें पता चला कि तालिबान ने कहा है कि वो नहीं चाहते कि लोग देश छोड़ें.
मंगलवार को तालिबान ने कहा था कि अब और अफ़ग़ान लोगों को काबुल एयरपोर्ट नहीं आने दिया जाएगा क्योंकि वहाँ बहुत कोलाहल है.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि अमेरिका को अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को देश छोड़ने के लिए बढ़ावा नहीं देना चाहिए क्योंकि उन्हें उनके तजुर्बे और काम की ज़रूरत है.
काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से अभी तक कम-से-कम 87,900 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है.
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने बताया कि मंगलवार से अब तक 19,000 लोगों को निकाला गया है.
व्हाइट हाउस की प्रिंसिपल डेपुटी प्रेस सचिव कैरीन जॉं पियर ने ट्वीट कर बताया कि 14 अगस्त से अभी तक अमेरिका ने अपने और सहयोगी देशों के सैन्य विमानों से 82,300 लोगों को बाहर निकाला है.
इनके अलावा भारत ने भी 626 लोगों को बाहर निकाला है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को बताया कि इनमें 228 भारतीय हैं. उन्होंने साथ ही बताया कि इनमें 77 लोग सिख हैं.
पुरी ने बताया कि इन लोगों में भारतीय दूतावास में काम करनेवाले कर्मचारी शामिल नहीं हैं.
केरल में कोरोना के 31,445 नए मामले, पॉज़िटिविटी रेट 19%
केरल में कोरोना संक्रमण की स्थिति एक बार फिर गंभीर होती जा रही है. वहाँ 31,445 नए मामले दर्ज किए गए हैं और पॉज़िटिविटी रेट 19% हो गई है.
इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सुबह जानकारी दी गई थी कि देश भर में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 37,593 नए मामले दर्ज हुए हैं.
देश भर में कोरोना टेस्ट की पॉज़िटिविटी दर 2.10% बताई गई.
उद्धव सरकार ने हाईकोर्ट से कहा, नारायण राणे के ख़िलाफ़ नासिक एफ़आईआर में नहीं करेंगे कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार बंबई उच्च न्यायालय से कहा है कि वो केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के विरुद्ध मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर विवादित टिप्पणी को लेकर नासिक में दर्ज मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी.
बुधवार को दो न्यायाधीशों की एक पीठ ने नारायण राणे की याचिका पर सुनवाई की जिसमें उन्होंने नासिक में दर्ज एफ़आईआर और आगे हो सकने वाले सभी मामलों को ख़ारिज करने की माँग की थी.
राणे ने अदालत से गिरफ़्तारी से बचने के लिए अंतरिम ज़मानत भी माँगी थी.
सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने कहा कि नासिक के एफ़आईआर के सिलसिले में 17 सितंबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी जब इस मामले की अगली सुनवाई होनी है.
हालाँकि, देसाई ने कहा कि दूसरे मामलों के लिए ये राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि याचिका में केवल नासिक के एफ़आईआर का उल्लेख किया गया है.
अदालत ने इसपर सहमति दी और सुनवाई के लिए अगली तारीख़ 17 सितंबर तय कर दी.
नारायण राणे को मंगलवार दोपहर को रत्नागिरी ज़िले में आरएसएक के पूर्व प्रमुख गोलवलकर के गाँव में गिरफ़्तार किया गया था.
इसके बाद उन्हें रायगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया जो उन्हें महाड़ लेकर गई. मंगलवार देर रात महाड की एक अदालत ने राणे को ज़मानत दे दी.
हाईकोर्ट में आज की सुनवाई के बाद नारायण राणे ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट में शिव सेना की ओर से उनके ख़िलाफ़ दायर सभी मुक़दमों में उनकी जीत हुई है जो इस बात का संकेत है कि देश क़ानून से चलता है.
मेघालय में रेप के दोषी पूर्व विधायक को 25 साल की सज़ा
मेघालय में पूर्व विधायक जूलियस दोरफांग को रि-बोई ज़िले की एक विशेष अदालत ने 25 साल की सज़ा सुनाई है. दोरफांग साल 2017 में विधायक रहते हुए एक लड़की के रेप के दोषी पाए गए थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन पर स्पेशल जज फे़ब्रोनियस सिकम संगमा मे 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
दोरफांग विद्रोही समूह हाइनिवट्रैप नेशनल लिबरेशन काउंसिल के संस्थापक और चेयरमैन थे.
उन्होंने 2007 में समर्पण किया था और 2013 में माव्हती सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने थे.
कोर्ट ने उन्हें 13 अगस्त को दोषी करार दिया था और मंगलवार को सज़ा सुनाई.
कोर्ट ने इस मामले में तीन और लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई है, जिनपर लड़की को वेश्यावृत्ति में झोंकने का आरोप था. दोरफांग के वकील किशोर गौतम ने बताया कि वो इस आदेश के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.
दोरफांग को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) द्वारा शिकायत के बाद पूर्वी ख़ासी हिल्स ज़िला पुलिस ने दिसंबर 2016 में गिरफ्तार किया था.
जनवरी 2017 में, एससीपीसीआर ने री-भोई में एक और शिकायत दर्ज कराई,जिसमें आरोप लगाया गया था कि दोरफांग ने ज़िले के एक रिसॉर्ट में उसी नाबालिग के खिलाफ इसी तरह का अपराध किया था.
शिकायतों के आधार पर दोरफांग के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद वह लापता हो गए.उन्हें 7 जनवरी को असम में एक बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया था.
दोरफांग को 5 जनवरी, 2017 को उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले में पॉक्सो अदालत ने दोषी ठहराया और सजा सुनाई.दोरफांग को उनकी गिरफ्तारी के बाद से नोंगपोह ज़िला जेल में बंद कर दिया गया था.
हाइकोर्ट ने उन्हें पिछले साल चिकित्सीय आधार पर जमानत दी थी.दोषी ठहराए जाने के बाद 13 अगस्त को उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया.
नीदरलैंड्स में अफ़ग़ानिस्तान से शरणार्थियों को लाने का हुआ विरोध
नीदरलैंड्स में मंगलवार को अफ़ग़ान शरणार्थियों के पहुंचने के बाद हुए विरोध प्रदर्शन को काबू में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा.
शुरुआत में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन तनाव तब बढ़ गया जब मौजूद युवाओं ने बार बार वहां से हटने की अपील को नज़रअंदाज़ कर दिया.
कुछ प्रदर्शनकारी देशभक्ति गीत गा रहे थे, तो कुछ बैनर लेकर खड़े थे. कुछ लोगों ने आगमन स्थल के सामने टायर जलाए.
पुलिस अफ़सरों के साथ पुलिस विभाग के कुत्तों को प्रदर्शन रोकने के लिए और प्रदर्शनकारियों को इलाक़े से बाहर भगाने के लिए वहां भेजा गया. हालांकि किसी को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया.
अफ़ग़ानिस्तान से आए क़रीब 800 शरणार्थियों को सेना के हार्सकैंप में रखा जाएगा.
शरणार्थियों का पहला समूह मंगलवार दोपहर को वहां पहुंचा था.
सेना का ये कैंप अफ़ग़ान शर्णार्थियों के लिए बनाए गए चार इमरजेंसी कैंपों में से एक है.
पैरालंपिक में शामिल हुआ अफ़ग़ानिस्तान का झंडा, लेकिन खिलाड़ी मौजूद नहीं
टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक खेलों में अफ़ग़ानिस्तान के खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं लेकिन खेलों के उद्घाटन समारोह में देश का झंडा ज़रूर शामिल हुआ.
दो खिलाड़ियों, ज़ाकिया ख़ुदादादी और होशनी रसौली को पैरा-ताइकवॉन्डो में प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा जाना था.
लेकिन दोनों ही उन हज़ारों लोगों में शामिल थे, जो तालिबान के क़ब्ज़े के बाद देश नहीं छोड़ पा रहे थे, हालांकि अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक कमिटी ने बाद में बताया कि उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक कमिटी के एक प्रवक्ता क्रेग स्पेंस ने कहा कि उन्हें अफ़ग़ानिस्तान से निकालने की कोशिश की गई और अब वो सुरक्षित स्थान पर हैं.
उन्होंने कहा, “मैं ये नहीं बता सकता कि वो किस जगह पर हैं, क्योंकि ये खेलों के बारे में नहीं है, ये इंसानों की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा है. ज़ाहिर है कि वो एक भयावह प्रक्रिया से ग़ुज़रे है, उन्हें मनोवैज्ञानिक मदद और परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है.”
23 साल की ख़ुदादादी पैरालंपिक में अफ़ग़ानिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वालीं पहली महिला बन सकती थीं. उन्होंने तालिबान के कब्ज़े के बाद ख़ुद को वहां से निकालने की अपील की थी.
चीनी राष्ट्रपति ने अपनी पकड़ की और मज़बूत, हुआ ये फ़ैसला
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की राजनीतिक विचारधारा राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी. चीन के शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि शी जिनपिंग विचारधारा से किशोरों में मार्क्सवादी सोच स्थापित होगी.
इस विचारधारा को प्राथमिक स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक में शामिल किया जाएगा. राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका समाज के विभिन्न क्षेत्रों में मज़बूत करने की ये हालिया कोशिश है.
शिक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि इसका लक्ष्य समाजवाद के निर्माताओं और उत्तराधिकारियों को तैयार करना है. शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह नैतिक, बौद्धिक, शारीरिक और सौंदर्य के स्तर पर भी किया जाएगा.
इसमें श्रम शिक्षा को भी शामिल किया गया है, जिसमें कड़ी मेहनत और उत्साह को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा की भी शिक्षा दी जाएगी. 2018 में चीन के संविधान में भी शी जिनपिंग थॉट को शामिल किया गया था.
संविधान में शामिल किए जाने के बाद से 'शी जिनपिंग थॉट' विश्वविद्यालयों और पॉलिटिकल यूथ विंग के साथ स्कूलों में भी इसे शामिल किया गया.
प्राथमिक विद्यालय में देश, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और समाजवाद के प्रति प्यार को बढ़ावा देने पर केंद्रित किया जाएगा. ग्लोबल टाइम्स के अनुसार मध्य विद्यालयों में ज्ञान और अध्ययन पर ध्यान दिया जाएगा ताकि बुनियादी राजनीतिक फ़ैसला लेने और विचार बनाने में मदद मिले. कॉलेजों में सैद्धांतिक विचार को अपनाने पर ज़ोर दिया जाएगा.
इससे पहले भी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के अपने विचार रहे हैं, लेकिन माओत्से तुंग के अलावा किसी के भी विचार को पार्टी संविधान में थॉट के रूप में जगह नहीं दी गई थी. केवल माओ और देंग श्याओपिंग का नाम पार्टी संविधान में उनके विचार को लेकर शामिल किया गया था.
अब स्कूल के बच्चे, कॉलेज स्टूडेंट्स, सरकारी कर्मचारी नौ करोड़ कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों के साथ शी जिनपिंग थॉट पढ़ेंगे. चीन में शी जिनपिंग थॉट के साथ ही नए तेवर में चीनी समाजवादी युग शुरू हो गया है. पार्टी ने इस नए युग को आधुनिक चीन का तीसरा चैप्टर क़रार दिया है.
कोरोना: बिहार में स्कूल, कॉलेज, सिनेमा हॉल, धार्मिक स्थल, जिम, पार्क खुले
कोविड -19 के नए मामलों में आई कमी को देखते हुए बिहार में स्कूल कॉलेज, मॉल, पार्क और धार्मिक स्थलों को सामान्य रूप से खोलने के आदेश दिए गए हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी जानकारी दी.
नीतीश मे ट्वीट कर लिखा, “सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज, तकनीकी शिक्षण संस्थान तथा विद्यालय (पहली से बारहवीं कक्षा तक) के साथ-साथ कोचिंग संस्थान भी सामान्य रूप से खुलेंगे. राज्य के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, विद्यालयों द्वारा परीक्षा आयोजित की जा सकेंगी.”
“कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार को देखते हुए सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शॉपिंग मॉल, पार्क, उद्यान एवं धार्मिक स्थल सामान्य रूप से खुल सकेंगे.”
“50% क्षमता के साथ सिनेमा हॉल, क्लब, जिम, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकान (आगंतुकों के साथ) खुल सकेंगे.”
हालांकि नीतीश कुमार ने लोगों को तीसरी लहर के प्रति आगाह करते हुए कोविड के नियमों का पालन करने का आग्रह किया है.
बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार तक बिहार में कोरोना के 101 सक्रिय मामले थे.
शिव सेना का नारायण राणे पर हमला जारी, कहा- पीएम मोदी के बारे में कोई ऐसा बोलता तो...
शिव सेना ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे पर हमला जारी रखते हुए कहा है कि उनकी वजह से केंद्र सरकार का सिर शर्म से झुक गया है.
उसने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में की गई उनकी टिप्पणी को गंभीरता से लेना चाहिए.
पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में उनपर तीखा हमला करते हुए उनकी तुलना ऐसे बैलून से की जिसमें छेद हैं और बीजेपी चाहे जितनी हवा भर दे वो ऊपर नहीं जा सकेगा.
सामना ने लिखा है कि केंद्रीय मंत्री बनाए जाने के बाद भी राणे का व्यवहार सड़कछाप गुंडे जैसा है.
संपादकीय में लिखा है, अगर किसी ने ऐसी बात प्रधानमंत्री के बारे में कही होती, तो उसे देशद्रोह के आरोप में अंदर कर दिया जाता. राणे का अपराध भी समान है.
पत्र ने लिखा है कि बीजेपी को इसकी महँगी कीमत चुकानी पड़ेगी.
उसने लिखा है, "मुख्यमंत्री को धमकी देनेवाले हाथ को क़ानूनी तौर पर तोड़ दिया जाना चाहिए. महाराष्ट्र की पिछली देवेंद्र फडनवीस सरकार ने कुछ बौद्धिक लोगों को इन आरोपों के बाद जेल भेज दिया था कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का षडयंत्र रच रहे थे."
सामना ने लिखा है, "कोई भी सभ्य नेता होता तो माफ़ी माँग लेता और बात ख़त्म हो जाती क्योंकि कोई भी सरकार से बड़ा नहीं है. मगर बीजेपी के लिए, महाराष्ट्र का गौरव और मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा का कोई मोल नहीं है.”
अफ़ग़ानिस्तान में डेडलाइन नहीं बढ़ाना चाहते बाइडन, बोले- तालिबान मदद कर रहा
अमेेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अमेरिका 31 अगस्त की डेडलाइन से पहले अफ़ग़ानिस्तान से वापसी के लिए पूरी गति से काम कर रहा है.
बाइडन ने ये बात ऐसे समय कही है जब उनपर इस डेडलाइन को बढ़वाने के लिए दबाव बढ़ रहा है. कई देशों का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों के नहीं रहने पर काबुल एयरपोर्ट सुरक्षित नहीं रह सकेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने जी-7 देशों के नेताओं की अफ़ग़ानिस्तान पर बुलाई गई आपात बैठक के बाद ये बात कही. बैठक में ब्रिटेन और अन्य देशों ने अमेरिका से इस डेडलाइन को बढ़ाने का आग्रह किया था.
मगर जो बाइडन ने इस माँग के बावजूद कहा है- "हम जितनी जल्दी इसे (अमेरिका की वापसी) ख़त्म कर लें, उतना अच्छा."
तालिबान ने कह दिया है कि वो 31 अगस्त की डेडलाइन को नहीं बढ़ाएगा और सभी विदेशी सैनिकों को उस दिन तक अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकल जाना होगा.
बाइडन ने कहा, "तालिबान ने हमारे लोगों को बाहर निकालने में मदद के लिए क़दम उठाए हैं."
उन्होंने साथ ही जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान का मूल्यांकन उनके किए गए कामों से करेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वहाँ से लोगों को बाहर निकालने का काम वहाँ इस्लामिक स्टेट के ख़तरे की वजह से जल्दी समाप्त हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि अमेरिका वहाँ जितने ज़्यादा समय तक रहेगा, हमले का ख़तरा उतना ही बढ़ता जाएगा.
कितने लोगों को निलाका जा चुका है
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक़ सैकड़ों अमेरिकी सैनिक पहले ही निकल चुके हैं. हालाँकि, इससे काबुल से लोगों की वापसी पर फ़र्क नहीं पड़ा है.
काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से अभी तक कम-से-कम 70,700 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है.
इनमें से 626 लोगों को भारत ने बाहर निकाला है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को बताया कि इनमें 228 भारतीय हैं. उन्होंने साथ ही बताया कि इनमें 77 लोग सिख हैं.
पुरी ने बताया कि इन लोगों में भारतीय दूतावास में काम करनेवाले कर्मचारी शामिल नहीं हैं.
नारायण राणे और उद्धव ठाकरे के बीच दुश्मनी का पूरा इतिहास
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की कथित टिप्पणी को लेकर शुरू हुए विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है.
मंगलवार को इस कथित बयान को लेकर केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के कद्दावर नेता रहे नारायण राणे को गिरफ़्तार कर लिया गया. देर रात उन्हें ज़मानत मिल गई.
बहरहाल, इस पूरे मामले ने एक बार फिर से नारायण राणे और उद्धव ठाकरे के बीच की आपसी रंज़िश को सुर्खियों में ला दिया है.
नारायण राणेे को बेल के बाद पुलिस ने भेजा नोटिस, 2 सितंबर को थाने में बुलाया
महाराष्ट्र की नासिक पुलिस ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर विवादित टिप्पणी के मामले में नोटिस भेजकर 2 सितंबर को थाने में पेश होने के लिए कहा है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दूसरी तरफ़ राणे भी आज बंबई उच्च न्यायालय में अपने ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर को ख़ारिज करवाने के लिए अपील करेंगे.
मंगलवार को राणे की गिरफ़्तारी ने महाराष्ट्र में राजनीतिक रंग ले लिया था और राज्य में जगह-जगह प्रदर्शन हुए.
सत्ताधारी शिव सेना और राणे की भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों के बीच कई जगह हिंसक संघर्ष भी हुआ.
बुधवार को भी मुंबई में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के आवास के बाहर पुलिसकर्मी तैनात हैं.
इससे पहले मंगलवार देर रात महाड़ की एक अदालत ने राणे को ज़मानत दे दी. राणे के ख़िलाफ़ मुंबई से 165 किलोमीटर दूर रायगढ़ ज़िले के महाड़ में एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी.
मजिस्ट्रेट ने उन्हें हिरासत में लेने के पुलिस के आग्रह को ठुकरा दिया मगर राणे को महाड़ पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया.
ज़मानत मिलने के बाद नारायण राणे ने ट्वीट कर लिखा- "सत्यमेव जयते."
मंगलवार हुई थी गिरफ़्तारी
राणे को मंगलवार दोपहर को रत्नागिरी ज़िले में आरएसएक के पूर्व प्रमुख गोलवलकर के गाँव में गिरफ़्तार किया गया था.
इसके बाद उन्हें रायगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया जो उन्हें महाड़ लेकर गई.
सऊदी अरब ने भारत के प्रवासी कामगारों पर लगा ट्रैवेल बैन हटाया
सऊदी अरब ने मंगलवार को 20 देशों के प्रवासी कामगारों पर लगाए गए ट्रैवेल बैन को ख़त्म कर दिया है.
कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए सऊदी अरब ने फ़रवरी महीने में यह बैन लगाया था. जिन 20 देशों के प्रवासी कामगारों पर से ट्रैवेल बैन हटाया गया है, उनमें भारत भी शामिल है.
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार जिन 20 देशों के प्रवासी कामगारों से ट्रैवेल बैन हटाया गया है, वे अब सऊदी अरब आ सकते हैं लेकिन कोविड वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी होनी चाहिए.
जिन 20 देशों से सऊदी अरब ने ट्रैवेल बैन हटाया है, वे हैं- यूएई, लेबनान, मिस्र, भारत, अर्जेंटीना, जर्मनी, अमेरिका, इंडोनेशिया, आयरलैंड, इटली, पाकिस्तान, ब्राज़ील, पुर्तगाल, ब्रिटेन, तुर्की, दक्षिण अफ़्रीका, स्वीडन, स्विटज़रलैंड, फ़्रांस और जापान.
सऊदी अरब ने दो फ़रवरी को इन देशों के नागरिकों पर ट्रैवेल बैन लगाया था. हालांकि इस पाबंदी से राजनयिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और उनके परिवारों को बाहर रखा गया था. जुलाई महीने में सऊदी के गृह मंत्रालय ने अपने नागरिकों से कहा था कि वे कोविड ट्रैवेल गाइडलाइन तोड़ेंगे तो तीन साल के लिए ट्रैवेल बैन लगा दिया जाएगा.
सऊदी के नागरिकों पर भी इन देशों की यात्रा पर पाबंदी थी. सऊदी ने एक अगस्त से कोविड वैक्सीन लेने वालों पर्यटकों के लिए सीमा खोल दी थी.
ब्रेकिंग न्यूज़, तालिबान कैसे चलाएगा अफ़ग़ानिस्तान, विश्व बैंक ने किया यह फ़ैसला
विश्व बैंक ने अफ़ग़ानिस्तान में परियोजनाओं की लिए फंडिंग रोक दी है. अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के बाद विश्व बैंक ने यह अहम फ़ैसला किया है.
कहा गया है कि तालिबान के नियंत्रण से देश की विकास परियोजनाओं और ख़ास कर महिलाओं पर बुरा असर पड़ेगा. इससे पहले आईएमएफ़ ने भी भुगतान बंद कर दिया था. बाइडन प्रशासन ने भी अफ़ग़ानिस्तान सेंट्रल बैंक की संपत्तियों को जब्त कर लिया है.
विश्व बैंक के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, ''हमने अफ़ग़ानिस्तान में अपने ऑपरेशन के लिए भुगतान पर रोक लगा दी है. हम अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा हालात पर अपनी आंतरिक नीतियों और प्रक्रिया के तहतनज़र रख रहे हैं. हम अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और विकास में शामिल लोगों से बातचीत जारी रखेंगे. हम अपने साझेदारों के साथ अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद के लिए कोशिश जारी रखेंगे ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके.''
शुक्रवार को विश्व बैंक ने कहा था कि काबुल से उनके स्टाफ़ को सुरक्षित पाकिस्तान भेजा गया है. विश्व बैंक का यह फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान की नई सरकार के लिए ताज़ा तगड़ा झटका है. पिछले हफ़्ते आईएमएफ़ ने क़र्ज़ बंद करने की घोषणा की थी.