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शुक्रवार 20 अगस्त के दिन भी अफ़ग़ानिस्तान में सियासी हलचल जारी रही. आइए एक नज़र डालते आज अफ़ग़ानिस्तान से जुड़ी ख़ास ख़बरों पर.
अनंत प्रकाश, कमलेश मठेनी and अपूर्व कृष्ण
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शुक्रवार 20 अगस्त के दिन भी अफ़ग़ानिस्तान में सियासी हलचल जारी रही. आइए एक नज़र डालते आज अफ़ग़ानिस्तान से जुड़ी ख़ास ख़बरों पर
*काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं, हज़ारों लोग अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाने के लिए एयरपोर्ट के बाहर मौजूद हैं.
*जर्मन प्रसारक डॉएचे वेले ने बताया है कि तालिबान ने उनके एक पत्रकार के रिश्तेदार को जान से मार दिया है.
*संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि तालिबान अफ़ग़ान, नेटो एवं अमेरिकी सेनाओं के सहयोगियों को तलाश रहा है.
*एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि तालिबान ने हज़ारा अल्पसंख्यक समुदाय के नौ लोगों को प्रताड़ित करके उनकी हत्या कर दी है.
*संयुक्त राष्ट्र वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने अफ़ग़ानिस्तान में एक व्यापक मानवीय संकट पैदा होने की चेतावनी दी है.
*ब्रितानी विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने फोन कॉल विवाद पर अपने फैसले का बचाव किया है.
*व्हाइट हाउस ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन काबुल में जारी बचाव अभियान पर जल्द ही एक अपडेट जारी करेंगे.
*चरमपंथी संगठन 'इस्लामिक स्टेट' ने अपने साप्ताहिक अख़बार अल-नबा के 19 अगस्त के संपादकीय में तालिबान की वापसी पर कहा है, "ये अमन के लिए जीत है, इस्लाम के लिए नहीं. ये सौदेबाज़ी की जीत है न कि जिहाद की."
*अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख हामिद शिनवारी ने कहा है कि उनकी टीम एक बार फिर श्रीलंका में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक दिवसीय श्रृंखला की तैयारी कर रही है.

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तालिबान ने अपने ख़िलाफ़ बढ़ती नाराज़गी के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी शासन को स्वीकार करने की अपील की है.
चीन के सरकारी मीडिया समूह सीजीटीएन टीवी को इंटरव्यू देते हुए तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शहीन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को “अफ़ग़ानी आवाम की इच्छा का सम्मान” करना चाहिए.
शहीन ने तालिबानी शासन में अफ़ग़ान महिलाओं की ज़िंदगी पर जताई जा रही चिंताओं को निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी सरकार महिलाओं के काम करने एवं पढ़ाई करने के अधिकार की रक्षा करेगी.
इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक संस्थाओं से नई सरकार के लिए फंड रिलीज़ करने का आग्रह किया.
चीन पर अपनी बात रखते हुए सुहैल शहीन ने कहा, “चीन एक विशाल अर्थव्यवस्था और क्षमता वाला देश है. वे अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण में एक बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं.पहले भी हमारे चीन और रूस के साथ रिश्ते रहे हैं. हमने उन्हें बताया है कि उन्हें अफ़ग़ानिस्तान को लेकर चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है.
ये हमारे हित में है कि हम अपने पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के ख़िलाफ़ अपनी ज़मीन का इस्तेमाल न होने दें. ये हमारे लिए अहमहै.अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण में हमें सभी देशों से मदद की ज़रूरत होगी. इसमें पड़ोसी देश, क्षेत्रीय देश और अमेरिका समेत शेष दुनिया शामिल है.”
इस इंटरव्यू में जब शहीन से पूछा गया कि लोग अफ़ग़ानिस्तान से क्यों भाग रहे हैं, इस पर शहीन ने कहा कि वे लोग भ्रमित होने की वजह से ऐसे कदम उठा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसी अफ़वाहों से भ्रमित हैं जो सुझाती हैं कि अगर कोई व्यक्ति विमान में चढ़ गया तो उसे अमेरिका या ब्रिटेन में रहने दिया जाएगा.
शहीन ने तालिबानी अभियान की तेजी को आने वाले सरकार की वैधता के रूप में भी पेश किया.
उन्होंने कहा कि “ये कोई चुनाव नहीं है लेकिन ये लोगों का समर्थन दिखाता है.”

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अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख हामिद शिनवारी ने कहा है कि उनकी टीम एक बार फिर श्रीलंका में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक दिवसीय श्रृंखला की तैयारी कर रही है.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान राष्ट्रीय टीम काबुल में प्रैक्टिस फिर से शुरू करने के लिए 'उत्साहित' थी.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि शिविर में माहौल तनावपूर्ण था और जैसे ही विमान सेवाएं फिर से शुरू होंगी, टीम को श्रीलंका भेज दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में अधिकारियों के संपर्क में हैं. हामिद शिनवारी ने कहा कि तालिबान से क्रिकेट को कोई खतरा नहीं है.
उन्होंने कहा, "पिछली तालिबान सरकार में क्रिकेट कोई समस्या नहीं थी और ऐसा दोबारा नहीं होगा. मुझे याद नहीं है कि तालिबान ने कभी क्रिकेट को लेकर कोई समस्या खड़ी की हो."
शिनवारी ने कहा कि वह फिलहाल महिला क्रिकेट पर टिप्पणी नहीं कर सकते लेकिन अगले कुछ हफ्तों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी 10 सितंबर से काबुल में अपनी टी-20 लीग शुरू करने की घोषणा की है.
उन्होंने कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान में क्रिकेट को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमारे भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के साथ मजबूत संबंध हैं और हम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय का हिस्सा हैं."

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि अन्य देशों को अफ़ग़ानिस्तान पर अपनी इच्छा नहीं थोपनी चाहिए.
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ बातचीत के बाद मॉस्को में मीडिया से बात कर रहे थे.
राष्ट्रपति पुतिन ने उम्मीद जताई कि तालिबान अपने वादों को निभाएगा.
उन्होंने ये कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि चरमपंथियों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने और क्षेत्र के अन्य देशों में फैलने से रोका जाए.
व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि "बाहर बैठकर विदेशी मूल्यों को थोपने और विदेशी मॉडल का लोकतंत्र विकसित करने की गैरजिम्मेदाराना नीति को रोका जाना चाहिए. हम अफगानिस्तान को जानते हैं, हम उन लोगों को अच्छी तरह जानते हैं, और हमने सीखा है कि यह देश कैसे काम करता है, और इसकी परंपराओं के विपरीत, उस पर एक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था थोपना कितना हानिकारक हो सकता है."
उन्होंने आगे कहा, "इनमें से कोई भी राजनीतिक और सामाजिक प्रयोग अतीत में सफल नहीं हुआ है."
उन्होंने कहा कि तालिबान ने युद्ध की समाप्ति की घोषणा की है, नागरिकों और राजनयिकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है और उम्मीद है कि सब कुछ किया जाएगा.

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भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने शुक्रवार को दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन जायकोव–डी को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दे दी है.
प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो ने बताया है कि ये दुनिया की पहली और भारत में निर्मित डीएनए आधारित कोविड 19 वैक्सीन है जो बच्चों और बड़ों को दी जा सकती है.
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तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में समाप्त हुए मॉनसून सत्र को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों पर तीखा हमला बोला है और 9 सवालों का जवाब माँगा है.
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने एक वीडियो में उनसे अलग-अलग मुद्दों पर नौ सवाल पूछे हैं.
उन्होंने सबसे पहले पूछा कि प्रधानमंत्री ओबीसी बिल पर बहस के समय सदन में क्यों नहीं थे?
ओ'ब्रायन ने सीधे-सीधे प्रधानमंत्री से पूछा, "पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा जी मौजूद थे, मनमोहन सिंह भी थे? प्रधानमंत्री कहाँ थे?"
टीएमसी सांसद ने दावा किया कि मोदी ने पिछले पाँच वर्षों में राज्यसभा में पूछे गए एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया है.
उन्होंने कहा, "आपने विपक्ष के किसी भी सवाल का जवाब देने की जहमत क्यों नहीं उठाई? मनमोहन सिंह ने 22 सवालों के जवाब दिए थे."
उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को पेगासस विवाद और कृषि क़ानूनों पर संसद के दोनों सदनों में नहीं बोलने दिया गया.
उन्होंने ये भी पूछा कि संसद का सत्र समय से पूर्व क्यों समाप्त कर दिया गया?
उन्होंने ये भी जानना चाहा कि लोकसभा के उपाध्यक्ष का पद पिछले दो वर्षों से क्यों खाली है?
अपने आख़िरी प्रश्न में कैबिनेट मंत्रियों पर निशाना साधते हुए डेरेक ओ'ब्रायन ने पूछा, "संसद को चलाना किसकी ज़िम्मेदारी है? सरकार की या विपक्ष की? सरकार किसके लिए जवाबदेह है लोगों के लिए. हम लोगों के लिए जवाबदेह हैं."
संसद के मॉनसून सत्र के समय से पहले समाप्त होने और आख़िरी दिन हिंसा की ख़बरों पर सफ़ाई देने के लिए केंद्र सरकार के 8 मंत्रियों ने एक साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी.
डेरेक ओ'ब्रायन ने इन मंत्रियों को चुनौती दी कि वो उनके बस एक सवाल का जवाब देकर दिखाएँ.
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राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव में टकराव दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है.
तेज प्रताप यादव ने शुक्रवार को खुलकर तेजस्वी यादव के सहयोगी बताए जाने वाले संजय यादव पर आरोप लगाया है कि वो उन्हें तेजस्वी यादव से ना बात करने दे रहे हैं और ना मिलने दे रहे हैं.
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “तेजस्वी जी से मेरी बात चालू ही हुई है. तो ये संजय यादव ने आकर हमें रोकने का काम किया है. अब तेजस्वी को लेकर चले गए हैं. ये मिलने नहीं दे रहे हैं. बात नहीं करने दे रहे हैं.
दरअसल, हालिया विवाद की जड़ राजद की छात्र इकाई के अध्यक्ष पद से जुड़ी हुई है.
राजद की बिहार शाखा के अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कुछ दिनों पहले पटना यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहे गगन कुमार को अध्यक्ष पद सौंप दिया था.
तेज प्रताप यादव को ये नाग़वार गुज़रा क्योंकि उनके क़रीबी माने जाने वाले आकाश यादव को इस पद से हटाकर गगन कुमार को अध्यक्ष बनाया गया था.
इसके बाद से तेज प्रताप यादव जगदानंद सिंह से लेकर अपने भाई तेजस्वी यादव के प्रति नाराज़गी का खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
तेज प्रताप यादव ने कहा था कि “वह (जगदानंद सिंह) सोचते हैं कि ये उनकी पार्टी है. पार्टी संविधान का पालन नहीं किया गया. हमारे छात्र नेताओं को नोटिस क्यों जारी नहीं किया गया. “तेज प्रताप यादव कौन है”, कहकर हमें ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं. वह सिर्फ कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी तोड़ना चाहते हैं.”
हालाँकि, इसके बाद जगदानंद सिंह ने कहा है, “वह पार्टी संविधान को स्वीकार कर रहे हैं, इससे ज़्यादा अच्छा कुछ नहीं हो सकता. हर समर्पित पार्टी कार्यकर्ता के लिए संविधान नियम और दिशानिर्देश की तरह होते हैं. इसका उल्लंघन नहीं किया जा रहा है.
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चीन को तालिबान से परहेज़ नहीं है, ये बात किसी से छिपी नहीं है. मगर क्या वो अफ़ग़ानिस्तान में हुए बदलाव के बाद भी तालिबान के संपर्क में है? क्या वो तालिबान की सरकार को मान्यता देगा?
चीन के विदेश मंत्रालय की दैनिक ब्रीफ़िंग में गुरुवार को ये सवाल पूछे गए और चीनी प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इनका जवाब भी दिया.
प्रवक्ता ने तालिबान के संपर्क के बारे में कहा, "चीन ने अफ़ग़ान तालिबान और दूसरे समुदायों के साथ अपना संपर्क बरक़रार रखा हुआ है और वो अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता और विभिन्न पक्षों की इच्छा का सम्मान करता है."
तालिबान के बारे में चीन की राय बताने के लिए मीडिया का सहारा लेते हुए प्रवक्ता ने कहा, "मीडिया में कई ये मानते हैं कि आज का तालिबान पिछली बार की तुलना में ज़्यादा सौम्य और समझदार है जब वो सत्ता में आए थे."
उन्होंने कहा, "चीन तालिबान से ये आशा करता है कि वो अपनी सकारात्मक बातों को लागू करेंगे और एक ऐसा राजनीतिक तंत्र तैयार करेंगे जो घरेलू परिस्थितियों के अनुरूप हो तथा जिसे लोगों का समर्थन हासिल हो."

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क्या चीन तालिबान की सरकार को मान्यता देगा- इस सवाल का भी चीनी प्रवक्ता ने सीधा जवाब नहीं दिया.
उन्होंने कहा, "हमने लक्ष्य किया है कि रूस और कुछ दूसरे देशों के कुछ राजनेता और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई लोगों ने तालिबान के व्यवहार की पहचान की है और माना है कि वे अच्छे और सकारात्मक रहे हैं और उन्होंने समझदारी भरे क़दम उठाए हैं."
प्रवक्ता ने साथ ही कहा कि चीन मानता है कि तालिबान को चरमपंथ और आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाना चाहिए ताकि युद्ध को झेल चुके अफ़ग़ान लोग शांति से रह सकें.
पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान में जारी भारी हिंसा के बीच मुल्लाह अब्दुल ग़नी बरादर की अगुआई में अफ़ग़ान तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल चीन पहुँचा था और चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात की थी.

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अफ़ग़ानिस्तान में काबुल एयरपोर्ट जा रहे जर्मनी के एक नागरिक को गोली मार दी गई है. काबुल में अभी भी एयरपोर्ट के पास काफ़ी ख़तरा बताया जा रहा है.
जर्मनी सरकार की एक प्रवक्ता ने ये जानकारी देते हुए बताया है कि उनके नागरिक को जल्दी ही वहाँ से बाहर निकाला जाएगा.
प्रवक्ता ने कहा,"उनकी चिकित्सा हो रही है और उनकी जान को कोई ख़तरा नहीं है."
गोलीबारी की ये घटना से एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान में एयरपोर्ट के पास की स्थिति का अंदाज़ा होता है जहाँ बताया जा रहा है कि भारी भीड़ है और लोग किसी भी तरह से वहाँ से निकलना चाह रहे हैं.
जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार जर्मन दूतावास ने एयरपोर्ट जानेवाले लोगों के लिए चेतावनी जारी की है कि वहाँ अफ़रातफ़री है और एयरपोर्ट के प्रवेशद्वारों पर हमले हो सकते हैं.
उसने लिखा है, "इस वक़्त एयरपोर्ट ख़ुला है, मगर ये गेट बहुत कम नोटिस पर किसी भी समय ब्लॉक हो सकते हैं, इसलिए भी क्योंकि बहुत सारे लोग अपने परिवारों के साथ बाहर निकलना चाह रहे हैं."
जर्मन सेना ने कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने के अभियान में मदद के लिए हेलिकॉप्टर भेजने पर विचार कर रही है.
काबुल पर तालिबान के रविवार को क़ब्ज़ा करने के बाद से ही वहाँ एयरपोर्ट पर भारी भीड़ जमा हो गई थी.
सोमवार को वहाँ स्थिति संभालने के लिए गोलियाँ चलानी पड़ी थी. कुछ लोगों की मौत भी हुई.
एयरपोर्ट का नियंत्रण अपने हाथ में लेने वाली अमेरिकी सेना ने मृतकों की संख्या के बारे में कुछ नहीं कहा है.
मगर तालिबान ने कहा है कि रविवार से एयरपोर्ट पर 12 लोगों की मौत हो चुकी है.

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आलोक प्रकाश पुतुल
रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित नारायणपुर ज़िले में संदिग्ध माओवादियों के हमले में आईटीबीपी के एक अधिकारी और एक एएसआई की मौत हो गई है.
शुक्रवार को संदिग्ध माओवादियों ने आईटीबीपी के जवानों पर उस समय हमला किया, जब वे माओवादियों के ख़िलाफ़ सर्चिंग ऑपरेशन के लिए निकले हुए थे.
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, "आईटीबीपी का एक दल कड़ेनार की ओर एरिया डोमिनेशन के लिए निकला हुआ था. उसी समय संदिग्ध माओवादियों ने हमला किया. लेकिन सुरक्षाबल के जवानों की सूझबूझ के कारण बड़ा नुकसान नहीं हुआ."
माओवादियों ने जिस जगह पर हमला किया, उससे लगभग 600 मीटर की दूरी पर सुरक्षाबलों का कडेमेटा कैंप है.
इस हमले में आईटीबीपी की 45वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट सुनील शिंदे और एएसआई गुरुमुख सिंह की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि कुछ जवान भी इस हमले में घायल हुए हैं.
पुलिस का कहना है कि माओवादियों ने सुरक्षाबल के जवानों से कुछ हथियार भी लूटे हैं.
मौके पर सुरक्षाबल के जवानों की अलग-अलग टुकड़ियां भेजी गई हैं और सर्चिंग ऑपरेशन जारी है. पिछले महीने की 20 तारीख को भी नारायणपुर में ही रोड ओपनिंग पार्टी पर माओवादियों ने हमला किया था, जिसमें आईटीबीपी के एक जवान की मौत हो गई थी.

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पाकिस्तान सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान में फंसे हुए अपने लोगों और विदेशी नागरिकों को निकालने के लिए दो विमानों को काबुल भेजने का फैसला किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने ट्वीट करके बताया है कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस 350 लोगों को लाने के लिए अपने दो विमानों को काबुल भेजेगी.
चौधरी ने बताया है कि पाकिस्तान का गृह मंत्रालय ज़मीनी सीमा से भी पाकिस्तानियों और विदेशी नागरिकों को निकालने की कोशिश कर रहा है.
अभी हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटीज़ से बात करने के बाद पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस ने यात्रियों, अपने चालक दल और विमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उड़ाने रद्द करने का फैसला किया था.
लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही सरकार ने एक बार फिर अपने दो विमानों को काबुल एयरपोर्ट भेजने का फैसला किया है. काबुल में तालिबानी क़ब्ज़े के बाद से पाकिस्तान सरकार अपने नागरिकों को हवा और ज़मीनी रास्ते से निकालने की कोशिश कर रही थी.
इसी वजह से पाकिस्तान सुरक्षा कारणों से काबुल छोड़ने की कोशिश कर रहे सभी राजनयिकों, विदेशियों और पत्रकारों को वीज़ा ऑन अराइवल दे रहा है.
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता कल्याण सिंह की हालत बिगड़ती हुई नज़र आ रही है.
कल्याण सिंह पिछले कुछ समय से लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई अस्पताल में भर्ती हैं.
उनकी देखरेख कर रही मेडिकल टीम ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी एएनआई को बताया है कि उन्हें डायलिसिस पर रखा गया है.
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने बताया है, “पूर्व सीएम कल्याण सिंह की स्थिति बिगड़ गयी है. उनका ब्लड प्रेशर कम है और वह सामान्य ढंग से यूरिन नहीं कर पा रहे हैं. उन्हें डायलिसिस पर रखा गया है. ऐसे में अब देखना ये है कि आज शाम या कल तक उनकी स्थिति में कितना सुधार होता है. वह वेंटीलेटर पर हैं.”
89 वर्षीय कल्याण सिंह को 4 जुलाई को संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ़ के बाद अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था.
कल्याण सिंह 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और अगले साल बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था.
2014 में वो राजस्थान के राज्यपाल भी रहे.
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उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस की स्थितियों की समीक्षा करने के बाद रविवार को लगता रहा कर्फ़्यू हटा लिया है.
सरकार की ओर से शुक्रवार कोबताया गया है कि “राज्य में कोविड की बेहतर होती स्थिति को ध्यान में रखते हुए रविवार की प्रदेशव्यापी साप्ताहिक बंदी की व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है.”
इसके साथ ही रविवार को छुट्टी करने के संदर्भ में भी सरकार की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं.
सरकार ने बताया है कि“अब से सभी शहरों, बाज़ारों, उद्योगों और कारखानों में कोविड काल से पूर्व में प्रभावी रही साप्ताहिक बंदी की तिथि पर अवकाश लागू किया जाए.”
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''मेरा नाम शबनम डवरान है. मैं अफ़ग़ानिस्तान में छह साल से पत्रकार हूं. मैं अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी मीडिया RTA में काम करती हूं. जब तालिबान का क़ब्ज़ा काबुल पर हुआ, तब मैंने हार नहीं मानी. मैं ऑफिस गई लेकिन दुर्भाग्य से मुझे ऑफिस नहीं जाने दिया गया. मैंने अपना आई-कार्ड दिखाया. लेकिन मुझसे कहा गया कि मैं अब नौकरी नहीं कर सकती क्योंकि निज़ाम बदल गए हैं. जो लोग मेरी इस बात को सुन रहे हैं, वो मदद करें. हमारी ज़िंदगी ख़तरे में है.''
अफ़ग़ानिस्तान की एक एंकर शबनम का ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है. इस वीडियो में वो ये बातें कहती दिख रही हैं. समाचार एजेंसी एएफपी ने भी इस वीडियो को जारी किया है.
तालिबान ने काबुल पर क़ब्ज़ा करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान ने कहा था- औरतों को शरिया के मुताबिक़ काम करने की आज़ादी होगी.
हालांकि, अब अफ़ग़ान के सरकारी चैनल से एक महिला एंकर को हटाए जाने की बात सामने आ रही है. इस बारे में तालिबान की ओर से अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कोरोना वैक्सीन को बढ़ावा देने के लिए टीवी सीरियल "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" की तारीफ़ की है.
उन्होंने ट्वीट कर लिखा है- गोकुलधाम सोसाइटी सही रास्ते पर है! वैक्सीन लगवाकर कोविड19 के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई को मज़बूत कर और अपने दोस्तों, परिवार और रिश्तेदारों को इसके लिए प्रोत्साहित कर. आइए सबको वैक्सीन मुफ़्त वैक्सीन के अभियान को सफल बनाएँ.
स्वास्थ्य मंत्री ने सीरियल का एक वीडियो क्लिप भी ट्वीट किया है.
सीरियल ने अपने ट्विटर हैंडल पर वीडियो के साथ लिखा है- "गोकुलधाम सोसाइटी में हो रहा है वैक्सीन महोत्सव...सब जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगवाएँ. अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें."
भारत में पिछले 24 घंटे में लगभग 55 लाख वैक्सीन दी गई है जिसके बाद अब तक देश में 57 करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन डोज़ दी जा चुकी है.
भारत में अभी कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख (3,63,605) है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ पिछले 150 दिनों में ये सबसे कम आँकड़ा है.
अभी ऐक्टिव मामलों की संख्या यानी जिन्हें कोरोना है ऐसे लोगों की संख्या कुल संक्रमित लोगों की संख्या का 1.12% है जो मार्च 2020 के बाद से सबसे कम आँकड़ा है.
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर चर्चा की है.
रविवार को तालिबान के काबुल पर क़ब्ज़े के बाद से दोनों नेताओं ने दूसरी बार चर्चा की है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि ब्लिंकन और जयशंकर ने गुरुवार को आपस में फ़ोन पर बात की और आपसी तालमेल को जारी रखने पर सहमति जताई.
ब्लिंकन ने बाद में ट्वीट कर जयशंकर के साथ बातचीत को "उपयोगी" बताया.
दोनों नेताओं ने इससे पहले सोमवार को बात की थी. तब जयशंकर ने काबुल में एयरपोर्ट को फिर से खोलने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था.
सोमवार को काबुल एयरपोर्ट पर सैकड़ों लोग जमा हो गए थे जिसके बाद वहाँ अफ़रातफ़री फैल गई थी और एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा था. अमेरिकी सेना ने तब एयरपोर्ट का संचालन अपने हाथ में ले लिया. अगले दिन एयरपोर्ट दोबारा खुल गया और मुख्य तौर पर राजनयिकों और दूतावास कर्मियों को वहाँ से निकाला जाना शुरू हुआ.
भारत ने मंगलवार को ही अफ़ग़ानिस्तान में अपने राजदूत रुद्रेंद्र टंडन और अन्य दूतावास कर्मचारियों को एक सैन्य मालवाहक विमान से वहाँ से निकाल लिया.
इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के लिए जयशंकर अमेरिका के दौरे पर भी गए जहाँ गुरुवार को सुरक्षा परिषद में एक प्रेस ब्रीफ़िंग में उन्होंने कहा कि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ और ख़ास तौर पर अमेरिका के साथ अफ़ग़ानिस्तान से अपने नागरिकों को वापस लाने के बारे में चर्चा कर रहा है.
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अफ़ग़ानिस्तान में एक युवा फ़ुटबॉल खिलाड़ी ज़की अनवरी की उस वक़्त मौत हो गई जब वो काबुल से जा रहे एक अमेरिकी सैन्य विमान में छिपकर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे.
अफ़ग़ानिस्तान प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि विमान में चढ़ने की कोशिश में ज़की अनवरी की मौत हो गई.
हालांकि, उनकी मौत कब हुई इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
19 साल के ज़की अनवरी अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय युवा टीम के लिए खेल चुके हैं.
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े के बाद कुछ दिनों पहले हज़ारों लोग देश से निकलने की कोशिश में काबुल हवाई अड्डे पर इकट्ठा हो गए थे. यहां से पश्चिमी देश अपने नागरिकों और अफ़ग़ान सहकर्मियों को देश से बाहर ले जा रहे थे.

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काबुल हवाई अड्डे से सामने आए कई वीडियो में कई लोग विमान के साथ भागते हुए और विमान के ऊपर चढ़े हुए नज़र आ रहे थे. कई लोग विमान में जबरन घुसने की कोशिश भी कर रहे थे.
स्थानयी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हवाई जहाज़ उड़ने के बाद कम से कम दो लोगों की नीचे गिरने से मौत हो गई.
अफ़ग़ानिस्तान के शारीरिक शिक्षा एवं खेल महानिदेशालय ने फ़ेसबुक पर एक बयान जारी कर ज़की अनवरी को श्रद्धांजलि दी है.
महानिदेशालय ने कहा, “उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार, दोस्तों और साथी खिलाड़ियों के लिए प्रार्थना करें.”

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अमेरिका में यूएस कैपिटल बिल्डिंग (अमेरिकी संसद भवन) के पास विस्फोटक की धमकी देने वाले एक शख़्स को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
इस शख़्स का नाम फ़्लोएड रे रोज़बेरी है जिसकी उम्र 49 साल है. विस्फोटक की धमकी देने के कुछ घंटों बाद फ़्लोएड ने आत्मसमर्पण कर दिया.
फ़िलहाल उसके मक़सद की पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस उस शख़्स की गाड़ी की भी जांच कर रही है.
संसद में इस समय छुट्टियां चल रही हैं, लेकिन वहां का स्टाफ़ काम कर रहा है. विस्फोटक की धमकी के चलते कई इमारतों को खाली करा दिया गया है.

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गाड़ी से लाइव करने वाले एक शख़्स का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था. फ़ेसबुक ने उस लाइव और उस शख़्स के प्रोफ़ाइल को हटा दिया है.
इस वीडियो में फ़्लोएड रोज़बेरी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के नाम संदेश दे रहे थे और क्रांति की बात कर रहे थे.
कैपिटल पुलिस प्रमुख जे थॉमस मेंगर ने बताया कि फ़्लोएड रोज़बेरी ने बेसमेंट में ट्रक खड़ा किया था. उन्होंने पूछताछ करने आए एक पुलिस अधिकारी से कहा कि उनके पास विस्फोटक है.
पुलिस ने रोज़बेरी से बात की और रोबोट के ज़रिए एक फ़ोन भी भेजा, लेकिन रोज़बेरी ने उसे इस्तेमाल नहीं किया. हालांकि, बाद में रोज़बेरी ने गाड़ी से उतरकर आत्मसमर्पण कर दिया.
पुलिस के मुताबिक रोज़बेरी की गाड़ी से विस्फोटक बनाने का सामान मिला है, लेकिन विस्फोटक नहीं मिला.