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तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की प्रांतीय राजधानी पर किया कब्ज़ा
तालिबान के लड़ाकों ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में देश की पहली प्रांतीय राजधानी पर कब्जा कर लिया है.अफ़ग़ानिस्तान सरकार के अधिकारियों ने बीबीसी से बात करते हुए इसकी पुष्टि की है.
लाइव कवरेज
पवन सिंह अतुल, सिंधुवासिनी and अनंत प्रकाश
ब्रेकिंग न्यूज़, UNSC की बैठक में बोला भारत, 'अफ़ग़ानिस्तान का अतीत उसका भविष्य नहीं बन सकता'
भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा के मुद्दे पर शुक्रवार को हुई यूएनएससी (सुरक्षा परिषद) की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान का अतीत उसका भविष्य नहीं बन सकता.
भारत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान में तेजी से बदलते हालात पर चर्चा की गई.
अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ़ आत्मर ने मंगलवार को इस मुद्दे पर बैठक बुलाए जाने का आग्रह किया था.
अफ़ग़ानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि देबोराह ल्योन्स ने इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान में तेजी से बदल रहे हालात पर चिंता जताई है.
उन्होंने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान इस समय एक ख़तरनाक मोड़ पर है. पिछले हफ़्तों में, अफ़ग़ानिस्तान एक नए विनाशकारी दौर में प्रवेश कर गया है. तालिबान के लड़ाकों ने कई महत्वपूर्ण इलाक़ों में बढ़त हासिल कर ली है.
अब यहाँ तक पहुंचने के बाद सिर्फ़ दो विकल्प नज़र आते हैं, इनमें पहला विकल्प शांति और सुलह का है. वहीं, दूसरे विकल्प का मतलब एक नए क्रूर और व्यापक संघर्ष की शुरुआत है, जिसमें मानवाधिकारों के हनन के साथ एक गंभीर मानवीय संकट पैदा होगा. मेरा मानना है कि सुरक्षा परिषद या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसी स्थितियां पैदा होने से रोक सकता है.
तालिबान गुट की रणनीति की मानवीय कीमत बहुत ज़्यादा और चिंताजनक है. पिछले एक महीने एक हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं. अफ़ग़ानिस्तान की आधी आबादी को मानवीय सहायता की जरूरत है. हम हिंसा में कमी नहीं देख रहे हैं और आम लोगों के घायल होने की संख्या में 50% की वृद्धि हुई है
यूएनएससी को स्पष्ट बयान जारी करना चाहिए कि शहरों के ख़िलाफ़ हमले बंद होने चाहिए. देशों को सामान्य युद्धविराम पर जोर देना चाहिए, बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए और फिर से कहना चाहिए कि ताक़त के दम पर बनाई गई सरकार को मान्यता नहीं दी जाएगी. इसके साथ ही अपराधियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.”
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा है, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए अफ़ग़ानिस्तान के साथ खड़े रहेंगे कि एक वैध और पारदर्शी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से शांति और स्थिरता बहाल हो, जो अफ़ग़ानिस्तान और क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक है.”
अफ़ग़ानिस्तान को मिलता रहेगा भारत का समर्थन
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, तिरुमूर्ति ने अफ़ग़ानिस्तान को आतंक से जूझने में पूरी तरह समर्थन देने की बात कही है. और कहा है कि "अफ़ग़ानिस्तान का अतीत उसका भविष्य नहीं बन सकता."
इस क्षेत्र में चरमपंथी गतिविधियों से मुक्त करने पर तिरुमूर्ति ने कहा, "अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए, इस क्षेत्र में आतंकी ठिकानों (ट्रेनिंग कैंप्स) को तुरंत नष्ट करना चाहिए और उनकी सप्लाई लाइन्स ध्वस्त करनी चाहिए. यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसियों और क्षेत्र को आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से ख़तरा न हो"
उन्होंने कहा, “हम अफ़ग़ानिस्तान को एक शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, समृद्ध भविष्य, आतंक से मुक्त (मुल्क), जहां अफगान समाज के सभी वर्गों के अधिकारों और हितों को बढ़ावा और संरक्षित किया जाता हो, के लिए उनकी आकांक्षाओं को साकार करने में हर संभव सहायता प्रदान करना जारी रखेंगे.”
तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की प्रांतीय राजधानी पर किया कब्ज़ा
तालिबान के लड़ाकों ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में देश की पहली प्रांतीय राजधानी पर कब्जा कर लिया है.अफ़ग़ानिस्तान सरकार के अधिकारियों ने बीबीसी से बात करते हुए इसकी पुष्टि की है.
स्थानीय सूत्रों की मानें तो शुक्रवार दोपहर निमरोज़ प्रांत की राजधानी ज़रंज पर तालिबान के लड़ाकों का कब्ज़ा सरकार को काफ़ी भारी पड़ सकता है.
पिछले कुछ हफ़्तों में विदेशी सेनाओं की वापसी के साथ तालिबान के लड़ाकों की आक्रामकता में भारी बढ़ोतरी देखी गई है. तालिबान लड़ाकों ने अफ़ग़ानिस्तान की कई सीमावर्ती चौकियों से लेकर एक बड़े क्षेत्रफल पर अपना कब्जा कर लिया है.
लेकिन अब तक किसी भी प्रांत की राजधानी तालिबान गुटों के कब्जे में नहीं आई थी. लेकिन गुरुवार को ज़रंज पर तालिबान के लड़ाकों का कब्जा हो गया है.
इसके साथ ही पश्चिम में हेरात और दक्षिण में लश्कर गाह में भारी संघर्ष जारी है.
ईरान की सीमा से लगता हुआ ज़रंज एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है. आसपास के ज़िलों पर कब्जा करने के बाद तालिबान लड़ाके लगातार इस शहर पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे.
दो आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि इस शहर पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया गया है. वहीं, एक अन्य सूत्र ने बताया है कि सिक्यॉरिटी ऑफिस के नेशनल डायरेक्ट दफ़्तर के पास संघर्ष जारी है.
निमरोज़ पुलिस विभाग के एक अनाम प्रवक्ता ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया है कि तालिबान के लड़ाके इस शहर पर कब्जा करने में सक्षम हुए क्योंकि सरकार की ओर से मदद किए जाने में कमी थी.
जीत का एलान
तालिबान गुट ने ट्विटर पर एक पोस्ट करके अपनी जीत का एलान किया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक ग्रुप कमांडर ने कहा, “ये एक शुरुआत है और देखिए कि जल्द ही हमारी झोली में कितने प्रांत गिरते हैं.
इसी बीच कुछ ख़बरें आ रही हैं कि अधिकारियों को उनके परिवारों के साथ ईरान जाने की अनुमति दी जाए.
हालांकि, सरकार ने अब तक ज़रंज से अपना नियंत्रण ख़त्म होने की पुष्टि नहीं की है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में आम लोग सरकारी दफ़्तरों से सामान लूटते हुए देखे जा रहे हैं.
ज़रंज में जीत हासिल करना तालिबान लड़ाकों के अभियान को गति दे सकता है. अमेरिकी सेनाओं के वापस जाने की ख़बर आने के बाद से तालिबान के लड़ाकों ने अपना अभियान तेज़ कर दिया था.
इसके साथ ही शुक्रवार को तालिबान लड़ाकों ने काबुल में नमाज़ के दौरान अफ़ग़ान सरकार के मीडिया चीफ़ की हत्या कर दी है.
तालिबान लड़ाकों की ओर से कहा गया है कि दवा ख़ान मनिपाल को “उनके कर्मों का फल” मिला है.
इमरान ख़ान ने OIC से मांगी मदद, भारत ने OIC से कहा- वो दूर रहे
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बार फिर कहा कि इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी को कश्मीर के मुद्दे पर दख़ल देने का कोई अधिकार नहीं है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इस बारे में ट्विटर पर बयान जारी किया है.
बयान में कहा गया है, “हम ओआईसी के महासचिव द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के एक और अस्वीकार्य संदर्भ को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हैं.ओआईसी को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से संबंधित मामलों में कोई अधिकार नहीं है. ये भारत का अभिन्न अंग है. इस बात को एक बार फिर कहा जा रहा है कि ओआईसी महासचिव को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणियों के लिए निहित स्वार्थों (समूहों) को अपने मंच का फ़ायदा उठाने की अनुमति देने से बचना चाहिए."
इस्लामी सहयोग संगठन की ओर से बीती 5 अगस्त को एक प्रेस रिलीज़ जारी की गयी थी.
इसमें संस्था के महासचिव यूसुफ अल-ओथइमीन के हवाले से कहा गया था कि भारत सरकार ने दो साल पहले जो कदम उठाया था, उसे वापस लिया जाए.
बयान कहता है कि उन्होंने (महासचिव) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया है कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के आधार पर निकालने की दिशा में प्रयास तेज किए जाएं.
बयान में आग्रह किया गया है कि “भारत अधिकृत जम्मू और कश्मीर के विवादित क्षेत्र की जनसांख्यिकीय बदलने से बचा जाए और वहां रहने वालों के मूल मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए.”
इसके साथ ही पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक बार फिर कश्मीर के मुद्दे पर भारत को घेरने की कोशिश की है.
ख़ान ने इस्लामाबाद पहुंचे इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के सहयोगी संस्थान इंडिपेंडेंट परमानेंट ह्युमन राइट्स कमिशन से बात करते हुए एक बार फिर जम्मू – कश्मीर का ज़िक्र किया.
पाकिस्तानी अख़बार ट्रिब्यून के मुताबिक़, पीएम इमरान ख़ान ने इस डेलिगेशन के साथ बैठक के दौरान कश्मीर के मुद्दे पर बात की.
उन्होंने कहा है कि “दमन के सभी उपकरणों का इस्तेमाल करने के बाद भी भारत कश्मीरी लोगों की इच्छा शक्ति तोड़ने में सफल नहीं हुआ है.”
“कश्मीर के मुसलमानों पर उनकी बहुसंख्यकता और विशेष पहचान खोने का संकट मंडरा रहा है क्योंकि अधिकृत क्षेत्र में डेमोग्राफ़िक परिवर्तन किए जा रहे हैं. ये चौथे जेनेवा कन्वेंशन के ख़िलाफ़ है और युद्ध अपराधों की श्रेणी में आता है.”
लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू - कश्मीर का मुद्दा उठाया गया है.
इससे पहले पाकिस्तान चीन और सऊदी अरब के साथ बातचीत के दौरान भी इस मुद्दे पर बात कर चुका है.
पूर्वी लद्दाख़ के गोगरा इलाके में भारत और चीन की सेनाएं पीछे हटीं, गिराए गए अस्थायी कैंप
भारत और चीन के सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख के गोगरा इलाक़े में पिछले काफ़ी समय से जारी गतिरोध ख़त्म हो गया है.
बीती 31 जुलाई 2021 को दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख़ के चुशुल मोल्दो मीटिंग पॉइंट पर बारहवें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता में इस इलाक़े से पीछे हटने पर सहमति बनी है.
भारतीय सेना ने इस घटनाक्रम पर बयान जारी करके बताया है कि अस्थायी ढांचों को गिरा दिया गया है और दोनों पक्षों ने इसका सत्यापन और पुष्टि भी कर ली है.
बयान में बताया गया है,"दोनों पक्षों के बीच भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर डिसइंगेज़मेंट (पीछे हटने) से जुड़े शेष मुद्दों के समाधान पर गहरा विचार विमर्श हुआ. इसके बाद दोनों पक्ष गोगरा इलाके में डिसइंगेज़मेंट (पीछे हटने) के लिए तैयार हुए हैं. इस इलाक़े में पिछले साल मई महीने से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं.
इस समझौते के तहत, दोनों पक्षों ने चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से इस क्षेत्र में अग्रिम तैनाती बंद कर दी है. डिसइंगेज़मेंट प्रक्रिया को दो दिनों यानी 04 और 05 अगस्त 2021 को अंजाम दिया गया. और दोनों पक्षों के सैनिक अपने-अपने स्थायी ठिकानों में हैं.
इसके साथ ही दोनों पक्षों द्वारा इस इलाके में बनाए गए सभी अस्थायी ढांचों और अन्य सहयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर को गिरा दिया गया है. इसे दोनों पक्षों की ओर से सत्यापित भी कर लिया गया है. यहां की ज़मीन पर कब्ज़ा अब तनाव बढ़ने से पहले जैसी स्थिति में आ गया है.
बयान में आगे कहा गया है कि ये समझौता सुनिश्चित करता है कि इस क्षेत्र में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल का सख़्ती से निरीक्षण एवं सम्मान किया जाएगा.
इस समय देपसांग और हॉट स्प्रिंग्स इलाके में तनाव जारी है.
वहीं, गलवान, पेंगोग त्सो और अब गोगरा इलाके में तनाव कम होता दिख रहा है.
हालांकि, हाल ही में देमचोक इलाके में तनाव बढ़ने की ख़बरें आई थीं लेकिन देमचोक का नाम अप्रैल 2020 की लिस्ट में नहीं था.
गोल्ड मेडल जीतने वाली चीनी एथलीट को कहा 'मर्दाना औरत', सोशल मीडिया में विवाद
चीन के सरकारी मीडिया ने टोक्यो ओलंपिक में अपने देश की एक गोल्ड मेडल विजेता से शादी और बच्चों से जुड़ा सवाल पूछा, जिसे लेकर जमकर विवाद हो रहा है.
चीनी सोशल मीडिया पर इस बारे में तीख़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
बीते रविवार को महिलाओं के शॉटपुट फाइनल में जीत हासिल करने वाली गोंग लिजियाओ के साथ चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी ने उन्हें "मर्दाना महिला" भी बताया था.
इंटरनेट पर लोग इस इंटरव्यू को सेक्सिस्ट और संकीर्ण सोच वाला बता रहे हैं.
सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि "क्या महिलाओं से सिर्फ़ शादी के बारे में ही बात की जा सकती है?"
कई लोग ये आपत्ति जता रहे हैं कि ऐसा रवैया चीनी महिलाओं से सुंदरता और स्त्रीत्व के पुराने आदर्शों की समाज में गहरी मौजूदगी दर्शाता है.
'मर्दाना महिला'
इंटरव्यू की शुरुआत में एक महिला सीसीटीवी पत्रकार बताती है कि गोंग ने "मुझे यह आभास दिया कि वे एक मर्दाना महिला हैं."
इसके जवाब में गोंग ने कहा, "मैं बाहर से एक मर्दाना महिला की तरह दिख सकती हूं, लेकिन अंदर मैं अभी भी एक लड़की की तरह हूँ."
इसके बाद रिपोर्टर ने गोंग से पूछा कि क्या उनकी ‘महिलाओं वाली ज़िंदगी के लिए कोई योजनाएं हैं क्या?’
सवाल से हैरान गोंग जवाब देती हैं, "अगर मैं ट्रेनिंग नहीं करुंगी तो शायद मैं अपना वजन कम कर लूंगी, शादी कर लूंगी और बच्चे भी पैदा करूंगी. हां, यह ऐसा रास्ता है जिसे हमें जीवन में अपनाना चाहिए."
सोशल मीडिया पर आलोचना
सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने गोंग से पूछे गए सवालों की आलोचना कर रहे हैं. माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म वीबो पर शादी के हैशटैग का 300 मिलियन से अधिक बार इस्तेमाल किया गया है.
एक वेबसाइट पर टिप्पणी है कि "एक ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता, फिर भी नासमझ महिलाओं के इस समूह की ज़बान बंद नहीं हुई."
वीबो पर इंटरव्यू के सवालों का मजाक उड़ाने वाला एक कार्टून ट्रेंड करने लगा है. इसमें एक महिला जिमनास्ट से पूछा जाता है कि "आप काम और परिवार में कैसे संतुलन बनाए रखती हैं?" जबकि एक महिला मुक्केबाज से पूछा जाता है कि "क्या आपका प्रेमी आपको हरा सकता है?"
कई लोगों ने गोंग वीबो पेज पर सैकड़ों संदेशों करते हुए कहा है वे उनके साथ हैं. वीबो पर एक पोस्ट लिखा गया है, "ऐसा नहीं है कि वह शादी नहीं कर सकती है, लेकिन कोई भी पुरुष उसका मैच नहीं है…”
इस पोस्ट का जवाब ख़ुद गोंग ने दिया और लिखा है - ये पोस्ट मेरे अहसास को सही ढंग से बयान करती है.
भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया की भावुक तस्वीर चर्चा में
भारतीय महिला हॉकी टीम की हार के बाद कई भावुक तस्वीरें सामने आई हैं. उनमें से सबसे अधिक चर्चा टीम की गोलकीपर सविता पूनिया की है.
सविता ने पूरे मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रिटेन की तरफ़ से कई गोल होने से बचाए. हालाँकि उनकी यह कोशिश भारत को ब्रॉन्ज़ मेडल जिताने के लिए काफ़ी नहीं रही है.
ज़ाहिर है, वो इससे काफ़ी दुखी थीं.
टोक्यो में मौजूद बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा ने बताया कि मैच के बाद सविता पूनिया को संभालना ही मुश्किल सा हो गया था.
पाक में मंदिर हमले पर सख़्त सुप्रीम कोर्ट, पुलिस को लगाई फटकार, कहा तुरंत हो कार्रवाई
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले पंजाब प्रांत के रहीमयार ख़ान में हुए हिंदू मंदिर पर हमले के लिए पुलिस को फटकार लगाई है. साथ ही अदालत ने तुरंत सभी दोषियों की गिरफ़्तारी के साथ-साथ मंदिर की मरम्मत करने के भी आदेश दिए हैं.
बुधवार को रहीमयार ख़ान के भोंग क़स्बे में सैकड़ों लोगों ने एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की थी. भीड़ ने आरोप लगाया था कि एक हिंदू बच्चे ने एक स्थानीय मदरसे में दुर्व्यवहार किया था.
इस बच्चे को रहीमयार ख़ान की एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी थी.
गुरुवार को पाकिस्तान हिंदू परिषद के संरक्षक डॉ रमेश कुमार ने पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद से मुलाक़ात करके उनका ध्यान इस घटना की ओर किया था.
इसके बाद पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लिया.
चीफ़ जस्टिस ने पाकिस्तानी पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) इनाम गनी को घटना की रिपोर्ट के साथ अदालत में पेश होने के लिए तलब किया था.
पाकिस्तान के डॉन न्यूज़ के मुताबिक़, अदालत में पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता वहां के 70 के करीब हिंदुओं को बचाना था. चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद ने कहा कि पुलिस मूकदर्शक बनकर वहां खड़ी रही और किसी ने कुछ नहीं किया.
अदालत ने पुलिस को कहा कि इस मामले में उपद्रवियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
ट्विटर ने कुछ देर बाद धोनी के ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक फिर लगाया
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के ट्विटर हैंडल को एक बार फिर ब्लू टिक दे दिया है.
इससे पहले गुरुवार दोपहर ट्विटर ने धोनी के अकाउंट से ब्लू टिक हटा लिया था.
महेंद्र सिंह धोनी को उन सेलिब्रिटीज़ में गिना जाता है जो सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखने के लिए जाने जाते हैं.
धोनी ने आख़िरी ट्वीट बीती 8 जनवरी को किया, उससे पहले 10 सितंबर को, 20 अगस्त, और 14 फरवरी को किया था.
इस तरह धोनी ने पिछले दो सालों में कुल 11 ट्वीट किए हैं और जबसे उन्होंने ट्विटर ज्वॉइन किया है तब से मात्र 480 ट्वीट किए हैं. इंस्टाग्राम पर भी धोनी ने मात्र 107 पोस्ट्स की हैं.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ब्लू टिक हटने की वजह उनका ट्विटर पर सक्रिय न रहना है. क्योंकि कमोवेश इसी तरह के मामले में उप-राष्ट्रपति वैंकेया नायडु का ब्लू टिक हट गया था जो कि ट्विटर के लिए विवाद का विषय बना था.
इस मामले में ट्विटर के प्रवक्ता ने बताया था कि “एम वेंकैया नायडू का निजी ट्विटर हैंडल जुलाई 2020 से निष्क्रिय था जिसकी वजह से ब्लू टिक अपने आप हट गया था. ट्विटर की यह नीति है कि अगर कोई अकाउंट काफ़ी समय तक सक्रिय ना रहे, तो कंपनी उस हैंडल से ब्लू टिक हटा देती है.”
ब्लू टिक हटाने या लौटाने की वजह जो भी रही हो लेकिन ट्विटर ने कुछ समय बाद वैंकेया नायडु की तरह धोनी के ब्लू टिक को भी लौटा दिया है.
महिला हॉकी कप्तान रानी ने समर्थकों को कहा - शुक्रिया, फिर जीतेंगे देश का दिल
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने ट्वीट कर कहा है कि टीम तमाम कोशिशों के बावजूद मेडल नहीं जीत पाई.
शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो में चल रहे ओलंपिक खेलों के कांस्य पदक के लिए खेले गए मैच में ब्रिटेन से हार गई थी.
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने टीम के सदस्यों से बात की थी और उनकी हौसला अफ़ज़ाई की थी. पीएम मोदी से बातचीत के दौरान भी खिलाड़ी काफ़ी भावुक थे और उनमें से कुछ रो भी रहे थे.
अब महिला टीम की कप्तान रानी रामपाल ने ट्वीट कर कहा है, " हमने बहुत कोशिश की लेकिन मेडल नहीं जीत पाए. हम दुखी और निराश हैं क्योंकि हम जीत के बिल्कुल क़रीब थे. लेकिन हमें यक़ीन है कि हम कमबैक करेंगे और अपने देशवासियों का दिल जीतेंगे. यहां तक की यात्रा में हमारा साथ देने और हमारे लिए प्रार्थना करने के लिए सबका शुक्रिया."
भारतीय हॉकी टीम मानसिक मज़बूती से जीती है: पूर्व गोल्ड विजेता कप्तान
भारतीय महिला टीम के कोच ने शाहरुख़ ख़ान को कहा- थैंक यू
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने टोक्यो ओलंपिक में महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन पर ट्वीट कर कहा है कि भारतीय लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन किया और भारत में सभी को प्रेरित किया है.
ये भी खु़द में एक जीत है. इस पर भारतीय टीम को कोच सोर्ड मारिन का जवाब भी दिलचस्प है.
मारिन ने ट्वीट किया, ''शुक्रिया शाहरुख़, इतना प्यार लुटाने के लिए! बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ से ऐसी हौसला अफ़ज़ाई वाई शानदार है. अब चक दे पार्ट-2 का वक़्त आ गया है. क्या कहते हैं?
शाहरुख़ ख़ान ने बॉलीवुड फ़िल्म 'चक दे इंडिया; में भारतीय महिला टीम के कोच कबीर ख़ान का किरदार अदा किया था.
अफ़ग़ानिस्तान में सरकार के मीडिया चीफ़ की तालिबान ने की हत्या
तालिबान लड़ाकों ने शुक्रवार दोपहर अफ़ग़ानिस्तान सरकार के मीडिया चीफ़ दवा ख़ान मिनापाल की हत्या कर दी है.
अफ़ग़ान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइज़ स्तेनकज़ई ने बताया है कि कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने शुक्रवार को डेढ़ बजे (स्थानीय समय) नमाज के दौरान सरकारी मीडिया एवं इनफॉर्मेशन सेंटर के निदेशक दवा ख़ान मनिपाल की हत्या कर दी है.
मिनापाल ने इससे पहले अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ गनी और उपराष्ट्रपति के प्रवक्ता के रूप में भी कार्य किया है.
तालिबान गुट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए बताया है कि उनके लड़ाकों ने दवा ख़ान की हत्या कर दी है.
अफ़ग़ानिस्तान के मीडिया हाउस टोलो न्यूज़ ने उस कार की तस्वीरें जारी की हैं जिसमें मिनापाल हमले के वक्त मौजूद थे.
(इस ख़बर से जुड़ी जानकारी अपडेट की जा रही है)
टोक्यो ओलंपिक: बजरंग सेमीफाइनल में हारे, कांस्य पदक की उम्मीद बरकरार
भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया शुक्रवार को टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती के सेमीफ़ाइनल (65 किलोग्राम वर्ग) में अज़रबैजान के पहलवान हाजी अलियेव से हार गये हैं.
अलियेव ने पूनिया को 12 – 5 से हरा दिया है. हालांकि, अभी उनके पास कांस्य पदक जीतने का मौका है जिसके लिए उन्हें एक मैच जीतना होगा.
पूनिया जिस तरह एक के बाद एक जीत दर्ज करते हुए सेमीफ़ाइनल में पहुंचे थे, उसके बाद उनके पदक जीतने की उम्मीदें बढ़ गयी थीं.
क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिए उन्होंने एक रोमांचक मुकाबले के आख़िरी सेकेंड में पॉइंट हासिल करते हुए किर्गिस्तान के अरनाज़र अकमातालिव को हराया था.
इसके बाद सेमीफ़ाइनल में पहुंचने के लिए उन्होंने ईरान के पहलवान गियानी मुर्तज़ा को हराया था.
रियो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले 30 वर्षीय अलियेव ने पूनिया को जोरदार दी है. अलियेव ने इससे पहले तीन बार वर्ल्ड चैंपियन 61 किलोग्राम भारवर्ग में जीती थीं. वहीं, ओलंपिक गोल्ड मेडल 57 किलोग्राम भारवर्ग में जीता था.
अगर 65 किलोग्राम भारवर्ग की बात करें तो उन्होंने 2018 और 2019 में 65 किलोग्राम भार वर्ग में लगातार गोल्ड मेडल जीते हैं.
Live: पहलवान बजरंग पूनिया के घर सोनीपत में कैसा है माहौल
पहलवान बजरंग पूनिया के घर सोनीपत में कैसा है माहौल. बता रहे हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी (कैमरा- बुशरा शेख़)
'आप शेरनियों की तरह लड़ीं...' भारतीय महिला हॉकी टीम से किसने क्या कहा?
भारतीय महिला हॉकी टीम को टोक्यो ओलंपिक में ब्रिटेन का हाथों हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद टीम के हौसले और बेहतरीन प्रदर्शन की ख़ूब तारीफ़ हो रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हॉकी टीम को स्पॉन्सर करने वाले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तमाम खिलाड़ी...सबने भारतीय टीम के प्रदर्शन को सलाम किया.
बिहार: आठ साल की बच्ची की आँख निकालकर हत्या, बलात्कार की आशंका
सीटू तिवारी
बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से
बिहार के मुंगेर में आठ साल की एक बच्ची के साथ बर्बर हत्या का मामला सामने आया है. बच्ची के साथ बलात्कार की आशंका भी है.
दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली इस बच्ची का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला है.
स्थानीय पत्रकार अरुण कुमार ने पीड़ित बच्ची का मृत शरीर देखा था.
उन्होने बीबीसी हिन्दी को बताया, “बच्ची की एक आँख निकाल ली गई थी और दूसरी आँख पर भी चोट थी. उसके नाख़ून उखड़े हुए थे. ऐसा लगता था जैसे हाथ को किसी भारी चीज़ से कुचल दिया गया हो. बच्ची की नाक सहित पूरे चेहरे और गले पर चोट के निशान थे.”
क्या है पूरा मामला?
यह अपराध मुंगेर के साफ़ियासराय ओ पी क्षेत्र के ग्राम फरदा पूर्वी टोला का है. जिसके एक तरफ़ एनएच 80 और दूसरी तरफ़ गंगा नदी है.
बीते चार अगस्त को बच्ची के पिता राजेश चौधरी (बदला हुआ नाम) उसे साथ लेकर गंगा नदी के पास गए थे. वो पेशे से मछुआरे हैं.
गंगा के पास पहुँचने के बाद राजेश चौधरी ने बच्ची को घर भेज दिया और ख़ुद नाव से मछली मारने चले गए. बाद में देर शाम जब वो घर लौटे तो मालूम हुआ कि बच्ची अब तक घर नहीं पहुँची है.
घरवालों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर उसे ढूंढने की कोशिश की.
पाँच अगस्त को तक़रीबन छह बजे उपेन्द्र यादव नाम के व्यक्ति को ईंट भट्ठे के पास पीपल के पेड़ के नीचे बच्ची की लाश मिली.
स्थानीय ग्रामीण प्रताप नारायण चौधरी बताते हैं, “बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है. उसकी दाहिनी आंख निकाल ली गई है. उसकी हत्या कर दी गई है. हम सब गांव वालों की माँग है कि ऐसी घटना अंजाम देने वाले को कड़ी सज़ा मिले. हमारे गाँव में ये बहुत दर्दनाक घटना घटी है.”
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
मुंगेर के पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी ने बीबीसी हिन्दी से कहा, “इस मामले में अज्ञात व्यक्ति पर एफ़आईआर हुई है. पोस्टमॉर्टम के लिए शव को भेजा गया है. आगे की कार्रवाई की जा रही है.”
सदर एसडीपीओ नंदजी प्रसाद ने बीबीसी को बताया, “बच्ची को देखकर पहली नज़र में ऐसा लगता है कि उसकी गला दबाकर हत्या हुई है. उसकी आँख फोड़ी गई है. जहां तक बलात्कार की आशंका है, मेडिकल टीम गठित कर उसकी जाँच की जा रही है.”
हालाँकि इस मामले में अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया जा सका है.
पीएम मोदी ने जब महिला हॉकी टीम से कहा- आप रोइए मत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों और उनके कोच को उनकी अथक मेहनत और लगन के लिए बधाई दी है.
पीएम मोदी ने कहा, “आप सभी लोग बहुत अच्छा खेले हैं. आपने पिछले पाँच – छह सालों से इतना पसीना बहाया है, सब कुछ छोड़कर आप इसी साधना में लगे हुए थे.
आपका पसीना पदक नहीं ला सका. लेकिन आपका पसीना आज देश की करोड़ों बेटियों की प्रेरणा बन गया है. मैं टीम के सभी साथियों को और आपके कोच के साथ सभी को बधाई देता हूं.”
टीम की खिलाड़ी रानी रामपाल ने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, “सर, आपका बहुत बहुत शुक्रिया कि आपने हमें इतना प्रेरित किया.”
इस पर पीएम मोदी ने कहा, “निराश बिल्कुल नहीं होना है, अच्छा मैं देख रहा था कि नवनीत की आँख में कुछ चोट आई है क्या?”
इस पर रामपाल ने बताया कि “हाँ, कल उसे चार टांके लगे हैं.
मोदी ने कहा, “अरे बाप रे, मैं देख रहा था कि उसे काफ़ी...,उसके हाथ में तो कोई तकलीफ़ नहीं हुई है न?
और वंदना आपने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है.”
पीएम मोदी से बात करते हुए महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों की आँखों से लगातार आँसू गिर रहे थे.
इस पर पीएम मोदी ने कहा कि आप लोग रोना बंद करिए, मेरे तक आवाज़ आ रही है, देखिए देश आज आप सब पर गर्व कर रहा है, बिल्कुल निराश नहीं होना है, और कितने दशकों के बाद, हॉकी जो भारत की पहचान है, वो पुनर्जीवित हो रही है. आप लोगों की मेहनत से हो रही है…”
इसके बाद भी टीम की सदस्यों से आँसू गिरते रहे...और टीम के कोच सोर्ड मारिन ने फोन हाथ में लेकर पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया.
इसराइल ने ईरान पर सैन्य हमले की धमकी दी, ईरान ने कहा - करारा जवाब देंगे
इसराइल के रक्षा मंत्री बेनी गंट्ज़ ने कहा है कि उनका देश ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है.
गंट्ज़ ने ईरान को ‘वैश्विक और क्षेत्रीय समस्या’ बताया है. ईरान और इसराइल के बीच यह तनाव ऐसे वक़्त में उभरकर तेज़ हुआ है जब इब्राहिम रईसी ने ईरान के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाला है.
इससे पहले ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर इन चीफ़ हुसैन सलामी ने कहा था कि जो देश ईरान को धमकी देते हैं (ख़ासकर इसराइल), उन्हें ईरान की हमला करने और बचाव दोनों क्षमताओं के बारे में सही समझ विकसित कर लेनी चाहिए.
सलामी ने कहा, “हम किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार हैं और मेरा यह संदेश एक एक्शन है, कूटनीति नहीं.”
इसराइल हमारा इम्तिहान न ले: ईरान
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने कहा, “इसराइल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करते हुए ईरान को सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. ऐसा दुर्भावनापूर्ण व्यवहार पश्चिमी देशों के अंध समर्थन से पैदा होता है. हम साफ़-साफ़ कहते हैं- ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी मूर्खतापूर्ण कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा. हमारा इम्तिहान मत लीजिए.”
हाल ही में इसराइली कंपनी के एक तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद ईरान और इसराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है.
इस हमले में एक ब्रितानी और एक रोमिनायाई नागरिक की मौत हो गई थी.
इसराइल ने इसके पीछे ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया था और कहा था कि उसके पास इसके ‘सबूत’ हैं.
कूटनीतिक रास्ते हमेशा नहीं खुले रहेंगे: अमेरिका
इधर, अमेरिका ने ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से ऐतिहासिक परमाणु समझौते पर बातचीत बहाल करने के लिए कहा है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीति की खिड़कियाँ हमेशा नहीं खुली रहेंगी.
अमेरिका और ईरान के सम्बन्ध साल 2018 से बिगड़ने लगे थे जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को परमाणु समझौते से अलग कर लिया था और ईरान पर कड़ी पाबंदियाँ लगी दी थीं.
इब्राहिम रईसी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति के तौर पर आधिकारिक रूप से शपथ ली थी. उन्होंने इस मौके पर कहा था कि वो ईरान पर लगे प्रतिबंधों को ख़त्म करने के लिए किसी भी कूटनीतिक योजना का समर्थन करेंगे.
रईसी ने कहा था, “ईरान के ख़िलाफ़ लगे सभी ग़ैरक़ानूनी प्रतिंबध हटाए जाने चाहिए.”
पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. हालाँकि ईरान इस आरोप से इनकार करता आया है.
साल 2015 में ईरान और छह देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, रूस और जर्मनी) के बीच परमाणु समझौता हुआ था.
इसके तहत अमेरिका को यूरेनियम संवर्धन को कम करना था और बदले में ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदियाँ हटाए जाने पर सहमति बनी थी. लेकिन बाद में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की सीमा बढ़ा दी थी और ट्रंप ने अमेरिका को समझौते से अलग कर लिया था.
आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव, राहत के लिए करना होगा इंतज़ार
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर ही रहने देने का फ़ैसला किया है.
छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट (वह ब्याज़ दर जिसपर आरबीआई अन्य बैंकों को लोन देता है) को 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया.
जानकारों का कहना है कि केंद्रीय बैंक की नज़र महंगाई और कोरोना की वजह से आई आर्थिक सुस्ती पर है.
अगर रेपो रेट में कटौती होती तो शायद बैंक उसका लाभ अपने ग्राहकों तक भी पहुंचाते और होम लोन की किश्तों में कुछ कमी आती.
लेकिन फ़िलहाल इसके लिए ऋण लेने वालों को इंतज़ार करना होगा
आरबीआई ने पिछली बार 22 मई, 2020 को अपनी ब्याज़ दरों में परिवर्तन किया था.
ये लगातार सातवीं बैठक थी जब बैंक ने यथास्थिति बनाए रखने का फ़ैसला लिया.
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, " बैंक की कमेटी ने बहुमत से फ़ैसला किया है ताकि आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने और बनाए रखने के लिए, जब तक ज़रूरी हो, तब तक सहयोग किया जाए."