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दीपक चाहर ने दिलाई भारत को रोमांचक जीत
इस वनडे मुक़ाबले में जीत के साथ ही तीन वनडे मैचों की सिरीज़ में भारत ने 2-0 की अजेय बढ़त ले ली है.
लाइव कवरेज
अनंत प्रकाश, विभुराज, सिंधुवासिनी and अपूर्व कृष्ण
दीपक चाहर ने दिलाई भारत को रोमांचक जीत

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कोलंबो में खेले गए दूसरे वनडे मुक़ाबले में भारत ने एक रोमांचक मुक़ाबले में श्रीलंका को तीन विकेट से हरा दिया है. जीत के लिए 276 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने एक समय में छह विकेट महज 160 रनों पर गंवा दिए थे.
लेकिन इसके बाद दीपक चाहर ने शानदार पारी खेलकर टीम को जीत दिलायी. चाहर ने भुवनेश्वर कुमार के साथ आठवें विकेट के लिए नाबाद 84 रनों की साझेदारी निभायी. दीपक चाहर 82 गेंदों पर सात चौके और एक छक्के की मदद से 69 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि भुवनेश्वर कुमार ने नाबाद 19 रन बनाए.
भारत की ओर से सूर्य कुमार यादव ने 44 गेंदों पर 53 रनों की पारी खेली. इन दोनों के अलावा क्रुणाल पांड्या ने 35 रन बनाए. इससे पहले श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों ने 50 ओवरों में नौ विकेट पर 275 रन बनाए. चरिथ असालंका ने 65 और अविष्का फर्नांडो ने 50 रनों की पारी खेली.
भारत की ओर से यजुवेंद्र चहल और भुवनेश्वर कुमार ने तीन-तीन विकेट लिए. इस वनडे मुक़ाबले में जीत के साथ ही तीन वनडे मैचों की सिरीज़ में भारत ने 2-0 की अजेय बढ़त ले ली है.

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सुप्रीम कोर्ट ने 97वें संविधान संशोधन के कुछ प्रावधान रद्द किए

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इमेज कैप्शन, भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2:1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए को-ऑपरेटिव सोसाइटी के प्रभावी प्रबंधन से जुड़े 97वे संवैधानिक संशोधन के कुछ प्रावधानों को रद्द करते हुए इस संविधान संशोधन की वैधता को बरकरार रखा है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधन के उस हिस्से को बरकरार रखा है जिसका संबंध कई प्रदेशों में सक्रिय सहकारी समितियों के गठन एवं संचालन से था.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरएफ़ नरीमन, केएमजोसेफ़, और बीआर गवई की पीठ ने कहा, “हमने सहकारी समितियों से संबंधित संविधान के भाग नौ बी को रद्द कर दिया है. लेकिन संशोधन को बचा लिया है.”
जस्टिस नरीमन ने कहा, “जस्टिस जोसेफ़ ने आंशिक असहमति वाला फैसला दिया है और 97वे संवैधानिक संशोधन को रद्द कर दिया है.”
साल 2011 में संसद ने को-ऑपरेटिव समितियों के प्रभावी प्रबंधन के जुड़ा 97वां संविधान संशोधन पारित किया था जो कि 15 फरवरी 2012 को लागू हुआ था.
लेकिन गुजरात हाई कोर्ट ने संसद द्वारा इस संशोधन को रद्द करते हुए कहा था कि को-ऑपरेटिव सोसाइटी राज्य का विषय है, ऐसे में संसद इस पर क़ानून नहीं बना सकती.
इसके बाद केंद्र सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में इस संशोधन के उस हिस्से को हटा दिया है जिसका संबंध सहकारी समितियों के गठन एवं प्रबंधन से था.
सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हो पेगासस कांड की जाँच: कपिल सिब्बल

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कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को पेगासस जासूसी कांड की जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की माँग की है.
इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री सिब्बल ने कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में श्वेत पत्र पेश करे जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि इसरायली सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल किया गया या नहीं.
जैन हवाला कांड जैसी जाँच की ज़रूरत
कपिल सिब्बल ने एक समय में भारत की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले जैन हवाला कांड का नाम लेते हुए कहा कि “इस मामले की जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए जैसे जैन हवाला कांड की हुई थी.”
सिब्बल ने ये भी कहा कि इस मामले की जाँच कैमरे में होनी चाहिए जिससे सभी को सच पता चल सके.
श्वेत पत्र के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “सरकार को ये बताना चाहिए कि उन्होंने कभी भी पेगासस का इस्तेमाल नहीं किया है. लेकिन उन्होंने ये नहीं किया है. इससे एक बड़ी समस्या पैदा होती है कि अगर सरकार या उसकी एजेंसियों ने पेगासस का इस्तेमाल नहीं किया है तो फिर किसने किया है. स्पाइवेयर बनाने वाली कंपनी एनएसओ कहती है कि वह सरकारी एजेंसियों के सिवा किसी को ये सॉफ़्टवेयर नहीं बेचती है.”
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को श्वेत पत्र में ये भी बताना चाहिए कि क्या उनकी किसी एजेंसी ने पेगासस को इस्तेमाल किया.
सिब्बल ने कहा, “आप कहते हैं कि आप प्राइवेट डेटा प्रोटेक्शन लेकर आ रहे हैं लेकिन आप पेगासस की मदद से डेटा संग्रहित कर रहे हैं. ये राष्ट्रीय सुरक्षा को एक ख़तरा है क्योंकि डेटा एक ऐसी एजेंसी को लीक होता है जिसका भारत से कोई संबंध नहीं है.”
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का नाम संभावित लक्ष्यों में शामिल होने की ओर संकेत करते हुए सिब्बल ने कहा, अगर सरकार या इसकी एजेंसियों ने किसी मंत्री के फोन में मालवेयर भेजकर फोन टैप किया है तो ये ऑफ़िशियल सीक्रेट्स एक्ट का उल्लंघन है.
‘देश नहीं सरकार बदनाम हो रही’
सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर लगे आरोपों को एक सिरे से नकार दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को इन आरोपों को भारतीय लोकतंत्र के ख़िलाफ़ एक साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा था कि जासूसी के इन आरोपों का उद्देश्य दुनिया भर में भारत को अपमानित करना है.
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इस पर सिब्बल ने कहा कि “राष्ट्र बदनाम नहीं हो रहा है, बल्कि आपकी सरकार के कर्मों की वजह से सरकार बदनाम हो रही है.”
अमित शाह के ‘क्रोनोलॉजी समझिए’ वाले बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा, “हम क्रोनोलॉजी समझ रहे हैं. मैं अमित शाह जी से कहना चाहता हूं कि आप इसकी क्रोनोलॉजी समझिए. ये साल 2017 से 2019 के बीच किया गया था.”
यूपी सरकार ने आज़म ख़ान के साथ नाइंसाफ़ी की है, उनकी सेहत से खिलवाड़ किया है: अखिलेश यादव
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को रामपुर के सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान से मंगलवार को हॉस्पिटल में भेंट की.
अखिलेश यादव ने कहा, "यूपी सरकार ने आज़म ख़ान के साथ नाइंसाफ़ी की है. उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ किया है."
उन्होंने कहा, "माननीय आज़म खान जी के शीघ्रातिशीघ्र स्वास्थ्य-लाभ के लिए अच्छे से अच्छे डॉक्टरों और सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आज मेंदाता, लखनऊ में व्यक्तिगत रूप मुलाक़ात करके उनका हाल जाना और डॉक्टरों से चर्चा की. हम सब उनकी जल्द से जल्द सेहतमंदी की दुआ करते हैं."
72 वर्षीय आज़म ख़ान को सांस की तकलीफ़ के बाद सीतापुर की जेल से इलाज के लिए लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
सीतापुर जेल के जेलर आरएस यादव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उनका हेल्थ चेकअप कराया गया था. ऑक्सीजन लेवल कम पाए जाने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल रेफर किया गया.
सपा सांसद आज़म ख़ान पर धोखाधड़ी और कई अन्य मामलों में केस चल रहा है.
राहुल गाँधी का सरकार पर पलटवार, 'बस ऑक्सीजन नहीं, संवेदनशीलता और सत्य की कमी'
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया के इस बयान पर कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ऑक्सीजन की कमी से एक भी व्यक्ति की मौत होने की सूचना नहीं दी है, कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी ने तीखी आलोचना की है.
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, "सिर्फ़ ऑक्सीजन की ही कमी नहीं थी. संवेदनशीलता व सत्य की भारी कमी - तब भी थी, आज भी है."
स्वास्थ्य मंत्री ने संसद में कहा था, "स्वास्थ्य एक राज्य का विषय है. सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश प्रतिदिन नियमानुसार कोरोना संक्रमण एवं मौतों की जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजते हैं. राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ऑक्सीजन से किसी की भी मौत होने की सूचना नहीं दी गयी है."
आज का कार्टून: संसद का दर्द

सिद्धू 'कप्तान' का खेल बनाएंगे या बिगाड़ेंगे?
वीडियो कैप्शन, सिद्धू 'कप्तान' का खेल बनाएंगे या बिगाड़ेंगे? कांग्रेस हाईकमान ने क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब में पार्टी प्रमुख बना दिया है. पंजाब में कांग्रेस ने यह फ़ैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सिद्धू के प्रति नापसंदगी के बावजूद लिया.
अभी हाल ही में अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वो सिद्धू से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक वो अपने 'अपमानजक ट्वीट्स' के लिए उनसे माफ़ी नहीं माँग लेते.
कुछ समय पहले दोनों नेताओं के बीच इतने तगड़े मतभेद के बीच कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में विधानसभा चुनाव से लगभग आठ महीने पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को 18 बिंदुओं वाली 'टु डू लिस्ट' थमा दी थी.
11 साल के बच्चे की ‘गिरफ़्तारी’ का सच
वीडियो कैप्शन, 11 साल के बच्चे की ‘गिरफ़्तारी’ का सच पुलिस वैन में बैठे 11 साल के अविजोत सिंह का ये वीडियो वायरल हो गया.
चंडीगढ़ में 17 जुलाई को बीजेपी नेता संजय टंडन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के मोर्चे में अविजोत भी शामिल थे.
अविजोत को हिरासत में लेने की ख़बर फैलने के बाद वीडियो वायरल हो गया.
हालांकि चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप सिंह चाहल के मुताबिक़, बच्चा ख़ुद पुलिस वैन में आया था.
अविजोत ने बीबीसी से बातचीत में उस दिन की पूरी कहानी साझा की.
सरकार ने कहा, ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत होने की सूचना नहीं

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इमेज कैप्शन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में विपक्ष के सवालों के जवाब देते हुए कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ऑक्सीजन की कमी से एक भी व्यक्ति की मौत होने की सूचना नहीं दी है.
उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य एक राज्य का विषय है. सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश प्रतिदिन नियमानुसार कोरोना संक्रमण एवं मौतों की जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजते हैं. राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ऑक्सीजन से किसी की भी मौत होने की सूचना नहीं दी गयी है.”
राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और शिवसेना नेता संजय राउत को कोरोना से होने वाली मौतों पर सरकार को घेरने की कोशिश की.
इसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, “भारत सरकार कोरोना से हुए मौत का आंकड़ा नहीं छुपाती बल्कि जो राज्य सरकार आंकड़ा भेजती है उसे कंपाइल कर पब्लिश करती है.”
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‘तीसरी लहर से बचाएगा पीएम मोदी का मार्गदर्शन’
कोरोना वायरस की तीसरी लहर और महामारी के प्रबंधन से जुड़ी विपक्ष की आलोचनाओं पर मांडविया ने सरकार का बचाव किया.
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने हमेशा कहा है कि आपदा को राजनीति की वजह नहीं बनाना चाहिए. इस आपदा के दौरान राजनीति नहीं होनी चाहिए. पीएम मोदी ने कहा है कि जब इस देश के 130 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ाएंगे तो देश 130 करोड़ कदम आगे बढ़ सकता है.”
जब हम तीसरी लहर के बारे में बात करते हैं तो 130 करोड़ आम लोगों और राज्य सरकारों को एक सामूहिक फैसला करना चाहिए कि हम तीसरी लहर को भारत में नहीं आने देंगे. हमारा संकल्प और पीएम मोदी का मार्गदर्शन हमें तीसरी लहर से बचा सकता है.”
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कांग्रेस का पलटवार, मोदी सरकार से पहले भी वैक्सीन उत्पादन में टॉप था भारत

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता आनंद शर्मा कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मंगलवार को राज्य सभा में रिकॉर्ड स्तर पर वैक्सीन उत्पादन से जुड़े सरकारी दावों पर पलटवार करते हुए कहा है कि भारत 1990 में ही दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश बन गया था.
नरेंद्र मोदी सरकार कई मौकों पर रिकॉर्ड स्तर पर वैक्सीन उत्पादन के लिए खुद को शाबाशी देती हुई दिख चुकी है.
ऐसे तमाम दावों पर शीर्ष कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, “हमें अपने वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और वैक्सीन निर्माताओं पर गर्व है. सभी भारतीय उन पर गर्व करते हैं. लेकिन मुझे एक तथ्य स्पष्ट रूप से रखने दीजिए. भारत अब जाकर वैक्सीन बनाने की अपनी क्षमताओं के लिए पहचाना नहीं गया है. साल 1990 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता बन गया था.”
उन्होंने कहा कि भारत को आज़ादी मिलने के बाद इस स्थिति में पहुंचने में कई दशक लगे.
उन्होंने पूछा, "सीरम इंस्टीट्यूट की स्थापना किस साल में हुई? 1960 के दशक में इस कंपनी का गठन हुआ था. पहला वैक्सीन इंस्टीट्यूट कब स्थापित किया गया था? सरकारों के कर्तव्य होते हैं. चाहें तत्कालीन जवाहरलाल नेहरू सरकार हो या मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार. सभी सरकारों के पास काम होते हैं.”
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कच्चे तेल के दाम घटे, क्या भारत में पेट्रोल सस्ता होगा

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पश्चिमी देशों में कोविड महामारी के डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल की क़ीमत सात प्रतिशत घटी, जो मंगलवार तक स्थिर हो गई.
कच्चे तेल के दाम के नीचे गिरने का एक और कारण था रविवार को तेल पैदा करने वाले देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस कहे जाने वाले देशों के बीच तेल के उत्पादन को बढ़ाने पर हुआ समझौता.
पिछले सप्ताह तेल उत्पादन के कोटे को लेकर दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के बीच हुए मनमुटाव ने दोनों देशों के बीच बातचीत को लटका दिया था, लेकिन रविवार को ये विवाद ख़त्म हुआ और एक बयान में ओपेक कार्टेल ने घोषणा की कि इराक़, कुवैत, रूस, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात उत्पादन बढ़ाएँगे.
पेगासस स्पाईवेयर मामला भारत के लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक क्यों?

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"इसमें कोई शक नहीं है कि आपकी निजता का उल्लंघन हुआ है. ये एक ऐसी जबरन घुसपैठ है जिस पर यकीन करना मुश्किल लगता है. किसी को ये दिन देखना न पड़े."
न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' के सहसंस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने पेगासस मामले पर ये बात कही.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ सिद्धार्थ वरदराजन भी दुनिया भर के उन कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, राजनेताओं और वकीलों में शामिल हैं जो जासूसी सॉफ़्टवेयर 'पेगासस' के निशाने पर थे.
एक इसराइली कंपनी 'एनएसओ ग्रुप' ये स्पाईवेयर अलग-अलग देशों की सरकारों को बेचती है.
न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' के अनुसार कंपनी के क्लाइंट्स की जिन लोगों में दिलचस्पी थी, उनसे जुड़े 50,000 नंबरों का एक डेटाबेस लीक हुआ है और उसमें 300 से ज़्यादा नंबर भारतीय लोगों के हैं.
पेगासस मामला: विपक्ष के साथ-साथ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी मोदी सरकार को घेरा

मंगलवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले, हाथों में तख़्तियाँ और खिलौने वाले फ़ोन को कान पर लगाए, तृणमूल कांग्रेस के सासंद, महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने केंद्र सरकार का विरोध करते नज़र आए.
ये विरोध कथित पेगासस जासूसी कांड के ख़िलाफ़ था, जिसमें देश के चर्चित लोगों (नेता, मंत्री, पत्रकार, संवैधानिक पदों में बैठे लोगों के नाम शामिल हैं) के फ़ोन की कथित जासूसी की बात सामने आई है.
पेगासस जासूसी कांड में सरकार के जवाब से असंतुष्ट ये सांसद, प्रधानमंत्री मोदी से जवाब की माँग कर रहे थे.
सोमवार की तरह ही संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामेदार ही रहा.
बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, सुनिए संदीप सोनी के साथ
आज के कार्यक्रम में सुनिए- कोरोना हुई मौतों के सरकारी आंकड़ों पर राज्यसभा में विपक्ष ने सवाल खड़े किए. राज कुंद्रा मामले से उठे कई सवाल. क्या मौजूदा क़ानून से अश्लीलता पर रोक लग पाएगी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा क्या योगी आदित्यनाथ के नक्शे-क़दम पर हैं?
छोड़िए YouTube पोस्टGoogle YouTube सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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40 करोड़ भारतीयों को अब भी कोरोना का ख़तराः आईसीएमआर

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इमेज कैप्शन, आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव भारत सरकार ने कहा है कि देश में छह साल से ऊपर के लगभग 40 करोड़ लोगों के शरीर में कोरोना वायरस का सामना करने वाली एंटीबॉडी बन चुकी है.
इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के चौथे सीरो सर्वे में पाया गया कि देश की लगभग 40 करोड़ आबादी पर अब भी कोरोना संक्रमण का ख़तरा है.
आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में बताया कि जून-जुलाई के बीच 21 प्रदेशों के 70 ज़िलों में 6-17 साल के लोगों का सर्वे किया गया जहाँ पिछले तीन बार सर्वे हुए थे.
उन्होंने ज़ोर दिया कि इस सर्वे का मतलब ये है कि लोगों को अभी भी कोरोना के हिसाब से बर्ताव करना चाहिए. सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक भीड़-भाड़ वाले आयोजनों से बचना चाहिए और ग़ैर-ज़रूरी यात्रा नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "यात्रा तभी करें जब आपको वैक्सीन लग चुकी हो."
आईसीएमआर ने साथ ही सुझाव दिया कि प्राइमरी स्कूलों को खोलने पर विचार किया जा सकता है.
बलराम भार्गव ने कहा,"बच्चे वायरल संक्रमण को बेहतर ढंग से झेल सकते हैं. तो अगर ऐसा फ़ैसला हुआ और सारे कर्मचारियों को वैक्सीन लग गई, तो पहले प्राइमरी स्कूलों को खोलना समझदारी होगी."
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अफ़ग़ान राजदूत की बेटी नहीं हुई थीं अग़वा, फिर बोला पाकिस्तान, लिया भारत का नाम

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इमेज कैप्शन, सिलसिला अलीखेल पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने मंगलवार को फिर दावा किया कि इस्लामाबाद से अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी का अपहरण नहीं हुआ था. उन्होंने फिर आरोप लगाया कि इस मामले में भारत का हाथ है.
उन्होंने अफ़ग़ान राजदूत नजीबुल्ला अलीखेल की बेटी सिलसिला अलीखेल से जाँच में हाथ बँटाने की अपील भी की.
उन्होंने ये बयान इस्लामाबाद की पुलिस के ऐसा ही दावा करने के एक दिन बाद दिया है. पुलिस ने कहा था कि अफ़ग़ान राजदूत के अपनी बेटी को लेकर किए गए दावे में कोई सबूत नहीं मिला है.
शेख़ रशीद ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि सिलसिला ने इस्लामाबाद और उससे सटे रावलपिंडी में चार अलग जगहों पर जाने के लिए चार टैक्सियाँ ली थीं और पुलिस के पास इसका पूरा ब्यौरा है.
रशीद ने कहा, ”उनकी कार में कोई नहीं था. अपहरण का कोई मामला नहीं है. हमने क़ानून के मुताबिक़ एफ़आईआर दर्ज की है. हमें उम्मीद है कि वो आगे आएँगी और उन चार ड्राइवरों को पहचानेंगी जिनकी गाड़ियों में उन्होंने उस दिन सफ़र किया था.”
उन्होंने कहा कि बेहतर होता अगर राजदूत और उनकी बेटी वापस नहीं लौटे होते.
शेख़ रशीद ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा, ”हमारे अफ़ग़ान भाई और भारतीय तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.”

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्री शेख़ रशीद इस मामले को लेकर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान सरकारों के बीच कूटनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो गई थी.
अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने रविवार को अपने राजदूत समेत तमाम राजनयिकों को पाकिस्तान से वापस बुलाने की घोषणा की.
इसकेअगले दिन पाकिस्तान सरकार ने भी अपने राजदूत को "चर्चा" के लिए इस्लामाबाद बुला लिया.
अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत ने दावा किया था कि पिछले शुक्रवार को उनकी बेटी को कुछ अज्ञात लोगों ने अग़वा कर लिया था और उनके साथ मारपीट की.
पाकिस्तानी गृह मंत्री ने रविवार को भी इस घटना को लेकर संदेह व्यक्त किया था.
आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर अब डाकिये की मदद से घर पर बदलें

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आप अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट करना चाहते हैं तो ये ख़बर आपके लिए काम की हो सकती है.
इसके लिए किसी आधार सेंटर पर जाने के बजाय आप पोस्टमैन की मदद से ये काम आप घर पर ही कर सकते हैं.
इंडियन पोस्ट पेमेंट्स बैंक और यूनीक आ आइंडेटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने इसके लिए करार किया है.
इस समझौते के तहत अब आपके इलाके का पोस्टमैन आधार कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए अधिकृत होगा.
इंडियन पोस्ट पेमेंट्स बैंक की 650 शाखाओं और 1.46 लाख ग्रामीण डाक सेवकों का नेटवर्क इस सेवा के लिए उपलब्ध रहेगा.

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आईपीपीबी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ जे वेंकटरामु ने एक बयान में मंगलवार को बताया, "यूआईडीएआई की मोबाइल अपडेट सर्विस डाकघरों, डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के नेटवर्क के जरिए उपलब्ध होगी. इससे हाशिये पर छूट गए लोगों और उन इलाकों में जहां बैंकिंग सेवाओं की कमी है, वहां सर्विस देने के आईपीपीबी के लक्ष्य को साकार करने में मदद मिलेगी."
फिलहाल आईपीपीबी केवल मोबाइल अपडेट सर्विस उपलब्ध कराएगी लेकिन जल्द ही इस नेटवर्क के जरिए बच्चों का भी आधार रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा.
31 मार्च, 2021 तक भारत के 128.99 करोड़ लोगों को आधार नंबर जारी किया जा चुका है.
कांग्रेस और शिवसेना ने मोदी सरकार से पूछा- कोरोना से सच में कितनी मौतें हुईं?

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में सरकार से सवाल पूछते हुए राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को कोरोना महामारी पर कठघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया.
उन्होंने कहा, “इतने बड़े देश में कोरोना से कितने लोग मरे, क्या ये रहस्य ही बना रहेगा? सरकार देश में कोरोना से 4 लाख से अधिक मौतों की बात बताती है. जो झूठे आंकड़े सरकार जारी कर रही है वो सत्य से दूर हैं.”
इसके साथ ही खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान को लेकर संघ की निंदा की.
खड़गे ने कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 15 मई 2021 को कहा है कि जो लोग चले गए वे मुक्त हो गए. सरकार का समर्थन करने वाले संघ की क्या नीति और मंशा है, ये इससे पता चलता है.”
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इसके साथ ही राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष खड़गे ने केंद्र सरकार को कोविड 19 नियमों का उल्लंघन करने के लिए उत्तरदायी ठहराये जाने की माँग की.
उन्होंने कहा, “सरकार ने लोगों से मास्क पहनने को कहा, सामाजिक दूरी बनाकर चलने के लिए कहा. लेकिन ये लोग अलग अलग राज्यों में चुनाव के दौरान क्या कर रहे थे? आप अपने ही नियम तोड़ रहे थे. इन्हें कोविड नियमों को तोड़ने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए.”
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शिवसेना नेता संजय राउत ने भी राज्य सभा में केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह कोरोना से होने वाली मौतों के आँकड़े क्यों छिपा रही है.
उन्होंने कहा, "सरकार से हमारा सवाल है कि आप आंकड़े क्यों छिपा रहे हैं? कितने लोगों की मौत हुई? हमें इसका सही आंकड़ा बताइए. जो रिपोर्ट हैं वो सरकारी आंकड़े से ज़्यादा है."
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पेगासस क्या है, कैसे काम करता है, कितना ख़तरनाक है? जानिए हर सवाल का जवाब

रविवार देर शाम 'वॉशिंगटन पोस्ट' और भारत में समाचार वेबसाइट 'द वायर' ने एक ख़बर प्रकाशित कर दावा किया कि दुनियाभर के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए.
हालांकि, पेगासस नाम के जिस स्पाईवेयर से फ़ोन हैक करने की बात सामने आ रही है उसे तैयार करने वाली कंपनी एनएसओ ने तमाम आरोपों से इनकार किया है.
ये कंपनी दावा करती रही है कि वो इस प्रोग्राम को केवल 'जांची-परखी गई सरकारों' को बेचती है.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भारत में पत्रकारों और अन्य लोगों के फोन भी इसराइल में निर्मित इस सॉफ्टवेयर के ज़रिए हैक किए गए और उनकी निगरानी की गई.
लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि 'पेगासस' आख़िर क्या है और ये कैसे काम करता है?
ये कितना ख़तरनाक है और इसके निशाने पर कौन कौन थे?

ये एक सर्विलांस सॉफ्टवेयर है जिसे इसराइल की सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने बनाया है.
एनएसओ के मुताबिक ये मास सर्विलांस टूल नहीं है बल्कि खास लोगों की निगरानी के लिए हैं. इसके जरिए उन लोगों पर नज़र रखी जा सकती है जिनके आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने का शक हो.
ये टारगेट का फोन हैक करके उसकी निगरानी करता है.

इसके जरिए किसी व्यक्ति का फोन हैक करके उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है.
इसे टारगेट के फोन में इंस्टॉल किया जाता है और फिर उसके फोन का रीमोट कंट्रोल ले लिया जाता है. ये रिमोट एक्सेस ट्रोजन की तरह काम करता है.
होलोन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में साइबर विभाग के प्रमुख डॉ. हारेल मेनाश्री कहते हैं, "ये टारगेट के फोन को कंट्रोल कर लेता है और उससे जुड़े डेटा का एक्सेस एजेंसी को दे देता है. फोन कॉल सुने जा सकते हैं, फोन के कैमरा और माइक्रोफ़ोन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है."

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक आमतौर पर टारगेट को करप्ट मैसेज या फाइल भेजकर डिवाइस हैक किया जाता है.
डॉ. हारेल मेनाश्री कहते हैं, "इस सॉफ़्टवेयर के बारे में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन ये माना जा सकता है कि ये भी फोन को वैसे ही हैक करता होगा जैसे बाकी टूल करते हैं, बस इसका तरीका हो सकता है अति उन्नत हो. कोई ना कोई कमज़ोरी तो हैकर देखते ही हैं."

अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट समेत दुनिया भर के कई अख़बारों और समाचार वेबसाइटों में छपी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस सॉफ़्टवेयर की मदद से कई पत्रकारों, अधिकारियों, राजनेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है.

रिपोर्ट्स में सामने आया है कि इस सॉफ़्टवेयर के ग्राहकों में 51 फीसदी सरकारी एजेंसिया हैं.
इस सॉफ़्टवेयर के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए क्लिक करें
