तीरंदाज़ दीपिका कुमारी ने पेरिस में तीन गोल्ड मेडल जीते

पेरिस में आयोजित चैंपियनशिप में इस कामयाबी के साथ ही सोमवार को जारी होने वाली वर्ल्ड रैंकिंग में दीपिका नंबर एक तीरंदाज़ हो जाएँगी.

लाइव कवरेज

प्रशांत चाहल, भूमिका राय and विभुराज

  1. तीरंदाज़ दीपिका कुमारी ने पेरिस में तीन गोल्ड मेडल जीते

    deepika kumari

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    तीरंदाज दीपिका कुमारी ने रविवार को पेरिस में तीरंदाजी विश्व कप स्टेज 3 में महिलाओं की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा जीतकर स्वर्ण पदक की हैट्रिक पूरी की.

    दीपिका कुमारी ने फाइनल में रूस की एलेना ओसिपोवा को 6-0 से हराकर टूर्नामेंट में अपना तीसरा स्वर्ण पदक जीता. इससे पहले दीपिका ने मिक्सड टीम और महिला टीम रिकर्व स्पर्धाओं में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया.

    दीपिका टीम इवेंट और मिक्स्ड इवेंट के गोल्ड में हिस्सेदार होने के बाद व्यक्तिगत इवेंट में भी गोल्ड मेडल हासिल किया. दीपिका ने ये तीन गोल्ड मेडल जीतने के लिए पाँच घंटे से कम समय में चार मुक़ाबले जीते.

    पेरिस में आयोजित चैंपियनशिप में इस कामयाबी के साथ ही सोमवार को जारी होने वाली वर्ल्ड रैंकिंग में दीपिका नंबर एक तीरंदाज़ हो जाएँगी.

    दीपिका ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी और उनसे इस बार मेडल की उम्मीद जताई जा रही है.

  2. कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट फेफड़ों के लिए कितना खतरनाक है?

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    कोरोना महामारी पर केंद्र सरकार को सलाह देने वाली एजेंसी 'नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन' के डॉक्टर एनके अरोड़ा ने कहा है कि कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट का अन्य वैरिएंट की तुलना में फेफड़ों पर ज़्यादा असर पड़ता है.

    हालांकि डॉक्टर एनके अरोड़ा ने ये भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट से गंभीर बीमारी हो जाएगी या फिर ये ज्यादा संक्रामक है.

    कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट की पहचान 11 जून को हुई थी. इसे हाल ही में ज़्यादा जोखिम वाले वैरिएंट्स की सूची में शामिल किया गया है.

    भारत में अब तक 12 राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 51 मामले दर्ज किए गए हैं. महाराष्ट्र में इस वैरिएंट के सबसे ज्यादा मामले हैं.

    डेल्टा प्लस वैरिएंट के बारे में बात करते हुए 'एनटीएजीआई' के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर अरोड़ा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "डेल्टा प्लस वैरिएंट फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है या नहीं, ये स्पष्ट नहीं है."

    उन्होंने कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट का असर तब ज्यादा स्पष्ट होगा, जब और मामलों की पुष्टि होगी. अभी ये लगता है कि जो लोग वैक्सीन की एक या दोनों खुराक ले चुके हैं, उनमें इसका संक्रमण सामान्य ही है.

  3. सोमालिया: अल शबाब के 21 लड़ाकों को मृत्युदंड

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    सोमालिया के अर्ध स्वायत्त राज्य पंटलैंड में 21 लोगों को मृत्युदंड दिया गया. इन सभी लोगों को इस्लामिक चरमपंथी समूह अल शबाब से संपर्क रखने का दोषी पाया गया था.

    इन्हें सेना की एक कोर्ट ने सज़ा सुनाई थी और फायरिंग स्क्वायड ने सज़ा पर अमल किया.

    सरकारी रेडियो के मुताबिक इनमें से 18 लोगों ने एक दशक से ज़्यादा वक्त पहले हत्याएं और बम धमाके किए गए थे.

    जब इन्हें सज़ा दी जा रही थी, उसी दौरान अल शबाब ने सोमालिया के एक अन्य शहर पर हमला किया.

    रिपोर्टों के मुताबिक इस हमले में कुछ सैनिकों के मारे जाने की ख़बर है.

    सोमालिया के दूसरे हिस्सों में भी कोर्ट पहले इस तरह की सज़ा सुना चुकी हैं लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक पंटलैंड में अल शबाब के इतने सदस्यों को पहले कभी एक साथ मृत्युदंड नहीं दिया गया.

  4. पीवी नरसिम्हा रावः 65 की उम्र में कंप्यूटर, मौत से छह महीने पहले की-बोर्ड पर महारत

    पीवी नरसिम्हा राव, PV Narasimha Rao, नरसिम्हा राव

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    बात 1986 की है. राजीव गांधी तब भारत के प्रधानमंत्री थे. पीवी नरसिम्हा राव तब रक्षा मंत्री थे. राजीव गांधी की तरह ही पीवी नरसिम्हा राव का भी टेक्नोलॉजी के प्रति झुकाव था. हालांकि, नरसिम्हा राव को तब तक कंप्यूटर का ज्ञान नहीं था. वहीं राजीव गांधी को उसकी अच्छी समझ थी. राजीव अपने कक्ष में एक मित्र से बात कर रहे थे. नरसिम्हा राव भी तब पास ही मौजूद थे.

    राजीव अपने मित्र से कह रहे थे कि वे इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटरों के आयात की अनुमति देना चाहेंगे. इसके बाद राजीव ने कहा, "पता नहीं पार्टी के पुराने सदस्य इसे कैसे लेंगे. उस पीढ़ी को टेक्नोलॉजी के बारे में कम समझ है."

    नरसिम्हा राव ने उनकी ये पूरी बातें सुनीं.

    उसी शाम नरसिम्हा राव ने अपने बेटे प्रभाकर राव को हैदराबाद फ़ोन किया.

    अभी क़रीब 15 दिन ही हुए थे जब उनके बेटे ने अपने पिता को बताया था कि कैसे उनकी कंपनी कंप्यूटर के इस्तेमाल को लेकर एक शोध प्रस्तावित करना चाहती है.

  5. तेजस्वी ने फिर दिया ऑफ़र, नीतीश-बीजेपी के ख़िलाफ़ साथ आएंगे चिराग?

    तेजस्वी यादव और चिराग पासवान

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    राजनीति कहावतें गढ़ती है. कई बार राजनीति कहावतों के मुताबिक आगे बढ़ती है.

    राजनीति में अक्सर इस्तेमाल होने वाली तीन मशहूर कहावते हैं. पहली है, 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है', दूसरी है, 'राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता. और तीसरी है, 'राजनीति संभावनाओं का खेल है.'

    राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इन दिनों जिस तरह लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान को साथ आने का न्योता दे रहे हैं, वो कोशिश इन कहावतों का सटीक उदाहरण मालूम होती है.

    नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोलने वाले और उन्हें अपनी पार्टी में फूट का जिम्मेदार बताने वाले चिराग पासवान बीते दिनों बीजेपी के रुख पर भी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं.

    चिराग पासवान ने अभी बीजेपी और एनडीए से नाता तोड़ने का एलान नहीं किया है. न ही तेजस्वी यादव का ऑफ़र मंजूर किया है लेकिन बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में वो तेजस्वी यादव को 'छोटा भाई' बता चुके हैं और ये भी जाहिर कर चुके हैं कि दोनों के बीच 'संवाद होता है.'

  6. बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, 27 जून 2021, सुनिए संदीप सोनी के साथ

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  7. कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने दुनिया के सामने खड़ा किया सवाल, पाबंदियां हटें या रहें?

    कोरोना महामारी

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    एक तरफ़ जब दुनिया कोरोना महामारी से उबरती हुई दिख रही थी और लॉकडाउन से जुड़ी पाबंदियों में राहत दिए जाने का एलान किया जाने लगा था कि व्यापक वैक्सीनेशन अभियान के बावजूद इस वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट की चुनौती सामने खड़ी हो गई.

    प्रशासनिक स्तर पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत लगाई गई पाबंदियों में जिन छूटों का एलान किया गया था, वे फैसले वापस लिए जाने लगे. रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में महामारी की शुरुआत के बाद से अब तक का रिकॉर्ड मृत्यु दर दर्ज किया गया.

    54 लाख की आबादी वाले इस शहर में पिछले 24 घंटों में 107 लोगों की मौत हुई है. महामारी की शुरुआत के बाद से रूस के किसी शहर में कोरोना के कारण मरने वालों का ये सबसे बड़ा आंकड़ा है.

    कोरोना महामारी

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    हाल के हफ्तों में डेल्टा वैरिएंट के कारण पुर्तगाल में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं. सिडनी में भी डेल्टा वैरिएंट के कारण पूरे शहर और उसके उपनगरीय इलाकों को दो हफ्तों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.

    50 लाख की आबादी वाले इस शहर में कोरोना के उस वैरिएंट के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं जो सबसे पहली बार भारत में पाया गया था. बांग्लादेश में भी सरकार ने कड़े क्वारंटीन नियम लागू किए हैं.

    डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण के मामलों ख़तरनाक स्तर पर हो रही वृद्धि को देखते हुए ये नियम सोमवार से लागू किए जा रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने कहा है कि डेल्टा वैरिएंट के कारण संक्रमण के नए मामले बढ़े हैं और वो कड़ी पाबंदियां लागू करने पर विचार कर रहा है.

    कोरोना महामारी

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    भारत में भी बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के 50,040 नए मामले सामने आए हैं. इसके अलावा इस दौरान 1,258 लोगों की इस वायरस के कारण मौत हुई है. कुछ राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामलों के बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है.

    देश में अब कुल संक्रमण के मामले 3.02 करोड़ से अधिक हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या 3.95 लाख है. इसके अलावा देश में एक्टिव मामलों की संख्या 5,86,403 हो गई है. देश में रिकवरी रेट 96.75% हो गया है.

  8. कोरोना वैक्सीन लेना क्या सरकार अनिवार्य कर सकती है? क्या कहता है क़ानून

    कोरोना वायरस की वैक्सीन

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    पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की सरकार ने कई ज़िलों में दुकानदारों, टैक्सी और ऑटो चलाने वालों के साथ-साथ रेहड़ी पर सामान बेचने वालों के लिए शर्त रखी कि कोरोना की वैक्सीन लिए बग़ैर वो अपना काम दोबारा शुरू नहीं कर सकते. कई ज़िलों में ये आदेश वहां के उपायुक्तों ने जारी किया.

    लेकिन मेघालय हाई कोर्ट ने इसे निरस्त करते हुए कहा कि वैक्सीन लेने को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता.अदालत ने इस आदेश को मौलिक अधिकार और निजता के अधिकार का हनन बताते हुए रद्द कर दिया.

    मेघालय की तरह के आदेश कुछ दूसरे राज्यों की सरकार ने भी जारी किए हैं. इनमें गुजरात भी शामिल है. गुजरात के 18 शहरों में व्यावसायिक संस्थानों से कहा गया है कि वो 30 जून तक अपने कर्मचारियों का टीकाकरण करवा लें.

    बाक़ी के शहरों और ज़िलों में 10 जुलाई की समय सीमा तय की गई है. सरकारी आदेश में कहा गया है कि ऐसा नहीं होने की स्थिति में ऐसे संस्थानों को बंद करा दिया जाएगा.

  9. भारत-चीन कूटनीटिक वार्ता के दो दिन बाद राजनाथ सिंह की लद्दाख यात्रा के क्या हैं मायने

    राजनाथ सिंह

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    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को लद्दाख पहुंचने के बाद कहा कि देश के लिए भारतीय सैनिकों का समर्पण एक अनुकरणीय उदाहरण है.

    चीन के साथ लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत की रक्षा तैयारियों का जायजा लेने के लिए रविवार को अपने तीन दिनों की यात्रा पर आज लद्दाख पहुंचे.

    अधिकारियों ने बताया कि लेह में रक्षा मंत्री ने लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवेलपमेंट काउंसिल के वरिष्ठ निर्वाचित प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान क्षेत्र की विकास गतिविधियों पर चर्चा की.

    रक्षा मंत्री के साथ इस दौरे में आर्मी चीफ़ जनरल एमएम नरवणे भी उनके साथ थे. राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों के कई पूर्व सैनिकों से मुलाकात की और राष्ट्रीय सुरक्षा और उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.

    राजनाथ सिंह

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    राजनाथ सिंह ने कहा, "देश के लिए भारतीय सैनिकों का समर्पण एक अनुकरणीय उदाहरण है. मैं हृदय से उनके लिए आभार प्रकट करता हूं. हमारा मकसद ये है कि आप सब की भी उसी तरह देखभाल की जानी चाहिए जिस तरह से आपने राष्ट्रीय सुरक्षा का ख्याल रखा था."

    "इसके बावजूद अगर आपको कहीं समस्या महसूस होती है तो एक हेल्पलाइन बनाया जा रहा है जो आपकी समस्याओं का निदान करेगा."

    समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में विवाद वाली जगहों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया में चीन के साथ गतिरोध के बीच रक्षा मंत्री भारत की सैनिक तैयारियों की समीक्षा करेंगे.

    राजनाथ सिंह की ये यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दो दिन पहले ही भारत और चीन के बीच कूटनीतिक वार्ता का एक चरण पूर हुआ है. इस वार्ता में दोनों देशों के बीच ये सहमति बनी है कि बातचीत और संवाद कायम रखा जाएगा.

  10. महिला की शादी का ये इश्तिहार छपते ही वायरल हो गया

    90 फ़ीसद भारतीय शादियां आज भी अरेंज्ड ही होती हैं

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    भारत में नारीवादी कार्यकर्ता आमतौर पर अख़बारों के वैवाहिक विज्ञापनों के ज़रिए जीवनसाथी की तलाश नहीं करती हैं.

    वैवाहिक विज्ञापन अमूमन जातियों और धर्म के आधार पर वर्गीकृत होते हैं और उनमें त्वचा के रंग, ऊंचाई शक्ल के बारे में बताया जाता है. कई विज्ञापनों में तो आय और पारिवारिक समृद्धि की शेखी भी बघारी जाती है.

    पिछले सप्ताह जब अख़बार में एक 'छोटे बालों और छिदे जिस्म का जिक्र करने वाली वैचारिक नारीवादी लड़की' के लिए ऐसे अमीर दूल्हे की तलाश में विज्ञापन प्रकाशित हुआ जो 'अमीर हो, हैंडसम हो, महिलावादी हों और पादता और डकार न लेता हो' तो ये तुरंत वायरल हो गया.

    कॉमेडियन अदिति मित्तल ने इस विज्ञापन को ट्विटर पर पोस्ट करते हुए सवाल पूछा कि उनकी तरफ से ये विज्ञापन किसने पोस्ट किया है?

  11. डोनाल्ड ट्रंप: चुनावी हार के पांच महीने बाद, हज़ारों समर्थकों के सामने लगाए वही पुराने आरोप

    डोनाल्ड ट्रंप

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    साल 2020 के चुनाव में हारने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार किसी बड़ी राजनीतिक रैली में अपने समर्थकों को संबोधित किया.

    पूर्व राष्ट्रपति ने ओहायो के वेलिंगटन में आयोजित इस रैली में अपने समर्थकों के सामने वही दावे फिर से दोहराए कि साल 2020 के राष्ट्रपति चुनावों के नतीज़ों में धांधली हुई थी.

    ट्रंप ने अप्रवासन और अपराध का मुद्दा उठाते हुए बाइडन प्रशासन के पहले पांच महीने के कार्यकाल को 'नाकाम' करार दिया.

    ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के उन लोगों की भी आलोचना की जिन्होंने जनवरी में हुई कैपिटल हिल हिंसा के बाद महाभियोग प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया था.

    ट्रंप ने ओहायो में अगले साल होने वाले मध्यावधि चुनाव में एंथनी गोंज़ालेज़ के विरोधी मैक्स मिल के समर्थन का एलान किया है.

  12. सऊदी अरब ने एक और सामाजिक कार्यकर्ता को रिहा किया

    समार बदावी

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    सऊदी अरब की जेल में तीन साल से कैद एक और सामाजिक कार्यकर्ता को रिहा कर दिया गया है. लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा अल-सदा की रिहाई के बाद समार बदावी को भी रिहा किए जाने की ख़बरें हैं.

    खाड़ी क्षेत्र की ख़बरें देने वाली कई न्यूज़ वेबसाइट्स ने इसकी पुष्टि की है. सऊदी अरब में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन अल-खलीज अल-जदीद ने इन दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई की जानकारी ट्विटर पर दी है.

    समार बदावी सऊदी अरब की उन शुरुआती महिलाओं में से थीं जिन्होंने महिलाओं को ड्राइविंग, वोट देने और चुनावों में भाग लेने के हक को लेकर एक पिटीशन पर दस्तखत किए थे. सऊदी अरब में साल 2014 से उन पर यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिया गया था.

    समार को पहले भी कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है. साल 2018 में कनाडा ने सऊदी अरब से समार बदावी को रिहा करने की मांग की थी जिसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो गई.

    सऊदी अरब ने कनाडा के राजदूत को निष्कासित कर दिया था और ओटावा से अपने राजदूत को बुला लिया था. समार के भाई और ब्लॉगर राइफ बदावी भी इंटरनेट पर विवादास्पद विचार साझा करने के लिए दस साल जेल की कैद काट रहे हैं.

  13. यमन: हूती विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच ख़ूनी संघर्ष, 100 लड़ाकों की मौत

    यमन

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    यमन के उत्तरी इलाके में सुरक्षा बलों और हूती विद्रोहियों के बीच हुई भीषण लड़ाई में 100 से ज़्यादा लड़ाकों की मौत की रिपोर्टें मिल रही हैं.

    सरकार समर्थक सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से चल रही इस लड़ाई में सुरक्षा बलों के 30 जवान मारे गए हैं.

    दरअसल ये लड़ाई मारिब शहर पर नियंत्रण के लिए हो रही है. सरकार समर्थक सूत्रों का कहना है कि इस लड़ाई में हूती विद्रोहियों के 80 लड़ाके मारे गए हैं.

    हालांकि हूती विद्रोहियों की तरफ़ जानोमाल के नुक़सान के बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है. वे महीनों से मारिब पर कब्ज़े के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.

    मारिब यमन के उन शहरों में से है, जहां तेल का बड़ा भंडार है. यमन के दूसरों इलाकों में संघर्ष के कारण विस्थापित हुए हज़ारों लोगों ने मारिब में ही पनाह ले रखी है.

    सहायता एजेंसियों के लिए काम करने वाले लोगों को डर है कि मारिब पर कब्ज़े की लड़ाई एक बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकती है.

  14. जम्मू: एयर फ़ोर्स स्टेशन पर हुए धमाके आतंकवादी हमला: डीजीपी दिलबाग सिंह

    डीजीपी दिलबाग सिंह

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    जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने जम्मू एयर फ़ोर्स स्टेशन पर रविवार को हुए दो धमाकों को 'आंतकवादी हमला' बताया है. डीजीपी सिंह के मुताबिक पुलिस, वायु सेना और दूसरी एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं.

    इसके पहले भारतीय वायु सेना ने जम्मू एयर फ़ोर्स स्टेशन के टेक्निकल एरिया में हुए धमाकों की जानकारी दी थी.

    वायु सेना ने ट्विटर पर जानकारी दी, "रविवार सुबह जम्मू एयर फ़ोर्स स्टेशन के टेक्निकल एरिया में कम तीव्रता के दो धमाके हुए. एक धमाके के कारण एक इमारत की छत को नुक़सान पहुंचा है वहीं दूसरा धमाका खुली जगह में हुआ."

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि धमाके में वायु सेना के दो जवान घायल हुए. दोनों धमाकों के बीच छह मिनट का अंतराल था.

  15. सऊदी अरब में तीन साल की कैद के बाद रिहा होने वाली सामाजिक कार्यकर्ता

    नसीमा अल सदा

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    सऊदी अरब ने जानीमानी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा अल सदा को तीन साल की कैद के बाद रिहा कर दिया है.

    नसीमा अल सदा सऊदी अरब के क़ातिफ़ क्षेत्र की रहने वाली हैं. उन्होंने महिलाओं और शिया अल्पसंख्यकों के हक में आवाज़ उठाई थी.

    साल 2018 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. और पिछले साल उन्हें बंद कमरे में हुई अदालती सुनवाई के बाद पांच साल कैद की सजा सुनाई गई थी.

    मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उनकी रिहाई की मांग की थी.

    मर्दों के प्रभुत्व वाली सामाजिक व्यवस्था को खत्म करने की मांग के समर्थन में कैम्पेन चलाने के आरोप में नसीमा अल सदा और समार बदावी को गिरफ्तार किया गया था.

    इनकी मांग थी कि सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत दी जाए. नसीमा ने जस्टिस सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स नाम से एक संस्था भी शुरू की थी लेकिन सऊदी अरब में इसकी इजाजत नहीं दी गई.

    जिस समय नसीमा को गिरफ्तार किया गया था, उसी दौरान कुछ और भी महिला कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था. उन पर विदेशी शक्तियों के लिए काम करने का आरोप लगाया गया था.

  16. भारत-जापान संबंधों पर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी

    मोदी

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि कोरोना संकट के दौरान भारत और जापान की साझेदारी वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के और प्रासंगिक हो गई है. अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन के परिसर में कैज़ेन एकैडमी और ज़ेन गार्डन का वर्चुअल उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बात कही.

    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अहमदाबाद में कैज़ेन एकैडमी और ज़ेन गार्डन खोले जाने से दोनों के रिश्तों की प्रगाढ़ता बढ़ेगी.

    उन्होंने कहा, "भारत और जापान जितना बाहरी प्रगति और उन्नति के लिए समर्पित रहे हैं, उतना ही आंतरिक शांति और प्रगति को भी हमने महत्व दिया है. जापानीज़ ज़ेन गार्डेन, शांति की इसी खोज की, इसी सादगी की एक सुंदर अभिव्यक्ति है."

    "जापान में जो ‘ज़ेन’ है, वही भारत में ‘ध्यान’ है. बुद्ध ने यही ध्यान, यही बुद्धत्व संसार को दिया था. और जहाँ तक ‘काईज़ेन’ की संकल्पना है, ये वर्तमान में हमारे इरादों की मजबूती को, निरंतर आगे बढ़ने की हमारी इच्छाशक्ति का प्रतीक है."

    "जापान की एक से बढ़कर एक कंपनियां आज गुजरात में काम कर रही हैं. मुझे बताया गया है कि इनकी संख्या 135 से भी ज्यादा है. ऑटोमोबिल से लेकर बैंकिंग तक, कंस्ट्रक्शन से लेकर फार्मा तक, हर सेक्टर की जापानी कंपनी ने गुजरात में अपना बेस बनाया हुआ है."

    "हमारे पास सदियों पुराने सांस्कृतिक सम्बन्धों का मजबूत विश्वास भी है, और भविष्य के लिए एक कॉमन विज़न भी. इसी आधार पर पिछले कई वर्षों से हम अपनी विशेष रणनीति और वैश्विक साझीदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं."

    "इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में हमने जापान-प्लस की एक विशेष व्यवस्था भी की है. जापान के वर्तमान प्रधानमंत्री श्रीमान योशिहिदे सुगा भी बहुत सुलझे हुए व्यक्ति हैं."

    "योशिहिदे जी और मेरा ये विश्वास है कि कोरोना महामारी के इस दौर में, भारत और जापान की दोस्ती, हमारी पार्टनरशिप, वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए और ज्यादा प्रासंगिक हो गई है."

  17. म्यांमार की शरणार्थी गर्भवती महिलाओं की भारत में बढ़तीं मुश्किलें

    महिलाएं

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    "उनकी डिलीवरी की तारीख़ बीत चुकी है. पेट में बच्चे की हलचल भी कम हुई है."

    एक डॉक्टर, जो ख़ुद भी शरणार्थी हैं, उन्होंने निआंग (बदला हुआ नाम) की जांच करते हुए मुझे बताया जब 16 जून को मैं मिज़ोरम के एक शरणार्थी कैंप में पहुंची.

    29 साल की निआंग तीन बच्चों की मां हैं. उन्हें लगा था कि डिलीवरी के लिए उनके पास कुछ दिन और बचे हैं.

    "मैंने मार्च में बॉर्डर पार किया और अप्रैल में यहां पहुंची. मुझे लगता है तब मैं 6 महीने की गर्भवती थी. मैं एक डॉक्टर के पास गई, उन्होंने बताया कि जून के आख़िरी हफ़्ते में डिलीवरी होगी.

    महामारी के कारण उनकी प्रसव पूर्व देखभाल ठीक से नहीं हो पाई. वो कहती हैं, "उन्होंने जांच के दौरान मेरे पेट को छुआ भी नहीं. अगले ही दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. मुझे डर है कि मैं बच्चे को खो दूंगी."

  18. ट्रांसजेंडर से प्यार और शादी की कहानी

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    आमतौर पर समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को हीन भावना से देखा जाता है. लेकिन महाराष्ट्र के एक परिवार ने एक ट्रांसजेंडर को अपने परिवार में खुशी खुशी शामिल किया.

    परिवार के लड़के ने एक ट्रांसजेंडर के साथ शादी की और पूरा परिवार उनके इस फ़ैसले में साथ रहा. देखिए यह कहानी.

  19. राष्ट्रपति कोविंद पहुँचे अपने गाँव परौंख, बोले- ‘देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने सर्वोच्च पद तक पहुँचाया’

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    भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित अपने गाँव परौंख पहुँचे.

    वहाँ उन्होंने एक जन-अभिनंदन समारोह में हिस्सा लिया. इस समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उनके साथ थीं.

    उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात ज़िले में स्थित परौंख गाँव की ज़मीन पर जब वे अपने हेलीकॉप्टर से उतरे, तो सबसे पहले उन्होंने अपनी जन्म-भूमि पर नतमस्तक होकर मिट्टी को स्पर्श किया और उसे अपने माथे से लगाया.

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    इस समारोह में अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा, “मैंने कभी सपने में भी सोचा नहीं था कि इस गाँव के मेरे जैसे सामान्य बालक को कभी देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा. लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह करके दिखा दिया.”

    राष्ट्रपति कोविंद ने दिल्ली से कानपुर तक का सफ़र एक विशेष ट्रेन में किया. इस दौरान उन्होंने कानपुर देहात के झींझक और रूरा रेलवे स्टेशनों पर जनता का अभिवादन स्वीकार किया और अपने स्कूल और सामाजिक जीवन के शुरुआती दिनों के पुराने परिचितों से मुलाक़ात की.

    उन्होंने कहा कि “आज मैं जहाँ तक पहुँचा हूँ, उसका श्रेय इस गाँव की मिट्टी और इस क्षेत्र तथा आप सब लोगों के स्नेह व आशीर्वाद को जाता है.”

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    “भारतीय संस्कृति में ‘मातृ देवो भव’, ‘पितृ देवो भव’, ‘आचार्य देवो भव’ की शिक्षा दी जाती है. हमारे घर में भी यही सीख दी जाती थी. माता-पिता और गुरु तथा बड़ों का सम्मान करना हमारी ग्रामीण संस्कृति में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है.”

    वे बोले, “गाँव में सबसे वृद्ध महिला को माता तथा बुजुर्ग पुरुष को पिता का दर्जा देने का संस्कार मेरे परिवार में रहा, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या संप्रदाय के हों. आज मुझे यह देखकर खुशी हुई कि बड़ों का सम्मान करने की हमारे परिवार की यह परंपरा अब भी जारी है.”

    “मैं कहीं भी रहूँ, मेरे गाँव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गाँव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं. मेरे लिए परौंख केवल एक गाँव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहाँ से मुझे आगे बढ़कर देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही.”

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