कोरोना से जंग के लिए सरकार लेगी सेना के 400 पूर्व चिकित्साकर्मियों की मदद
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश में कोविड-19 के रिकॉर्ड संक्रमण और मौतों से दबाव झेल रही स्वास्थ्य प्रणाली को मजूबती देने के लिए पूर्व सैन्य चिकित्साकर्मियों को भर्ती किया जाएगा.
लाइव कवरेज
कोरोना से जंग के लिए सेना के 400 पूर्व चिकित्साकर्मियों की ली जाएगी मदद
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भारत में कोरोना
वायरस से लड़ाई में मदद के लिए पूर्व सैन्य चिकित्साकर्मियों की सेवाएं ली जाएंगी.
रक्षा मंत्रालय ने
रविवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि देश में कोविड-19 के रिकॉर्ड संक्रमण और
मौतों से दबाव झेल रही स्वास्थ्य प्रणाली को मजूबती देने के लिए पूर्व सैन्य
चिकित्साकर्मियों को भर्ती किया जाएगा.
मंत्रालय ने कहा
कि लगभग 400 चिकित्सा अधिकारियों को अधिकतम 11 महीनों के लिए अनुबंध पर नियुक्त
किया जाएगा. महामारी के जंग में ऑनलाइन कंसल्टेशंस के लिए अन्य डिफेंस डॉक्टर्स की भी मदद ली जाएगी.
भारत में कोरोना
वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. बीते दो दिनों से लगातार देश में कोरोना संक्रमण से चार हज़ार
से ज़्यादा लोगों की मौतें हो रही हैं.
कई राज्यों में पिछले
महीने से कड़ा लॉकडाउन लगाया गया है. हालांकि कुछ राज्यों में लोगों की आवाजाही पर
कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं. कई राज्यों में सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, पब और शॉपिंग मॉल बंद किए गए हैं.
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इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी देशव्यापी लॉकडाउन लगाने की घोषणा करने को लेकर दबाव बन रहा है.
भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने छिटपुट नाइट कर्फ़्यू और प्रतिबंधों की बजाए संपूर्ण, योजनागत, पूर्वघोषित राष्ट्रीय लॉकडाउन की मांग की है.
शनिवार को जारी एक बयान में आईएमए ने कहा, “आईएमए कोविड-19 महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर से पैदा हुए संकट से निपटने में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बेहद सुस्त और अनुपयुक्त तरीक़ों को देखकर हैरान है.”
द इंस्टीट्यूट फ़ॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन का अनुमान है कि भारत में अगस्त तक कोविड-19 से दस लाख मौतें हो सकती हैं.
देश के कई हिस्सों में अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की भारी कमी देखने को मिल रही है और श्मशान घाटों में शवों की संख्या बहुत बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के मामलों और उससे होने वाली मौतों की संख्या सामने आ रहे आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हैं.
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भी चल रहा है. अब तक 16 करोड़ से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है.
भारत में कोरोना की दूसरी लहर बेकाबू क्यों हो गई?
कोरोना से लड़ने के लिए एमबीबीएस पास किए छात्रों को नियुक्त करेगी तेलंगाना सरकार
प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ते दबाव को कम करने के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने एमबीबीएस पास किए छात्रों को तुरंत नियुक्त करने का फ़ैसला किया है.
चंद्रशेखर राव ने कहा है कि इससे कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में लगे डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों पर दबाव कम होगा.
इसके लिए प्रदेश सरकार ने क़रीब पचास हज़ार ऐसे छात्रों से आवेदन मांगे हैं जिन्होंने अभी-अभी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है और इस काम के लिए योग्य हैं.
इन्हें कोरोना के ख़िलाफ़ जंग के लिए दो से तीन महीनों के लिए बतौर डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट या पैरामेडिकल कार्यकर्ता के तौर पर नियुक्त किया जाएगा.
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एएमयू में 16 फैकल्टी की मौत, कोरोना वैरिएंट की जांच के लिए ICMR से गुज़ारिश
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उत्तर प्रदेश में
स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हाल ही में 16 फैकल्टी सदस्यों की कोरोना
से मौत होने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति तारीक़ मंसूर ने इंडियन काउंसिल ऑफ़
मेडिकल रिसर्च को पत्र लिखकर कैंपस में फैल रहे कोविड-19 वैरिएंट की जांच करने का आग्रह
की है.
ये पत्र रविवार को
इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव के नाम लिखा
गया है.
इस पत्र में लिखा
है, “विश्वविद्यालय
परिसर और आसपास के मोहल्लों में रहने वाले 16 एएमयू फैकल्टी सदस्यों, कई
सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की कोविड-19 के कारण मौत हो गई है.”
“इससे ये
संदेह पैदा होता है कि कोई विशेष वैरिएंट अलीगढ़ के सिविल लाइंस इलाक़े में फैल
रहा है. इस इलाक़े में एएमयू और कई आसपास के मोहल्ले आते हैं.”
पत्र में लिखा गया है कि जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैबोरेट्री शहर में
मिले वैरिएंट की सिक्वेंसिंग के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोमिक एंड इंटीग्रेटेड बायोलॉजी
लेबोरेट्री, नई दिल्ली को सैंपल्स भेज रही है.
उपाध्यक्ष ने लिखा
है, “मैं आपसे
अनुरोध करता हूं कि अलीगढ़ में फैल रहे कोविड-19 वायरस के किसी विशेष वैरिएंट, जो
बीमारी को और गंभीर बना सकता है, की जांच के लिए हमारी लैब से भेजे गए कोविड-19
सैंपल्स का विश्लेषण करने के लिए आईसीएमआर के संबंधित सेक्शन/ विभाग को निर्देश
दें ताकि हम सलाह और अनुशंसा के आधार पर नियंत्रण के उपाय अपना सकें.”
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राज्यसभा सांसद रघुनाथ महापात्र का निधन, कोरोना से थे संक्रमित
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कलाकार और राज्यसभा सांसद रघुनाथ महापात्र का रविवार को निधन हो गया है. कोरोना संक्रमित होने के कारण बीते दिनों भुवनेश्वर के एम्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक प्रकट किया है और कहा है, "कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें याद किया जाएगा."
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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी रघुनाथ महापात्र की मौत पर दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट किया, "पारंपरिक तौर की कला में प्रवीण रघुनाथ महापात्र की मौत को तीनों पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था."
1943 में पुरी के पास जन्मे रघुनाथ महापात्र पत्थरों से मूर्तियां तराशने की कला में माहिर थे.
कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1976 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. बाद में 2001 में उन्हें पद्म भूषण और 2013 में पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ा गया था.
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बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर’
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए संदीप सोनी के साथ.
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ब्रेकिंग न्यूज़, हमारे वैज्ञानिकों की बनाई वैक्सीन हमारे लोगों के लिए नहीं है- मनीष सिसोदिया
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दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने वैक्सीन की कमी के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया और लिखा, "हमारे ही वैज्ञानिकों की बनाई वैक्सीन हमारे ही लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है."
उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए और लिखा कि बीते तीन महीनों में केंद्र सरकार ने 93 देशों को कोरोना वैक्सीन की 6.5 करोड़ डोज़ निर्यात की है.
उन्होंने लिखा "कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारत में क़रीब एक लाख लोगों की जान ली है, अगर वैक्सीन का निर्यात नहीं किया जाता तो लोगों की जान बचाई जा सकती थी."
"अंतरराष्ट्रीय जगत की चिंता करना अच्छी बात है लेकिन अमेरिका, कनाडा, यूरोप के देश, पहले दुनिया भर से, अपने लोगों के लिए वैक्सीन का इंतज़ाम करने में लगे हैं. केवल फ़्रांस ने पिछले महीने 1 लाख वैक्सीन एक्सपोर्ट की हैं."
उन्होंने लिखा "जब इतनी वैक्सीन बन गई थी तो इसे अपने लोगों को देकर बेहतर कोरोना मेनेजमेंट हो सकता था लेकिन केंद्र सरकार इंटर्नेशनल इमेज मेनेजमेंट में लगी रही."
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वहीं मुख्यमंत्री
अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर राज्य को 60 लाख डोज़ दिलाने
की अपील की है.
उन्होंने स्वास्थ्य
मंत्रालय से अपील की है कि वो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक को मई
से जुलाई के दौरान दिल्ली को कोरोना के टीके की 60 लाख डोज़ देने का आदेश दें.
साथ ही राज्यों को
टीकाकरण के लिए अलग से ऐप या मैकेनिज़्म बनाने की इजाजत दी जाए.
उन्होंने पत्र में
लिखा है कि सभी नागरिकों के टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकारों को
ज़रूरी मात्रा में टीके उपलब्ध कराने चाहिए.
केंद्र सरकार को निजी
वैक्सीन निर्माताओं पर सक्रियता से निगरानी रखनी चाहिए ताकि सभी राज्य सरकारों को
पर्याप्त मात्रा में टीके की आपूर्ति हो सके और इस महत्वपूर्ण पहलू को निजी
निर्माताओं के विवेक पर नहीं छोड़ना चाहिए.
पत्र में ये भी
लिखा है कि सरकारों (केंद्र और राज्य दोनों) और निजी अस्पतालों के लिए टीके का एक एकसमान
मूल्य तय किया जाना चाहिए. अलग-अलग कीमतों के कारण वैक्सीन निर्माताओं को सरकार के
बजाय निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देने में फायदा मिलेगा.
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कोरोना महामारी के कारण बंद रहेंगे मारुति सुज़ुकी के कारखाने
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भारत की सबसे बड़ी
कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड ने कहा है कि कोविड-19
महामारी को देखते हुए उसके कारखाने 16 मई तक बंद रहेंगे.
कंपनी का कहना है कि वह इस समय का इस्तेमाल वार्षिक मेनटेनेंस के लिए करेगी.
फिलहाल ये कह पाना
मुश्किल है कि ये शटडाउन कोरोना वायरस महामारी के कारण किया गया है या मांग घटने के
कारण.
एक ऑटो उद्योग
निकाय के पिछले महीने आए वार्षिक आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के कारण
कारों की बिक्री पिछले छह सालों में सबसे कम हो गई है.
इतना ही नहीं
कोरोना की दूसरी लहर के कारण बिक्री में और कमी आने वाली है.
भारत में कोरोना
वायरस की दूसरी लहर में चार लाख से ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं. वहीं, एक दिन में चार
हज़ार से ज़्यादा मौतें रही हैं.
कोरोना संक्रमण पर
काबू पाने के लिए कई राज्यों में लॉकडाउन लगाया है जिसका असर अर्थव्यवस्था पर
पड़ रहा है.
कोरोना से बेहाल पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी
जम्मू कश्मीर में भी बढ़ा कोरोना कर्फ़्यू, 17 मई तक सख्त पाबंदियां
जम्मू-कश्मीर के सभी 20 ज़िलों में कोरोना कर्फ़्यू 17 मई सवेरे सात बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
ताज़ा आदेश के अनुसार इस बार कोरोना कर्फ़्यू पहले से सख्त होगा और इस दौरान केवल मेडिकल और राशन की दुकानों जैसी ज़रूरी सेवाओं की ही खुलने की इजाज़त दी जाएगी.
इस दौरान शादी समारोह जैसे आयोजनों में 25 से अधिक लोगों के शामिल होने की इजाज़त नहीं होगी.
इससे पहले लगाए गए कोरोना कर्फ़्यू की मियाद 10 तारीख सवेरे सात बजे तक ख़त्म होने वाली थी.
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उत्तर प्रदेश में 17 मई तक के लिए बढ़ा कोरोना कर्फ़्यू
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उत्तर प्रदेश
सरकार ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाया गया कर्फ़्यू 17 मई तक बढ़ा
दिया है.
इससे पहले लगाया गया कर्फ़्यू सोमवार
सुबह सात बजे ख़त्म होने वाला था.
अतिरिक्त मुख्य
सचिव (सूचना) नवनीत सहगल ने एक बयान जारी कहा है कि राज्य में लगा कोरोना कर्फ़्यू
17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
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उत्तर प्रदेश में शनिवार को कोरोना के 26,847 नए मामले सामने आए और 298 लोगों की मौत हो गई.
राज्य में अब तक कोरोना वायरस के 14,80,315 मामले सामने आ चुके हैं और 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है.
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ब्रेकिंग न्यूज़, असम में हिमंत बिस्व सरमा सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए
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असम में हिमंत बिस्व सरमा को सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया. समाचार एजेंसी एनएआई के अनुसार केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसकी घोषणा की.
सरमा सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. इससे पहले सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने रविवार को राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपा.
हिमंत बिस्व सरमा साल 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे. सोनोवाल सरकार में वो कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके है.
कांग्रेस में रहते हुए वो पहली बार 2001 में, इसके बाद 2006 और 2011 मेंं जलुकबाड़ी से विधायक चुने गए थे.
पाकिस्तान ने मुंबई में बरामद हुए अवैध यूरेनियम की जांच की मांग की
मुंबई में गुरुवार को सात किलो बरामद किए
गए अवैध यूरेनियम को लेकर पाकिस्तान ने चिंता ज़ाहिर की है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हाफ़ीज़ चौधरी ने शनिवार को एक
बयान में कहा, "हमें इस बाद कि चिंता है कि भारत में 7 किलोग्राम प्राकृतिक यूरेनियम
एक अनाधिकृत व्यक्ति के पास के बरामद हुआ है. किसी भी देश के लिए परमाणु वस्तुओं की सुरक्षा
सबसे अहम होनी चाहिए. इस मामले की सही तरीक़े से जांच की ज़रूरत है."
ज़ाहिद हाफीज़ चौधरी ने कहा, ''परमाणु मटीरियल की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं होनी चाहिए. इस बात की गंभीरता से जाँच होनी चाहिए कि अनाधिकारिक रूप से इतनी मात्रा में यूरेनियम बाहर कैसे आया.''
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महाराष्ट्र एटीएस ने गुरुवार को 7 किलोग्राम यूरेनियम के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया था.
एटीएस के डीआईजी शिवदीप लांडे ने बताया कि गिरफ़्तार किए गए दोनों युवक, जिगर पंड्या और अबू ताहिर यूरेनियम को बेचने की फिराक में थे. एटीएस की टीम ने ग्राहक बनकर उनसे संपर्क किया था.
उनके पास से क़रीब सात किलो यूरेनियम बरामद किया गया जिसकी कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है.
दिल्ली में एक और हफ़्ते के लिए लॉकडाउन बढ़ा, कल से मेट्रो भी रहेगी बंद
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में लॉकडाउन एक और हफ़्ते के लिए बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार का लॉडकाउन ज़्यादा कड़ा होगा.
केजरीवाल ने कहा कि लॉकडाउन के पहले कोरोना की संक्रमण दर 35 फ़ीसदी थी. मतलब 100 लोगों का कोरोना टेस्ट हो रहा था तो 35 लोग संक्रमित पाए जा रहे थे.
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि अब संक्रमण दर लॉकडाउन के बाद 23 फ़ीसदी हो गई है.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मजबूरीवश लॉकडाउन बढ़ाया जा रहा है. इस बार लॉकडाउन सख़्त रहेगा. कल से यानी सोमवार से मेट्रो भी नहीं चलेगी.
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भारत में कोरोना की तबाही का असर बांग्लादेश में भी बहुत बुरा
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भारत में कई राज्यों में लॉकडाउन के बावजूद, लगातार चौथे दिन
चार लाख से अधिक संक्रमण के मामले दर्ज किए गए. इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में टीकाकरण
अभियान तेज़ करने पर ज़ोर दिया जा रहा है.
लेकिन भारत में बढ़ते संक्रमण और टीकाकरण का असर पड़ोसी देश
बांग्लादेश पर भी पड़ रहा है. बांग्लादेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों ने
चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में वैक्सीन की कमी हो सकती है.
जानकारों का मानना है कि देश में टीकाकरण अभियान तेज़ करने
की ज़रूरत है क्योंकि वायरस के नए और ख़तरनाक वेरिएंट पाए जाने लगे हैं.
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समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि कोरोना वायरस का भारत से आया एक वेरिएंट पहली बार बांग्लादेश में पाया गया है.
कई हफ़्तों तक ज़्यादातर मामले दक्षिण अफ्रीका के वेरिएंट के पाए गए है. चिंता जताई जा रही है कि नया वेरिएंट पहले के वेरिएंट के मुक़ाबले ज़्यादा तेज़ी से फैलता है और मुमकिन है कि वैक्सीन का असर उनपर न हो.
जानकारों के मुताबिक़ बांग्लादेश में पिछले दो हफ़्तों में संक्रमण में कमी आई है. हालांकि इसकी सही वजह का पता नहीं चल पाया है. जानकार इसे टीकाकरण अभियान को तेज़ करने का सही वक़्त मान रहे हैं.
बांग्लादेश की चाइल्ड हेल्थ रिसर्च फाउंडेशन से जुड़ीं वैज्ञानिक सेंजुती साहा ने एपी को बताया, “यही समय है, टीकाकरण को बढ़ाया जाए, संक्रमण के दर को कम रखा जाए और नए वेरिएंट को आने से रोका जाए.”
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लेकिन भारत ने अपने देश में तेज़ी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए वैक्सीन के निर्यात पर रोक लगा दी है. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया को बांग्लादेश को जून तक तीन करोड़ डोज़ देने थे, हर महीने 50 लाख. लेकिन कंपनी अभी तक केवल 70 लाख डोज़ की ही सप्लाई कर पाई है.
वैज्ञानिक एएस एम आलमगिर के मुताबिक़, “इससे बहुत समस्याएं हो रही हैं.” कमी के कारण सरकार ने पिछले महीने नए लोगों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी. लोगों को दूसरा डोज़ देने में भी दिक्क़तें आ रही हैं.
इसलिए बांग्लादेश अब दूसरे देशों की तरफ़ रूख़ कर रहा है. उनकी कोशिश है कि रूस और चीन से तकनीक लेकर अपने देश में उनकी वैक्सीन का उत्पादन करे. बांग्लादेश को चीन से अगले महीने 5 लाख वैक्सीन मिलने मुफ़्त में की उम्मीद है. बांग्लादेश ने अमेरिका से भी मदद मांगी है.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना से 4,092 लोगों की मौत
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पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 4,03,738 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 4,092 लोगों की मौत हुई है. सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत में अब तक कोरोना से 2.22 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं.
कोविड संकट: मशहूर मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में पीएम मोदी की तीखी आलोचना
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दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने अपने एक संपादकीय में पीएम मोदी
की आलोचना करते हुए लिखा है कि उनका ध्यान ट्विटर पर अपनी आलोचना को दबाने पर ज़्यादा
और कोविड – 19 महामारी पर काबू पाने पर कम है.
जर्नल ने लिखा, “ऐसे मुश्किल समय में मोदी की अपनी आलोचना और खुली चर्चा को
दबाने की कोशिश माफ़ी के काबिल नहीं है.”
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के
अनुमान के मुताबिक़ भारत में एक अगस्त तक कोरोना महामारी से होने वाली मौतों की संख्या
10 लाख तक पहुंच सकती है.
लैंसेट के मुताबिक़ कोरोना के ख़िलाफ शुरुआती सफलता के बाद से सरकार की टास्क
फ़ोर्स अप्रैल तक एक बार भी नहीं नहीं मिली.
जर्नल के मुताबिक, “इस फ़ैसले का नतीजा हमारे सामने है. अब महामारी बढ़ रही है
और भारत को नए सिरे से क़दम उठाने होंगे. इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि
सरकार अपनी ग़लतियों को मानती है और देश को पारदर्शिता के साथ नेतृत्व देती है या
नहीं.”
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जर्नल के मुताबिक़ वैज्ञानिक आधार पर पब्लिक हेल्थ से जुड़े क़दम उठाने होंगे. लैंसेट ने सुझाव दिया है कि जब तब टीकाकरण पूरी तेज़ी से नहीं शुरू होता, संक्रमण को रोकने के लिए हर ज़रूरी क़दम उठाने चाहिए.
“जैसे जैसे मामले बढ़ रहे हैं, सरकार को समय पर सटीक डेटा उपलब्ध कराना चाहिए, हर 15 दिन पर लोगों को बताना चाहिए कि क्या हो रहा है और इस महामारी को कम करने के लिए क्या क़दम उठाने चाहिए. इसमें देशव्यापी लॉकडाउन की संभावना पर भी बात होनी चाहिए.”
जर्नल के मुताबिक संक्रमण को बेहतर तरीक़े के समझने और फैलने से रोकने के लिए जीनोम सीक्वेंसींग को बढ़ावा देना होगा.
“लोकल स्तर पर सरकारों ने संक्रमण रोकने के लिए क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन ये सुनिश्चित करना की लोग मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, भीड़ इकट्ठा न हो, क्वारंटीन और टेस्टिंग हो, इन सब में केंद्र सरकार की अहम भूमिका होती है.
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जर्नल में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान में तेज़ी लाने की ज़रूरत है. अभी सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं वैक्सीन की सप्लाई को बढ़ाना और इसके लिए डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर बनाना जो कि ग़रीब और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को तक पहुंचे क्योंकि ये देश की 65 प्रतिशत आबादी हैं और इन तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचती.
सरकार को लोकल और प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ मिलकर काम करना चाहिए.
जर्नल में भारत के अस्पतालों की मौजूदा स्थिति और स्वास्थ्य मंत्री के उस बयान का भी ज़िक्र किया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत महामारी के अंत की ओर जा रहा है.
जर्नल के मुताबिक कुछ महीनों तक मामलों में कमी आने के बाद सरकार ने दिखाने की कोशिश की कि भारत ने कोविड को हरा दिया है. सरकार ने दूसरी लहर के ख़तरों और नए स्ट्रेन से जुड़ी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया.
संपादकीय के अनुसार, “चेतावनी के बावजूद सरकार ने धार्मिक आयोजन होने दिए जिनमें लाखों लोग जुटे, इसके अलावा चुनावी रैलियां भी हुईं.”
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जर्नल में सरकार के टीकाकरण अभियान की भी आलोचना की गई. लैंसेट ने लिखा, “केंद्र के स्तर पर टीकाकरण अभियान भी फेल हो गया. केंद्र सरकार ने टीकाकरण को बढ़ाने और 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका देने के बारे में राज्यों से सलाह नहीं ली और अचानक पॉलिसी बदल दी जिससे सप्लाई में कमी हुई और अव्यवस्था फैली.”
जर्नल के मुताबिक़ महामारी से लड़ने के लिए केरल और ओडिशा जैसे राज्य बेहतर तैयार थे. वो ज़्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन कर दूसरे राज्यों की भी मदद कर रहे हैं. वहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं थे और इन्हें ऑक्सीजन,अस्पतालों में बेड और दूसरी ज़रूरी मेडिकल सुविधाओं यहां तक की दाह-संस्कार के लिए जगह की कमी से जूझना पड़ा.
लैंसेट में लिखा गया कि कुछ राज्यों ने बेड और ऑक्सीजन की डिमांड कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ देश की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल किया.
लैंसेट की इस रिपोर्ट का हवाला देकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
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कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा, “लैंसेट के संपादकीय के बाद, अगर सरकार में शर्म है, को उन्हें देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.”
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के इस्तीफ़े की भी मांग की.
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा, “सरकार में ढिंढोरा पीटने वाले पहले लैंसेट की रिपोर्ट के संपादकीय का इस्तेमाल अपनी तारीफ़ के कर चुके हैं.”
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