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देश में कोरोना वैक्सीन की कमी नहीं: अमित शाह
देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरों और उनके सटीक विश्लेषण के लिए बने रहें बीबीसी हिंदी के लाइव पेज पर.
लाइव कवरेज
सचिन वाझे को 23 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया
मुंबई की एनआईए कोर्ट ने मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाझे को 23 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वो पहले एनआईए की कस्टडी में थे.
25 फ़रवरी, 2021 को जेलेटिन स्टिक्स से भरी एक स्कॉर्पियो कार उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर के बाहर मिली थी. कुछ दिनों बाद इस कार के मालिक मनसुख हिरेन का शव ठाणे में बरामद किया गया. वाजे पर इस पूरी साज़िश में शामिल होने और हिरेन की हत्या का आरोप है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ प्रारंभिक जाँच के लिए सीबीआई को एनआईए के पास मौजूद दस्तावेज़ों के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी है.
उमर अब्दुल्लाह कोविड पॉज़िटिव हुए
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह कोविड पॉज़िटिव हो गए हैं. अब्दुल्लाह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी.
उन्होंने लिखा, “मैंने एक साल तक इस वायरस से बचने की पूरी कोशिश की लेकिन आख़िरकार इसने मुझे पकड़ लिया. आज दोपहर मैं कोविड पॉज़िटिव हो गया. मेरे अंदर किसी तरह के लक्षण नहीं है. मैं घर में ही ख़ुद को अलग कर रहा हूं और ऑक्सीजन लेवल जैसे पैरामीटर की जाँच कर रहा हूं.”
उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह भी कोरोना संक्रमित हैं और फ़िलहाल उनका इलाज चल रहा है.
देश में कोरोना वैक्सीन की कमी नहीं: अमित शाह
देशभर से आ रही कोरोना वैक्सीन की क़िल्लत की ख़बरों को ख़ारिज करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है.
कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “ये कहना कि वैक्सीन कम पड़ रही हैं, सही नहीं है. सभी राज्यों में वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है और जितनी ज़रूरत है, उतनी उपलब्ध करावाई गई है."
कोरोना के ख़तरे के बीच चुनाव कैंपेन में जुटती भारी भीड़ को लेकर अमित शाह ने कहा कि प्रचार नियमों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, “यह चुनाव आयोग तय करता है कि चुनाव कब और कहां करवाना है.”
अभिषेक बनर्जी: मोदी और शाह के निशाने पर रहने वाले ममता बनर्जी के भतीजे
सऊदी अरब से कम तेल खरीदने से भारत पर क्या असर होगा?
भारत ने सरकारी तेल रिफ़ाइनरी और तेल कंपनियों से सऊदी अरब से तेल आयात में कमी करने को कहा है. इस आदेश में इनसे कहा गया है कि वो सऊदी अरब और खाड़ी के कुछ दूसरे देशों पर तेल निर्भरता कम करने के लिए मई से दुनिया भर में अलग-अलग कंपनियों और देशों से तेल ख़रीदना शुरू कर दें.
भारत सरकार के आदेश का निशाना असल में सऊदी अरब है. भारत सऊदी अरब से तेल ख़रीदने वाला दूसरा बड़ा मुल्क है.
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक है. दूसरी तरफ़ भारत तेल आयात करने वाला और इसका इस्तेमाल करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है.
- स्टोरी: ज़ुबैर अहमद
- आवाज़: विशाल शुक्ला
- वीडियो एडिटिंग: दीपक जसरोटिया
दिल्ली हो या मुंबई, कोरोना वायरस ने हालात कैसे बदल दिए हैं?
महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. इस बीच मुंबई से उत्तर प्रदेश आने वाली एक ट्रेन प्रवासी मज़दूरों से भरी दिखी. कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से लोग शहर छोड़ रहे हैं.
एक यात्री ने बताया कि ट्रेन गोरखपुर तक जाएगी. उधर, दिल्ली में भी 30 अप्रैल तक के लिए नाइट कर्फ़्यू लगाया गया है. वाहनों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए हैं.
यूपी पुलिस भी रात में चिल्ला बॉर्डर पर दिल्ली से आने वालों के आईकार्ड चेक करती दिखी. नोएडा में 17 अप्रैल तक रात 10 बजे से सुबह पांच बजे के बीच नाइट कर्फ़्यू लगाया गया है.
कोरोना वैक्सीन आख़िर कितनी सुरक्षित है?
भारत में कोविड-19 से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान जारी है. भारत में लोगों को दो तरह की वैक्सीन दी जा रही है.
एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया.
और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन.
ब्रिटेन समेत कई अन्य देशों में भी लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है. ब्रिटेन में ऑक्सफ़र्ड-एस्ट्राज़ेनेका और फाइज़र-बायोएनटेक की वैक्सीन लगाई जा रही है.
जहां जो भी वैक्सीन लगाई जा रही है, वहां के नियामकों ने उसे सुरक्षित बताया है. हालांकि कुछ लोगों में वैक्सीन लेने के बाद मामूली रीएक्शन देखे गए हैं.
कोरोना वैक्सीन: वो बातें जो आपको जाननी चाहिए
कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए दुनिया के कई देशों में टीकाकरण अभियान चल रहा है.
इससे जुड़ी सूचनाएं और सुझाव कई बार आपको पेचीदा लग सकते हैं, लेकिन कुछ बुनियादी तथ्य हैं जो आपकी यह समझने में मदद करेंगे कि एक वैक्सीन आख़िर काम कैसे करती हैं.
माओवादी आंदोलन भारत में क्या अपनी आख़िरी सांसें ले रहा है?
छत्तीसगढ़ में हाल ही में सुरक्षाबलों और माओवादियों की बीच हुई बड़ी मुठभेड़ कई सवालों को खड़ा करती है.
क्या इन हमलों से यह समझा जाना चाहिए कि माओवादी वापस मज़बूत हो रहे हैं? या फिर क्या यह दिखाता है कि माओवादी अपने आख़िरी बचे इलाक़ों पर क़ब्ज़ा बरक़रार रखने को लेकर बेहद व्याकुल हैं?
आख़िर हक़ीक़त क्या है?
इन मुद्दों को समझने के लिए बीबीसी ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस अफ़सरों, लंबे समय से माओवाद पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों, पूर्व माओवादियों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से बात की.
देश में कोरोना वैक्सीन की कमी पर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दिये ये सुझाव
कांग्रेस पार्टी ने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया एक पत्र ट्वीट किया है.
इस पत्र में राहुल गांधी ने देश में कोरोना वैक्सीन की कमी को लेकर चिंता ज़ाहिर की है.
उन्होंने अपने इस पत्र में केंद्र सरकार से एक बार फिर कुछ सवाल किये हैं. जैसे, उन्होंने पूछा है कि ऐसे समय में जब देश में कोरोना वैक्सीन की कमी हो गई है, तब वैक्सीन का निर्यात जारी रखना क्या ज़रूरी है?
गांधी ने अपने इस पत्र में पीएम मोदी को कुछ सुझाव भी दिये हैं.
उन्होंने पीएम मोदी से गुज़ारिश की है कि:
- वैक्सीन के आपूर्तिकर्ताओं को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराये जायें, ताकि वो ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादन कर सकें.
- वैक्सीन के निर्यात पर तुरंत अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाये.
- भारत में अन्य टीकों को मान्यता देने की कार्यवाही तेज़ की जाये.
- टीकाकरण अभियान के तहत हर उस इंसान को टीका लगवाने की अनुमति दी जाये, जिसे टीका लगवाने की ज़रूरत है.
- आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को महामारी की दूसरी लहर में सहायता देने के लिए सीधे तौर पर मदद करने की कोई योजना बनायी जानी चाहिए.
- वैक्सीन के लिए केंद्र की ओर से दिए गए 35,000 करोड़ के मौजूदा कोष को दोगुना किया जाए.
बिहार: कई अस्पतालों में वैक्सीन ख़त्म, टीका लगवाने पहुँचे लोगों को वापस लौटाया जा रहा
नीरज प्रियदर्शी
पटना (बिहार) से बीबीसी हिन्दी के लिए
बिहार के अस्पताल और टीकाकरण केंद्र भी कोरोना वैक्सीन की कमी से जूझ रहे हैं.
यही वजह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लगातार निर्देशों के बावजूद भी यहाँ रोज़ाना दो लाख के टीकाकरण का लक्ष्य पार नहीं हो पा रहा.
कोरोना वैक्सीन की कमी के चलते लोगों को अब टीकाकरण केंद्रों से वापस लौटाया जा रहा है.
बहुत से केंद्रों के बाहर ‘वैक्सीन उपलब्ध नहीं है’ लिखे हुए पोस्टर चिपका दिये गए हैं.
बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग़ अस्पताल में शुक्रवार सुबह से ही टीकाकरण का काम रोक दिया गया और पंजीकरण कराने के बाद टीका लगवाने पहुँचे लोगों को अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर लौटा दिया कि टीका फ़िलहाल ख़त्म हो गया है, आने पर बुलाया जाएगा.
अस्पताल प्रबंधन ने वैक्सीन की अनुपलब्धता वाला पोस्टर भी केंद्र पर चिपका दिया है.
यह स्थिति अकेले पटना शहर की नहीं है. बल्कि प्रदेश के अन्य ज़िलों से भी वैक्सीन ख़त्म होने की सूचना है.
दरभंगा ज़िले के डीएमसीएच अस्पताल में पिछले दो दिन से वैक्सीन ख़त्म है.
दरभंगा के ज़िला अधिकारी त्याग राजन ने बीबीसी को बताया, "हमें जितनी वैक्सीन मिली थी, वह बुधवार को ही ख़त्म हो चुकी है. कहा गया है कि तीन-चार दिनों के अंदर फिर से वैक्सीन उपलब्ध हो जायेगी."
बिहार हेल्थ सोसाइटी से मिली जानकारी के मुताबिक़, अभी राज्य के स्टॉक में तीन लाख के क़रीब वैक्सीन डोज़ उपलब्ध है.
जैसा कि पिछले तीन-चार दिनों में टीकाकरण का औसत रहा है, उसके हिसाब से यह स्टॉक अब तीन दिन ही चलने वाला है.
बिहार हेल्थ सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार के मुताबिक़, 9अप्रैल यानी आज ही केंद्र की ओर से नौ लाख वैक्सीन डोज़ का स्टॉक आने वाला है.
मनोज कहते हैं कि अगर तय समय पर वैक्सीन का स्टॉक केंद्र की ओर से मिल जाएगा, तब तो कमी नहीं होगी, अन्यथा टीकाकरण के काम पर काफ़ी असर पड़ेगा.
चूंकि इस समय केंद्रीय स्तर पर भी वैक्सीन की कमी को लेकर चर्चा हो रही है, इसलिए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से ज़िलों को पहले ही निर्देश दे दिया गया है कि सीमित संख्या में टीकाकरण के लिए पंजीकरण कराया जाए.
बिहार में पिछले एक हफ़्ते से कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आँकडों के अनुसार, गुरुवार को बिहार में 1,911नये कोरोना केस मिले.
बिहार में इस समय सक्रिय कोविड मरीज़ों की संख्या 7,504हो गई है.
बिहार में संक्रमण का प्रसार रोज़ 25फ़ीसदी की दर से बढ़ रहा है, लेकिन टीकाकरण की रफ़्तार घट रही है.
पाँच अप्रैल को बिहार में लगभग दो लाख 87हज़ार लोगों का टीकाकरण हुआ था.
लेकिन छह अप्रैल को यह घटकर दो लाख सात हज़ार पर आ गया.
फिर सात अप्रैल को यह और घटकर 1,07,841हुआ और आठ अप्रैल को यह उससे भी कम, 1,07,071तक पहुँच गया था.
कोरोना वैक्सीन को लेकर सारी दुनिया में बहस के बीच चीन ने क्या कहा
चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वो ‘वैक्सीन संबंधी राष्ट्रवाद’ से बचे और विकासशील देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए मिलकर एक नीति बनाये ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके.
पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना के गवर्नर यी गैंग ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की संचालन समिति को दिये एक बयान में ये बात कही.
उन्होंने कहा, “वैश्विक आर्थिक वृद्धि में सुधार बहुत धीमा और असमान रहा है. लिहाज़ा कोविड वैक्सीन का उचित और निष्पक्ष रूप से वितरण ज़रूरी है ताकि सभी जगह स्थायी आर्थिक वृद्धि हो सके.”
उन्होंने कहा, “इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वो इस दिशा में मिलकर काम करे. ‘वैक्सीन संबंधी राष्ट्रवाद’से बचे. साथ ही आपसी समन्वय को मज़बूत करते हुए कोविड-19 के ख़िलाफ़ एक ऐसी नीति बनाये ताकि विकासशील देशों में भी सही ढंग से टीके पहुँच पायें.”
चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग ने भी इस सप्ताह की शुरुआत में जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से फ़ोन पर हुई बातचीत में यही बात कही थी.
चीन के बारे में बात करते हुए गवर्नर यी गैंग ने कहा, “एक बढ़िया मौद्रिक नीति को लचीले, लक्षित और उचित तरीके से लागू किया जाएगा.”
कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन पर सवाल उठते रहे हैं. माना जाता है कि चीन की ही किसी प्रयोगशाला में इस वायरस को तैयार किया गया.
हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं जुटा पाया है जिनके आधार पर इस आरोप को सही ठहराया जा सके. वहीं, चीन इन आरोपों को बिल्कुल ग़लत बताता है.
कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि चीन इस वैक्सीन संबंधी ‘कूटनीतिक अभियान’ के ज़रिये अपनी वैक्सीन को अन्य देशों में ‘धकेलना’ चाहता है. लेकिन चीन इस धारणा को भी ग़लत कहता है.
गवर्नर यी गैंग के अनुसार, चीन ने कम से कम 80 देशों की वैक्सीन हासिल करने में सहायता करने या वैक्सीन मुहैया कराने की योजना बनाई है. साथ ही, 40 देशों में चीन ने टीके निर्यात भी किये हैं.
उन्होंने कहा कि चीन विश्व स्तर की वैक्सीन शेयरिंग योजना ‘कोवैक्स’ के तहत कम से कम दस मिलियन (एक करोड़) ख़ुराक़ दे रहा है.
केंद्र सरकार बिना पक्षपात सभी राज्यों की मदद करे: राहुल गांधी
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोरोना वैक्सीन के मामले में केंद्र सरकार से पक्षपात ना करने की अपील की है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “बढ़ते कोरोना संकट में वैक्सीन की कमी एक अति-गंभीर समस्या है. ऐसे में केंद्र सरकार सभी राज्यों को बिना पक्षपात के मदद करे. हम सबको मिलकर इस महामारी को हराना होगा.”
उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि अपने देशवासियों को ख़तरे में डालकर वैक्सीन एक्सपोर्ट करना क्या सही है?
पश्चिम बंगालः योगी बोले, 'जीते तो एंटी-रोमियो स्क्वॉड बनाएँगे’, विरोधी नेताओं ने दिया जवाब
पश्चिम बंगाल की एक चुनावी जनसभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने गुरुवार को कहा, “जब बीजेपी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आयेगी, तो बहनों और बेटियों की सुरक्षा के लिए यूपी की तरह एंटी-रोमियो स्क्वॉड का गठन किया जायेगा जो स्कूलों के बाहर घूमने वाले शोहदों से निपटेगा.”
उनके इस बयान का तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने जवाब दिया है.
एक ट्वीट में मोइत्रा ने लिखा, “अजय बिष्ट उर्फ़ सीएम योगी का ताज़ा बयान सुनिये: ‘अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी तो यहाँ भी एंटी-रोमियो स्क्वॉड बनायेंगे.’ गुड्डू जी, आपके शोहदों के विपरीत, बंगाली लोग दिल से प्यार करने वाले लोग हैं! हमें अपना संगीत पसंद है, हमें अपनी कविताएं पसंद हैं, अपनी मिष्टी पसंद है और हाँ, अपने रोमियो भी पसंद हैं.”
सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के बयानों की काफ़ी चर्चा हो रही है. दोनों के ही पक्ष और विपक्ष में लोग खुलकर लिख रहे हैं.
साल 2017 में, उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के बाद बीजेपी ने ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ नामक दल का गठन किया था जिसे लेकर दावा था कि वो प्रदेश में महिलाओं, ख़ासकर लड़कियों की सुरक्षा का काम करेगा.
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के अपने घोषणा-पत्र में ऐसे किसी दल के निर्माण का वादा नहीं किया है.
कुछ पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स पर नज़र डालें, तो उत्तर प्रदेश के ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ पर महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर कुछ लोगों का उत्पीड़न करने के आरोप लगे थे.
उत्तर प्रदेश में ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ ने अपने गठन के पहले दो महीने में ही 200 से ज़्यादा जोड़ों को पकड़कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी.
उस समय उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ जोड़ों के साथ हाथापाई के वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुए थे.
आदित्यनाथ योगी के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री ब्रत्य बसु ने भी टिप्पणी की है.
उनका कहना है, “वो (योगी) एक बेवकूफ़ है, जिसे आप शेक्सपियर के नाटकों में ढूंढ पायेंगे. ऐसे स्क्वॉड का सभ्य समाज में क्या काम. ये हमें नाज़ी (हिटलर की तानाशाही के दौर) सैनिकों की याद दिलाता है.”
वहीं, सीपीएम के महिला विंग की नेता कनिका घोष कहती हैं, “यह आदमी (आदित्यनाथ योगी) सिर्फ़ आरएसएस का पोस्टर बॉय हो सकता है. वो पहले अपने राज्य को संभालें. महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में उनका राज्य लिस्ट में सबसे ऊपर है. उन्हें पश्चिम बंगाल के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं.”
उन्होंने कहा, “भविष्य में, बल्कि पश्चिम बंगाल में एंटी-आरएसएस स्क्वॉड होगा.”
कोरोना संक्रमण: यूपी के पाँच और शहरों में लगा रात का कर्फ़्यू
समीरात्मज मिश्र
लखनऊ (यूपी) से बीबीसी हिन्दी के लिए
उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज के बाद अब पाँच और शहरों में रात्रि कर्फ़्यू का एलान कर दिया गया है.
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के दो ज़िलों, गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद के अलावा मेरठ, बरेली और सहारनपुर में रात्रि कर्फ़्यू लगाने की घोषणा की गई है.
गौतम बुद्ध नगर, ग़ाज़ियाबाद और मेरठ में रात्रि कर्फ़्यू की शुरुआत गुरुवार से ही हो गई जबकि बरेली और सहारनपुर में यह शुक्रवार से लागू होगा.
रात्रि कर्फ़्यू फ़िलहाल 17 अप्रैल तक के लिए लगाया गया है और इस दौरान ज़रूरी सेवाओं के लिए आवागमन में छूट रहेगी.
इस बीच, राज्य में कोविड-19 का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है.
गुरुवार को यूपी में कोरोना के अब तक सबसे ज़्यादा 8,490 मामले मिले, जबकि 39 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई.
संक्रमण के लिहाज़ से यूपी में एक दिन में यह सबसे बड़ी संख्या है. इससे पहले 11 सितंबर को एक दिन में सबसे ज़्यादा 7,103 कोरोना संक्रमित मिले थे.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को उन 13 ज़िलों में नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है जहां संक्रमण की दर सबसे ज़्यादा है.
ये सभी नोडल अधिकारी 15 दिनों तक संबंधित ज़िले में रुक कर डीएम के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे. इनकी निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय करेगा.
राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में 26 डॉक्टर और कर्मचारी गुरुवार को भी कोरोना संक्रमित पाए गए. इससे पहले यहां केजीएमयू के वीसी समेत 40 डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव मिले थे जिसके बाद 153 का डॉक्टरों और कर्मचारियों का टेस्ट कराया गया.
राजधानी लखनऊ में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या राज्य में सबसे ज़्यादा है.
कोरोना संक्रमण को देखते हुए लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को आज से फिर बंद कर दिया गया. लॉकडाउन के बाद 14 फ़रवरी से इसे चलाया जा रहा था.
वहीं यूपी के कई ज़िलों में वैक्सीन ख़त्म हो जाने के कारण टीकाकरण रोक दिया गया है.
चीन ने बताया, दो महीने बाद अब भारत से किस मुद्दे पर होगी चर्चा
चीन ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 की यथास्थिति की बहाली के लिए भारत के प्रस्ताव पर दोनों देशों के बीच अगली बैठकों में चर्चा हो सकती है.
इसके साथ ही, चीन ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाली शेष जगहों से सैनिकों की वापसी पर भारत के साथ वार्ता करने में कोई देरी नहीं की जा रही है.
ख़बरों के अनुसार दोनों सेनाओं के कोर कमांडरों की बैठक शुक्रवार को हो सकती है जिसमें पूर्वी लद्दाख के संघर्ष वाले शेष स्थानों (जैसे गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और डेपसांग) से सैनिकों की वापसी पर चर्चा भी की जा सकती है.
गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि 12 मार्च को हुई डब्ल्यूएमसीसी की बैठक में दोनों पक्ष इस पर राज़ी हुए थे कि 11वें दौर की कोर कमांडर स्तर की बैठक आयोजित की जायेगी. उनके अनुसार, यह बैठक शुक्रवार को होनी है.
लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि आगामी वार्ता के लिए एक ख़ास तारीख़ की उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
चीन और भारत के बीच कोर कमांडर स्तर की 11वें दौर की बैठक होनी तय बताई जा रही है.
हालांकि, इसकी तारीख़ के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कहा कि चीन और भारत 11वें दौर की वार्ता आयोजित करने के लिए संपर्क में हैं.
प्रवक्ता ने 11वें दौर की वार्ता आयोजित करने में किसी तरह के विलंब से भी इनकार किया.
उन्होंने कहा कि मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहता हूँ कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति बहुत स्पष्ट हैं. हम आशा करते हैं कि दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण सहमति के आधार पर भारतीय पक्ष चीन के साथ काम करेगा.
उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति की बहाली के लिए भारत के प्रस्ताव पर दोनों देशों के बीच अगली बैठकों में चर्चा हो सकती है.
भारत अब तक इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के लिए आवश्यक है.
20 फ़रवरी को, भारतीय और चीनी सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव को कम करने के लिए 10वें दौर की सैन्य वार्ता की थी.
दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध को अब लगभग दस महीने हो गए हैं. समझौते के बाद दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर वाले क्षेत्रों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है.
नमस्कार!
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