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ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन से ख़ून के थक्के बनने के 'कोई संकेत नहीं'

दिन की तमाम ज़रूरी ख़बरों के लिए बीबीसी हिन्दी के इस लाइव पन्ने पर बने रहिए.

लाइव कवरेज

  1. बाइडन ने अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े राहत पैकेज पर किए हस्ताक्षर

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 1.9 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक राहत विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इसका मक़सद कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुए अमेरिकियों की सहायता करना है और यह अब क़ानून का रूप ले चुका है.

    इस विधेयक में 1,400 डॉलर के भुगतान, बेरोज़गारी भत्तों का विस्तार, चाइल्ड टैक्स क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिससे अनुमान है कि यह करोड़ों लोगों को ग़रीबी से बाहर निकालेगा.

    राष्ट्रपति बाइडन ने कहा है कि राहत पैकेज ‘देश की रीढ़ को’फिर खड़ा करेगा.

    इस ख़र्चे के विधेयक को अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा विधेयक बताया जा रहा है जिसे अमेरिकी संसद ने बिना एक भी रिपब्लिकन समर्थक के पास किया है.

    बाइडन इस विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर आज देश को संबोधित भी करेंगे. वो और अन्य डेमोक्रेट नेता शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक हस्ताक्षर समारोह में भी भाग लेंगे.

    इस छठे कोविड-19 राहत विधेयक को बाइडन की विधायी जीत भी बताया जा रहा है क्योंकि यह पैकेज अमेरिकियों में काफ़ी प्रसिद्ध है.

    पीऊ रिसर्च सेंटर के एक सर्वे के अनुसार, 70 फ़ीसदी अमेरिकी युवाओं ने विधेयक का समर्थन किया था जिनमें 41 फ़ीसदी रिपब्लिकन भी शामिल हैं.

  2. ‘ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन से ख़ून के थक्के बनने के संकेत नहीं’

    यूरोपीय संघ के दवा नियामक ने कहा है कि ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की कोविड-19 वैक्सीन के कारण ख़ून के थक्के बनने के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

    नियामक ने कहा है कि जिन लोगों को इस वैक्सीन का टीका लगाया गया है उनकी और आम जनता की तुलना में ख़ून के थक्के बनने के मामले अधिक नहीं हैं.

    दरअसल यह बयान तब आया है जब डेनमार्क और नॉर्वे जैसे देश इस वैक्सीन के टीकाकरण पर रोक लगा चुके हैं.

    इस पर रोक उन रिपोर्ट के आधार पर लगाई गई थी जिनमें कहा गया था कि वैक्सीन लेने के बाद लोगों के एक छोटे समूह में ख़ून के थक्के बनने के मामले पाए गए हैं.

    ऐसी भी रिपोर्ट आई थीं कि इटली में एक 50 वर्षीय व्यक्ति में टीकाकरण के बाद डीप वेन थ्रम्बोसिस (डीवीटी) बीमारी पैदा हो गई जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी.

    अब यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए) ने कहा है कि टीकाकरण के कारण ऐसी किसी भी स्थिति के पैदा होने का कोई संकेत नहीं मिला है.

  3. अहमदाबाद से दांडी तक की पदयात्रा को रवाना करेंगे पीएम मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके बताया है कि वो शुक्रवार (12 मार्च) को अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से दांडी तक की पदयात्रा को रवाना करेंगे.

    1930 में महात्मा गांधी ने दांडी तक पदयात्रा करके नमक क़ानून को तोड़ा था. इस घटना को कल 91 साल पूरे हो रहे हैं.

    प्रधानमंत्री मोदी जिस पदयात्रा को झंडी दिखाएंगे वो भारत की स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर मनाए जा रहे ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’का ही एक भाग है.

    पीएम ने ट्वीट किया है कि साबरमती आश्रम से यह पदयात्रा निकलेगी जो अहमदाबाद से होते हुए दांडी तक जाएगी और समाज के हर तबक़े के लोग इसमें शामिल होंगे.

  4. ब्रिटेन का शाही परिवार नस्लवादी नहीं है: प्रिंस विलियम

    द डयूक ऑफ़ कैम्ब्रिज प्रिंस विलियम ने कहा है कि ब्रिटेन का शाही परिवार नस्लवादी परिवार नहीं है.

    उनके भाई प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन मर्केल के टीवी इंटरव्यू के बाद पैदा हुए विवाद के बाद से यह प्रिंस विलियम का पहला बयान है.

    प्रिंस विलियम ने यह भी कहा कि अभी तक उन्होंने अपने भाई से बात नहीं की है लेकिन वो जल्द ही अपने भाई से बात करेंगे.

    मेगन और प्रिंस हैरी ने कहा था कि शाही परिवार के एक आदमी ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि उनके बेटे आर्ची का रंग 'कितना काला' होगा.

    इससे पहले शाही महल बकिंघम पैलेस ने एक बयानी जारी कर कहा था कि मेगन और प्रिंस हैरी का दावा चिंताजनक है और शाही परिवार निजी तौर पर इसकी जांच करेगा.

    बयान में यह भी कहा गया था कि शाही परिवार के लिए प्रिंस हैरी और मेगन हमेशा प्यारे किए जाने वाले परिवार के सदस्य रहेंगे.

  5. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से.

  6. राहुल गांधी ने कहा, भारत नहीं रहा लोकतांत्रिक देश, स्वीडन की रिपोर्ट का दिया हवाला

    कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वीडन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि भारत अब एक लोकतांत्रिक देश नहीं रह गया है.

    दरअसल स्वीडन स्थित वी-डेम इंस्टीट्यूट ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत अब 'इलेक्टोरेल डेमोक्रेसी' नहीं रहा है, बल्कि भारत अब एक 'इलेक्टोरेल ऑटोक्रेसी' बन गया है.

    राहुल गांधी ने उसी रिपोर्ट का हवाला देकर ट्वीट किया है.

    इससे पहले वॉशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक फ्रीडम हाउस ने अपनी 2021 की रिपोर्ट में भारत के फ्रीडम स्कोर को घटा दिया था. इस रिपोर्ट में भारत का दर्जा पिछले साल के "फ्री" यानी स्वतंत्र से "पार्टली फ्री" यानी आंशिक रूप से स्वतंत्र कर दिया गया था. इंटरनेट फ्रीडम स्कोर के आधार पर भी भारत को आंशिक रूप से स्वतंत्र का दर्जा दिया गया है.

    बीजेपी ने उस रिपोर्ट को भारत विरोधी एजेंडे का हिस्सा क़रार दिया था.

  7. अब भारत में तैयार होगा आईफ़ोन-12, उत्पादन का काम चीन से बाहर ले जाने की दिशा में एप्पल का एक और क़दम

    अमेरिकी कंपनी एप्पल ने भारत में आईफ़ोन-12 की असेंबली (फ़ोन को तैयार करने का काम) शुरू कर दी है.

    गुरुवार को कंपनी ने एक बयान जारी कर इसकी सूचना दी. कंपनी ने कहा, “अपने स्थानीय ग्राहकों के लिए हमने आईफ़ोन-12 अब भारत में ही तैयार करना शुरू कर दिया है.”

    केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कंपनी के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “यह देखकर ख़ुशी हो रही है कि हमने भारत को मोबाइल और उसके पुर्जों के निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में जो कोशिशें कीं, वो अब दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही हैं. इससे (एप्पल के फ़ैसले से) भारत में रोज़गार में काफ़ी अवसर पैदा होंगे.”

    एप्पल ने बताया है कि ताइवान की उनकी पार्टनर कंपनी फ़ॉक्सकॉन तमिलनाडु स्थित एप्पल के प्लांट में आईफ़ोन की असेंबली का काम करेगी.

    अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक द्वंद्व की वजह से एप्पल ने अपने उत्पादन का कुछ काम चीन से बाहर ले जाने का निर्णय लिया है.

    नवंबर में फ़ॉक्सकॉन ने कहा था कि एप्पल के कहने पर उसने आई-पैड और मैक-बुक के कुछ मॉडल चीन की जगह, वियतनाम में तैयार करने शुरू किये हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले महीने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि एप्पल कुछ आई-पैड्स की असेंबली का काम भी भारत में लाने की योजना बना रहा है.

  8. किसान आंदोलन पर अब क्या होगी आगे की रणनीति?

    किसान आंदोलन पर अब क्या होगी आगे की रणनीति?

    किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां से बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता सरबजीत धालीवाल (कैमरा- गुलशन)

  9. म्यांमार की सेना ने सू ची पर लगाया अवैध ढंग से पैसा लेने का आरोप

    म्यांमार के सैन्य शासकों ने अपदस्थ नेता आंग सान सू ची पर सरकार में रहते हुए, अवैध तरीक़े से कुछ गोल्ड और छह लाख अमेरिकी डॉलर (क़रीब चार करोड़ 36 लाख रुपये) स्वीकार करने का आरोप लगाया है.

    म्यांमार की सेना द्वारा सू ची पर लगाया गया यह अब तक का सबसे गंभीर आरोप है. सेना ने यह दावा भी किया है कि ‘उन्होंने इस सूचना की पुष्टि की है कि सू ची ने ये पैसे स्वीकार किये थे.’

    1 फ़रवरी को म्यांमार के सैन्य शासकों ने देश के लोकतांत्रिक नेतृत्व को उखाड़ फेंकने के साथ ही आंग सान सू ची को भी गिरफ़्तार कर लिया था.

    गुरुवार को कुछ सैन्य शासकों ने इस बारे में एक प्रेस वार्ता की जिसमें उन्होंने सू ची पर यह आरोप लगाया.

    हालांकि, इन आरोपों के साथ किसी तरह का सबूत उन्होंने पेश नहीं किया.

    प्रेस वार्ता के दौरान ब्रिगेडियर जनरल ज़ॉ मिन तुन ने म्यांमार के राष्ट्रपति समेत कुछ मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाये.

    म्यांमार में पिछले साल हुए आम-चुनावों में सू ची की पार्टी – नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी ने बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन सेना का आरोप है कि सू ची की पार्टी ने यह चुनाव धांधली से जीता था.

    ब्रिगेडियर जनरल ज़ॉ मिन तुन ने कहा, “सेना ने चुनावी अनियमितताओं के बारे में अपनी रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन म्यांमार के राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से इस बारे में कोई कार्रवाई ना करने को कह रखा था.”

    लेकिन म्यांमार का चुनाव आयोग सेना के इस दावे को ग़लता बता चुका है.

    साथ ही स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि म्यांमार के आम चुनाव में कोई अनियमितता नहीं देखी गई थी.

    सेना इससे पहले सू ची पर अवैध तरीक़े से वॉकी-टॉकी मंगवाने का आरोप लगा चुकी है.

    म्यांमार के सैन्य शासकों ने अब तक ये नहीं बताया है कि सू ची को गिरफ़्तार करने के बाद, कहाँ रखा गया है.

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, म्यांमार की सेना ने गुरुवार को जो आरोप सू ची पर लगाये हैं, वो अब तक के सबसे गंभीर आरोप हैं.

    इस वार्ता में सैन्य शासकों ने म्यांमार के अधिकांश शहरों में जारी हिंसा के बारे में कोई बात नहीं की.

    जबकि सभी प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारी सैन्य शासकों का विरोध कर रहे हैं और उनसे लोकतंत्र बहाल करने की अपील कर रहे हैं.

    सेना के ख़िलाफ़ जारी प्रदर्शनों में, अलग-अलग जगहों को मिलाकर 60 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं सुरक्षा बलों ने दो हज़ार से ज़्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया है.

    ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार को भी विरोध-प्रदर्शनों में शामिल कम से कम सात लोगों की मौत हुई है.

  10. हॉन्ग-कॉन्ग के चुनाव को अब नियंत्रित करेगा चीन

    चीन की संसद ने एक विवादास्पद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत हॉन्ग-कॉन्ग की चुनावी प्रणाली पर चीन के क़ाबू पाने का रास्ता साफ़ हो जाएगा और इस तरह चीन हॉन्गकॉन्ग पर अपने नियंत्रण को और बढ़ा सकेगा.

    गुरुवार को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में 'देशभक्त शासित हॉन्ग-कॉन्ग पर' प्रस्ताव पारित किया गया.

    इस प्रस्ताव के तहत लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा और बीजिंग समर्थक पैनल को 'देशभक्त' उम्मीदवारों को चुनने की इजाज़त होगी.

    इस प्रस्ताव के संसद से पास हो जाने की उम्मीद जताई भी जा रही थी. इसके समर्थन में 2895 वोटों पड़े और विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा और ये प्रस्ताव एकमत के साथ पारित किया गया .

    अब क़ानून का मसौदा तैयार किया जाएगा और अगले कुछ महीनों के भीतर हॉन्ग-कॉन्ग में इसे लागू किया जा सकता है.

    पिछले साल के एनपीसी सत्र में एक विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून पारित किया गया था, जो प्रभावी रूप से हॉन्ग-कॉन्ग की स्वायत्तता को कम करता है और प्रदर्शनकारियों को सज़ा देने की राह आसान बनाता है.

    इस क़ानून के पिछले साल जून में लागू होने के बाद से हॉन्ग-कॉन्ग में दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

  11. म्यांमार: कम से कम 7 प्रदर्शनकारियों की मौत, सेना पर लोगों के ख़िलाफ़ 'युद्ध की रणनीति' अपनाने का आरोप

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ चश्मदीदों और म्यांमार के स्थानीय मीडिया का हवाला देते हुए लिखा है कि ‘गुरुवार को केंद्रीय म्यांमार में प्रदर्शन के दौरान कम से कम सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई.’

    म्यांमार में लोग सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. इन लोगों की माँग है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को रिहा किया जाये, जिनमें देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची भी शामिल हैं.

    एजेंसी ने एक चश्मदीद के हवाले से लिखा है कि ‘म्याइंग अस्पताल के डॉक्टरों ने आज छह लोगों को मृत घोषित किया. इनके अलावा एक और शख़्स जिसकी हालत बहुत गंभीर है. यह स्पष्ट नहीं है कि वो बच पायेगा या नहीं.’

    गुरुवार को भी म्यांमार के अधिकांश बड़े शहरों में सेना के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी हैं.

    इस बीच, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यांमार की स्थिति पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि ‘सैन्य शासक अब प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ युद्ध की रणनीतियाँ अपना रहे हैं.’

    म्यांमार के एक स्थानीय संगठन के अनुसार, अब तक 60 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 2000 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षा बलों ने बंधक बना लिया है.

    एक फ़रवरी को म्यांमार के सैन्य शासकों ने तख़्तापलट करने के बाद, आंग सान सू ची को गिरफ़्तार कर लिया था.

    बुधवार को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने प्रदर्शनकारियों के साथ हो रही हिंसा की आलोचना की थी और संस्था ने म्यांमार की सेना से संयम बरतने की अपील की थी. लेकिन सुरक्षा परिषद म्यांमार की सेना पर ख़ास दबाव नहीं बना पायी, क्योंकि चीन और रूस का इस मामले में नज़रिया अलग रहा है.

    बताया गया है कि गुरुवार को म्यांमार की सेना एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी करने वाली है.

  12. ब्रेकिंग न्यूज़, महाराष्ट्र के नागपुर में 15-21 मार्च के बीच रहेगा संपूर्ण लॉकडाउन

    महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितिन राउत ने बताया है कि नागपुर शहर में 15 से 21 मार्च के बीच संपूर्ण लॉकडाउन रखने का निर्णय लिया गया है. इस दौरान लोगों को ज़रूरी वस्तुएं और आवश्यक सेवाएं मिलती रहेंगी.

    नागपुर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह से यह निर्णय लिया गया है.

    महाराष्ट्र में शुरुआत से ही कोरोना संक्रमण के मामले सबसे अधिक रहे हैं.

    नागपुर में कोरोना के नये मामलों की संख्या में असामान्य वृद्धि देखी गई है.

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नागपुर में बुधवार को 1,710 नये मामले सामने आए थे. शहर में अब तक कोविड-19 के दो लाख 43 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

    इससे पहले नागपुर में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार ने 14 मार्च तक नाइट कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया था.

  13. रूस ने ट्विटर के ख़िलाफ़ की कार्रवाई, वेबसाइट की रफ़्तार कम की गई

    रूस में मीडिया पर नज़र रखने वाली संस्था ने कहा है कि ‘उसने ट्विटर की रफ़्तार को धीमा कर दिया है क्योंकि यह अमेरिकी कंपनी सरकार द्वारा बैन किये गये कंटेंट को अपनी वेबसाइट से नहीं हटा पायी.’

    रूस की इस संस्था का आरोप है कि ‘उसने ट्विटर से क़रीब तीन हज़ार पोस्ट्स हटाने को कहा था, जिसमें ड्रग्स और पोर्नोग्राफ़ी से संबंधित कंटेंट शामिल है. पर कंपनी ने ऐसा नहीं किया.’

    संस्था के अनुसार, रूस के नागरिक-हितों की रक्षा के लिए यह कार्रवाई की गई है.

    रूस में राष्ट्रपति पुतिन के विरोधियों द्वारा ट्विटर का काफ़ी उपयोग किया जाता है.

    पुतिन के विरोधियों और व्यापक रूप से ट्विटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों का कहना है कि ‘कार्रवाई के बाद, उन्हें ट्विटर की वेबसाइट पर फ़ोटो और वीडियो देखने में कठिनाई हो रही है.’

    इस बीच ट्विटर ने कहा है कि ‘रूसी संस्था की कार्रवाई से वो ‘गंभीर रूप से चिंतित’ हैं.

    संस्था के अधिकारियों ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा कि ‘रूस में सभी मोबाइल उपकरणों पर ट्विटर की गति घटाई गई है और क़रीब आधे डेस्कटॉप उपकरणों पर ट्विटर की रफ़्तार कम की गई है.’

    अधिकारियों ने कहा कि “ट्विटर जिस प्रतिबंधित सामग्री को हटाने में विफल रहा, उसने नाबालिगों को आत्महत्या के लिए उकसाया और बच्चों की अश्लील तस्वीरों को बढ़ावा दिया. साथ ही नशीली दवाओं के उपयोग की जानकारी भी अपने प्लेटफ़ॉर्म से नहीं हटाई.”

    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ‘रूस में इंटरनेट की स्पीड को सामान्य रूप से ही धीमा कर दिया गया है.’

    ट्विटर, रूस में छठी सबसे बड़ी सोशल मीडिया वेबसाइट है.

    एलेक्सी नवेलनी समेत अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है.

    नवेलनी फ़िलहाल जेल में हैं. उन्हें जनवरी में गिरफ़्तार कर लिया गया था. लेकिन जब उन्हें ज़हर देकर मारने की कोशिश की गई, तो उसके ख़िलाफ़ रूस में कुछ प्रदर्शन हुए थे.

    पर नवेलनी की गिरफ़्तारी के बाद, जब रूस में कुछ बड़े प्रदर्शन हुए तो रूस की इसी संस्था ने ट्विटर, टिकटॉक और फ़ेसबुक समेत अन्य कंपनियों को यह चेतावनी दी थी कि ‘अगर उन्होंने युवाओं से प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील करने वाले वीडियो नहीं हटाये, तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है.’

    ट्विटर ने कहा है कि ‘वो इस बात से चिंतित है कि रूस में ऑनलाइन होने वाली सार्वजनिक चर्चा को दबाने की कोशिश की जा रही है.’

    हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट किया कि वो किसी भी तरह से अनैतिक व्यवहार के समर्थन में नहीं है.

  14. महाराष्ट्र एटीएस ने रिकॉर्ड किया सचिन वाझे का बयान

    महाराष्ट्र एटीएस ने मनसुख हिरेन मौत मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाझे का बयान दर्ज कर लिया है. बुधवार को महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया है कि उन्हें क्राइम ब्रांच से हटाया जा रहा है.

    महाराष्ट्र में विपक्षी पार्टी बीजेपी की ओर से सचिन वाझे की गिरफ्तारी और सस्पेंड करने की मांग उठ रही थी.

    दरअसल, मुंबई के पॉश इलाके पेडर रोड पर स्थित मुकेश अंबानी के घर एंटिलिया के बाहर एक स्कॉर्पियो में जिलेटिन की छड़ मिली थी, इसके बाद स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हीरेन का शव ठाणे से बरामद किया गया.

    सचिन वाझे का कहना है कि वह एक मामले की जांच के लिए वहां पर मौजूद थे.

  15. टीएमसी आज जारी नहीं करेगी घोषणा-पत्र

    तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी गुरूवार को चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं करेगी.

    दरअसल पार्टी को गुरूवार को अपना घोषणापत्र जारी करना था लेकिन ममता बनर्जी पर हुए कथित हमले और इसमें आई चोटों के बाद वह इस वक़्त अस्पताल में भर्ती हैं. जिसे देखते हुए ये फ़ैसला लिया गया है.

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इलाज कोलकाता के सरकारी अस्पताल एसएसकेएम में चल रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि उनके बाएँ पैर और टखने की हड्डी में गंभीर चोट लगी है जबकि दाएँ कंधे, बाँह और गर्दन में भी चोट है.

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के नेता और ममता सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा है कि इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के पास जाएंगे.

    मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी को रोकने के लिए कायर कोशिश करते रहे हैं लेकिन कोई नहीं कर पाया. सबसे पहले राज्य के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर को हटा दिया गया था, फिर डीजी और अब ये हुआ है. मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि चुनाव आयोग जिसने सारे बदलाव किए वह इस पर चुप है. उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए."

    "हमने फ़ैसला किया है कि हम चुनाव आयोग के पास जाएंगे और इस मामले को सामने रखेंगे."

    • ये भी पढ़िए: पश्चिम बंगाल चुनावः ममता बनर्जी 48 घंटे निगरानी पर; नंदीग्राम में हमले के आरोप को विपक्ष ने बताया ‘नौटंकी’
  16. ब्राज़ील में फिर से कोरोना का प्रकोप, एक दिन में 2,000 से ज़्यादा की मौत

    ब्राज़ील में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर तेज़ हो रहा है और महामारी के बाद पहली बार एक दिन में 2000 से ज़्यादा लोगो की मौत हो गई है.

    बुधवार को देश में 2,286 लोगों की मौत दर्ज की गई.

    अमेरिका के बाद ब्राजील में इस संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या सबसे ज़्यादा है, यहां कोविड-19 से अब तक 268,370 लोगों की मौत हो चुकी है.

    जानकारों का कहना है कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के आने से संक्रमण की दर में और तेज़ी आई है.

    बुधवार को ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति लुईज़ लुला द सिलवा ने राष्ट्रपति ज़ेर बोलसेनारो के कोरोना वायरस को लेकर लिए फ़ैसलों को ‘बेवकूफ़ी भरा’ बताते हुए उनपर हमला बोला.

    बुधवार को बोलसेनारो इस महीने में पहली बार मास्क पहने नज़र आए. वह कोरोना वायरस से होने वाले ख़तरों को हमेशा कमतर आंकते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि लोग कोरोना को लेकर ‘ शोर मचाना’ बंद कर दें.

    ब्राज़ील के प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र फ़ोक्रूज़ ने चेतावनी दी है कोरोना बढ़ते मामलों के कारण ब्राजील के अधिकांश बड़े शहरों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ रहा है. कई शहरों में हालात चरमराने की कगार पर हैं.

  17. नमस्कार!

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