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ट्रैक्टर रैली में क्या करें, क्या न करें: संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया
बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर परेड में हिस्सा लेने वाले अपने साथियों के लिए कुछ हिदायतें दी हैं.
लाइव कवरेज
महाराष्ट्र में कई ज़िलों से किसानों का मुंबई पहुंचना जारी
महाराष्ट्र के लगभग 21 ज़िलों से किसानों का मुंबई पहुंचना जारी है.
रविवार देर शाम तक मुंबई में 15 हज़ार किसानों के पहुंचने की पुष्टि की गई है.
ऑल इंडिया किसान सभा के नेता ए नावले ने कहा है, "लगभग 15000 किसान नासिक से यहां पहुंचे हैं. कल कई और लोग आएंगे. और हम लोग गवर्नर के घर जाएंगे. शरद पवार जी ने कहा है कि वह भी आएंगे. हमें मुख्यमंत्री ठाकरे का समर्थन हासिल है. महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ पार्टियां कल हमारे साथ आएंगी.
ट्रैक्टर रैली में क्या करें, क्या न करें: संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया
किसानों को गणतंत्र दिवस से मौके पर ट्रैक्टर परेड की अनुमति मिल गई है और इसके लिए रास्ते भी तय कर दिए गए हैं. इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर परेड में हिस्सा लेने वाले अपने साथियों के लिए कुछ हिदायतें दी हैं.
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी रिलीज़ में कहा है, “हमें इस परेड के जरिए देश और दुनिया को अपना दुख दर्द दिखाना है.तीनों किसान विरोधी क़ानूनों की सच्चाई को बताना है.''
''हमें ध्यान रखना है कि इस ऐतिहासिक परेड में किसी किस्म का धब्बा ना लगने पाए. परेड शांतिपूर्वक और बिना किसी वारदात के पूरी हो, इसमें हमारी जीत है. याद रखिए, हम दिल्ली को जीतने नहीं जा रहे हैं. हम देश की जनता का दिल जीतने जा रहे हैं.”
संगठन ने परेड में हिस्सा लेने वाले किसानों से अपील की है कि वो अपने साथ किसी भी तरह का हथियार न रखें और न ही किसी तरह के भड़काऊ या नकारात्मक नारे लगाएं.
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि परेड के दौरान साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखने के साथ ही किसी भी तरह की आपात स्थिति के लिए भी तैयार रहना होगा.
दिल्ली पुलिस ने रविवार को एकदम साफ़ कर दिया कि 26 जनवरी को किसान दिल्ली में दाख़िल हो सकते हैं, लेकिन उनकी वजह से गणतंत्र दिवस की परेड में कोई दिक्कत नहीं आना चाहिए.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ''दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी, इंटेलीजेंस दीपेंद्र पाठक ने रविवार को कहा कि इंटेलीजेंस और अन्य एजेंसियों से हमें लगातार इनपुट मिल रहे हैं कि ट्रैक्टर रैली में गड़बड़ की जा सकती है. भ्रम पैदा करने के लिए पाकिस्तान से 308 ट्विटर हैंडल तैयार किए गए हैं.''
कमला हैरिस के बारे में क्या बोले उनके मामा गोपालन बालाचंद्रन
भारतीय मूल की कमला देवी हैरिस ने हाल ही में अमेरिका के उप राष्ट्रपति पद की शपथ ली है. कमला हैरिस न सिर्फ़ अमेरिका की पहली महिला उप राष्ट्रपति हैं बल्कि उन्होंने कई कीर्तिमान कायम किए हैं.
कमला हैरिस अमेरिका की पहली एशियाई मूल की और पहली काली महिला हैं जो उप राष्ट्रपति पद तक पहुँची है.
कमला हैरिस की माँ श्यामला भारत के तमिलनाडु से थीं. बीबीसी तमिल सेवा की संवाददाता विष्णुप्रिया को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उनके मामा गोपलन बालाचंद्रन ने उनके बचपन की कई यादें साझा कीं.
उन्होंने कहा, “मैं जब लंदन में था तब पहली बार कमला से मिला. उस समय वो सिर्फ़ तीन साल की थी. मैं उसे लेकर लंदन के क्यू गार्डेन में गया जो फूलों से भरा एक बगीचा है.”
गोपालन याद करते हैं, “कमला पूरे बगीचे में इधर-उधर दौड़ती थी और मुझे उसे लगातार टोकना पड़ता था.”
वो कहते हैं कि कमला हैरिस की सबसे बड़ी ताक़त ये है कि वो ख़ुद को समझती और पहचानती हैं. कोई दूसरा आकर उन्हें उनके बारे में नहीं बता सकता.
गोपालन बालाचंद्रन ने कहा, “वो बाइडन की महत्वपूर्ण और बेहतरीन सहयोगी साबित होंगी. वो अमेरिका के इतिहास में सबसे सक्रिय उप राष्ट्रपति होंगी.”
कमला हैरिस के मामा कहते हैं कि उनकी प्रेरणा कोई और नहीं बल्कि उनकी माँ श्यामला हैं.
उन्होंने कहा, “कमला आत्मविश्वास से भरपूर है. उसने ऐसे वक़्त में अमेरिकी की घरेलू राजनीति में हिस्सा लेना शुरू किया जब आम तौर पर भारतीय मूल के लोग इससे बचते थे.”
गोपालन कहते हैं, “कमला हर भारतीय को यह बताना चाहती है कि अगर वो कामयाब हो सकती है तो वो भी हो सकते हैं.”
नेपाल: कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पार्टी से निष्कासित
सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के प्रचंड-माधव नेपाल धड़े ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकालने का फ़ैसला किया है.
रविवार को पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में ये फ़ैसला किया गया.
स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य जनार्दन शर्मा के मुताबिक, पार्टी ने बैठक में ओली से स्पष्टीकरण की बात कही थी, जिसे स्टैंडिंग कमेटी ने नज़रअंदाज़ करके उन्हें निकालने का फ़ैसला किया.
प्रचंड-माधव नेपाल धड़े ने पार्टी के फ़ैसले के बिना संसद को भंग करने समेत अन्य मुद्दों पर ओली से स्पष्टीकरण चाहा था.
इससे पहले ओली ने पिछले साल 20 दिसंबर को संसद भंग करने का फ़ैसला किया था जिसके बाद नेपाल में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था.
संसद भंग किए जाने के बाद इस साल अप्रैल और मई में चुनावों का ऐलान किया गया था, जिसे नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने मंज़ूरी दी थी.
ट्यूनीशियाः अरब क्रांति के 10 साल बाद लोगों को क्या हासिल हुआ?
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किसानों का मुंबई मार्च
आज़ाद मैदान में जुटने के लिए बड़ी संख्या में किसान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों से मुंबई पहुंच रहे हैं.
दिल्ली की सीमाओं पर दो महीने से डटे किसानों की तरह महाराष्ट्र के इन किसानों की भी मांग है कि मोदी सरकार विवादित कृषि क़ानूनों को वापस ले.
महाराष्ट्र में किसानों की ये तस्वीर मोदी सरकार की उस दलील के विपरीत है कि कृषि क़ानूनों का विरोध केवल पंजाब के किसान कर रहे हैं.
किसान दिल्ली में आ सकते हैं, लेकिन 26 जनवरी की परेड में कोई बाधा नहीं होना चाहिए: दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस ने रविवार को एकदम साफ़ कर दिया कि 26 जनवरी को किसान दिल्ली में दाख़िल हो सकते हैं, लेकिन उनकी वजह से गणतंत्र दिवस की परेड में कोई दिक्कत नहीं आना चाहिए.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ''दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी, इंटेलीजेंस दीपेंद्र पाठक ने रविवार को कहा कि इंटेलीजेंस और अन्य एजेंसियों से हमें लगातार इनपुट मिल रहे हैं कि ट्रैक्टर रैली में गड़बड़ की जा सकती है. भ्रम पैदा करने के लिए पाकिस्तान से 308 ट्विटर हैंडल तैयार किए गए हैं.''
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी इंटेलीजेंस दीपेंद्र पाठक ने कहा, ''किसानों के ट्रैक्टर दिल्ली के भीतर कुछ किलोमीटर तक आ सकेंगे और तय रास्ते से वापस लौटेंगे. रास्ता इस तरह से तय किया गया है कि उसे सुरक्षा प्रदान की जा सके. ट्रैक्टरों की संख्या अभी तय नहीं की गई है, लेकिन ट्रैक्टर रैली गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद ही शुरू होगी.''
उन्होंने बताया, ''दिल्ली में ट्रैक्टर रैली का प्रवेश टिकरी, सिंघु और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से होगा और रैली वापस वहीं पहुंचेगी जहां से शुरू होगी. रैली कंझवाला, बवाना, औचंडी बॉर्डर, केएमपी एक्सप्रेसवे से होती हुई सिंघु बॉर्डर पहुंचेगी.''
उन्होंने बताया, ''टिकरी से रैली नांगलोई, नज़फ़गढ़ और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे होकर जाएगी. इसी तरह ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से ट्रैक्टर रैली 56 फुट रोड होकर कुंडली-ग़ाज़ियाबाद-पलवल एक्सप्रेसवे होकर वापस ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचेगी.''
नीतीश कुमार ने लालू के जल्द ठीक होने की कामना की
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने विरोधी लालू प्रसाद यादव के जल्द ठीक होने की कामना की है. स्वास्थ्य में गिरावट के बाद रांची से लालू प्रसाद को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है. लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच पिछले करीब पांच दशक से दोस्ती-दुश्मनी के दौर चलते रहे हैं.
जेडीयू के नीतीश कुमार ने इस बात पर भी खेद जताया कि वे अब आरजेडी सुप्रीमो के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी अखबारों से ही हासिल कर पाते हैं क्योंकि गुजरे वक्त में उनके लालू यादव के स्वास्थ्य को लेकर किए गए फोन पर विवाद पैदा हो गया था.
नीतीश कुमार ने कहा, “मैं चाहता हूं कि वे जल्द से जल्द ठीक हों.” मुख्यमंत्री जेडीयू राज्य मुख्यालय के बाहर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. वे वहां पूर्व मुख्यमंत्री और पिछड़ों के बड़े नेता कर्पूरी ठाकुर की जंयती पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे.
नीतीश कुमार और लालू प्रसाद दोनों ही कर्पूरी ठाकुर को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं. नीतीश कुमार ने कहा,“जब वे साल 2018 में इसी तरह से अस्वस्थ हुए थे तो मैं अक्सर उनके निजी सहायकों को फोन करता था और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेता रहता था. इसके लिए मुझे क्या कुछ नहीं कहा गया.”
साल 2017 में नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ बनाए गए गठबंधन को तोड़कर बीजेपी के साथ नई सरकार बना ली थी.
लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य को लेकर उनकी सहानुभूति को लेकर उस वक्त ये चर्चाएं उठने लगी थीं कि वे बीजेपी के साथ गठबंधन में असहज महसूस कर रहे हैं और आरजेडी चीफ लालू यादव के साथ फिर से हाथ मिलाना चाहते हैं.
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बोडो शांति समझौते से असम में चरमपंथ के खात्मे की शुरुआत हुईः अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केवल बीजेपी ही असम को “भ्रष्टाचार मुक्त, चरमपंथ मुक्त और प्रदूषण मुक्त” बना सकती है.
असम के कोकराझार में हुई रैली में शाह ने कहा कि बोडोलैंड टैरिटोरियल रीजन (बीटीआर) समझौते से असम में चरमपंथ की समाप्ति की शुरुआत हो गई है और बीजेपी सरकार के तहत असम के सभी समुदायों के राजनीतिक अधिकार, संस्कृति और भाषा सुरक्षित हैं.
एएनआई के मुताबिक, बीटीआर संधि दिवस की पहली वर्षगांठ पर हुए आयोजन में अमित शाह ने कहा, “ये रैली उन लोगों को जवाब है जो बोडो और गैर-बोडो के नाम पर असम की शांति में खलल डालते रहे.”
अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पार्टी ने भी चरमपंथियों के साथ कई समझौते किए लेकिन इनमें से किसी का पालन नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और बीजेपी बोडो संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
उन्होंने कहा,“प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर में चरमपंथ को खत्म करने के लिए बोडो शांति समझौता किया. ब्रू-रियांग मसले के हल की कोशिशें हुईं और 8 सशस्त्र समूहों के 700 सदस्यों ने हथियार डाल दिए.”
नलबाड़ी में एक रैली में उन्होंने कहा कि कांग्रेस घुसपैठियों को नहीं रोक सकती क्योंकि वे उसका वोट बैंक हैं. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी सरकार ही असम को घुसपैठियों से मुक्त करा सकती है.
शाह ने कहा,“असमिया और गैर-असमिया, बोडो और गैर-बोडो लोगों के नाम पर विवाद भड़काने की कोशिश कर रहे लोगों को पहचानिए. असम के लोगों के लिए इन ताकतों को सबक सिखाने का यही समय है.”
उन्होंने कहा कि बोडो इलाके में सड़कों का जाल बिछाने के लिए 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि यह कदम से इस इलाके को विकास के रास्ते पर ले जाएगा.
“तीन साल में बनेगा राम मंदिर, 1,100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा”
अयोध्या में राम मंदिर तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा और इसके निर्माण पर 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट के एक प्रमुख अधिकारी ने यह जानकारी दी है.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बताया,“मुख्य मंदिर तीन से साढ़े तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा और इसकी लागत 300 से 400 करोड़ रुपये रहेगी. पूरी 70 एकड़ जमीन के विकास पर 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा.”
उन्होंने कहा कि वे राम मंदिर निर्माण प्रोजेक्ट से जुड़े जानकारों से चर्चा के आधार पर ये आंकड़े बता रहे हैं.
उन्होंने कहा,“मंदिर निर्माण के लिए हमारे सामने कुछ कॉरपोरेट्स से पैसे लेने का विकल्प था. कुछ कॉरपोरेट परिवारों ने हमसे संपर्क भी किया था और हमसे मंदिर के डिजाइन को देने के लिए कहा था. उन्होंने हमें भरोसा दिया था कि वे मंदिर प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे, लेकिन मैंने विनम्रता से इस अनुरोध को खारिज कर दिया.”
कुछ तबकों से इस तरह की आलोचना आने पर कि बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए पैसे इकट्ठा करने की मुहिम चला रही है, उन्होंने कहा,“लोगों की राय इस पर निर्भर करती है कि वे रंग का चश्मा लगाए हुए हैं. हम किसी तरह का चश्मा नहीं लगाए हैं और हमारी आंखें भक्ति के मार्ग को देख रही हैं.”
उन्होंने कहा,“मंदिर निर्माण के लिए पैसे इकट्ठे करने के लिए हमारा टारगेट 6.5 लाख गांवों और 15 करोड़ घरों तक पहुंचने का है.”
यह पूछे जाने पर कि क्या वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निवास पर भी चंदा मांगने जाएंगे, उन्होंने कहा,“अगर वे सहयोग राशि देने के लिए तैयार होंगे तो मैं वहां जरूर जाऊंगा.”
पिछले हफ्ते गोविंद गिरि राष्ट्रपति भवन गए थे और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मंदिर निर्माण के लिए पांच लाख एक सौ रुपये का दान दिया था.
क्या वे सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास भी चंदा मांगने जाएंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा,“अगर कोई इस बात की गारंटी दे कि मेरा वहां पर अपमान नहीं होगा तो मैं वहां जाने के लिए तैयार हूं.”
किसान नेता ने हरियाणा पुलिस की थ्योरी पर उठाये सवाल
किसान नेताओं ने शुक्रवार को जिस युवक को ‘हिंसा की साज़िश रचने का आरोप’ लगाते हुए पुलिस को सौंपा था, उसके बारे में हरियाणा पुलिस ने शनिवार को कहा कि ‘युवक ने पिटाई के डर से एक मनगढ़ंत कहानी बनाई जो जाँच में बेबुनियाद साबित हुई है.’
इसके बाद किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने पुलिस की इस थ्योरी पर सवाल खड़े किये हैं.
अभिमन्यु ने ‘किसान एकता मोर्चा’ के फ़ेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने हरियाणा पुलिस से कई सवाल पूछे हैं.
उन्होंने सवाल किया है, "जब हमने उस युवक को जाँच के लिए पुलिस को सौंप दिया था तो पुलिस ने उसका वीडियो बनाकर समाचार चैनलों को क्यों भेज दिया? पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि इन समाचार चैनलों के साथ पुलिस का क्या संबंध है?’
अभिमन्यु ने सवाल किया है कि हरियाणा पुलिस ने अब तक ये क्यों नहीं बताया कि जाँच में आख़िर क्या पाया गया?
इस वीडियो में उन्होंने कहा, “युवक की माँ कह रही थीं कि उसके चाचा की मृत्यु हो चुकी है और उनका लड़का 20 तारीख़ को घर से चला गया था, जबकि लड़का कह रहा था कि वो 19 तारीख को अपने चाचा के घर गया था. इसकी जाँच होनी चाहिए कि कौन सच बोल रहा है?”
यमुना एक्सप्रेस-वे पर ट्रैक्टरों की ‘नो एंट्री’
समीरात्मज मिश्र,
बीबीसी हिंदी के लिए
दिल्ली में 26 जनवरी पर किसानों को ट्रैक्टर मार्च निकालने की भले ही अनुमति मिल गई हो, लेकिन यूपी के कई हिस्सों से दिल्ली आने वाले ट्रैक्टरों को रोका जा रहा है.
आगरा से दिल्ली को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर ट्रैक्टरों के चलने पर पाबंदी लगा दी गई है और दूसरे रास्तों पर भी ट्रैक्टरों के दिल्ली जाने के लिए नाकेबंदी कर दी गई है.
स्थानीय अख़बारों में छपी ख़बरों के मुताबिक़, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक्सप्रेस-वे अधिकारियों की हुई बैठक में इस संबंध में ख़ासतौर पर निर्देश दिये गए हैं.
हालांकि मथुरा में मांठ के क्षेत्राधिकारी धर्मेंद्र चौहान इस संबंध में किसी जानकारी से इनकार करते हैं और इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बातचीत की सलाह देते हैं.
उच्चाधिकारी फ़ोन का जवाब नहीं दे रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों और किसानों की मौजूदगी और एक्सप्रेस-वे पर ट्रैक्टर की ग़ैर-मौजूदगी इस बात को साबित करती है कि ट्रैक्टरों को दिल्ली आने से रोका जा रहा है.
एक्सप्रेस-वे पर स्थित एक टोल प्लाज़ा के अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि “टोल अधिकारियों को साफ़तौर पर कहा गया है कि किसी भी स्थिति में 26 जनवरी तक किसी टोल से कोई ट्रैक्टर नहीं गुज़रना चाहिए. पुलिस ने यह भी कहा है कि ट्रैक्टरों को रोकने की ज़िम्मेदारी टोल प्रबंधन पर है और पैदल जाने वालों को पुलिस रोकेगी.”
किसानों को ट्रैक्टर परेड की अनुमति मिली, मगर अब रूट को लेकर कशमकश
केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत के कई दौर पूरे हो चुके हैं, लेकिन इनसे कुछ ठोस निकलकर सामने नहीं आया.
सरकार अपने कृषि क़ानूनों पर किसानों को मनाने में नाकाम रही है और इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ अब किसान 26 जनवरी के दिन ‘ट्रैक्टर परेड’ निकालने वाले हैं.
दिल्ली पुलिस से किसान संगठनों को इस परेड के आयोजन की अनुमति मिल गई है, लेकिन इसके रूट को लेकर अब भी चर्चा जारी है.
दिल्ली पुलिस ने किसान संगठनों के सामने एक शर्त भी रखी है कि ‘किसानों की परेड 26 जनवरी पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड के बाद ही शुरू होगी.’
समझौते के हिसाब से किसान दिल्ली की तीनों सीमाओं से राजधानी में दाखिल हो सकेंगे जहाँ वो पिछले दो महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं.
लेकिन सेंट्रल दिल्ली की ओर बढ़ने की उन्हें इजाज़त नहीं होगी.
इस परेड में शामिल होने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश से हज़ारों ट्रैक्टरों के दिल्ली पहुंचने का अनुमान है.
पंजाब जम्हूरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने कहा है कि ‘कई राज्यों के किसान इस परेड में शामिल होने वाले हैं और वो दिल्ली आकर कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे. हमारा अनुमान है कि 26 जनवरी के दिन दिल्ली में क़रीब ढाई से तीन लाख ट्रैक्टर होंगे. यह परेड बिल्कुल शांतिपूर्वक ढंग से की जायेगी.’
भारतीय किसान मंच (पंजाब) के बूटा सिंह ने कहा है कि ‘रूट को लेकर अब भी मंथन किया जा रहा है.’ उन्होंने कहा, “26 जनवरी के दिन प्रदर्शनस्थलों से ट्रैक्टर दिल्ली की ओर बढ़ेंगे और परेड के बाद वापस प्रदर्शनस्थलों पर लौट आयेंगे.”
दिल्ली पुलिस ने पहले किसान संगठनों को यह परेड आयोजित ना करने की गुज़ारिश की थी, लेकिन बाद में किसानों को परेड करने की अनुमति दे दी गई.
लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों के अनुसार, किसानों को जो रूट दिया गया है, उससे कुछ किसान संगठनों को आपत्ति है क्योंकि यह रूट दिल्ली की आउटर-रिंग रोड के क़रीब भी नहीं पहुँचता.
किसानों ने माँग की थी कि वो दिल्ली की बाहरी-रिंग रोड पर परेड करना चाहते हैं. लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी.
इस विषय पर समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पंजाब किसान संघर्ष कमेटी के सतनाम सिंह पन्नू ने कहा, “हमारे बहुत से किसान साथी इस परेड में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे हैं. हम दिल्ली की बाहरी रिंग रोड पर रैली आयोजित करेंगे, चाहे दिल्ली पुलिस इसकी अनुमति दे या ना दे.”
टिकरी बॉर्डर पर डटे एक प्रदर्शनकारी किसान ने बताया कि ‘आज पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से काफ़ी ट्रैक्टर आ रहे हैं. हम 26 जनवरी को शांतिपूर्ण ट्रैक्टर परेड निकालेंगे. अकेले टिकरी बॉर्डर पर क़रीब दो लाख ट्रैक्टर होंगे.’
इस बीच गाज़ीपुर बॉर्डर (दिल्ली-यूपी) के प्रदर्शन स्थल पर सीसीटीवी लगा दिये गए हैं.
एक प्रदर्शनकारी ने एएनआई को बताया कि 'गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड की जाने वाली है, कुछ घटनाएं भी हुई हैं, उसी के मद्देनज़र गाज़ीपुर का पूरा आंदोलन-स्थल सीसीटीवी की नज़र में रहेगा. 500 वॉलंटियर भी तैनात किये गए हैं.'
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना अपडेट: क़रीब 16 लाख लोगों को लग चुकी कोविड वैक्सीन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 14,849 नये मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़कर एक करोड़ 6 लाख 54 हज़ार से अधिक हो गई है.
155 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या भी 1 लाख 53 हज़ार 339 हो गई है.
देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या अब 1 लाख 84 हज़ार 408 है और कुल डिस्चार्ज हुए मामलों की संख्या 1 करोड़ 3 लाख 16 हज़ार 786 है.
अधिकारियों ने बताया है कि अब तक भारत में कुल 15 लाख 82 हज़ार 201 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है.
हरियाणा पुलिस ने किसान नेताओं द्वारा पकड़े गये युवक की कहानी को बताया मनगढ़ंत
शुक्रवार को किसान नेताओं ने अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में एक युवक को पेश किया था और यह दावा किया था कि ‘उसने 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड में हिंसा भड़काने की साज़िश के बारे में उन्हें बताया है.’
लेकिन हरियाणा पुलिस ने अपनी जाँच के बाद इसे ‘युवक की मनगढ़ंत और निराधार कहानी’ बताया है.
पुलिस का कहना है कि ‘प्रदर्शन स्थल पर इस युवक को कथित तौर पर लड़कियों के साथ छेड़खानी करते पकड़ा गया था. प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने ही इसे पकड़ा था और पकड़े जाने पर इसने ये कहानी बना दी. इस लड़के की पहचान 21 वर्षीय योगेश रावत के तौर पर हुई है जो सोनीपत (हरियाणा) से है.’
हरियाणा पुलिस के एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा ने बताया कि “लड़के से किसान आंदोलन वाले दावे पर तमाम सवाल पूछे गये, लेकिन पूछताछ में हमने पाया कि वो जो कह रहा है, सब मनगढ़ंत है. उसका कोई भी दावा सही साबित नहीं हुआ. पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया है.”
किसान नेताओं ने शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इस युवक पर आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों पर हमला करने की साज़िश रचने का आरोप लगाया था और कहा था कि ट्रैक्टर परेड को विफल करने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं.
लेकिन हरियाणा पुलिस का कहना है कि ‘युवक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन लोगों ने युवक को पकड़ा था, अधिकांश बातें उसने उनके कहने पर ही बोली थीं.’
रंधावा ने बताया, “इस युवक के पिता कुक हैं और माँ बर्तन धोने का काम करती हैं. हमने उनसे और इसके दोस्तों, भाई, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों से भी बात की है. कहीं भी इसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला. लेकिन पिटाई के डर से इसने ये कहानी बनाई. कुछ तो इसे पकड़ने वालों ने इससे बोलने को कहा था और बाकी कहानी इसने ख़ुद बनाई.”
रंधावा ने कहा, “हरियाणा पुलिस ने युवक को गिरफ़्तार नहीं किया है, पर उससे पूछताछ जारी है.”
सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच आज होगी 9वें दौर की वार्ता
भारत और चीन के बीच दो महीने से अधिक चले ‘उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद’ के बाद नौवें दौर की कॉर्प्स-कमांडर स्तरीय बातचीत आज यानी रविवार को शुरू होगी.
इस बैठक का लक्ष्य पूर्वी-लद्दाख में नौ महीने से जारी तनाव का कोई समाधान निकालना है.
बताया गया है कि पिछली कुछ बैठकों की तरह विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी इस बैठक का हिस्सा होंगे.
यह बैठक भारत के चुशूल सेक्टर के सामने, चीन की तरफ मोल्डो में होगी.
दोनों पक्षों के बीच आख़िरी सैन्य बैठक 6 नवंबर को हुई थी जिसमें भारत ने स्पष्ट रूप से चीन को अपने सैनिक पीछे हटाने के लिए कहा था.
उम्मीद जताई जा रही है कि इस वार्ता में दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता हो सकता है.
18 दिसंबर, 2020 को विदेश मंत्रालय स्तर की वार्ता में दोनों देशों ने कहा था कि ‘वो वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ सभी तनाव वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में काम जारी रखने को तैयार हैं.’
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक इंटरव्यू में यह कहा था कि ‘जब तक चीन अपने सैनिकों को पीछे नहीं हटाता, भारत भी अपने सैनिकों को पीछे नहीं लेगा.’
15 जून 2020 को गलवान घाटी में दोनों देशों के जवानों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह विवाद शुरू हुआ था.
इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक मारे गये थे, जबकि चीन ने कभी भी अपने मरने वाले जवानों की संख्या सार्वजनिक नहीं की.
नमस्कार!
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