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चीन: चाकू से हुए हमले में सात लोगों की मौत, सात घायल -आज की बड़ी ख़बरें

सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ़्तार कर लिया है. हालांकि हमले के पीछे का मक़सद अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है

लाइव कवरेज

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  2. बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पेपर लीक का आरोप

    बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यार्थियों ने औरंगाबाद में कथित तौर पर पेपर लीक का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया.

    औरंगाबाद के ज़िलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने इन कथित आरोपों पर कहा, “यहां पर कुल 18 सेंटर हैं. इनमें से एक सेंटर के अभ्यार्थियों का आरोप है कि प्रश्न पत्र की सील खुली हुई थी. हम मामले की जांच कर रहे हैं.”

  3. राहुल गांधी निजी यात्रा पर विदेश रवाना, कांग्रेस के स्थापना दिवस पर भी नहीं होंगे मौजूद

    कांग्रेस नेता और वायनाड सेेसांसद राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के 136वें स्थापना दिवस पर मौजूद नहीं रहेंगे. 28 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी का स्थापना दिवस है.

    पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जानकारी दी कि राहुल गांधी संक्षिप्त निजी यात्रा पर विदेश जा रहे हैं और कुछ दिन बाहर रहेंगे.

    सूत्रों के हवाले से न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने ख़बर दी है कि राहुल गांधी रविवार की सुबह ही विदेश यात्रा के लिए चले गए और कुछ दिन वो विदेश में ही रहेंगे.

    हालांकि राहुल गांधी कहां गए हैं, इस संबंध में स्पष्ट तौर पर अभी तक कोई ख़बर नहीं है.

    राहुल गांधी ऐसे समय में विदेश यात्रा पर गए हैं जबकि देश में कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ और उन्हें वापस लिए जाने की मांग को लेकर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. पंजाब-हरियाणा और कई दूसरे राज्यों के किसान बीते एक महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं.

  4. चीन के उत्तर-पूर्वी प्रांत लिओलिंग में चाकू से हमले की घटना में 7 की मौत, 7 घायल

    चीन के उत्तर-पूर्वी प्रांत लिओलिंग में एक शख़्स ने लोगों पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला किया. मीडिया में आयी रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हमले में सात लोगों की मौत हो गई है.

    लिओनिंग प्रांत के एक छोटे से शहर कायायुआन में हुए इस हमले में सात लोग ज़ख़्मी भी हुए हैं.

    सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ़्तार कर लिया है. हालांकि हमले के पीछे का मक़सद अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है.

    प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से न्यूज़ रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने एक शख़्स को लोगों पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला करते हुए देखा.

    चीन में इस तरह के हिंसक अपराध तुलनात्मक रूप से कम होते हैं लेकिन बीते कुछ सालों में चाकू या फिर धारदार हथियारों से हमले के मामले बढ़े हैं.

    इन तरह के हमलों में अमूमन वे लोग शामिल होते हैं जो या तो किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे होते हैं या फिर जब वे किसी से बदला लेना चाह रहे होते हैं.

    हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (एससीएमपी) समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार,कायायुआन में चाकू से हमले की जो घटना हुई उसके संदिग्ध ने स्थानीय समय आठ बजे के करीब़ लोगों पर चाकू से हमला करना शुरू कर दिया.

    पुलिस के मुताबिक़, संदिग्ध को पकड़ने के दौरान एक पुलिस अधिकारी घायल भी हुआ है. हालांकि हमले में घायल लोगों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है.

    एक प्रत्यक्षदर्शी ने एससीएमपी को बताया कि यह हमला एक स्कूल के बाहर शुरू हुआ और हमले का शिकार होने वालों में ज़्यादातर या तो मध्यम आयु वर्ग की महिलाएं हैं या फिर वृद्ध महिलाएं.

    लियू उपनाम वाली एक महिला ने कहा,“यह तो राहत की बात थी कि आज स्कूल बंद है. वरना कई और लोग इसके शिकार हो सकते थे.”

  5. किसानों के समर्थन में दमदम जेल के 10 कैदी भूख हड़ताल पर

    कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में कोलकाता की दमदम सेंट्रल जेल में बंद 10 राजनीतिक कैदियों ने रविवार से भूख हड़ताल शुरू की है. इनमें पांच माओवादी भी शामिल हैं.

    जेल से जारी एक बयान में इन कैदियों ने कृषि क़ानूनों को किसान-विरोधी करार देते हुए आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी की वजह से उपजी परिस्थिति का फ़ायदा उठाते हुए केंद्र की बीजेपी सरकार नेकृषि क़ानूनों को पारित कर दिया.

    कोलकाता से बीबीसी हिंदी के सहयोगी प्रभाकर मणि तिवारी ने एक अधिकारी के हवाले से ख़बर दी है कि मुर्शीदाबाद ज़िले की बरहमपुर जेल के आठ राजनीतिक कैदियों ने भी इसी मुद्दे पर सोमवार से भूख हड़ताल शुरू करने का एलान किया है.

  6. तनाव के बीच अफ़्रीका के इस देश में हो रहा है मतदान

    सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक की राजधानी बंगुई में कड़े सुरक्षा प्रबंधों को बीच आम चुनावों के लिए मतदान जारी है. स्थानीय सुरक्षा टुकड़ियां, संयुक्त राष्ट्र शांति दल और रवांडा के जवान सड़कों पर गश्त कर रहे हैं.

    मुल्क के कुछ हिस्सों में विद्रोहियों ने चुनाव सामग्री कब्जे में ले ली हैं और वोट करनेवालों को धमका रहे हैं.

    मतदान शुरू होने के कुछ देर पहले, पूर्व राष्ट्रपति फैंकुआ बोजिज़े ने विद्रोहियों को अपना समर्थन दिया और लोगों से आग्रह किया कि वो वोट न दें.

    उन्हें चुनाव में खड़ा होने नहीं दिया गया है और उनपर इल्ज़ाम है कि उन्होंने राजधानी पर विद्रोहियों के एक गुट को आगे बढ़ने में मदद की. उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है.

  7. किसानों के प्रदर्शन में गए बेनीवाल और उनके समर्थक किसानों से अलग क्यों बैठे?

    राजस्थान-हरियाणा सीमा पर डटे कई राज्यों के किसानों की क़तार जयपुर-दिल्ली हाइवे पर लगातार बढ़ती जा रही है.

    शनिवार को नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नेता हनुमान बेनीवाल ने भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचकर माहौल को और गरम कर दिया लेकिन दो हफ़्ते से डटे किसानों से उनकी दूरी चर्चा में भी रही.

    शनिवार दोपहर हाइवे पर शाहजहांपुर गांव के पास स्थित ओवरब्रिज के एक ओर यानी राजस्थान सीमा की ओर सुबह से हनुमान बेनीवाल के समर्थक मंच सजाकर बैठे थे. क़रीब चार बजे हनुमान बेनीवाल अपने तमाम समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और देर रात तक रहे.

    उनका दावा था कि उनके साथ क़रीब एक लाख समर्थक आए हैं, लेकिन ऐसा दिखा नहीं. दूसरी ओर, ओवरब्रिज के उस पार यानी हरियाणा की ओर अखिल भारतीय किसान संगठन और कई अन्य संगठनों से जुड़े किसान और उनके समर्थक भी बड़ी संख्या में वहां डटे हैं.

    यह संख्या लगातार बढ़ रही है और इन किसानों में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के किसान भी बड़ी संख्या में हैं. महाराष्ट्र से सैकड़ों किसान रविवार की सुबह भी वहां पहुंचे.

  8. बिहार के किसान आंदोलन क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या वहाँ खेती में सब बढ़िया है?

    "दिल्ली के किसान आंदोलन में बिहार के किसान भी शामिल हों, क्योंकि इस क़ानून के तहत किसानों को एमसएपी कभी नहीं मिलेगा. इस क़ानून से सबसे अधिक बिहार के किसानों पर असर पड़ेगा. उन्हें बहुत नुकसान होने वाला है. इसलिए बिहार के किसानों से मेरी अपील है कि वे जागरूक हों, दिल्ली पहुंचें."

    भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ये बातें पटना के एक होटल में सोमवार को प्रेस कॉफ़्रेंस करके कह रहे थे. भारत सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसान आंदोलन में एक बात जो बार-बार कही जा रही है, वो ये कि बिहार के किसानों को इन क़ानूनों से कोई समस्या नहीं है, इसलिए यहाँ के किसान आंदोलन में भाग नहीं ले रहे हैं.

    बिहार देश का वह राज्य है जहाँ सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ कुल आबादी का 77 फ़ीसदी हिस्सा कृषि पर आश्रित है, जो पंजाब और उत्तर प्रदेश की तुलना में कहीं अधिक है.

    पंजाब में कृषि पर निर्भर आबादी का प्रतिशत 75 है जबकि उत्तर प्रदेश में यह 65 फ़ीसद है. बावजूद इसके किसान आंदोलन में बिहार के किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी नहीं है. बिहार के किसानों को संगठित और जागरूक करने के लिए पंजाब के किसान नेता यहाँ आकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रहे हैं.

  9. यूरोप में लगाए जा रहे हैं कोरोना वायरस के टीके

    यूरोपीय संघ ने आम लोगों को कोरोना का टीका देने का काम शुरू कर दिया है. इससे लोगों को राहत का एहसास हुआ है क्योंकि पूरा क्षेत्र बुरी तरह से महामारी ग्रस्त रहा है.

    फ़ाइज़र-बायोनटेक का टीका सबसे पहले बुज़ुर्गों और स्वास्थकर्मियों को टीका लगाया जा रहा है. अधिकाशंतर मुल्क इसका लाइव प्रसारण भी कर रहे हैं.

    इटली के प्रधानमंत्री जुसेफ़े कौंटे ने कहा है कि इटली जाग रहा है और ये दिन हमेशा याद किया जाएगा. लेकिन यूरोपीय संघ के सभी शहरियों को टीका लगने में कई माह लग जाएंगे.

    अबतक तीन लाख तीस हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है. और अभी भी कई मुल्कों में संक्रमण कम होने का नाम नहीं ले रहा.

  10. नेपाल के राजनीतिक संकट के बीच काठमांडू पहुंचा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का दल

    चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर अधिकारी नेपाल के काठमांडू पहुंचे हैं. अबसे कुछ ही दिनों पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर संसद भंग कर दी गई थी और चुनाव का एलान कर दिया गया था.

    विरोधियों की तरफ से बढ़ते दबाव को लेकर संसद भंग होने के बाद नेपाल में अप्रैल और मई में चुनावों की घोषणा कर दी गई है. कहा जा रहा है कि चीन से आया दल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में किसी तरह के विभाजन को रोकने की कोशिश करेगा.

    चीन के इस प्रतिनिधिमंडल ने अपने दौरे के पहले ही दिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात की है. ये प्रतिनिधिमंडल चार दिनों की यात्रा पर नेपाल आया है.

  11. छत्तीसगढ़: दो BSF कैंपों को हटाने की माँग क्यों कर रहे हैं स्थानीय लोग

    छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स के दो कैंप स्थापित करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

    इस इलाक़े का स्थानीय आदिवासी समुदाय बीएसएफ़ का कैंप लगाये जाने का विरोध कर रहा है.

    रविवार को विभिन्न ग्राम पंचायतों से जुड़े लगभग 50 प्रतिनिधियों ने इस कैंप के ख़िलाफ़ अपना इस्तीफ़ा सौंपा है.

    बताया गया है कि कटगाँव और कामतेड़ा नामक गाँवों के पास बीएसएफ़ के दो शिविर स्थापित किये गए हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस इलाक़े में बन रही एक सड़क के कार्य को सुरक्षा देने के लिए बीएसएफ़ यहाँ शिविर लगाये गए हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसके ख़िलाफ़ हैं.

    क़रीब 100 गाँवों से आने वाले हज़ारों ग्रामीण निवासी 23 दिसंबर से इन दो कैंपों को कहीं दूसरी जगह शिफ़्ट करने की माँग लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

    कम से कम 46 सरपंच, सात जनपद पंचायत सदस्य, एक डिप्टी सरपंच और एक ज़िला पंचायत सदस्य ने कैंपों को इन गाँवों के पास लगाये जाने के निर्णय के ख़िलाफ़ अपना इस्तीफ़ा सौंपा है.

    इनका कहना है कि वो बीएसएफ़ के कैंपों के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन जिस ज़मीन पर इन कैंपों की जगह चिन्हित की गई है, उसकी धार्मिक मान्यता है. वर्षों से उस ज़मीन पर स्थानीय लोग अपने धार्मिक आयोजन करते आये हैं.

    स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी रोष है कि कैंप की स्थापना के लिए बीएसएफ़ ने एक पेड़ काट गिराया है, जिसे स्थानीय लोग वर्षों से पूजते आये थे.

    प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान किया जा रहा है.

    स्थानीय जन-प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन को कैंप के लिए जगह देने से पहले उनसे चर्चा करनी चाहिए थी.

    हालांकि, बस्तर रेंज के इंस्पक्टर जनरल पुलिस सुंदर राज पी का कहना है कि बस्तर में लगाये गए 16 नये शिविरों में ये दो शिविर भी शामिल हैं जिनसे नक्सलियों की गतिविधियाँ बाधित हुई हैं और वो स्थानीय लोगों को भड़काकर, उनसे बीएसएफ़ के कैंपों का विरोध करवा रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं का पूरा ध्यान रखा गया है.

  12. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर, 27 दिसंबर 2020, बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से

  13. फैशन के इस दौर में कुदरत की फिक्र कौन करेगा?

    पुरानी कहावत है कि फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा ना करें लेकिन फैशन के इस दौर में कुदरत की फिक्र कौन करेगा?

    कुल कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन का 10 फ़ीसदी फैशन इंडस्ट्री से होता है. क्या इस महामारी के बाद कुछ बदलेगा?

  14. किसान आंदोलन: थाली बजाकर पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का विरोध

    आंदोलन कर रहे किसानों ने रविवार को ताली थाली बजाकर पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का विरोध किया.

    राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर शाहजहांपुर में हाइवे पर किसान आंदोलन का यह 15वां दिन है.

    ताली थाली बजाते हुए किसानों ने क़रीब दो किलोमीटर तक रैली निकाली.

    किसानों ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में जमकर नारेबाज़ी की.

  15. महिला अधिकारी ने रेलवे ट्रैक पर गिरे शख़्स को ट्रेन के नीचे कुचलने से बचाया

    मुंबई रेलवे स्टेशन पर एक शख़्स अचानक बेहोश हो गया. बेहोश होकर वह रेलवे ट्रैक पर गिर गया.

    मौके पर मौजूद महाराष्ट्र सुरक्षाबल की एक महिला अधिकारी ने तत्काल एक्शन लिया.

    महिला अधिकारी ने उसे ट्रेन के नीचे कुचलने से बचा लिया.

  16. सलमान ख़ान ने पनवेल के अपने फ़ार्म हाउस में मनाया बर्थडे

    बॉलीवुड अभिनेता सलमान ख़ान ने पनवेल में अपने फ़ार्म हाउस में जन्मदिन मनाया.

    कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ उनके फ़ार्म हाउस में जाते हुए देखे गए.

    सलमान ने मीडियाकर्मियों के साथ भी केक काटकर जन्मदिन मनाया. सलमान ख़ान 27 दिसंबर को 55 साल के हो गए हैं.

  17. कोरोना लेकर आए साल 2020 ने क्या अगले साल की चुनौतियां भी बढ़ा दीं?

    कोरोना महामारी के साथ शुरू हुआ साल 2020 लोगों के लिए बोझ बनकर आया और अब भी मुसीबतें बरकरार हैं.

    इस साल के 365 दिन साल जैसे लगे.

    भारत हो या पाकिस्तान या फिर दुनिया का कोई और देश, कोरोना महामारी के चलते सब पस्त हो गए. कराची से वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान की टिप्पणी.

  18. महाराष्ट्र का वो किसान आंदोलन जो छह सालों तक चला था

    दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे जा चुका है लेकिन पंजाब और हरियाणा से आए किसान इसकी परवाह किए बिना दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर पर जमे हुए हैं.

    किसान छह महीनों तक विरोध-प्रदर्शन करने की तैयारी के साथ आए हैं. एक महीने तो उनके यहाँ पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए हो गए और वो अब तक बिल्कुल भी पीछे नहीं हटते दिख रहे हैं.

    केंद्र सरकार जब तक तीन नए कृषि क़ानूनों को वापस नहीं ले लेती तब तक वो अपना विरोध जारी रखेंगे. यह उनका साफ तौर पर कहना है. कई लोग किसानों के छह महीने तक आंदोलन जारी रखने को लेकर उत्सुकता से भरे हुए हैं.

    इसी तरह से कुछ लोगों को इस बात पर यकीन करना मुश्किल हो सकता है कि महाराष्ट्र में छह साल तक किसानों का एक आंदोलन चला था. छह सालों से इसमें शामिल किसी किसान ने खेती नहीं की.

    इसकी वजह से भुखमरी की नौबत तक आ चुकी थी लेकिन किसान अपने रुख पर कायम रहे. ये सुनकर आपको ताज्जुब हो सकता है लेकिन यह सच है. महाराष्ट्र में ये किसान आंदोलन एक इतिहास बन चुका है.

    इसे 'चारी किसान हड़ताल' कहते हैं. महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में खोटी व्यवस्था के ख़िलाफ़ किसानों का ये आंदोलन चला था.

  19. किसान आंदोलन: 'भगत सिंह की याद में पीले कपड़े' पहन कर आईं ये औरतें

    वे एक बार फिर वहां डट गई थीं. वहीं बीच रास्ते में. रोहतक फ्लाईओवर पर उनका जत्था आकर रुका था. यह बठिंडा से आया हुआ महिलाओं का एक हुजूम था, जो ट्रैक्टर ट्रॉली पर बैठ कर सरकार के कृषि क़ानूनों का विरोध करने चला आया था. इन महिलाओं के लिए ये काले क़ानून हैं. और ये महिलाएं 'दिल्ली चलो' का नारा सुन कर इन कानूनों पर विरोध दर्ज कराने निकल आई थीं.

    रोहतक फ्लाईओवर पर सरकार के ख़िलाफ़ आ बैठे इस हुजूम में नौ महिलाएं थीं. इनमें सबसे उम्रदराज 72 साल की थीं और सबसे छोटी 20 साल की. एक छोटा बच्चा भी था.

    ये लोग बठिंडा के चक राम सिंह वाला से थे. दो पुराने दल के ही थे. अन्य, तीन उन लोगों की जगह लेने आई थीं, जो अब लौट चुकी हैं. 28 दिसंबर को गांव से और महिलाएं यहां आएंगीं. इसी तरह से बारी-बारी से वे यहां आ कर धरने पर बैठ रही हैं. इन लोगों ने इसी तरह से प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बनाई है.

    यहां आने के लिए ट्रैक्टर पर सहारा लेना पड़ा. पहले टिकरी बॉर्डर पार किया. फिर ट्रैक्टर, ट्रॉलियों और ट्रकों से होकर चलती रही. दो किसानों ने अपने ट्रैक्टर पर बिठा लिया. रोहतक फ्लाईओवर के खत्म होते ही एक युवा किसान ने पीला कपड़ा लहराया. यह रुकने का संकेत था.

  20. किसान आंदोलन: मोदी सरकार के कृषि क़ानूनों पर अरविंद केजरीवाल इतने आक्रामक क्यों हैं?

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ काफ़ी मुखर हैं. बीजेपी, कांग्रेस से लेकर अकाली दल इस मुखरता को 'केजरीवाल की अवसरवादिता' क़रार दे रहे हैं.

    वहीं, आम आदमी पार्टी का दावा है कि वो किसानों के साथ उस दिन से खड़ी है जब से ये क़ानून लोकसभा और राज्य सभा में पास किए गए थे.

    इस मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बादल और केजरीवाल के बीच पिछले कई हफ़्तों से 'ट्विटर जंग' छिड़ी हुई रही.

    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, "इन कृषि क़ानूनों के बारे में किसी भी मीटिंग में कोई चर्चा नहीं की गई थी और अरविंद केजरीवाल आपके बार-बार दोहराये गए झूठ से ये नहीं बदलने वाला है. और बीजेपी भी मुझपर दोहरे मापदंड रखने का आरोप नहीं लगा सकती है क्योंकि आपकी तरह मेरा उनसे किसी किस्म का गठजोड़ नहीं है."

    विपक्षी पार्टियों का सवाल है कि जब दिल्ली सरकार ने कृषि क़ानून को नोटिफ़ाई कर दिया तो उसके बाद उन्हें सदन में फाड़ने का मतलब क्या है?