केंद्रीय उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी के अधिकारियों पर दिए बयान के बाद लोकायुक्त पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के प्रमुख ने अपने
स्टाफ को पत्र लिखा है.
उन्होंने स्टाफ से कहा है कि वो "अभियुक्त" एचडी कुमारस्वामी के बयान से विचलित ना हों, जिन्होंने उनके खिलाफ "झूठे और
दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए हैं और धमकियां दी हैं".
कुमारस्वामी
के खिलाफ भूमि अधिसूचना रद्द करने के मामले में जांच चल रही है.
कर्नाटक लोकायुक्त
के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम चंद्रशेखर ने इस मामले में जांच कर रहे
अपने 80 सदस्यों के स्टाफ को एक पत्र में लिखा है, "जैसा कि आप जानते हैं कि
एसआईटी ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है. जमानत
पर रिहा अभियुक्त एचडी कुमारस्वामी ने हमें अपना काम करने से रोकने के लिए ऐसा
किया है."
चंद्रशेखर
ने अपने पत्र में लिखा है, "ऐसा लग रहा है कि उनका उद्देश्य मुझ पर हमला करके
एसआईटी के अधिकारियों के मन में भय पैदा करना है. लेकिन एक अभियुक्त, चाहे वह कितना भी बड़ा और शक्तिशाली क्यों न हो, एक अभियुक्त ही होता है. ऐसे आरोपों और धमकियों
से हमारे उत्साह में कोई कमी नहीं आनी चाहिए."
दरअसल, एचडी कुमारस्वामी ने अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल किए थे.
उन्होंने मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री के अलावा राज्य के गृह मंत्री से भी ये पूछा था कि कितने अधिकारियों को अलग-अलग पदों का वादा किया
गया था.
एचडी कुमारस्वामी ने कहा था, ''आप उनसे क्या करवा रहे हैं? बीके सिंह बेंगलुरु पुलिस के आयुक्त
हैं. चंद्रशेखर भी आयुक्त या सीआईडी प्रमुख हैं. आपने कितनी बार अधिकारियों से ये
चर्चा की है कि कुमारस्वामी को कैसे फंसाया जाए?''
कुमारस्वामी
ने अधिकारियों पर कई आरोप लगाते हुए कहा, ''ज़मीन के डीनोटिफिकेशन के मामले में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांगने की
जानकारी लीक होने पर चंद्रशेखर ने कैसे राज्यपाल के सचिवालय पर छापा मारने की
योजना बनाई थी? हिमाचल प्रदेश कैडर का यह अधिकारी
यहां काम करने के लिए मांगे गए पांच साल से ज़्यादा समय तक कैसे रहा?''
लोकायुक्त
पुलिस के सूत्रों के अनुसार, कुमारस्वामी के
बयान से एसआईटी के अधिकारी इतने परेशान थे कि वे टीम का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे.
इससे पहले कुमारस्वामी
से शुक्रवार को दो घंटे तक पूछताछ की गई थी. मामले के मुख्य अभियुक्त पूर्व
मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से 21 सितंबर को लगभग ढाई घंटे से ज़्यादा समय तक
पूछताछ की गई.
यह मामला
बेंगलुरु के गंगेनाहल्ली में 1.1 एकड़ जमीन से जुड़ा है. 5 जून, 2020 को मुख्यमंत्री रहते हुए येदियुरप्पा ने इससे जुड़ी अधिसूचना को वापस
ले लिया था.
उस जमीन की
जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी कुमारस्वामी की सास विमला के पास थी, जिन्हें इस अधिसूचना को वापस लिए
जाने का फायदा हुआ था. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को लोकायुक्त कार्यालय के बाहर पत्रकारों
से बातचीत में कहा था कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है.
जब से
राज्यपाल गहलोत ने मुडा (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में सिद्धारमैया को
कारण बताओ नोटिस भेजा है,
तब से सत्तारूढ़
कांग्रेस पार्टी के नेताओं,
खासकर मुख्यमंत्री
सिद्धारमैया और कुमारस्वामी और भाजपा नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बढ़
गया है.