लाइव, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान को लेकर क्या कहा

भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान को लेकर बयान दिया है.

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सुमंत सिंह

  1. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान को लेकर क्या कहा

    पार्वथनेनी हरीश

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    इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारतीय राजदूत ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के सैन्य हवाई हमलों की कड़ी निंदा की

    भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान को लेकर बयान दिया है.

    संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पार्वथनेनी ने कहा कि अपने ही देश के भीतर सक्रिय समूहों को 'फ़ितना अल हिंदुस्तान' कहने का पाकिस्तान का फ़ैसला 'आधिकारिक तौर पर प्रायोजित दुष्प्रचार' है.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि पिछले साल पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों और संगठनों को आधिकारिक तौर पर 'फ़ितना अल हिंदुस्तान' घोषित किया था.

    पाकिस्तान ने बिना कोई सबूत दिए आरोप लगाया था कि ये संगठन 'भारत के इशारे पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल' हैं.

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारतीय राजदूत ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के सैन्य हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की.

    भारत का कहना है कि इन हमलों से बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हो रहे हैं और अफ़ग़ान जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

    पार्वथनेनी ने कहा, "मैं फिर दोहराना चाहता हूं. किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम दे देने से ज़िम्मेदार पक्ष दोषमुक्त नहीं हो जाता. नागरिकों की हत्या करना, उन्हें घायल करना और बच्चों को अनाथ बनाना आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं है.".

    भारतीय राजदूत ने कहा, "अपनी नाकामियों के लिए पड़ोसी देशों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है. दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश नाकाम होगी."

  2. शी जिनपिंग बोले, 'चीन और उत्तर कोरिया की तक़दीर एक'

    शी जिनपिंग और किम जोंग उन

    इमेज स्रोत, Xinhua

    इमेज कैप्शन, शी जिनपिंग 2019 के बाद उत्तर कोरिया के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर हैं

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उत्तर कोरिया के दो दिन के दौर पर हैं. 2019 के बाद यह उनका उत्तर कोरिया का पहला आधिकारिक दौरा है.

    सोमवार सुबह राजधानी प्योंगयांग पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया.

    बाद में शी और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच शिखर बैठक हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया.

    चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़, शी जिनपिंग ने सोमवार रात एक डिनर कार्यक्रम में कहा कि चीन और उत्तर कोरिया "पहाड़ों और नदियों से जुड़े हुए हैं और उनकी तक़दीर एक ही है."

    शी ने यह भी कहा कि उन्होंने किम के साथ 'समय के रुझान को समझने' और 'उच्च स्तर के सहयोग के साथ-साथ लोगों के बीच रिश्तों को और मज़बूत करने' पर 'महत्वपूर्ण सहमति' बनाई है.

  3. ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा, 'बहुत जल्द ईरान के सामने आप अकेले पड़ सकते हैं: इसराइली मीडिया

    बिन्यामिन नेतन्याहू

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा था कि वे ईरान पर जवाबी हमला करने से बचें (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को चेतावनी दी कि अगर तनाव बढ़ता रहा तो वह जल्द ही ईरान के मामले में अकेले पड़ सकते हैं.

    ट्रंप ने यह बात इसराइल के 'चैनल 12' को दिए एक इंटरव्यू में कही.

    इसराइली न्यूज़ एजेंसी ने सोमवार को बताया कि नेतन्याहू ने रविवार को ईरान पर हमला करने के अपने अंतिम फ़ैसले के बारे में ट्रंप को योजना के अंतिम स्टेज तक जानकारी नहीं दी थी.

    रविवार को ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा था कि वे ईरान पर जवाबी हमला करने से बचें.

    दरअसल, इसराइल की ओर से लेबनान की राजधानी बेरूत पर हमला किए जाने के बाद ईरान ने इसराइल पर हमले किए थे.

    'चैनल 12' की रिपोर्ट के मुताबिक़, दोनों नेताओं के बीच बातचीत किसी सहमति के बिना समाप्त हुई और नेतन्याहू ने इस मामले में अपने अंतिम फ़ैसले की जानकारी ट्रंप को नहीं दी.

    बाद में नेतन्याहू ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को बताया कि उन्होंने ईरान पर हमला करने का फ़ैसला कर लिया है. ट्रंप ने 'चैनल 12' से कहा कि वह इस हमले के "पैमाने को कम कराने" में सफल रहे.

    ट्रंप ने नेतन्याहू को ईरान के साथ जारी हमलों को पूर्ण युद्ध में बदलने से बचने की चेतावनी भी दी.

    उन्होंने 'चैनल 12' से कहा, "मैंने बीबी से कहा, आपको बहुत सावधान रहना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं, क्योंकि बहुत जल्द ऐसा हो सकता है कि ईरान के सामने आप अकेले रह जाएं."

  4. एच-1बी वीज़ा के लिए एक लाख डॉलर की फीस को कोर्ट ने अवैध क़रार दिया

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, पिछले साल अमेरिका ने नए एच-1बी आवेदनों में एक लाख डॉलर की फ़ीस जोड़ी

    अमेरिका के एक फ़ेडरल जज ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया, जिसके तहत हाई स्किल्ड विदेशी कर्मचारियों के लिए नए एच-1बी वीज़ा पर 1 लाख डॉलर की फ़ीस लगाई गई थी.

    बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएसन्यूज़ के मुताबिक़, अमेरिकी ज़िला जज लियो सोरोकिन ने अपना फ़ैसला 20 राज्यों के पक्ष में सुनाया. इन राज्यों ने सितंबर में ट्रंप की ओर से घोषित नई फ़ीस को चुनौती दी थी.

    जज का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की अनुमति के बिना एच-1बी आवेदन पर एक लाख डॉलर का टैक्स लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है.

    पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से नियुक्त किए गए जज ने 42 पन्नों के अपने फ़ैसले में लिखा कि "ऐसी कोई वैधानिक शक्ति मौजूद नहीं है जो (ट्रंप प्रशासन को) एच-1बी आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का टैक्स लागू करने की अनुमति देती हो."

    अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एक बयान में सोरोकिन के फ़ैसले को 'ब्लैटेंट ज्यूडिशियल एक्टिविज़्म' यानी 'राजनीतिक विचारों पर आधारित फ़ैसला' बताया और ट्रंप प्रशासन के आव्रजन सुधारों का बचाव किया.

    एच-1बी वीज़ा क्या है?

    सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक़, एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम को कांग्रेस ने 1990 में शुरू किया था. इसके तहत अमेरिका स्थित कंपनियों को विशेष पेशेवर क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से अधिकतम छह साल तक नियुक्त करने की अनुमति मिलती है.

    कांग्रेस ने हर साल जारी किए जाने वाले एच-1बी वीज़ा की संख्या 65,000 तय की है. इसके अलावा एडवांस्ड डिग्री रखने वाले लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीज़ा जारी किए जा सकते हैं.

    इस वीज़ा कार्यक्रम के तहत नियोक्ताओं यानी कंपनियों को कुछ निर्धारित फ़ीस भी देनी होती है, जो आमतौर पर 1,700 डॉलर से 4,500 डॉलर के बीच होती है.

    लेकिन पिछले साल ट्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सभी नए एच-1बी आवेदनों में 100,000 डॉलर की फ़ीस जोड़ी गई.

    यूएस सिटीज़नशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज़ (यूएससीआईसी) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में मंज़ूर किए गए कुल एच-1बी वीज़ा में 71 प्रतिशत लाभार्थी भारत से थे, जबकि चीन 11.7 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर था.

  5. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैं नेतन्याहू को जो करने के लिए कहता हूँ, उसे वह कर देते हैं'

    डोनाल्ड ट्रंप और बिन्यामिन नेतन्याहू

    इमेज स्रोत, Jim WATSON / AFP via Getty Images

    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान एक 'बेहद मज़बूत समझौते के क़रीब' हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीबीसी से एक संक्षिप्त बातचीत में कहा है कि अगर वह इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को कुछ करने के लिए कहते हैं, तो वह उसे कर देते हैं.

    ट्रंप से बीबीसी की नॉर्थ अमेरिका संपादक सारा स्मिथ ने सोमवार को फ़ोन पर बात की.

    उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछा कि उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को ईरान पर हमला रोकने के लिए कैसे राज़ी किया.

    ट्रंप ने जवाब दिया, "मैंने सिर्फ़ इतना कहा, 'हमें समझदारी से काम लेना होगा.' हम एक बेहद मज़बूत समझौते पर हस्ताक्षर करने के बहुत क़रीब हैं, एक बहुत अच्छे समझौते पर."

    उन्होंने कहा, "न परमाणु हथियार होंगे, न कुछ और. आप जानते हैं, हमें बहुत ज़्यादा कॉमन सेंस का इस्तेमाल करना होगा."

    जब ट्रंप से पूछा गया कि उनकी ओर से इसराइल से ईरान के हमलों के जवाब में मिसाइलें न दागने के आग्रह के बावजूद नेतन्याहू ने जवाबी हमला किया.

    इस पर ट्रंप ने कहा, "नहीं, नहीं. वे पहले ही जा चुके थे. वे पहले ही जा चुके थे. वे पहले से ही रास्ते में थे."

    वहीं, ट्रंप ने नेतन्याहू के बारे में कहा, "अगर मैं उनसे कुछ करने को कहता हूं, तो वह कर देते हैं."

    दो महीने पहले ईरान के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद रविवार को पहली बार इसराइल और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए. इसके बाद अमेरिका और इसराइल के नेताओं के बीच बातचीत हुई.

  6. नमस्कार!

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