जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों को लेकर "कॉकरोच जनता पार्टी" के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है.
इस पत्र में उन्होंने सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं और छात्रों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है.
पत्र के मुताबिक़, जंतर-मंतर पर पिछले 15 दिनों से प्रदर्शन जारी है और शिक्षा विशेषज्ञ सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का शनिवार को 7वां दिन है.
दीपके ने पत्र में प्रधानमंत्री से सवाल किया है कि सरकार लंबे समय से इस आंदोलन और भूख हड़ताल को क्यों नज़रअंदाज़ कर रही है?
पत्र में दावा किया गया है कि देश में परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है. इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री पर नैतिक ज़िम्मेदारी न लेने और इस्तीफ़ा न देने का आरोप भी लगाया है.
पत्र में दीपके ने कहा है, "हम यहां बैठे हैं क्योंकि आपकी सरकार बार-बार परीक्षा पेपर लीक को रोकने में विफल रही है, जिसने करोड़ों भारतीय युवाओं के भविष्य और विश्वास को तोड़ दिया है. हम यहां बैठे हैं क्योंकि आपके शिक्षा मंत्री ने नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की और लगभग पांच वर्षों से पद पर बने हुए हैं."
"हम यहां बैठे हैं क्योंकि आपकी सरकार उन छात्रों के परिवारों को न तो राहत दे सकी, न सम्मान, और न ही न्याय, जिन्होंने इस टूटी हुई व्यवस्था के बोझ तले आत्महत्या की. और सबसे महत्वपूर्ण बात, हम यहां बैठे हैं क्योंकि हम अब भी संविधान के उस मूल वादे पर विश्वास करते हैं कि निर्वाचित प्रतिनिधि मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं."
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
अभिजीत दीपके ने आगे कहा, “कोई भी सरकार सवालों से ऊपर नहीं है. कोई भी मंत्री ज़िम्मेदारी से ऊपर नहीं है. और कोई भी प्रशासन नागरिकों को जवाब मांगने से चुप नहीं करा सकता.”
दीपके ने इस पत्र में दिल्ली पुलिस पर भी आरोप लगाया है.
पत्र में अभिजीत ने कहा, "दिल्ली पुलिस ने हमारे प्रदर्शन स्थल पर छात्रों के साथ मारपीट की. एसीपी अजय शर्मा और इंस्पेक्टर नीरज साहू के सीधे आदेशों पर पुलिस ने किताबों को कीचड़ में फेंक दिया, जिनमें छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर और शहीद भगत सिंह से संबंधित साहित्य शामिल था. हम मांग करते हैं कि इन अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए."
उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों के निलंबन की भी मांग की है.
पत्र में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के बजाय सरकार को संवाद करना चाहिए और युवाओं की आवाज़ सुननी चाहिए.
आख़िर में अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वो चुप्पी तोड़ें, शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं पर जवाब दें और ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई सुनिश्चित करें.