बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी को सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उनके ख़िलाफ़ कथित रूप से प्रसारित किए गए मानहानिकारक, डीपफ़ेक और एआई-जनरेटेड पोस्ट को लेकर मुक़दमा दायर करने की अनुमति दे दी.
लाइव लॉ के मुताबिक़, मामले की सुनवाई जस्टिस अभय आहूजा की पीठ के सामने हुई. गडकरी की ओर से वकील संदीप एस लड्डा पेश हुए और उन्होंने मुक़दमा दायर करने के लिए अदालत से अनुमति मांगी.
अदालत ने गडकरी को एक्स, मेटा, गूगल और अन्य अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ सिविल मुक़दमा दाख़िल करने की अनुमति दी है. गडकरी ने इन पोस्ट को हटाने और उचित राहत दिए जाने की मांग को लेकर अदालत का रुख़ किया है.
गडकरी ने अपनी याचिका में कहा कि वह वर्ष 2014 से लगातार सड़क परिवहन मंत्री हैं, लेकिन ई20 नीति से जुड़े फ़ैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं रही है. इसके बावजूद कुछ अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर डीपफ़ेक और भ्रामक सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित की.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन पोस्ट के ज़रिए गडकरी और उनके परिवार को एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से आर्थिक लाभ मिलने का झूठा दावा किया गया. इसमें भ्रष्टाचार, पक्षपात, हितों के टकराव और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
गडकरी ने अपनी याचिका में ऐसे 24 कथित मानहानि करने वाली पोस्ट का ज़िक्र किया है और अदालत से इन्हें हटाने का आदेश देने की मांग की है.
गडकरी की ओर से कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह की सार्वजनिक बहस, आलोचना या नीतियों पर चर्चा को रोकना नहीं है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन डीपफ़ेक पोस्ट के ज़रिए उनकी पहचान और छवि का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया, जो उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है.
इसके अलावा, गडकरी ने इस मामले में 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है.