अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिका के ज़्यादातर राष्ट्रपति की विरासत को पीछे छोड़ दिया है.
सारांश
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने किया कमला हैरिस का समर्थन.
मायावती बोलीं- कई बार प्रतिबंधित रहे आरएसएस की गतिविधियाँ राजनीतिक.
कांवड़ यात्रा के रूट पर दुकानदारों को दिए मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई.
आर्थिक सर्वे 2023-24 में वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5-7 फ़ीसदी रहने का अनुमान.
संसद में राहुल गांधी ने नीट परीक्षा में कथित धांधली का मुद्दा उठाते हुए कहा- भारत की परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. कहा- पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना ग़लत है.
लाइव कवरेज
सौरभ कुमार यादव, चंदन कुमार जजवाड़े
कमला हैरिस ने जो बाइडन की तारीफ़ के पुल बांधे
इमेज स्रोत, Getty Images
अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने
कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने एक ही कार्यकाल में, अमेरिका के ज़्यादातर
राष्ट्रपति के दो कार्यकाल की विरासत को पीछे छोड़ दिया है.
डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ
से जो बाइडन के राष्ट्रपति पद की दोबारा दावेदारी छोड़ने के बाद कमला हैरिस का ये पहला संबोधन है.
कमला हैरिस पेरिस ओलंपिक से पहले, व्हाइट हाउस में अमेरिकी खिलाड़ियों के लिए
हुए सम्मान समारोह में बोल रही थीं.
उन्होंने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति जो बाइडन की
तरफ से खिलाड़ियों का स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएँ भी दीं.
कमला हैरिस ने कहा, "मैंने उनकी (जो
बाइडन) ईमानदारी, अखंडता, देश के प्रति प्यार और समर्पण को अनुभव किया है. मैं
इसकी गवाह रही हूँ. पिछले तीन साल की उनकी विरासत का कोई सानी नहीं है.”
कमला हैरिस ने बताया कि राष्ट्रपति बाइडन के स्वास्थ्य में तेज़ी
से सुधार हो रहा है. कुछ ही दिन पहले जो बाइडन कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे.
राष्ट्रपति
बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी छोड़ने के बाद इसके लिए कमला
हैरिस के नाम का समर्थन किया है.
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने किया कमला हैरिस का समर्थन, क्या कहा?
इमेज स्रोत, Getty Images
अमेरिका
की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अगले अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए कमला
हैरिस का समर्थन किया है.
हिलेरी
क्लिंटन भी डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रह
चुकी हैं.
हिलेरी क्लिंटन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, “मैं कमला
हैरिस को लंबे समय से जानती हूँ. वे प्रतिभाशाली वकील रह चुकी हैं. वे दोषी पाए गए अपराधी, डोनाल्ड ट्रम्प और हमारी आज़ादी
छीनने के 'प्रोजेक्ट 2025' के एजेंडे के ख़िलाफ़ लड़ेंगी. लेकिन वे ये काम अकेली नहीं कर सकती.”
हिलेरी क्लिंटन ने लोगों से इस ‘ऐतिहासिक लड़ाई’ में
कमला हैरिस के साथ खड़े होने की अपील की है.
साल 2016 में हिलेरी क्लिंटन अमरीका में किसी प्रमुख राजनीतिक
दल की ओर से राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी हासिल करने वाली पहली महिला बनी थीं.
उस साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी का मुक़ाबला
रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप से हुआ था, जिसमें ट्रंप की जीत हुई थी.
कमला हैरिस के नाम पर क्या डेमोक्रेटिक पार्टी लगाएगी अपनी मुहर
इमेज स्रोत, Getty Images
जो बाइडन अगले साल जनवरी तक अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे.
इस बीच उम्मीद की जा रही है कि वो इसी सप्ताह देश को संबोधित कर सकते हैं.
भले ही जो बाइडन ने उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाने का
समर्थन किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित
उम्मीदवार हैं.
डेमोक्रेटिक पार्टी में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए अभी भी
मुक़ाबला बाक़ी है.
चुनाव के दिन क़रीब होने के बाद भी पार्टी में नए
उम्मीदवार को नामित करने का रास्ता स्पष्ट नहीं है. डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन
यानी डीएनसी नए उम्मीदवार को चुनने के लिए रूपरेखा तय करेगी.
19 अगस्त से
शुरू होने वाले इस कन्वेंशन में पार्टी के प्रतिनिधि, डेमोक्रेटिक
पार्टी का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार आधिकारिक तौर पर चुन सकते हैं.
डीएनसी की नियम समिति का कहना है कि अगले कदमों पर चर्चा करने के
लिए बुधवार को उसकी बैठक होगी.
सम्मेलन में भाग लेने वाले पार्टी के प्रतिनिधि या डेलिगेट्स आमतौर
पर प्राथमिक प्रक्रिया के दौरान चुने गए उम्मीदवारों को अपना वोट देते हैं. लेकिन
अब उन्हें किसी अन्य उम्मीदवार को वोट देने की छूट होगी.
यदि पार्टी किसी नए उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए एकजुट नहीं
होती है, तो इसके लिए साल 1968 के बाद पहली बार इसके लिए
खुला अधिवेशन हो सकता है.
इसका मतलब यह है कि यदि उनके सामने कई उम्मीदवार हैं तो
प्रतिनिधि यह फ़ैसला लेने के लिए स्वतंत्र होंगे कि वो उनमें से किसे अपना वोट
दें.
इस बीच जो बाइडन की उम्मीदवारी छोड़ने के बाद से उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के प्रचार ने 24 घंटे में लगभग पांच करोड़ डॉलर का फंड जुटाया है.
बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर फ़ैसला नहीं, अब जेडीयू का लालू पर पलटवार
इमेज स्रोत, Getty Images
बिहार सरकार का नेतृत्व कर रहे जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है
कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, विशेष पैकेज और विशेष सहायता के लिए नीतीश
कुमार है.
नीरज कुमार ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर निशाना
साथा है और कहा है, “माननीय लालू प्रसाद जी आप उम्र के चौथे पड़ाव पर हैं, चिंता
से दूर रहिए. आपको केवल एक बात की चिंता होनी चाहिए कि आपके पुत्र तेजस्वी यादव
विधानसभा के मानसून सत्र से लापता हैं.”
नीरज कुमार ने लालू प्रसाद यादव को सुबह और शाम की सैर जारी
रखने की नसीहत दी है और दावा किया है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विकसित बिहार
बनाएंगे.
इससे पहले आज से शुरू हुए संसद के बजट सत्र में एक सवाल के
जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया है कि बिहार को विशेष
राज्य का दर्जा देने को लेकर कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.
पंकज चौधरी ने बताया है कि अतीत में
विशेष श्रेणी का दर्जा नेशनल डिवेलपमेंट काउंसिल (एनडीसी) कुछ राज्यों को देती रही
है. इस फ़ैसले को राज्य की ख़ास परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता रहा है.
वित्त राज्य मंत्री के इस जवाब के बाद बिहार में विपक्षी दल
आरजेडी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है.
सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट कर आरजेडी ने कहा था कि नीतीश कुमार और जेडीयू विशेष राज्य
के दर्जे पर ढोंग की राजनीति करते हैं.
आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इस मुद््दे पर नीतीश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है.
मायावती बोलीं- कई बार प्रतिबंधित रहे आरएसएस की गतिविधियाँ राजनीतिक और चुनावी
इमेज स्रोत, Getty Images
सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की शाखाओं में शामिल
होने पर लगे प्रतिबंध हटने के बाद उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी प्रमुख
मायावती ने प्रतिक्रिया दी है.
मायावती ने एक्स पर लिखा है, “सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस की शाखाओं में जाने
पर 58 साल से जारी
प्रतिबंध को हटाने का केन्द्र का फ़ैसला देशहित से परे, राजनीति से
प्रेरित संघ तुष्टिकरण का फ़ैसला है, ताकि सरकारी नीतियों व इनके अहंकारी
रवैयों आदि को लेकर लोकसभा चुनाव के बाद दोनों के बीच तीव्र हुई तल्ख़ी दूर हो
सके."
मायावती के मुताबिक़- सरकारी कर्मचारियों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर निष्पक्षता के साथ जनहित और जनकल्याण में काम करना ज़रूरी
होता है जबकि कई बार प्रतिबंधित रहे आरएसएस की गतिविधियाँ राजनीतिक ही नहीं बल्कि
पार्टी विशेष के लिए चुनावी भी रही हैं.
मायावती
ने केंद्र सरकार के फ़ैसले को अनुचित बताया है और इसे फ़ौरन वापस लेने की मांग की
है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट के ज़रिए केंद्र सरकार के इस फै़सले का स्वागत किया है.
वहीं कांग्रेस समेत कई दलों ने इसका विरोध किया है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, "मोदी जी सरकारी कर्मचारियों पर आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर लगा प्रतिबंध हटाकर सरकारी दफ़्तरों के कर्मचारियों को विचारधारा के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं."
नूंह: सांप्रदायिक हिंसा के एक साल बाद कैसे शुरू हुई जलाभिषेक यात्रा, सत सिंह, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज कैप्शन, नूंह के नल्हड़ में मौजूद शिव मंदिर (फ़ाइल फ़ोटो)
हरियाणा के नूंह में सोमवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के
साथ ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा की शुरुआत हुई. यात्रा का जगह-जगह पर मुस्लिम समाज
के लोगों ने भी स्वागत किया.
इस यात्रा में बड़ी संख्या में संत समाज से जुड़े लोग भी
शामिल हुए. ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा को लेकर ज़िला उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने
कहा कि इलाक़े में माहौल शांतिपूर्वक है.
ब्रजमंडल यात्रा दोपहर 12 बजे नल्हरेश्वर
मंदिर से शुरू हुई. कुछ लोग बाहर से आ रहे हैं, कुछ लोग
स्थानीय हैं. दोनों समुदाय के लोग यात्रा का स्वागत करने के लिए जुटे थे.
ज़िला उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने कहा कि उन्होंने नल्हरेश्वर मंदिर
का दौरा किया है और यह यात्रा शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न होगी.
उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने कहा कि पिछली बार जो हिंसा हुई
थी उससे सीख लेते हुए इंटरनेट
की सेवाएं बाधित की गई हैं ताकि कोई शरारती तत्व गड़बड़ ना करे. एहतियात के तौर पर इलाक़े में इंटरनेट की सेवाएं 24 घंटे बंद रखने का फ़ैसला
लिया गया है. उन्होंने कहा कि नूंह के तीनों मंदिरों में किसी प्रकार की कोई
दिक्कत नहीं है
डीसी नूंह ने कहा कि आयोजकों ने अपने-अपने तरीक़े से
व्यवस्था की है, जिन्होंने पंडाल लगाए हैं, उन्होंने
भी प्रशासन से अनुमति ली है.
बीते साल
ब्रजमंडल यात्रा के दौरान नूंह ज़िले में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी जिसमें छह
लोगों की मौत हुई थी.
अजीत आगरकर ने सूर्यकुमार यादव को श्रीलंका के साथ टी20 सिरीज़ के लिए कप्तान बनाने की वजह बताई
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर (फ़ाइल फ़ोटो)
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में सूर्यकुमार यादव को श्रीलंका टूर के लिए भारतीय टी20 टीम का कप्तान बनाए जाने के कारणों के बारे में बात की है.
आगरकर ने कहा कि सूर्या को कप्तान इसलिए बनाया गया है क्योंकि वह सबसे योग्य उम्मीदवारों में से एक हैं. उनके पास ज़बरदस्त क्रिकेटिंग ब्रेन हैं. वह दुनिया के शानदार बल्लेबाज़ों में से एक हैं और वे सभी मैच खेलने वाले हैं.
आगरकर ने हार्दिक पांड्या को लेकर कहा कि वह एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं उनकी जैसी प्रतिभा मिलना बहुत मुश्किल है. उनकी फिटनेस को लेकर समस्याएं रही हैं. इस फ़ैसले के पीछे यह सोच भी रही है.
उन्होंने कहा कि 'हमें ऐसा खिलाड़ी चाहिए था जो हर समय उपलब्ध रहे. सूर्या के पास वह गुण हैं जो आपको एक कप्तान के रूप में सफल होने के लिए चाहिए.'
बीजेपी ने ममता बनर्जी से पूछा- क्या आप भारत को तोड़ना चाहती हैं?
इमेज स्रोत, ANI
बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे पर हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी के बयान पर बीजेपी की प्रतिक्रिया आई है.
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि ममता बनर्जी ने कहा है कि वो अपने
दरवाज़े खुले रखेंगी और किसी को भी बंगाल में आने देंगी, बांग्लादेश के लोग हमारे
दरवाज़े खटखटाएंगे तो ज़रूर शरण देंगे.
उन्होंने कहा कि ममता जी आप वही हैं जिन्होंने सीएए के बारे में कहा था कि हम
किसी भी हिंदू, सिख, पारसी और ईसाई शरणार्थी को, जो हिंसा से पीड़ित होकर बंगाल में
आएंगे उनको घुसने नहीं देंगे.
"ममता जी ने सीएए का हमेशा विरोध किया है जबकि सीएए का कोई संबंध भारत के
नागरिकों से बिलकुल नहीं था. आज वो कह रही हैं कि जो भी आएगा हम उसे बसाएंगे, इसका
मतलब क्या है? ममता, अखिलेश और राहुल गांधी संविधान की बात करते हैं. ये अधिकार तो
केंद्र सरकार के पास है."
"ममता जी को याद दिलाऊंगा कि साल 1971 में जो विस्थापित भारत आए थे उन्हें केंद्र
सरकार ने बसाया था लेकिन एक मुख्यमंत्री सीधी घोषणा करे इसका क्या मतलब है, क्या
आप भारत को तोड़ना चाहती हैं?"
केंद्र सरकार ने बताया बिहार को क्यों नहीं मिला विशेष राज्य का दर्जा, आरजेडी बोली नीतीश ढोंग करते हैं
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फ़ाइल फ़ोटो)
संसद में आज से शुरू हुए बजट सत्र में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त
राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने को
लेकर कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.
पंकज चौधरी ने बताया है कि अतीत में विशेष श्रेणी का दर्जा नेशनल डिवेलपमेंट
काउंसिल (एनडीसी) कुछ राज्यों को देती रही है. इस फ़ैसले को राज्य की ख़ास परिस्थितियों
के आधार पर लिया जाता रहा है.
वित्त राज्य मंत्री ने बताया है कि पहले बिहार को विशेष राज्य का दर्ज देने की
चर्चा इंटर मिनिस्टीरियल ग्रुप (आईएमजी) में हुई थी जिसकी रिपोर्ट 30 मार्च 2012
को जमा की गई. आईएमजी एनडीसी के मौजूदा मानदंडों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि बिहार के लिए विशेष
श्रेणी का दर्जा देने का मामला नहीं बनता है.
वित्त राज्य मंत्री के
इस जवाब के बाद बिहार में विपक्षी दल आरजेडी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना
साधा है.
सोशल मीडिया वेबसाइट
एक्स पर पोस्ट करके आरजेडी ने कहा है कि नीतीश कुमार और जेडीयू विशेष राज्य के
दर्जे पर ढोंग की राजनीति करते हैं.
वहीं बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा है कि 14वें वित्त आयोग ने साल
2015 में सामान्य श्रेणी और विशेष श्रेणी का विभाजन ख़त्म कर दिया था.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसी भी राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा नहीं
दिया गया है क्योंकि भारत का संविधान इस तरह के वर्गीकरण की व्यवस्था नहीं करता
है.
कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों के नाम बताने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर बोले अखिलेश यादव
इमेज स्रोत, ANI
यूपी के मुज़फ़्फ़रनगर
में कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों के नाम सार्वजनिक करने पर सुप्रीम कोर्ट की
अंतरिम रोक लगाने के फ़ैसले पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने
प्रतिक्रिया दी है.
अखिलेश यादव ने कहा है कि जिस समय उन्हें इस तरह के फ़ैसले की जानकारी मिली थी उसी समय उन्होंने कहा
था कि सुप्रीम कोर्ट इसका संज्ञान ले और इस कार्रवाई को रोके.
“सांप्रदायिक राजनीति का
दिया फड़फड़ा रहा है इस वजह से ये इस तरह के फ़ैसले ले रहे हैं. सांप्रदायिक
राजनीति ख़त्म होने जा रही है और इसका दुख बीजेपी को है.”
“ये बड़ा संवेदनशील मुद्दा है और उत्तर प्रदेश में काफ़ी समय से देख रहे हैं कि अधिकारी
किस तरह से राजनीतिक दलों का काम कर रहे हैं.”
आरएसएस की गतिविधियों और सरकारी कर्मचारियों को लेकर क्या बोले ओवैसी और दूसरे नेता
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, आरएसएस के स्वयंसेवक (फाइल फोटो)
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर रविवार को पोस्ट किया था कि सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा लिया गया है.
इसके बाद से इस फ़ैसले को लेकर देश की राजनीति में काफ़ी चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है.
विभिन्न दलों के नेता इस आदेश को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. आरएसएस ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
आरएसएस ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इस फै़सले का स्वागत किया है.
आरएसएस ने अपने ट्वीट में लिखा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 99 वर्षों से लगातार राष्ट्र के पुनर्निर्माण एवं समाज की सेवा में लगा हुआ है.
आरएसएस ने लिखा है कि 'तत्कालीन सरकार ने निराधार ही शासकीय कर्मियों के संघ की गतिविधियों में भाग लेने पर रोक लगा दी थी. वर्तमान सरकार का फै़सला समुचित है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुष्ट करने वाला है.'
इस आदेश को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि, महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल और नेहरू की सरकार ने आरएसएस पर बैन लगाया था.
इमेज स्रोत, ANI
ओवैसी ने कहा कि आरएसएस से बैन इस शर्त पर हटाया गया था कि वे भारत के संविधान को मानेंगे और राष्ट्रीय झंडे को मानेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को संघ की गतिविधियों में भाग लेने देने का फै़सला ग़लत है.
उन्होंने कहा कि संघ का सदस्य भारत की विविधता को नहीं मानता है वो हिंदू राष्ट्र की कसम खाता है.
कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि यह नौकरशाही की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है.
उन्होंने कहा कि एक कार्यरत सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनैतिक संगठन का भाग नहीं हो सकता है.
उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा किसी कारण से ही इस संस्था पर बैन लगाया गया था, सरकार को यह बताना चाहिए कि उन्होंने यह बैन क्यों हटाया है.
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी इस आदेश को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि यह बैन बहुत पुराना है, 1966 में लगाया था. उसके बाद जनसंघ की सरकार बनी उन्होंने नहीं हटाया, उसके बाद वाजपेयी की सरकार बनी उन्होंने भी नहीं हटाया.
उन्होंने कहा है कि दस साल मोदी सरकार रही उन्होंने भी नहीं हटाया, अचानक क्या होगा, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए.
ब्रेकिंग न्यूज़, यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर में कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों के नाम सार्वजनिक करने पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, उमंग पोद्दार, बीबीसी संवाददाता
इमेज स्रोत, ANI
कांवड़ यात्रा के रूट
पर दुकानदारों के नाम सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित करने के मुज़फ़्फ़रनगर एसएसपी के
आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है.
जस्टिस ऋषिकेश रॉय और
जस्टिस एसवीएन भट्टी की दो जजों वाली पीठ ने ये आदेश दिया है.
इसके साथ ही पीठ ने कांवड़
यात्रा के रूट पर दुकानदारों के नाम सार्वजनिक करने को लेकर मध्य प्रदेश, उत्तर
प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया है.
इस मामले की अगली सुनवाई
शुक्रवार को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा
है कि वो निर्देशों को अमल में लाने पर रोक लगा रही है, दूसरे शब्दों में कहें तो
खाना बेचने वालों को ये बताना ज़रूरी है कि वो किस तरह का खाना दे रहे हैं लेकिन
उन पर मालिक या स्टाफ़ का नाम सार्वजनिक करने के लिए ज़ोर नहीं डाला जा सकता है.
बजट से पहले संसद में आर्थिक सर्वे पेश, 6.5-7 फ़ीसदी जीडीपी रहने का अनुमान
इमेज स्रोत, ANI
केंद्रीय मंत्री
निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक सर्वे 2023-24 पेश कर दिया. मंगलवार को वो आम बजट पेश करेंगी.
इस बार के आर्थिक
सर्वे में वित्त वर्ष 2025 में भारत की जीडीपी के 6.5-7 फ़ीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है.
इसमें जोखिमों को समान
रूप से संतुलित रखा गया है साथ ही इस तथ्य को ध्यान में रखा गया है कि बाज़ार की अपेक्षाएं ऊंचे स्तर पर हैं.
इसके साथ ही
आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि आरबीआई का अनुमान है कि वित्त
वर्ष 2025 में महंगाई दर 4.5 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है जो कि वित्त वर्ष 2026 में
4.1 फ़ीसदी होगी.
इसमें ये भी
बताया गया है कि चीन से एफ़डीआई में बढ़ोतरी हुई है जो कि ग्लोबल सप्लाई
चेन में भारत की भागीदारी को बढ़ा सकता है और इससे निर्यात भी बढ़ा है.
आर्थिक सर्वे
में 54 फ़ीसदी बीमारियों के लिए अस्वास्थ्यकारी
आहार को ज़िम्मेदार ठहराया गया है और माना गया है कि इसमें बदलाव की ज़रूरत है.
धीरेंद्र शास्त्री की चेतावनी बागेश्वर धाम की दुकानों पर लगानी होगी नेम प्लेट, शुरैह नियाज़ी, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
उत्तर प्रदेश में
कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते पर पड़ने वाली दुकानों पर अपना नाम लिखने के आदेश
का असर अब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी पड़ने लगा है.
पहले प्रदेश के दो बीजेपी
विधायकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि प्रदेश में भी इसी
तरह से किया जाए.
उसके बाद अब बागेश्वर
धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धाम पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों
को चेतावनी दी है कि 10 दिन के अंदर अपनी दुकानों पर नेमप्लेट लगवा लें, नहीं तो क़ानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें.
शास्त्री ने यह बात
गुरु पूर्णिमा के मौक़े पर धाम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रविवार को
कही. इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश की तारीफ़ की जिसमें दुकानदारों को दुकानों के बाहर नाम लिखने को कहा गया है.
धीरेंद्र कृष्ण
शास्त्री ने कहा, “हम बागेश्वर धाम में भी दुकान लगाने वाले सभी दुकानदारों को आदेश देते हैं कि
अपनी दुकानों के बाहर नेमप्लेट ज़रूर लगाएं, जिससे पता चल सके कि राम वाले हैं या रहमान वाले.”
उन्होंने कहा, “आप जो हो दुकान के
बाहर नेमप्लेट में टांग दो, ताकि आने वाले
श्रद्धालुओं का धर्म भ्रष्ट न हो. हमारी आज्ञा है बागेश्वर धाम के सभी दुकानदार 10
दिन के अंदर नेमप्लेट लगवा लें. नहीं तो इसके आगे धाम समिति क़ानून के अनुसार विधिक कार्रवाई करेगी.”
धीरेंद्र शास्त्री
अपने बयानों की वजह से ख़बरों में बने रहते हैं. इस चेतावनी के बाद प्रशासन की तरफ़
से अभी तक कोई बयान नही आया है.
बागेश्वर धाम में देशभर
से लाखों लोग आते हैं और वहां दर्जनों दुकानें हैं जिस से धंधा किया जाता है.
राहुल गांधी ने संसद में नीट का मुद्दा उठाया, धर्मेंद्र प्रधान ने उनके बयान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
इमेज स्रोत, ANI
संसद का बजट सत्र आज
से शुरू हो गया है और इस दौरान नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर हंगामा हुआ
है. विपक्ष लगातार नीट परीक्षा में कथित धांधली को मुद्दा बना रहा है.
प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष
के नेता राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी बोले, जिनके सवालों का जवाब देने के लिए
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मौजूद थे.
कांग्रेस नेता राहुल
गांधी ने नीट परीक्षा में कथित धांधली पर कहा कि लाखों बच्चों के भविष्य के साथ
खिलवाड़ हुआ है और भारत की परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी है.
उन्होंने कहा कि न
सिर्फ़ नीट बल्कि सभी बड़ी परीक्षाओं में बेहद गंभीर समस्याएं हैं.
राहुल गांधी ने धर्मेंद्र
प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ख़ुद को दोषी ठहराने की जगह हर किसी
को दोषी ठहराया है. उन्होंने कहा कि उन्हें तो यह भी लगता है कि यहां जो कुछ हो रहा
है उसके मूल तत्वों को शिक्षा मंत्री भी समझते हैं या नहीं.
राहुल गांधी ने कहा कि
ये लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है और पैसे के बल पर परीक्षा का सौदा संभव है.
इस पर धर्मेंद्र प्रधान
ने प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि
पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना ग़लत है.
बजट सत्र से पहले पीएम मोदी बोले- प्रधानमंत्री की आवाज़ दबाने का प्रयास किया गया
इमेज स्रोत, ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र शुरू होने से पहले संसद के बाहर कहा कि पिछले संसद सत्र के दौरान विपक्ष ने उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 60 साल बाद कोई सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आई है और तीसरी पारी का पहला बजट पेश कर रही है.
उन्होंने कहा कि यह बजट अमृत काल का महत्वपूर्ण बजट है. यह बजट हमारे अगले पांच साल के कार्य की दिशा तय करेगा. यह बजट 2047 में हमारे विकसित भारत के सपने की नींव रखेगा.
पीएम ने कहा कि सभी देशवासियों के लिए गर्व का विषय है कि भारत बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश है.
उन्होंने कहा कि 'मैं देश के सभी सांसदों से आग्रह करना चाहता हूं कि हमें जितनी लड़ाई लड़नी थी लड़ ली, जनता ने अपना जनादेश दे दिया है अब हमें आने वाले पांच सालों के लिए देश के लिए लड़ना है.'
उन्होंने कहा कि 'मैं सभी दलों से कहना चाहूंगा कि अगले चुनावों से पहले तक देश के किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं को सशक्त करने लिए एक जनभागीदारी का आंदोलन हम खड़ा करें और अपनी पूरी ताकत लगाएं.'
पीएम ने कहा कि 'मैं बहुत दुख के साथ कहना चाहूंगा कि कुछ सांसदों को अपने क्षेत्र की बातें रखने का मौका नहीं मिला क्योंकि कुछ राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीतिक विफलताओं को ढाकने के लिए देश की संसद के महत्वपूर्ण समय का गलत प्रयोग किया है.'
उन्होंने कहा कि 'नई संसद का गठन होने के बाद पहले सत्र में चुनी हुई सरकार की आवाज़ को कुचलने का अलोकतांत्रिक प्रयास किया गया. 2.5 घंटे तक देश के प्रधानमंत्री का गला घोटने का उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास किया गया. लोकतांत्रिक परंपराओं में इसका कोई स्थान नहीं हो सकता है.'
उन्होंने कहा कि देशवासियों ने हमें यहां देश के लिए भेजा है, दल के लिए नहीं भेजा है, यह सदन दल के लिए नहीं देश के लिए है.
गौतम गंभीर ने बताया विराट कोहली और रोहित शर्मा कब तक खेल सकते हैं?
इमेज स्रोत, ANI
श्रीलंका दौरे से पहले प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के नए
कोच गौतम गंभीर ने रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर टिप्पणी की है.
गौतम गंभीर ने कहा है कि दोनों क्रिकेटर 2027 वर्ल्ड कप तक अपनी फ़िटनेस बरक़रार
रख सकते हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वो क्या डिलिवर कर सकते हैं इसको वो टी20 वर्ल्ड कप और 50 ओवरों
के वर्ल्ड कप में दिखा चुके हैं. मुझे लगता है कि दोनों में बहुत क्रिकेट बचा है
और ख़ासकर चैंपियंस ट्रॉफ़ी और ऑस्ट्रेलिया के टूर के लिए.”
“वो
बेहद प्रेरित हैं और 2027 वर्ल्ड कप तक अपनी फ़िटनेस बरक़रार रख सकते हैं. यह उनका
व्यक्तिगत फ़ैसला है. मैं नहीं कह सकता हूं कि उनमें कितना क्रिकेट बचा है लेकिन यह
पूरी तरह उन पर है.”
“विराट
और रोहित अभी भी वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं और कोई भी टीम जितना संभव हो सके उतने
लंबे समय तक उन्हें अपने साथ चाहेगी.”
बाइडन के राष्ट्रपति चुनाव से बाहर होने और कमला हैरिस के आने का असर क्या होगा?
सर्वदलीय बैठक में अपने लोगों ने भी बढ़ाई बीजेपी की चिंता
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री मोदी के साथ बिहार के सीएम नीतीश कुमार
संसद के मॉनसून सत्र से पहले एनडीए सरकार दो सहयोगी दलों ने यूपी सरकार के कांवड़ यात्रा को लेकर निकाले गए आदेश की आलोचना की है.
हालांकि भाजपा के सहयोगी दलों ने सर्वदलीय बैठक में इन मुद्दों को नहीं उठाया बल्कि अपने-अपने राज्यों से जुड़े मुद्दों पर ही ध्यान केंद्रित किया.
बिहार में भाजपा के सहयोगी दल जदयू और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग की है.
जदयू और लोजपा (राम विलास) ने कहा कि उनकी इस मांग को केंद्रीय बजट में शामिल किया जाना चाहिए.
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बैठक के बाद कहा, “ बिहार के लिए विशेष दर्जे का मुद्दा उठाया है.”
उन्होंने कहा कि हम बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग उठा रहे हैं. अगर इसमें कोई तकनीकी समस्या आती है तो बिहार को एक विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा हमारी तरफ़ से बिहार में बाढ़ का मुद्दा भी उठाया गया है क्योंकि पानी नेपाल की तरफ़ से आता है. इसमें केंद्र को हस्तक्षेप करना चाहिए. बाढ़ से बचाव के लिए एक बांध बनाने की ज़रूरत है.
लोजपा (राम विलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी संजय झा की मांग को दोहराया है.
यूपी सरकार द्वारा कांवड़ियों को लेकर निकाले गए आदेश पर संजय झा ने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे आदेश देने से बचना चाहिए और जाति और धर्म के आधार पर समाज में कोई विभाजन नहीं होना चाहिए.
हसन अली ने कहा- भारत नहीं आता है तो हम उसके बिना खेलेंगे
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी हसन अली
पाकिस्तान 2025 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की मेज़बानी करने के लिए तैयार है. भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के कारण भारत के पाकिस्तान का दौरा ना करने की ख़बरें सामने आ रही हैं, जिससे आयोजकों बड़ा झटका लग सकता है.
भारत के पाकिस्तान का दौरा ना करने की ख़बरों को लेकर पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी हसन अली ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि हम भारत के बिना ही खेलेंगे.
समा टीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “अगर हम भारत खेलने जा सकते हैं तो उन्हें भी पाकिस्तान आना चाहिए. कई लोग अनगिनत बार कह चुके हैं कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए. अगर आप अलग नज़रिए से देखें तो कई भारतीय खिलाड़ी भी अपने इंटरव्यू में कह चुके हैं कि वे पाकिस्तान में खेलना चाहते हैं.”
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम पाकिस्तान खेलने आना चाहती है पर उन्हें अपने देश और बोर्ड के फ़ैसलों को देखना पड़ता है.
19 फ़रवरी 2025 से शुरू हो रहा ये टूर्नामेंट 9 मार्च तक खेला जाएगा. चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला लाहौर के गद्दाफ़ी स्टेडियम में खेला जाएगा.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बीबीसीआई कथित तौर पर आईसीसी से भारत के मैचों को दुबई या श्रीलंका शिफ्ट करने का अनुरोध करने जा रहा है.
इन रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के क्रिकेटर हसन अली ने कहा है कि अगर भारत पाकिस्तान आने से मना करता है तो भारत के बिना ही यह टूर्नामेंट खेला जाएगा.