05 अक्तूबर, 2006 - Published 12:37 GMT
मिर्जा एबी बेग
आप ने आज तक के अपने जीवन में न जाने कितनी बार बायकॉट शब्द का प्रयोग किया होगा, कितनी बार पढ़ा होगा और कितनी ही बार इस में हिस्सा भी लिया होगा लेकिन क्या आप को मालूम है कि यह शब्द आया कहाँ से और बना कैसे?
शब्दों की दुनिया एक अनोखी भूल भूलैयाँ है जहाँ हमेशा कुछ शब्द बनते हैं तो कुछ बिगड़ते रहते हैं और इनके बनने बिगड़ने की भी अजीब दास्तान है.
आप को शायद यह मालूम हो कि बहुत सारे शब्द ऐसे हैं जो पहले लोगों के नाम थे बाद में वह शब्द बन गए.
आविष्कारों और विज्ञान के क्षेत्र में इन का प्रचलन काफ़ी रहा है लेकिन कुछ लोकप्रिय शब्द ऐसे भी हैं जिन्हें हम अक्सर प्रयोग में लाते है, वास्तव में वह हमारी शब्दावली का एक हिस्सा बन चुके हैं.
Boycott
आज का हमारा शब्द है बायकॉट (Boycott)
यहां इस शब्द का अर्थ बताने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि अगर हमने इसका अर्थ बताया तो कहीं आप हमारा बहिष्कार न कर दें. लेकिन यहां ज़रूरी है कि हम इस शब्द से जुड़ी कुछ रोचक बातों को आप के सामने लाएँ और देखें कि यह शब्दों की निराली दुनिया हमारे दैनिक जीवन और कार्यों से कितनी प्रेरित है.
अंग्रेज़ी भाषा के इस शब्द (बायकॉट) को हम ज्यों का त्यों अपनी मातृभाषा में भी प्रयोग करते हैं और अर्थ समान होता है. इसका अर्थ इस प्रकार है.
A boycott is to abstain from using, buying, or dealing with someone or some organization as an expression of protest or as a means of coercion.
इसके पर्याय के तौर पर हम बहुत से शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे ban, bar, blackball, blacklist, embargo, exclude, ostracize, refrain from, refuse, reject इत्यादि. यानी बहिष्कार, बहिष्कार करना, न मानना, ज़ात बाहर करना इत्यादि
यह शब्द ब्रितानी मूल का है और 1880 में पहली बार प्रयोग में आया और उसी मायने में दुनिया भर में आज तक प्रयुक्त है. इसकी उत्पत्ति की कहानी काफ़ी रोचक है.
यह शब्द अंग्रेज़ी भाषा में आयरलैंड में जारी ज़मीन की लड़ाई के कारण आया और इसे कैप्टेन चार्ल्स बायकॉट के नाम से लिया गया है. कैप्टेन चार्ल्स बायकॉट मेयो काउंटी के ज़मीनदार अर्ल अर्न की ग़ैर हाज़री में उनकी ज़मीन की निगरानी और देख-भाल करने वाले एजेंट थे.
आइरिश लैंड लीग ने 1880 में उनका समाजी बहिष्कार कर रखा था. सितम्बर के महीने में प्रदर्शनकारी आसामियों या काश्तकारों ने बायकॉट से ज़मीन के किराए में ली जाने वाली मालगुज़ारी में काफ़ी कटौती करने की मांग की. उन्होंने न सिर्फ़ ऐसा करने से इनकार किया बल्कि उनको ज़मीन से भी बेदख़ल कर दिया.
आइरिश लैंड लीग ने इसके जवाब में ख़ून ख़राबा करने के बजाए यह सुझाव दिया कि आस पास के सारे लोग उन से कोई कारोबार नहीं करें. हालांकि बहिष्कार करने वालों को काफ़ी आर्थिक कठिनाईयां हुईं लेकिन कुछ ही दिनों में बायकॉट बिल्कुल अकेले पड़ गए.
उनके नौकरों ने उनके खेतों पर काम करना बंद कर दिया, यहाँ तक कि घर और अस्तबल में भी काम करना बंद कर दिया. क्षेत्रीय व्यापारियों ने उन के साथ व्यापार बंद कर दिया यहाँ तक कि डाकिए ने उनको डाक देना बंद कर दिया.
क्या नतीजा निकला?
इन सब सामूहिक बहिष्कार का नतीजा यह हुआ कि जिस फ़सल के वह ज़िम्मेदार थे वह उस फ़सल को कटवा भी नहीं पा रहे थे. नतीजे के तौर पर कैवान और मोनाघन क्षेत्रों के 50 औरंगियों (एक क़बीला) ने उनकी फ़सल काटने का ज़िम्मा लिया.
उन 50 लोगों को क्लेयरमोरिस से लाने ले जाने के लिए उन्हें एक हज़ार सिपाहियों और सेना के जवानों को तैनात करना पड़ा. और यह भी उस स्थिति में जब बायकॉट के सामाजिक बहिष्कार में उनको कोई शारिरिक ख़तरा नहीं था. मज़े की बात तो यह हुई कि जितने की फ़सल नहीं थी उसे कहीं ज़्यादा उसकी कटाई में ख़र्च आया.
फ़सल की कटाई के बाद भी बहिष्कार जारी रहा और कुछ ही हफ़्तों में बायकॉट के नाम की घर घर चर्चा होने लगी.
इस पूरे क्रम को बयान करते हुए लंदन के अख़बार दी टाईम्स ने 20, नवम्बर 1880 को लिखाः
“The people of New Pallas have resolved to 'boycott' them and refused to supply them with food or drink.”
इस प्रकार यह शब्द बायकॉट पहली बार इस अर्थ में सारी दुनिया के सामने आया. ब्रिटेन के एक और अख़बार दी डेली न्यूज़ ने 13 दिसम्बर 1880 को लिखा “Already the stoutest-hearted are yielding on every side to the dread of being 'Boycotted'.”
फिर तो इसके अलंकारिक प्रयोग भी शुरू हो गए. अगले वर्ष जनवरी में दी स्पेक्टेटर ने 22 जनवरी 1881 को लिखा "Dame Nature arose....She 'Boycotted' London from Kew to Mile End"
वैसे आप को यह जिज्ञासा ज़रूर होगी कि आख़िर कैप्टेन बायकॉट का क्या हुआ. तो जान लिजिए कि उन्होने 1, दिसम्बर 1880 को अपना पद छोड़ दिया और सपरिवार लंदन चले गए.
एक किताब आयरलैंड में सामंतवाद का पतन में माइकल डेविट ने लिखा है कि यह शब्द मेयो काउंटी के फ़ादर जॉन ओ मैली ने ज़मीनदारों और उनके बायकॉट जैसे एजेंटों के बहिष्कार के लिए यह शब्द गढ़ा था.
दुनिया भर में यह शब्द न केवल पढ़ने लिखने और बोलने में प्रयुक्त है बल्कि इस पर अमल भी होता है, कुछ मशहूर ऐतिहासिक बहिष्कारों पर नज़र दौड़ाते हैं जिसने दुनिया का रुख़ पलट दिया और किस प्रकार यह कैप्टेन चार्लस का नाम हर जगह पहुंच गया. वैसे यह याद रखें कि बहिष्कार की यह प्रक्रिया उतनी प्राचीन है जितनी की हमारी सभ्यता का इतिहास.
कुछ उदाहरण
1789 में बिना प्रतिनिधित्व के टैक्स लेने के ख़िलाफ़ ब्रितानी व्यापारी माल का बहिष्कार किया गया.
1830 में दासों द्वारा बनाए गए मालों का बहिष्कार.
1880 कैप्टेन चार्लस बायकॉट का बहिष्कार.
चार मई के आन्दोलन के बाद जापानी सामान का चीन द्वारा बहिष्कार.
दिसम्बर 1921 में स्वदेशी आंदोलन में महात्मा गांधी का ब्रितानी सरकार के कपड़ों स्कूलों, अदालतों और नौकरियों का बहिष्कार.
1950 और 60 के दशक में अमरीका में नागरिक अधिकारों के आंदोलन में अफ़्रीकी अमरीकियों के द्वारा बहिष्कार.
खेतों में काम करने वाले मज़दूरों द्वारा अंगूर और सलाद के पत्तों का बहिष्कार.
अरब लीग द्वारा इसराइल और उसके साथ व्यापार का बहिष्कार.
रंग नस्ल भेद के कारण दक्षिण अफ़्रीका का बहिष्कार इत्यादि.