वर्ल्ड कप: ईरान सरकार क्या फुटबॉल खिलाड़ियों के परिवारों पर बना रही दबाव?

ईरानी टीम पर दबाव

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रकाशित
पढ़ने का समय: 5 मिनट

ईरान के महान फुटबॉल खिलाड़ी अली देई ने सोमवार को दावा किया है कि विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करने के बाद से उन्हें धमकियां मिल रही हैं.

ईरान में कुर्दिश मूल की 22 वर्षीय महिला महसा अमीनी की मौत के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं.

ईरान में मजहबी पुलिस ने 16 सितंबर को महसा अमीनी को गिरफ़्तार किया था जब वह अपने छोटे भाई के साथ तेहरान आई थीं.

गिरफ़्तारी के तीन बाद ही महसा अमीनी की मौत हो गयी थी.

इसके बाद से ईरान की राजधानी तेहरान से लेकर कई अन्य शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि सुरक्षाबलों के साथ हिंसक झड़पों में 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 17 हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

ईरान के नेताओं का कहना है कि ये 'दंगे' देश के दुश्मनों की साजिश हैं.

क़तर में हो रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान ईरानी टीम की ओर से एक मैच में राष्ट्रगान न गाए जाने को भी ईरान सरकार के प्रति विरोध प्रदर्शन की तरह देखा गया.

छोड़िए Instagram पोस्ट, 1
Instagram सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Instagram से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Instagram cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट Instagram समाप्त, 1

अली देई ने क्या कहा?

ईरानी खिलाड़ी अली देई को फुटबॉल की दुनिया के ईरान के सबसे महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है. देई अंतरराष्ट्रीय मैचों में 109 गोल दागने का रिकॉर्ड बनाया था जिसे एक लंबे समय तक तोड़ा नहीं जा सका था.

अली देई उस टीम के भी सदस्य थे जिसने 1998 में अमेरिका के साथ हुए ऐतिहासिक मैच में 2-1 से जीत दर्ज की थी.

लेकिन अली देई पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर की हैसियत से क़तर में हो रहे मौजूदा वर्ल्ड कप देखने नहीं गए हैं.

इसका एलान करते हुए उन्होंने कहा था कि वह क़तर नहीं जा रहे हैं क्योंकि वह अपने देशवासियों के साथ रहना चाहते हैं और उन लोगों के प्रति संवेदना जताना चाहते हैं जिन्होंने इन विरोध प्रदर्शनों में अपनों को खोया है.

छोड़िए Instagram पोस्ट, 2
Instagram सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Instagram से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Instagram cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट Instagram समाप्त, 2

अली देई ने इंस्टाग्राम पर जारी एक बयान में लिखा है, "पिछले कुछ महीनों में मुझे और मेरे परिवार को कुछ संगठनों, माध्यमों और अज्ञात स्रोतों से धमकियां मिली हैं."

उनका ये बयान एक ऐसे समय में आया है जब ईरानी फुटबॉल टीम एक बार फिर अमेरिका से टकराने जा रही है. यही नहीं, ईरानी फुटबॉल टीम पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के नॉकआउट दौर में जगह बनाने की कोशिश कर रही है.

अली देई ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में सुरक्षा एजेंसियों से उन लोगों को बिना किसी शर्त के रिहा करने की अपील की है जिन्हें विरोध प्रदर्शनों के दौरान पकड़ा गया है.

इन विरोध प्रदर्शनों के शुरुआती दौर में अली देई के ईरान पहुंचने पर उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया था. हालांकि, अब उनका पासपोर्ट वापस कर दिया गया है.

उधर, समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले ईरान के प्रमुख फ़ुटबॉल खिलाड़ी कुर्दिश मूल के वोरिया घफौरी को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

हालाँकि ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, घफौरी को बाद में रिहा कर दिया गया है.

हालांकि, नॉर्वे स्थित कुर्दिश अधिकार समूह हेंगा ने ऐसी ख़बरों का खंडन करते हुए कहा है कि घफौरी को पश्चिमी ईरान से निकालकर तेहरान की एक जेल में डाल दिया गया है.

वीडियो कैप्शन, लोगों के जज़्बे की कहानियां, देखिए एक साथ बीबीसी ऑन द स्ट्रीट में

ईरानी टीम को लेकर कयास जारी

ईरान की फ़ुटबॉल टीम ने अपने पहले मुक़ाबले में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हुए जिस तरह ईरान का राष्ट्रगान नहीं गाया, उससे नये सवाल पैदा हुए.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मुक़ाबले से पहले ईरान के कप्तान एहसान हजसफ़ी ने कहा कि खिलाड़ी उन लोगों के समर्थन में खड़े हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों के दौरान अपनी जान गंवाई है.

32 साल के हजसफ़ी ने कहा था, "हमें ये मानना होगा कि हमारे देश में हालात अच्छे नहीं हैं और हमारे लोग ख़ुश नहीं हैं."

उन्होंने कहा, "सबसे पहले, मैं ईरान में उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने प्रदर्शनों में अपनों को खोया है. उन्हें ये जानना चाहिए कि हम उनके साथ हैं. हम उनका समर्थन करते हैं और हमें उनसे हमदर्दी है."

एईके एथेंस क्लब से खेलने वाले हजसफ़ी ने कहा, "हम हालात से मुँह नहीं मोड़ सकते. मेरे वतन में हालात अच्छे नहीं हैं और खिलाड़ियों को ये अच्छे से पता है. हम यहाँ हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम उनकी आवाज़ नहीं बन सकते या हम उनका सम्मान नहीं कर सकते."

उन्होंने कहा, "जो कुछ हमारे पास है वो सब उनकी बदौलत है. हमें लड़ना होगा, हमें अच्छा खेल दिखाना होगा ताकि हम गोल कर सकें और अच्छे नतीजे को अपने बहादुर ईरानी नागरिकों को तोहफ़े के रूप में दे सकें."

वीडियो कैप्शन, क़तर विश्व कप: ईरानी फ़ुटबॉल टीम के मैनेजर और बीबीसी संवाददाता के बीच नोंकझोंक

ईरानी टीम ने बदला अपना रुख

ईरानी टीम

इमेज स्रोत, Getty Images

लेकिन ईरान की फ़ुटबॉल टीम ने इसके बाद अपना रुख बदलते हुए वेल्स के ख़िलाफ़ खेलते हुए राष्ट्रगान गाया.

इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरानी टीम ने ये कदम संभवत: ईरानी सरकार की ओर से धमकाए जाने के बाद उठाया है.

लेकिन अब तक इसे लेकर किसी तरह की पुष्ट ख़बर नहीं आई है.

हालांकि, ईरान के पूर्व अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल खिलाड़ी दारियश याज़दानी ने पिछले हफ़्ते बीबीसी के साथ बात करते हुए उन दिनों को याद किया था जब वह ईरानी टीम के लिए खेला करते थे.

याज़दानी ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने ईरानी जनता के साथ खड़े होकर सही कदम उठाया है, अभी फ़ुटबॉल प्राथमिकता नहीं है. लोग संघर्ष कर रहे हैं. और सरकार ने पिछले 40-45 दिनों में बहुत से लोगों को मार दिया है. तीन दिन पहले उन्होंने एक नौ साल की बच्ची को मार दिया. वह ज़िंदा हो सकता था और मैच देख सकता था. उसका नाम क्यान था.

ईरान की फुटबॉल टीम

इमेज स्रोत, Getty Images

इसके साथ ही उन्होंने कहा, "मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये सही है. मैं सिर्फ़ ये कह रहा है कि हम अपने लोगों के साथ खड़े हैं. ये टीम ईरान सरकार की टीम है. ये हमारी राष्ट्रीय टीम नहीं है. जब मैं खेला करता था तब हम दबाव में रहते थे. हम पर हमेशा सरकार का दबाव रहता था. वे भी दबाव में हैं. लेकिन मैं ख़ुश हूं कि उन्होंने सही पक्ष के साथ खड़े होने का फ़ैसला किया.

इस इंटरव्यू में जब याज़दानी से पूछा गया कि अगर वो मौजूदा टीम में होते तो क्या करते.

वह कहते हैं, "मैं घुटने पर बैठा रहता जब तक वे मुझे मैदान से बाहर नहीं कर देते. मौजूदा टीम ने उतना नहीं किया है जितना मेरे हिसाब से करना चाहिए था. लेकिन मैं उन पर आरोप नहीं लगाता. क्योंकि उन्हें खेलना है. अपने परिवारों पर दबाव है. और उन्हें खेलना ही होगा. ये हमेशा से ही ऐसा होता रहा है. ये सरकार आपको एक - एक मौके पर बताती है कि आपको क्या करना है और कैसे करना है."

ये भी पढ़ें -

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)