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बेरूत धमाका: लेबनान में ख़ून-ख़राबे के बाद एक दिन का शोक
राजधानी बेरूत में पिछले कुछ सालों की सबसे भीषण हिंसा के एक दिन बाद शुक्रवार को लेबनान में एक दिन का शोक मनाया जा रहा है. गुरुवार को हुई हिंसा में सात लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए.
गुरुवार को शिया मुस्लिम पिछले साल शहर के बंदरगाह पर हुए ब्लास्ट की जांच कर रहे जज के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दारौन वहां फ़ायरिंग हुई थी.
इस विरोध-प्रदर्शन का आयोजन हिज़बुल्ला ने किया था. उन्होंने कहा कि विरोध कर रहे लोगों पर इमारतों की छतों से फ़ायरिंग की गई. उन्होंने इस घटना के लिए ईसाई समुदाय को ज़िम्मेदार ठहराया है. हालांकि ईसाई समुदाय ने इन आरोपों से इनकार किया है.
अगस्त 2020 में बंदरगाह पर हुए धमाके में 219 लोग मारे गए थे. इसकी जांच को लेकर देश में काफ़ी तनाव है.
धमाके से शहर के कई इलाक़ों को नुक़सान पहुंचा था, लेकिन इस मामले में अभी तक किसी की ज़िम्मेदारी तय नहीं की गई. हिज़बुल्ला और उनके समर्थकों का कहना है कि जज निष्पक्ष नहीं हैं. हालांकि हादसे में मरने वालों के परिजन उनके समर्थन में हैं.
जज के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
विरोध-प्रदर्शन वहां की अदालत की मुख्य बिल्डिंग के सामने शुरू हुआ, जहां सैंकड़ों लोग जांच के राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाते हुए जज तारिक बितार को हटाने की मांग कर रहे थे.
जब भीड़ तायूने बदारो इलाके़ से गुज़र रही थी, तो गोलीबारी शुरू हो गई. ऑटोमैटिक राइफ़ल और रॉकेट लॉंचर से लैस लोगों के डर से स्थानीय लोगों को अपने घरों से भागना पड़ा और बच्चे स्कूल में डेस्क के नीचे छिप गए. माना जा रहा है ये लोग शिया और ईसाई लड़ाके थे, जिन्होंने सड़क पर एक-दूसरे पर गोली चलाईं.
एक चश्मदीद ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि पास के एक स्कूल में शिक्षकों ने बच्चों को सिर पर हाथ रखकर ज़मीन पर लेट जाने को कहा.
शांति बहाल होने से पहले कई घंटों तक लड़ाई चली. अस्पताल और सेना के सूत्रों ने बताया कि कई मरने वालों को सिर में गोली मारी गई. इनमें वो महिला भी शामिल थी, जिन्हें घर में काम करते वक्त हवा में दागी गई गोली लगी.
अभी हल निकालना मुश्किल है
एना फॉस्टर, बीबीसी न्यूज़, बेरूत
तायूने की सड़कों पर अभी भी भारी मात्रा में कांच के टुकड़े बिखरे पड़े हैं. कुछ परिवारों ने फिर से हिंसा भड़कने के डर से अपने घर छोड़ दिए हैं. राष्ट्रपति आउन ने कहा ने कहा कि लेबनान में विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत का माध्यम हिंसा नहीं हो सकती. लेकिन उनके बीच भरोसे का संकट काफी गहरा है.
शिया नेता जज तारिक बितार पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन जिनके परिवार वालों की मौत हुई है, वो उनका समर्थन करते हैं. उनका आरोप है कि सांसद इंसाफ़ नहीं दिलाना चाहते. अभी तनाव जारी है, लेकिन दोनों ही पक्ष देखना चाहते हैं कि कि जांच की दिशा अब क्या होगी और क्या जांच प्रभावित होगी.
लेबनान सेना के लीडर समीर गेगे ने हिंसा की आलोचना की है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
उन्होंने एक ट्वीट किया, "इन घटनाओं के पीछे की मुख्य वजह बड़ी मात्रा में हथियारों की मौजूदगी है, जिन्हें कंट्रोल नहीं किया जा रहा. और ये नागरिकों के लिए कहीं भी किसी भी समय पर ख़तरा हैं."
लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने लोगों से "शांत रहने और किसी भी कारण से राजद्रोह न करने" की अपील की है.
सेना ने कहा है कि उन्होंने हिंसा करने वाले लोगों की खोज करने के लिए सेना की तैनाती कर दी है और "किसी भी हथियारबंद व्यक्ति को गोली मारने" की चेतावनी दी है. सेना ने बाद में कहा कि इस मामले में "सीरिया के एक नागरिक सहित दोनों पक्षों के नौ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है."
इससे पहले गुरुवार को एक कोर्ट ने दो पूर्व सरकारी अधिकारियों और सांसद अली हसन खाली और ग़ाज़ी ज़ैटर - जिन्हें जज ने शक के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया था, उनके ख़िलाफ़ शिकायतों को ख़ारिज कर दिया. दोनों जज पर पक्षपात करने का आरोप लगा रहे थे.
मरने वालों के परिवार ने भी शिकायतों की निंदा की थी. इस शिकायत के कारण जांच को तीन हफ़्तों के भीतर दो बार रोकना पड़ा. उन्होंने अपने देश के नेताओं पर ख़ुद को बचाने का आरोप लगाया है.
बंदरगाह पर धमाका 2,750 टन अमोनिया नाइट्रेट के कारण हुआ था, जो क़रीब छह सालों से वहीं रखा था. वरिष्ठ अधिकारियों को इसके वहां होने और इससे जुड़े ख़तरों के बारे में जानकारी थी, लेकिन वो इसे सुरक्षित रखने, हटाने या नष्ट करने में नाकामयाब रहे.
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